Chapter 2भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक

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NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2

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कुल 66 प्रश्न

तारों का मतलब: ★ज़रूरी · ★★बहुत ज़रूरी; समय कम हो तो पहले ये प्रश्न और ये बातें दोहराइए।


खण्ड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक) — 20 प्रश्न

पृष्ठ संख्याएँ NCERT की किताब “आर्थिक विकास की समझ” (कक्षा 10) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।

1अर्थशास्त्र में “क्षेत्रक” किसे कहते हैं?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) किसी महत्त्वपूर्ण मानदंड के आधार पर बनाए गए आर्थिक गतिविधियों के समूह को

व्याख्या: हमारे चारों ओर हर समय तरह-तरह की आर्थिक गतिविधियाँ होती हैं। इन्हें समझने के लिए किसी महत्त्वपूर्ण मानदंड के आधार पर समूहों में बाँटा जाता है, और इन समूहों को क्षेत्रक कहते हैं। बाकी तीनों विकल्प गतिविधियों के समूह नहीं हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 19

2कपास को प्राकृतिक उत्पाद क्यों माना जाता है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) क्योंकि उसकी फसल के लिए हम मुख्यतः वर्षा, सूर्य के प्रकाश और जलवायु पर निर्भर हैं

व्याख्या: कपास का पौधा उगाने में हम मुख्यतः, न कि पूरी तरह, वर्षा, सूर्य के प्रकाश और जलवायु जैसे प्राकृतिक कारकों पर निर्भर हैं। इसलिए कपास प्राकृतिक उत्पाद है और प्राथमिक क्षेत्रक की देन है। उससे बना कपड़ा विनिर्मित उत्पाद है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 20

3कार्य के स्वभाव के आधार पर गन्ने से चीनी या गुड़ बनाना किस क्षेत्रक की गतिविधि है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) द्वितीयक

व्याख्या: गन्ना उगाना प्राथमिक क्षेत्रक है। गन्ने को विनिर्माण से चीनी या गुड़ में बदलना द्वितीयक क्षेत्रक है, जिसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहते हैं। तृतीयक क्षेत्रक वस्तुएँ नहीं बनाता, सेवाएँ देता है, और सूचना प्रौद्योगिकी किसी क्षेत्रक का नाम नहीं, तृतीयक क्षेत्रक की एक सेवा है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 20

4इनमें से कौन-सी गतिविधि तृतीयक क्षेत्रक की है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) माल को गोदाम में रखना (भण्डारण)

व्याख्या: भण्डारण एक सेवा है, जो प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक के उत्पादन में मदद करती है; परिवहन, संचार, