Chapter 4कृषि

Question bank48 min

This note is written in Hindi.Read in Hindi →

इस फ़ाइल में हर प्रश्न के साथ पूरा लिखा हुआ उत्तर दिया गया है। पहले उत्तर पढ़िए, फिर पुस्तक बंद करके वही उत्तर अपनी कॉपी में लिखिए, और अंत में मिलाकर देखिए कि कौन-सी बात छूट गई।


उत्तर लिखने का तरीक़ा

अंकउत्तर की लंबाईकैसे लिखें
1 अंकएक वाक्यसीधे उत्तर लिखिए, भूमिका मत बाँधिए
2 अंकलगभग 30 से 40 शब्द, या 2 बिंदुपहले एक वाक्य में उत्तर, फिर एक वाक्य में कारण या उदाहरण
3 अंकलगभग 60 से 80 शब्द, या 3 बिंदुतीन अलग-अलग बातें लिखिए; हर बात पूरे वाक्य में
5 अंकलगभग 120 शब्द, या 5 बिंदुएक वाक्य की भूमिका, फिर पाँच बिंदु, फिर एक वाक्य का निष्कर्ष
मानचित्रकेवल सही जगह पर सही चिह्ननाम साफ़ लिखिए और चिह्न बनाइए

★इस अध्याय के लिए एक ही सुनहरा नियम — किसी भी फसल पर प्रश्न आए, तो पाँच बातें लिखिए — ऋतु · तापमान · वर्षा · मिट्टी · राज्य। जो विद्यार्थी ये पाँच याद कर लेता है, वह किसी भी फसल पर कोई भी प्रश्न लिख सकता है।

और दूसरी बात — इस अध्याय में राज्यों के नाम ही सबसे ज़्यादा अंक दिलाते हैं। हर उत्तर में कम से कम तीन राज्य ज़रूर लिखिए।

भाग क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक)

1भारत की कितनी जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है?

उत्तर देखिए

उत्तर: दो-तिहाई जनसंख्या।

2कृषि किस प्रकार की क्रिया है?

उत्तर देखिए

उत्तर: प्राथमिक क्रिया।

3भारत किन कृषि उत्पादों का निर्यात करता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: चाय, कॉफी और मसाले इत्यादि का।

4प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि में कौन-से औज़ार प्रयोग होते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: आदिम कृषि औज़ार जैसे लकड़ी के हल, डाओ (dao) और खुदाई करने वाली छड़ी।

5‘कर्तन दहन प्रणाली’ किसे कहते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: वह कृषि जिसमें किसान ज़मीन के टुकड़े साफ़ करके फसल उगाते हैं और मृदा की उर्वरता कम होने पर दूसरे टुकड़े पर चले जाते हैं।

6स्थानांतरण से मिट्टी को क्या लाभ होता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: कृषि के स्थानांतरण से प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढ़ जाती है।

7प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि में उत्पादकता कम क्यों होती है?

उत्तर देखिए

उत्तर: क्योंकि किसान उर्वरक अथवा अन्य आधुनिक तकनीकों का प्रयोग नहीं करते।

8असम, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड में स्थानांतरी कृषि को क्या कहते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: ‘झूम’।

9मणिपुर में इसे क्या कहते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: ‘पामलू’ (pamlou)।

10छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले और अंडमान निकोबार में इसे क्या कहते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: ‘दीपा’।

11दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में स्थानांतरी कृषि को क्या कहते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: ‘वालरे’ या ‘वाल्टरे’।

12मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में इसे क्या कहते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: मध्य प्रदेश में ‘बेबर या दहिया’ और आंध्र प्रदेश में ‘पोडु या पेंडा’।

13मैक्सिको और मध्य अमेरिका में स्थानांतरी कृषि को क्या कहते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: ‘मिल्पा’।

14वेनेजुएला और ब्राज़ील में इसे क्या कहते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: वेनेजुएला में ‘कोनुको’ और ब्राज़ील में ‘रोका’।

15इंडोनेशिया और वियतनाम में इसे क्या कहते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: इंडोनेशिया में ‘लदांग’ और वियतनाम में ‘रे’।

16गहन जीविका कृषि कहाँ की जाती है?

उत्तर देखिए

उत्तर: उन क्षेत्रों में जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है।

17गहन जीविका कृषि में जोतों का आकार छोटा क्यों होता जा रहा है?

उत्तर देखिए

उत्तर: भूस्वामित्व में विरासत के अधिकार के कारण, जिससे पीढ़ी दर पीढ़ी जोतें बँटती जाती हैं।

18वाणिज्यिक कृषि के मुख्य लक्षण क्या हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: आधुनिक निवेशों जैसे अधिक पैदावार देने वाले बीजों, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से उच्च पैदावार प्राप्त करना।

19चावल किस राज्य में वाणिज्यिक और किसमें जीविका फसल है?

उत्तर देखिए

उत्तर: हरियाणा और पंजाब में चावल वाणिज्य की फसल है, परंतु ओडिशा में यह एक जीविका फसल है।

20रोपण कृषि की मुख्य विशेषता क्या है?

उत्तर देखिए

उत्तर: इसमें लंबे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है।

21रोपण कृषि को क्या कहा गया है?

उत्तर देखिए

उत्तर: ‘उद्योग और कृषि के बीच एक अंतरापृष्ठ (interface)’।

22भारत की महत्त्वपूर्ण रोपण फसलें कौन-सी हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना और केला।

23असम और उत्तरी बंगाल तथा कर्नाटक की मुख्य रोपण फसलें कौन-सी हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: असम और उत्तरी बंगाल में चाय तथा कर्नाटक में कॉफी।

24भारत में कितनी शस्य ऋतुएँ हैं और कौन-सी?

उत्तर देखिए

उत्तर: तीन — रबी, खरीफ और ज़ायद।

25रबी फसलें कब बोई और कब काटी जाती हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: शीत ऋतु में अक्टूबर से दिसंबर के मध्य बोई जाती हैं और ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून के मध्य काटी जाती हैं।

26मुख्य रबी फसलें कौन-सी हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: गेहूँ, जौ, मटर, चना और सरसों।

27खरीफ फसलें कब बोई और कब काटी जाती हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: मानसून के आगमन के साथ बोई जाती हैं और सितंबर-अक्तूबर में काट ली जाती हैं।

28मुख्य खरीफ फसलें कौन-सी हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, तुर (अरहर), मूँग, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली और सोयाबीन।

29ज़ायद ऋतु में कौन-सी फसलें उगाई जाती हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: तरबूज, खरबूज़े, खीरे, सब्जियों और चारे की फसलें।

30गन्ने की फसल को तैयार होने में कितना समय लगता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: लगभग एक वर्ष।

31असम, पश्चिमी बंगाल और ओडिशा में धान की कौन-सी तीन फसलें बोई जाती हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: आँस, अमन और बोरो।

32रबी फसलों के अधिक उत्पादन में कौन-सी वर्षा सहायक होती है?

उत्तर देखिए

उत्तर: शीत ऋतु में शीतोष्ण पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली वर्षा।

33हरित क्रांति की सफलता किन राज्यों में रबी फसलों की वृद्धि का कारक रही?

उत्तर देखिए

उत्तर: पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ भागों में।

34चावल उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?

उत्तर देखिए

उत्तर: चीन के बाद दूसरा।

35चावल के लिए कितना तापमान और वर्षा चाहिए?

उत्तर देखिए

उत्तर: उच्च तापमान (25° सेल्सियस से ऊपर) और अधिक आर्द्रता (100 सेमी. से अधिक वर्षा)।

36राजस्थान के कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल उगाना कैसे संभव हुआ?

उत्तर देखिए

उत्तर: नहरों के जाल और नलकूपों की सघनता के कारण।

37भारत की दूसरी सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल कौन-सी है?

उत्तर देखिए

उत्तर: गेहूँ।

38गेहूँ के लिए कितनी वार्षिक वर्षा चाहिए?

उत्तर देखिए

उत्तर: समान रूप से वितरित 50 से 75 सेमी.।

39देश में गेहूँ उगाने वाले दो मुख्य क्षेत्र कौन-से हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: उत्तर-पश्चिम में गंगा-सतलुज का मैदान और दक्कन का काली मिट्टी वाला प्रदेश।

40भारत में उगाए जाने वाले मुख्य मोटे अनाज कौन-से हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: ज्वार, बाजरा और रागी।

41रागी में कौन-से पोषक तत्त्व प्रचुर मात्रा में मिलते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: लोहा, कैल्शियम, सूक्ष्म पोषक और भूसी।

42क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से देश की तीसरी महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल कौन-सी है?

उत्तर देखिए

उत्तर: ज्वार।

43ज्वार के लिए सिंचाई की आवश्यकता क्यों नहीं होती?

उत्तर देखिए

उत्तर: क्योंकि यह अधिकतर आर्द्र क्षेत्रों में उगाई जाती है और वर्षा पर निर्भर होती है।

44बाजरा किस मिट्टी पर उगाया जाता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: बलुआ और उथली काली मिट्टी पर।

45बाजरे के मुख्य उत्पादक राज्य कौन-से हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा।

46रागी के मुख्य उत्पादक राज्य कौन-से हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश।

47मक्का के लिए कितना तापमान और कौन-सी मिट्टी चाहिए?

उत्तर देखिए

उत्तर: 21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस तापमान और पुरानी जलोढ़ मिट्टी।

48किस राज्य में मक्का रबी की ऋतु में भी उगाई जाती है?

उत्तर देखिए

उत्तर: बिहार में।

49दालों के उत्पादन और उपभोग में भारत का विश्व में क्या स्थान है?

उत्तर देखिए

उत्तर: भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता देश है।

50भारत की मुख्य दलहनी फसलें कौन-सी हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: तुर (अरहर), उड़द, मूँग, मसूर, मटर और चना।

51कौन-सी दाल वायु से नाइट्रोजन नहीं लेती?

उत्तर देखिए

उत्तर: अरहर।

52दालों को अन्य फसलों के आवर्तन में क्यों बोया जाता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: क्योंकि फलीदार फसलें होने के नाते अरहर को छोड़कर अन्य सभी दालें वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि की उर्वरता को बनाए रखती हैं।

53गन्ने के लिए कितना तापमान और वर्षा चाहिए?

उत्तर देखिए

उत्तर: 21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस तापमान और 75 सेमी. से 100 सेमी. वार्षिक वर्षा।

54गन्ना उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?

उत्तर देखिए

उत्तर: ब्राज़ील के बाद दूसरा।

55गन्ना किन चीज़ों के बनाने के काम आता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: चीनी, गुड़, खांडसारी और शीरा।

56देश के कितने प्रतिशत बोए गए क्षेत्र पर तिलहन उगाया जाता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: 12 प्रतिशत भाग पर।

57भारत की मुख्य तिलहन फसलें कौन-सी हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: मूँगफली, सरसों, नारियल, तिल, सोयाबीन, अरंडी, बिनौला, अलसी और सूरजमुखी।

58मुख्य तिलहनों के कुल उत्पादन का आधा भाग किस फसल से मिलता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: मूँगफली से।

59मूँगफली का प्रमुख उत्पादक राज्य कौन-सा है?

उत्तर देखिए

उत्तर: गुजरात; इसके अतिरिक्त राजस्थान और तमिलनाडु भी मुख्य उत्पादक राज्य हैं (2019–20)।

60तिल उत्तरी और दक्षिणी भारत में किस ऋतु की फसल है?

उत्तर देखिए

उत्तर: उत्तरी भारत में खरीफ की और दक्षिणी भारत में रबी की।

61अरंडी किन ऋतुओं में बोई जाती है?

उत्तर देखिए

उत्तर: खरीफ और रबी दोनों ही फसल ऋतुओं में।

62चाय भारत में कौन लाया था?

उत्तर देखिए

उत्तर: शुरुआत में अंग्रेज़।

63चाय के लिए कैसी जलवायु चाहिए?

उत्तर देखिए

उत्तर: वर्ष भर कोष्ण, नम और पालारहित जलवायु; तथा वर्ष भर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें।

64चाय की पत्तियाँ कहाँ संसाधित की जाती हैं और क्यों?

उत्तर देखिए

उत्तर: बागान में ही, ताकि उनकी ताज़गी बनी रहे।

65चाय उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?

उत्तर देखिए

उत्तर: 2018 में चीन के बाद दूसरा।

66भारत में कॉफी की कौन-सी किस्म पैदा की जाती है और वह कहाँ से आई?

उत्तर देखिए

उत्तर: अरेबिका किस्म, जो आरम्भ में यमन से लाई गई थी।

67भारत में कॉफी की कृषि की शुरुआत कहाँ से हुई?

उत्तर देखिए

उत्तर: बाबा बूदन पहाड़ियों से।

68आज कॉफी की खेती कहाँ की जाती है?

उत्तर देखिए

उत्तर: नीलगिरि की पहाड़ियों के आस पास कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में।

69फलों और सब्ज़ियों के उत्पादन में भारत का विश्व में क्या स्थान है?

उत्तर देखिए

उत्तर: 2018 में चीन के बाद दूसरा।

70अनन्नास और लीची के मुख्य उत्पादक क्षेत्र कौन-से हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: अनन्नास मेघालय में और लीची उत्तर प्रदेश तथा बिहार में।

71सेब, नाशपाती, खूबानी और अखरोट कहाँ पैदा होते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: हिमाचल प्रदेश और जम्मू व कश्मीर में।

72रबड़ के लिए कितनी वर्षा और तापमान चाहिए?

उत्तर देखिए

उत्तर: 200 सेमी. से अधिक वर्षा और 25° सेल्सियस से अधिक तापमान।

73रबड़ मुख्यत: कहाँ उगाया जाता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और मेघालय में गारो पहाड़ियों में।

74भारत की चार मुख्य रेशेदार फसलें कौन-सी हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: कपास, जूट, सन और प्राकृतिक रेशम।

75इन चारों में क्या अंतर है?

उत्तर देखिए

उत्तर: पहली तीन मिट्टी में फसल उगाने से प्राप्त होती हैं और चौथा रेशम के कीड़े के कोकून से प्राप्त होता है, जो मलबरी पेड़ की हरी पत्तियों पर पलता है।

76रेशम उत्पादन (Sericulture) किसे कहते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: रेशम उत्पादन के लिए रेशम के कीड़ों के पालन को।

77कपास के पौधे का मूल स्थान किसे माना जाता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: भारत को।

78कपास उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?

उत्तर देखिए

उत्तर: चीन के बाद दूसरा (2017)।

79कपास के लिए कौन-सी मिट्टी उपयुक्त है?

उत्तर देखिए

उत्तर: दक्कन पठार के शुष्कतर भागों की काली मिट्टी।

80कपास को कितने पाला रहित दिन चाहिए?

उत्तर देखिए

उत्तर: 210 पाला रहित दिन।

81कपास को पककर तैयार होने में कितना समय लगता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: 6 से 8 महीने।

82जूट को क्या कहा जाता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: ‘सुनहरा रेशा’।

83जूट की फसल कहाँ उगाई जाती है?

उत्तर देखिए

उत्तर: बाढ़ के मैदानों में जलनिकास वाली उर्वरक मिट्टी में, जहाँ हर वर्ष बाढ़ से आई नई मिट्टी जमा होती रहती है।

84जूट के मुख्य उत्पादक राज्य कौन-से हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और ओडिशा तथा मेघालय।

85जूट का प्रयोग किन चीज़ों में होता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: बोरियाँ, चटाई, रस्सी, तंतु व धागे, गलीचे और दूसरी दस्तकारी की वस्तुएँ बनाने में।

86कितने प्रतिशत लोगों को कृषि आजीविका प्रदान करती है?

उत्तर देखिए

उत्तर: 60 प्रतिशत से भी अधिक।

87प्रथम पंचवर्षीय योजना का मुख्य लक्ष्य क्या था?

उत्तर देखिए

उत्तर: भूमि सुधार।

881960 और 1970 के दशकों में कौन-सी दो क्रांतियाँ आरंभ की गईं?

उत्तर देखिए

उत्तर: हरित क्रांति और श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड)।

89फसल बीमा किन आपदाओं के लिए है?

उत्तर देखिए

उत्तर: सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिए।

90किसानों के लाभ के लिए भारत सरकार ने कौन-सी दो योजनाएँ शुरू कीं?

उत्तर देखिए

उत्तर: ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) और ‘व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना’ (पीएआईएस)।

91सरकार न्यूनतम सहायता मूल्य की घोषणा क्यों करती है?

उत्तर देखिए

उत्तर: किसानों को बिचौलियों और दलालों के शोषण से बचाने के लिए।

92महात्मा गांधी ने किसे अपना आध्यात्मिक उत्तराधिकारी घोषित किया था?

उत्तर देखिए

उत्तर: विनोबा भावे को।

93भूदान की शुरुआत किस गाँव से हुई?

उत्तर देखिए

उत्तर: आंध्र प्रदेश के गाँव पोचमपल्ली से।

94पहला भूदान किसने और कितना किया?

उत्तर देखिए

उत्तर: श्री राम चन्द्र रेड्डी ने 80 भूमिहीन ग्रामीणों को 80 एकड़ भूमि बाँटने की पेशकश की।

95‘ग्रामदान’ किसे कहा गया?

उत्तर देखिए

उत्तर: जब कुछ ज़मींदारों ने, जो अनेक गाँवों के मालिक थे, भूमिहीनों को पूरा गाँव देने की पेशकश की।

96भूदान-ग्रामदान आंदोलन को और किस नाम से जाना गया?

उत्तर देखिए

उत्तर: ‘रक्तहीन क्रांति’।

भाग ख — लघूत्तरात्मक प्रश्न (2 अंक)

1प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: यह कृषि भूमि के छोटे टुकड़ों पर आदिम कृषि औज़ारों जैसे लकड़ी के हल, डाओ और खुदाई करने वाली छड़ी तथा परिवार अथवा समुदाय श्रम की मदद से की जाती है। यह प्राय: मानसून, मृदा की प्राकृतिक उर्वरता और फसल उगाने के लिए अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों की उपयुक्तता पर निर्भर करती है।

2‘कर्तन दहन प्रणाली’ कृषि को समझाइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: इसमें किसान ज़मीन के टुकड़े साफ़ करके उन पर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए अनाज व अन्य खाद्य फसलें उगाते हैं, और जब मृदा की उर्वरता कम हो जाती है तो वे उस भूमि से स्थानांतरित होकर दूसरा टुकड़ा साफ़ करते हैं। कृषि के इस स्थानांतरण से प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढ़ जाती है, परंतु उर्वरक अथवा आधुनिक तकनीकों का प्रयोग न होने के कारण इसमें उत्पादकता कम होती है।

3स्थानांतरी कृषि को भारत में किन-किन नामों से जाना जाता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: उत्तर-पूर्वी राज्यों असम, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड में इसे ‘झूम’, मणिपुर में ‘पामलू’ और छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले तथा अंडमान निकोबार द्वीप समूह में ‘दीपा’ कहा जाता है। इसके अलावा मध्य प्रदेश में ‘बेबर या दहिया’, आंध्र प्रदेश में ‘पोडु या पेंडा’, ओडिशा में ‘पामाडाबी’, पश्चिम घाट में ‘कुमारी’, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में ‘वालरे या वाल्टरे’, हिमालयन क्षेत्र में ‘खिल’ और झारखंड में ‘कुरुवा’ कहा जाता है।

4गहन जीविका कृषि क्या है?

उत्तर देखिए

उत्तर: यह कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है; यह एक श्रम-गहन खेती है जहाँ अधिक उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में जैव-रासायनिक निवेशों और सिंचाई का प्रयोग किया जाता है। भूस्वामित्व में विरासत के अधिकार के कारण जोतों का आकार छोटा और अलाभप्रद होता जा रहा है, और वैकल्पिक रोज़गार न होने के कारण किसान सीमित भूमि से अधिकतम पैदावार लेने की कोशिश करते हैं।

5एक ही फसल कहीं वाणिज्यिक और कहीं जीविका फसल कैसे हो सकती है?

उत्तर देखिए

उत्तर: कृषि के वाणिज्यीकरण का स्तर विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग होता है, इसलिए कोई फसल अपने आप वाणिज्यिक या जीविका नहीं होती — यह इस पर निर्भर करता है कि किसान उसे बेचने के लिए उगा रहा है या अपने खाने के लिए। उदाहरण के लिए हरियाणा और पंजाब में चावल वाणिज्य की एक फसल है, परंतु ओडिशा में यह एक जीविका फसल है।

6रोपण कृषि की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: इस प्रकार की खेती में लंबे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है और यह उद्योग तथा कृषि के बीच एक अंतरापृष्ठ (interface) है; यह व्यापक क्षेत्र में अत्यधिक पूँजी और श्रमिकों की सहायता से की जाती है। इससे प्राप्त सारा उत्पादन उद्योग में कच्चे माल के रूप में प्रयोग होता है, और चूँकि उत्पादन बिक्री के लिए होता है, इसलिए इसके विकास में परिवहन तथा संचार साधन और बाज़ार महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।

7रबी और खरीफ फसलों में अंतर बताइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: रबी फसलों को शीत ऋतु में अक्टूबर से दिसंबर के मध्य बोया जाता है और ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून के मध्य काटा जाता है; गेहूँ, जौ, मटर, चना और सरसों कुछ मुख्य रबी फसलें हैं। खरीफ फसलें मानसून के आगमन के साथ बोई जाती हैं और सितंबर-अक्तूबर में काट ली जाती हैं; चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, तुर, मूँग, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली और सोयाबीन इसमें शामिल हैं।

8ज़ायद ऋतु के बारे में लिखिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: रबी और खरीफ फसल ऋतुओं के बीच ग्रीष्म ऋतु में बोई जाने वाली फसल को ज़ायद कहा जाता है। इस ऋतु में मुख्यत: तरबूज, खरबूज़े, खीरे, सब्जियों और चारे की फसलों की खेती की जाती है।

9चावल की खेती के लिए भौगोलिक परिस्थितियाँ बताइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: चावल एक खरीफ की फसल है जिसे उगाने के लिए उच्च तापमान (25° सेल्सियस से ऊपर) और अधिक आर्द्रता (100 सेमी. से अधिक वर्षा) की आवश्यकता होती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे सिंचाई करके उगाया जाता है, और यह उत्तर तथा उत्तर-पूर्वी मैदानों, तटीय क्षेत्रों और डेल्टाई प्रदेशों में उगाया जाता है।

10राजस्थान जैसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल कैसे उगाया जाता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: नहरों के जाल और नलकूपों की सघनता के कारण पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में चावल की फसल उगाना संभव हो पाया है। इससे पता चलता है कि सिंचाई की सुविधा फसल के प्राकृतिक क्षेत्र को भी बदल सकती है।

11गेहूँ की खेती के लिए भौगोलिक परिस्थितियाँ बताइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: गेहूँ रबी की फसल है और इसे उगाने के लिए शीत ऋतु तथा पकने के समय खिली धूप की आवश्यकता होती है। इसे उगाने के लिए समान रूप से वितरित 50 से 75 सेमी. वार्षिक वर्षा चाहिए।

12देश में गेहूँ के दो मुख्य क्षेत्र कौन-से हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: पहला — उत्तर-पश्चिम में गंगा-सतलुज का मैदान, और दूसरा — दक्कन का काली मिट्टी वाला प्रदेश। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान के कुछ भाग गेहूँ पैदा करने वाले मुख्य राज्य हैं।

13मोटे अनाजों को ‘मोटा’ कहना क्यों उचित नहीं है?

उत्तर देखिए

उत्तर: यद्यपि ज्वार, बाजरा और रागी को मोटा अनाज कहा जाता है, परंतु इनमें पोषक तत्त्वों की मात्रा अत्यधिक होती है। उदाहरणतया रागी में प्रचुर मात्रा में लोहा, कैल्शियम, सूक्ष्म पोषक और भूसी मिलती है।

14ज्वार के बारे में लिखिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से ज्वार देश की तीसरी महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है और यह फसल वर्षा पर निर्भर होती है। अधिकतर आर्द्र क्षेत्रों में उगाए जाने के कारण इसके लिए सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती; इसके प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश हैं।

15बाजरे की खेती के बारे में लिखिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: बाजरा बलुआ और उथली काली मिट्टी पर उगाया जाता है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा इसके मुख्य उत्पादक राज्य हैं।

16दालें भूमि की उर्वरता कैसे बनाए रखती हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: फलीदार फसलें होने के नाते अरहर को छोड़कर अन्य सभी दालें वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि की उर्वरता को बनाए रखती हैं। इसीलिए इन फसलों को आमतौर पर अन्य फसलों के आवर्तन (rotating) में बोया जाता है।

17गन्ने की खेती के लिए भौगोलिक परिस्थितियाँ बताइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: गन्ना एक उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय फसल है, जो 21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस तापमान और 75 सेमी. से 100 सेमी. वार्षिक वर्षा वाली उष्ण और आर्द्र जलवायु में बोई जाती है। कम वर्षा वाले प्रदेशों में सिंचाई की आवश्यकता होती है; इसे अनेक मिट्टियों में उगाया जा सकता है तथा इसके लिए बुआई से लेकर कटाई तक काफ़ी शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है।

18तिलहन फसलों के बारे में लिखिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: देश में कुल बोए गए क्षेत्र के 12 प्रतिशत भाग पर तिलहन की फसलें उगाई जाती हैं; मूँगफली, सरसों, नारियल, तिल, सोयाबीन, अरंडी, बिनौला, अलसी और सूरजमुखी मुख्य तिलहन फसलें हैं। इनमें से अधिकतर खाद्य हैं और खाना बनाने में प्रयोग किए जाते हैं, परंतु कुछ तेल के बीजों को साबुन, प्रसाधन और उबटन उद्योग में कच्चे माल के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।

19चाय की खेती के लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ बताइए। (अभ्यास प्रश्न 2-i)

उत्तर देखिए

उत्तर: चाय का पौधा उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु, ह्यूमस और जीवांश युक्त गहरी मिट्टी तथा सुगम जल निकास वाले ढलवाँ क्षेत्रों में भली-भाँति उगाया जाता है। चाय की झाड़ियों को उगाने के लिए वर्ष भर कोष्ण, नम और पालारहित जलवायु की आवश्यकता होती है, तथा वर्ष भर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें इसकी कोमल पत्तियों के विकास में सहायक होती हैं।

20चाय एक श्रम-सघन उद्योग क्यों है?

उत्तर देखिए

उत्तर: क्योंकि चाय की कोमल पत्तियों को हाथ से चुनना पड़ता है, इसलिए इसके लिए प्रचुर मात्रा में सस्ता और कुशल श्रम चाहिए। इसके अलावा इसकी ताज़गी बनाए रखने के लिए चाय की पत्तियाँ बागान में ही संसाधित की जाती हैं।

21भारतीय कॉफी के बारे में लिखिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: भारतीय कॉफी अपनी गुणवत्ता के लिए विश्वविख्यात है और हमारे देश में अरेबिका किस्म की कॉफी पैदा की जाती है, जो आरम्भ में यमन से लाई गई थी और जिसकी विश्व भर में अधिक माँग है। इसकी कृषि की शुरुआत बाबा बूदन पहाड़ियों से हुई और आज भी इसकी खेती नीलगिरि की पहाड़ियों के आस पास कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में की जाती है।

22रबड़ की खेती के लिए भौगोलिक परिस्थितियाँ बताइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: रबड़ भूमध्यरेखीय क्षेत्र की फसल है, परंतु विशेष परिस्थितियों में उष्ण और उपोष्ण क्षेत्रों में भी उगाई जाती है; इसको 200 सेमी. से अधिक वर्षा और 25° सेल्सियस से अधिक तापमान वाली नम तथा आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है। यह मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और मेघालय में गारो पहाड़ियों में उगाया जाता है।

23कपास की खेती के लिए भौगोलिक परिस्थितियाँ बताइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: दक्कन पठार के शुष्कतर भागों में काली मिट्टी कपास उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती है, और इस फसल को उगाने के लिए उच्च तापमान, हल्की वर्षा या सिंचाई, 210 पाला रहित दिन और खिली धूप की आवश्यकता होती है। यह खरीफ की फसल है और इसे पककर तैयार होने में 6 से 8 महीने लगते हैं।

24जूट को ‘सुनहरा रेशा’ क्यों कहते हैं और यह कहाँ उगाया जाता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: जूट को उसके सुनहरे रंग और आर्थिक महत्त्व के कारण ‘सुनहरा रेशा’ कहा जाता है। जूट की फसल बाढ़ के मैदानों में जलनिकास वाली उर्वरक मिट्टी में उगाई जाती है जहाँ हर वर्ष बाढ़ से आई नई मिट्टी जमा होती रहती है; पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा तथा मेघालय इसके मुख्य उत्पादक राज्य हैं।

25चार रेशेदार फसलें कौन-सी हैं और उनमें क्या अंतर है?

उत्तर देखिए

उत्तर: कपास, जूट, सन और प्राकृतिक रेशम भारत में उगाई जाने वाली चार मुख्य रेशेदार फसलें हैं। इनमें से पहली तीन मिट्टी में फसल उगाने से प्राप्त होती हैं और चौथा रेशम के कीड़े के कोकून से प्राप्त होता है, जो मलबरी पेड़ की हरी पत्तियों पर पलता है; रेशम के कीड़ों के पालन को ‘रेशम उत्पादन’ (Sericulture) कहा जाता है।

26भारतीय कृषि में तकनीकी और संस्थागत सुधार क्यों आवश्यक हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: प्रौद्योगिकी और संस्थागत परिवर्तन के अभाव में लगातार भूमि संसाधन के प्रयोग से कृषि का विकास अवरुद्ध हो जाता है तथा इसकी गति मंद हो जाती है, और सिंचाई के विकास के बावजूद देश का एक बड़ा भाग अभी भी मानसून तथा भूमि की प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भर है। बढ़ती जनसंख्या के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण चुनौती है, क्योंकि 60 प्रतिशत से भी अधिक लोगों को आजीविका कृषि से ही मिलती है।

27स्वतंत्रता के बाद कृषि में कौन-से संस्थागत सुधार किए गए?

उत्तर देखिए

उत्तर: स्वतंत्रता के पश्चात् देश में संस्थागत सुधार के लिए जोतों की चकबंदी, सहकारिता तथा ज़मींदारी आदि समाप्त करने को प्राथमिकता दी गई, और प्रथम पंचवर्षीय योजना में भूमि सुधार मुख्य लक्ष्य था। भूमि पर पुश्तैनी अधिकार के कारण यह टुकड़ों में बँटती जा रही थी, जिसकी चकबंदी करना अनिवार्य था; हालाँकि भूमि सुधार के क़ानून तो बने पर इन्हें लागू करने में ढील की गई।

28हरित क्रांति और श्वेत क्रांति के बारे में लिखिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: 1960 और 1970 के दशकों में भारत सरकार ने कई प्रकार के कृषि सुधारों की शुरुआत की, जिनमें पैकेज टेक्नोलॉजी पर आधारित हरित क्रांति तथा श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड) जैसी रणनीतियाँ शामिल थीं। परंतु इसके कारण विकास कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रह गया, इसलिए 1980 तथा 1990 के दशकों में व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम शुरू किया गया।

29किसानों के लाभ के लिए सरकार ने कौन-सी योजनाएँ शुरू कीं?

उत्तर देखिए

उत्तर: सरकार ने सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिए फसल बीमा का प्रावधान किया, और किसानों को कम दर पर ऋण देने के लिए ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों तथा बैंकों की स्थापना की। इसके अलावा ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) और ‘व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना’ (पीएआईएस) भी शुरू की गईं।

30भूदान और ग्रामदान में क्या अंतर है?

उत्तर देखिए

उत्तर: जब श्री राम चन्द्र रेड्डी ने 80 भूमिहीन ग्रामीणों को 80 एकड़ भूमि बाँटने की पेशकश की, तो इसे ‘भूदान’ के नाम से जाना गया। और जब कुछ ज़मींदारों ने, जो अनेक गाँवों के मालिक थे, भूमिहीनों को पूरा गाँव देने की पेशकश की, तो इसे ‘ग्रामदान’ कहा गया।

भाग ग — लघूत्तरात्मक प्रश्न (3 अंक)

1भारत में की जाने वाली कृषि के प्रकारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर:

  • प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि भूमि के छोटे टुकड़ों पर आदिम औज़ारों और परिवार अथवा समुदाय श्रम से की जाती है; इसे कर्तन दहन प्रणाली भी कहते हैं और भारत में इसे झूम, पामलू, दीपा तथा दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में वालरे कहा जाता है।
  • गहन जीविका कृषि उन क्षेत्रों में होती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक है; यह श्रम-गहन खेती है जिसमें अधिक जैव-रासायनिक निवेश और सिंचाई का प्रयोग होता है।
  • वाणिज्यिक कृषि में आधुनिक निवेशों जैसे अधिक पैदावार देने वाले बीजों, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से उच्च पैदावार ली जाती है; इसी का एक प्रकार रोपण कृषि है, जिसमें लंबे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है और सारा उत्पादन उद्योग में कच्चे माल के रूप में जाता है।

2तीनों शस्य ऋतुओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर:

  • रबी फसलों को शीत ऋतु में अक्टूबर से दिसंबर के मध्य बोया जाता है और ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून के मध्य काटा जाता है; गेहूँ, जौ, मटर, चना और सरसों इसकी मुख्य फसलें हैं, और शीत ऋतु में शीतोष्ण पश्चिमी विक्षोभों से होने वाली वर्षा इनके अधिक उत्पादन में सहायक होती है।
  • खरीफ फसलें मानसून के आगमन के साथ बोई जाती हैं और सितंबर-अक्तूबर में काट ली जाती हैं; चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, तुर, मूँग, उड़द, कपास, जूट, मूँगफली और सोयाबीन इसमें शामिल हैं।
  • ज़ायद रबी और खरीफ के बीच ग्रीष्म ऋतु में बोई जाने वाली फसल है, जिसमें मुख्यत: तरबूज, खरबूज़े, खीरे, सब्जियों और चारे की फसलें उगाई जाती हैं; गन्ने की फसल को तैयार होने में लगभग एक वर्ष लगता है।

3मोटे अनाजों का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर:

  • ज्वार, बाजरा और रागी भारत में उगाए जाने वाले मुख्य मोटे अनाज हैं; यद्यपि इन्हें मोटा अनाज कहा जाता है परंतु इनमें पोषक तत्त्वों की मात्रा अत्यधिक होती है — जैसे रागी में प्रचुर मात्रा में लोहा, कैल्शियम, सूक्ष्म पोषक और भूसी मिलती है।
  • ज्वार क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से देश की तीसरी महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है; यह वर्षा पर निर्भर होती है और आर्द्र क्षेत्रों में उगाए जाने के कारण इसके लिए सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती। इसके प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश हैं।
  • बाजरा बलुआ और उथली काली मिट्टी पर उगाया जाता है, जिसके मुख्य उत्पादक राज्य राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा हैं; जबकि रागी शुष्क प्रदेशों की फसल है जो लाल, काली, बलुआ, दोमट और उथली काली मिट्टी पर उगाई जाती है और कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम, झारखंड तथा अरुणाचल प्रदेश इसके प्रमुख उत्पादक हैं।

4दालों के महत्त्व और उनकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर:

  • भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता देश है, और शाकाहारी खाने में दालें सबसे अधिक प्रोटीन दायक होती हैं; तुर (अरहर), उड़द, मूँग, मसूर, मटर और चना भारत की मुख्य दलहनी फसलें हैं।
  • दालों को कम नमी की आवश्यकता होती है और इन्हें शुष्क परिस्थितियों में भी उगाया जा सकता है, इसलिए ये शुष्क क्षेत्रों के लिए बहुत उपयुक्त हैं।
  • फलीदार फसलें होने के नाते अरहर को छोड़कर अन्य सभी दालें वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि की उर्वरता को बनाए रखती हैं, इसीलिए इन्हें अन्य फसलों के आवर्तन में बोया जाता है; मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक दालों के मुख्य उत्पादक राज्य हैं।

5गन्ने की खेती का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर:

  • गन्ना एक उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय फसल है जो 21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस तापमान और 75 सेमी. से 100 सेमी. वार्षिक वर्षा वाली उष्ण और आर्द्र जलवायु में बोई जाती है; कम वर्षा वाले प्रदेशों में सिंचाई की आवश्यकता होती है।
  • इसे अनेक मिट्टियों में उगाया जा सकता है तथा इसके लिए बुआई से लेकर कटाई तक काफ़ी शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है, और इसे तैयार होने में लगभग एक वर्ष लगता है।
  • ब्राज़ील के बाद भारत गन्ने का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है; यह चीनी, गुड़, खांडसारी और शीरा बनाने के काम आता है, और उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, पंजाब तथा हरियाणा इसके मुख्य उत्पादक राज्य हैं।

6चाय की खेती का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर:

  • चाय की खेती रोपण कृषि का एक उदाहरण है; यह एक महत्त्वपूर्ण पेय पदार्थ की फसल है जिसे शुरुआत में अंग्रेज़ भारत में लाए थे, और आज अधिकतर चाय बागानों के मालिक भारतीय हैं।
  • चाय का पौधा उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु, ह्यूमस और जीवांश युक्त गहरी मिट्टी तथा सुगम जल निकास वाले ढलवाँ क्षेत्रों में भली-भाँति उगाया जाता है; इसे वर्ष भर कोष्ण, नम और पालारहित जलवायु तथा वर्ष भर समान रूप से होने वाली वर्षा की बौछारें चाहिए।
  • चाय एक श्रम-सघन उद्योग है जिसके लिए प्रचुर मात्रा में सस्ता और कुशल श्रम चाहिए, और ताज़गी बनाए रखने के लिए पत्तियाँ बागान में ही संसाधित की जाती हैं; असम, पश्चिमी बंगाल में दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी ज़िलों की पहाड़ियाँ, तमिलनाडु और केरल इसके मुख्य क्षेत्र हैं।

7कपास की खेती का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर:

  • भारत को कपास के पौधे का मूल स्थान माना जाता है और सूती कपड़ा उद्योग में कपास एक मुख्य कच्चा माल है; कपास उत्पादन में भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है (2017)।
  • दक्कन पठार के शुष्कतर भागों में काली मिट्टी कपास उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती है, और इस फसल को उगाने के लिए उच्च तापमान, हल्की वर्षा या सिंचाई, 210 पाला रहित दिन और खिली धूप की आवश्यकता होती है।
  • यह खरीफ की फसल है और इसे पककर तैयार होने में 6 से 8 महीने लगते हैं; महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश इसके मुख्य उत्पादक राज्य हैं।

8सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार कार्यक्रमों की सूची बनाएँ। (अभ्यास प्रश्न 2-iii)

उत्तर देखिए

उत्तर:

  • स्वतंत्रता के पश्चात् जोतों की चकबंदी, सहकारिता तथा ज़मींदारी की समाप्ति को प्राथमिकता दी गई, और प्रथम पंचवर्षीय योजना में भूमि सुधार मुख्य लक्ष्य था।
  • 1960 और 1970 के दशकों में हरित क्रांति तथा श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड) शुरू हुईं, और 1980-90 के दशकों में व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम चलाया गया; इसमें सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिए फसल बीमा और कम दर पर ऋण हेतु ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों तथा बैंकों की स्थापना शामिल थी।
  • किसानों के लाभ के लिए ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) और ‘व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना’ (पीएआईएस) शुरू की गईं; साथ ही आकाशवाणी और दूरदर्शन पर मौसम बुलेटिन तथा कृषि कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं, और किसानों को बिचौलियों से बचाने के लिए न्यूनतम सहायता मूल्य तथा लाभदायक ख़रीद मूल्य की घोषणा की जाती है।

9भूदान-ग्रामदान आंदोलन का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर:

  • महात्मा गांधी ने विनोबा भावे को अपना आध्यात्मिक उत्तराधिकारी घोषित किया था, और गांधी जी की शहादत के बाद उनके संदेश को लोगों तक पहुँचाने के लिए विनोबा भावे ने लगभग पूरे देश की पदयात्रा की।
  • जब वे आंध्र प्रदेश के गाँव पोचमपल्ली में बोल रहे थे तो कुछ भूमिहीन ग़रीब ग्रामीणों ने भूमि माँगी; तभी श्री राम चन्द्र रेड्डी उठ खड़े हुए और उन्होंने 80 भूमिहीन ग्रामीणों को 80 एकड़ भूमि बाँटने की पेशकश की, जिसे ‘भूदान’ कहा गया।
  • बाद में कुछ ज़मींदारों ने भूमिहीनों को पूरा गाँव देने की पेशकश की, जिसे ‘ग्रामदान’ कहा गया; हालाँकि कुछ ज़मींदारों ने भूमि सीमा क़ानून से बचने के लिए भी दान किया था। इस पूरे आंदोलन को ‘रक्तहीन क्रांति’ का नाम दिया गया।

भाग घ — निबंधात्मक प्रश्न (5 अंक)

1चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें। (अभ्यास प्रश्न 3-ii)

उत्तर देखिए

उत्तर:

  • भारत में अधिकांश लोगों का खाद्यान्न चावल है और हमारा देश चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है।
  • यह एक खरीफ की फसल है, जो मानसून के आगमन के साथ बोई जाती है और सितंबर-अक्तूबर में काट ली जाती है।
  • इसे उगाने के लिए उच्च तापमान (25° सेल्सियस से ऊपर) की आवश्यकता होती है।
  • तथा अधिक आर्द्रता (100 सेमी. से अधिक वर्षा) चाहिए; कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे सिंचाई करके उगाया जाता है।
  • चावल उत्तर और उत्तर-पूर्वी मैदानों, तटीय क्षेत्रों और डेल्टाई प्रदेशों में उगाया जाता है; इसके मुख्य राज्य असम, पश्चिमी बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र (विशेषकर कोंकण तटीय क्षेत्र), उत्तर प्रदेश और बिहार हैं।
  • नहरों के जाल और नलकूपों की सघनता के कारण पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी चावल उगाना संभव हो पाया है, और पिछले कुछ वर्षों में चावल पंजाब तथा हरियाणा की महत्त्वपूर्ण फसल बन गई है।

निष्कर्ष — असम, पश्चिमी बंगाल और ओडिशा में तो धान की तीन फसलें — आँस, अमन और बोरो — बोई जाती हैं, जो दिखाता है कि अनुकूल परिस्थितियों में चावल साल में कई बार उगाया जा सकता है।

2कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपाय सुझाइए। (अभ्यास प्रश्न 3-i)

उत्तर देखिए

उत्तर:

  • समस्या यह है कि प्रौद्योगिकी और संस्थागत परिवर्तन के अभाव में लगातार भूमि संसाधन के प्रयोग से कृषि का विकास अवरुद्ध हो जाता है; सिंचाई के विकास के बावजूद देश का बड़ा भाग अब भी मानसून और भूमि की प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भर है, और 60 प्रतिशत से भी अधिक लोगों को आजीविका देने वाली कृषि में गंभीर सुधार आवश्यक हैं।
  • संस्थागत सुधार — स्वतंत्रता के पश्चात् जोतों की चकबंदी, सहकारिता तथा ज़मींदारी की समाप्ति को प्राथमिकता दी गई और प्रथम पंचवर्षीय योजना में भूमि सुधार मुख्य लक्ष्य था; भूमि पर पुश्तैनी अधिकार के कारण वह टुकड़ों में बँट रही थी, जिसकी चकबंदी अनिवार्य थी। हालाँकि क़ानून तो बने पर उन्हें लागू करने में ढील की गई।
  • तकनीकी सुधार — 1960 और 1970 के दशकों में पैकेज टेक्नोलॉजी पर आधारित हरित क्रांति तथा श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड) शुरू हुईं, परंतु इनका विकास कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रहा; इसलिए 1980 और 1990 के दशकों में व्यापक भूमि विकास कार्यक्रम चलाया गया।
  • जोखिम से बचाव और ऋण — सूखा, बाढ़, चक्रवात, आग तथा बीमारी के लिए फसल बीमा का प्रावधान किया गया, तथा किसानों को कम दर पर ऋण देने के लिए ग्रामीण बैंकों, सहकारी समितियों और बैंकों की स्थापना की गई।
  • विशेष योजनाएँ — किसानों के लाभ के लिए ‘किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) और ‘व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना’ (पीएआईएस) शुरू की गईं।
  • जानकारी और उचित क़ीमत — आकाशवाणी और दूरदर्शन पर किसानों के लिए मौसम की जानकारी के बुलेटिन और कृषि कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं; और किसानों को बिचौलियों तथा दलालों के शोषण से बचाने के लिए सरकार न्यूनतम सहायता मूल्य और कुछ महत्त्वपूर्ण फसलों के लाभदायक ख़रीद मूल्यों की घोषणा करती है।

निष्कर्ष — इनके अलावा विनोबा भावे के भूदान-ग्रामदान आंदोलन ने भी भूमिहीनों को भूमि दिलाने में योगदान दिया, जिसे ‘रक्तहीन क्रांति’ कहा गया।

3भारत में की जाने वाली कृषि के विभिन्न प्रकारों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर:

  • प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि — यह भूमि के छोटे टुकड़ों पर आदिम कृषि औज़ारों जैसे लकड़ी के हल, डाओ और खुदाई करने वाली छड़ी तथा परिवार अथवा समुदाय श्रम से की जाती है, और मानसून तथा मृदा की प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भर करती है।
  • यह ‘कर्तन दहन प्रणाली’ कृषि है, जिसमें किसान ज़मीन साफ़ करके फसल उगाते हैं और उर्वरता कम होने पर दूसरे टुकड़े पर चले जाते हैं; इस स्थानांतरण से प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा मिट्टी की उर्वरता बढ़ जाती है, पर आधुनिक तकनीक न होने से उत्पादकता कम रहती है। भारत में इसे झूम, पामलू, दीपा, बेबर, पोडु, कुमारी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में वालरे कहा जाता है।
  • गहन जीविका कृषि — यह उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है; यह श्रम-गहन खेती है जिसमें अधिक जैव-रासायनिक निवेश और सिंचाई का प्रयोग होता है। विरासत के अधिकार के कारण जोतें छोटी और अलाभप्रद होती जा रही हैं, और वैकल्पिक रोज़गार न होने से कृषि भूमि पर बहुत दबाव है।
  • वाणिज्यिक कृषि — इसका मुख्य लक्षण आधुनिक निवेशों जैसे अधिक पैदावार देने वाले बीजों, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से उच्च पैदावार प्राप्त करना है। इसका स्तर हर प्रदेश में अलग है — हरियाणा और पंजाब में चावल वाणिज्य की फसल है पर ओडिशा में जीविका फसल।
  • रोपण कृषि — यह भी वाणिज्यिक खेती का प्रकार है जिसमें लंबे-चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है; यह उद्योग और कृषि के बीच का अंतरापृष्ठ है और अत्यधिक पूँजी तथा श्रमिकों से की जाती है। भारत में चाय, कॉफी, रबड़, गन्ना और केला महत्त्वपूर्ण रोपण फसलें हैं।

निष्कर्ष — चूँकि रोपण कृषि में उत्पादन बिक्री के लिए होता है, इसलिए इसके विकास में परिवहन और संचार साधन तथा बाज़ार महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।

4भारत की मुख्य रेशेदार फसलों का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर:

  • कपास, जूट, सन और प्राकृतिक रेशम भारत में उगाई जाने वाली चार मुख्य रेशेदार फसलें हैं; इनमें से पहली तीन मिट्टी में फसल उगाने से प्राप्त होती हैं और चौथा रेशम के कीड़े के कोकून से, जो मलबरी पेड़ की हरी पत्तियों पर पलता है। रेशम के कीड़ों के पालन को ‘रेशम उत्पादन’ (Sericulture) कहते हैं।
  • कपास — भारत को कपास के पौधे का मूल स्थान माना जाता है और यह सूती कपड़ा उद्योग का मुख्य कच्चा माल है; कपास उत्पादन में भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है (2017)।
  • कपास के लिए दक्कन पठार के शुष्कतर भागों की काली मिट्टी उपयुक्त है, तथा उच्च तापमान, हल्की वर्षा या सिंचाई, 210 पाला रहित दिन और खिली धूप चाहिए; यह खरीफ की फसल है और 6 से 8 महीने में तैयार होती है। मुख्य राज्य महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश हैं।
  • जूट — इसे ‘सुनहरा रेशा’ कहा जाता है; यह बाढ़ के मैदानों में जलनिकास वाली उर्वरक मिट्टी में उगाई जाती है जहाँ हर वर्ष बाढ़ से आई नई मिट्टी जमा होती रहती है, और इसके बढ़ने के समय उच्च तापमान की आवश्यकता होती है।
  • जूट के मुख्य उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और ओडिशा तथा मेघालय हैं; इसका प्रयोग बोरियाँ, चटाई, रस्सी, तंतु व धागे, गलीचे और दूसरी दस्तकारी की वस्तुएँ बनाने में किया जाता है।

निष्कर्ष — इस प्रकार रेशेदार फसलें न केवल किसानों की आय का स्रोत हैं, बल्कि सूती कपड़ा और जूट जैसे बड़े उद्योगों का आधार भी हैं।

भाग ङ — मानचित्र-आधारित और आरेख-आधारित प्रश्न

मानचित्र 1 — भारत: चावल का वितरण (पृष्ठ 33)

प्रश्नउत्तर
चावल के प्रमुख क्षेत्र भारत के किस भाग में हैं?पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भाग में, तथा पूर्वी और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में।
ऐसा क्यों?क्योंकि चावल को 100 सेमी. से अधिक वर्षा और 25° सेल्सियस से ऊपर तापमान चाहिए, जो इन क्षेत्रों में मिलता है।
पंजाब-हरियाणा में चावल कैसे उगता है?नहरों के जाल और नलकूपों की सघनता के कारण, यानी सिंचाई से।

मानचित्र 2 — भारत: गेहूँ का वितरण (पृष्ठ 35)

प्रश्नउत्तर
गेहूँ के प्रमुख क्षेत्र कहाँ हैं?देश के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भागों में — मुख्यत: गंगा-सतलुज के मैदान में।
दूसरा मुख्य क्षेत्र कौन-सा है?दक्कन का काली मिट्टी वाला प्रदेश।
चावल और गेहूँ के मानचित्र में मुख्य अंतर क्या है?चावल पूर्व और तटीय क्षेत्रों में है (अधिक वर्षा), जबकि गेहूँ उत्तर-पश्चिम में है (कम वर्षा, शीत ऋतु) — यानी वर्षा ही दोनों का क्षेत्र तय करती है।

भाग च — मानचित्र-कार्य (5 अंक) — यह सबसे आसान अंक हैं

इस अध्याय से मानचित्र में फसलों के उत्पादक क्षेत्र और राज्य पूछे जाते हैं। पाठ्यपुस्तक का परियोजना कार्य भी यही कहता है — “भारत के मानचित्र में गेहूँ उत्पादन क्षेत्र दर्शाइए।”

1. मुख्य फसलें और उनके प्रमुख राज्य (मानचित्र पर दिखाने के लिए)

फसलमानचित्र पर कौन-से राज्य दिखाएँ
चावलअसम · पश्चिम बंगाल · ओडिशा · आंध्र प्रदेश · तमिलनाडु · केरल · उत्तर प्रदेश · बिहार
गेहूँपंजाब · हरियाणा · उत्तर प्रदेश · मध्य प्रदेश · बिहार · राजस्थान
ज्वारमहाराष्ट्र · कर्नाटक · आंध्र प्रदेश · मध्य प्रदेश
बाजराराजस्थान · उत्तर प्रदेश · महाराष्ट्र · गुजरात · हरियाणा
रागीकर्नाटक · हिमाचल प्रदेश · उत्तराखण्ड · सिक्किम · झारखंड · अरुणाचल प्रदेश
गन्नाउत्तर प्रदेश · महाराष्ट्र · कर्नाटक · तमिलनाडु · बिहार · पंजाब · हरियाणा
चायअसम · पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग-जलपाईगुड़ी) · तमिलनाडु · केरल
कॉफीकर्नाटक · केरल · तमिलनाडु (नीलगिरि की पहाड़ियाँ)
रबड़केरल · तमिलनाडु · कर्नाटक · अंडमान निकोबार · मेघालय (गारो पहाड़ियाँ)
कपासमहाराष्ट्र · गुजरात · मध्य प्रदेश · तेलंगाना · पंजाब · हरियाणा
जूटपश्चिम बंगाल · बिहार · असम · ओडिशा · मेघालय
मूँगफलीगुजरात · राजस्थान · तमिलनाडु

2. राजस्थान से जुड़े स्थान (RBSE के लिए अनिवार्य)★

क्याकहाँ
बाजराराजस्थान — प्रमुख उत्पादक राज्य
गेहूँराजस्थान के कुछ भाग
दालेंराजस्थान (मध्य प्रदेश के बाद)
मूँगफलीराजस्थान (गुजरात के बाद)
हरित क्रांतिराजस्थान के कुछ भाग
चावलराजस्थान के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्र (नहरों से)
वालरे/वाल्टरेदक्षिण-पूर्वी राजस्थान

3. अन्य महत्त्वपूर्ण स्थान

स्थानक्यों
दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ीचाय की पहाड़ियाँ (पश्चिम बंगाल)
नीलगिरि की पहाड़ियाँकॉफी
बाबा बूदन पहाड़ियाँभारत में कॉफी की शुरुआत
गारो पहाड़ियाँरबड़ (मेघालय)
नागपुरसंतरे
पोचमपल्लीभूदान की शुरुआत (आंध्र प्रदेश)
बस्तर ज़िला‘दीपा’ कृषि (छत्तीसगढ़)

4. मानचित्र-अभ्यास के तीन नमूना प्रश्न

प्रश्नअंक
भारत के दिए गए रेखा-मानचित्र में गेहूँ उत्पादन क्षेत्र दर्शाइए और किन्हीं तीन प्रमुख उत्पादक राज्यों के नाम लिखिए।3
भारत के रेखा-मानचित्र पर चाय और कॉफी के प्रमुख उत्पादक राज्य अंकित कीजिए।3
भारत के रेखा-मानचित्र पर बाजरे के तीन प्रमुख उत्पादक राज्य दिखाइए।3

★सबसे आसान तरीक़ा — फसल को दिशा से जोड़िए: चावल = पूर्व और तट · गेहूँ = उत्तर-पश्चिम · बाजरा = पश्चिम (राजस्थान) · चाय = उत्तर-पूर्व · कॉफी और रबड़ = दक्षिण · जूट = पूर्व · कपास = मध्य-पश्चिम (काली मिट्टी)।

भाग छ — तीन नमूना परीक्षा-पत्र (स्वयं अभ्यास के लिए)

नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में स्थानांतरी कृषि को क्या कहते हैं?1
2जूट को क्या कहा जाता है?1
3धान की तीन फसलों के नाम बताइए।1
4रबी और खरीफ फसलों में अंतर बताइए।2
5दालें भूमि की उर्वरता कैसे बनाए रखती हैं?2
6मोटे अनाजों का वर्णन कीजिए।3
7चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें।5
8भारत के रेखा-मानचित्र में गेहूँ उत्पादन क्षेत्र दर्शाइए।5

नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1कपास को कितने पाला रहित दिन चाहिए?1
2भारत में कॉफी की कौन-सी किस्म उगाई जाती है?1
3भूदान-ग्रामदान आंदोलन को और किस नाम से जाना गया?1
4एक ही फसल कहीं वाणिज्यिक और कहीं जीविका फसल कैसे हो सकती है?2
5चाय एक श्रम-सघन उद्योग क्यों है?2
6गन्ने की खेती का वर्णन कीजिए।3
7कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपाय सुझाइए।5
8भारत के रेखा-मानचित्र पर चाय, कॉफी और रबड़ के क्षेत्र अंकित कीजिए।5

नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1मिल्पा, कोनुको और रोका किन देशों के नाम हैं?1
2गन्ने से बनने वाले चार उत्पाद कौन-से हैं?1
3पहला भूदान किसने और कितना किया?1
4रोपण कृषि की विशेषताएँ बताइए।2
5बाजरे की खेती के बारे में लिखिए।2
6भारत में की जाने वाली कृषि के प्रकारों का वर्णन कीजिए।3
7भारत की मुख्य रेशेदार फसलों का वर्णन कीजिए।5
8भारत के रेखा-मानचित्र पर बाजरा, कपास और जूट के प्रमुख उत्पादक राज्य अंकित कीजिए।5

अंतिम सलाह। इस अध्याय में सबसे ज़्यादा अंक तीन चीज़ों से मिलते हैं — 1. हर फसल की पाँच बातें — ऋतु, तापमान, वर्षा, मिट्टी और राज्य। 2. हर उत्तर में कम से कम तीन राज्यों के नाम। 3. मानचित्र — जिसमें फसल को दिशा से जोड़कर याद कीजिए।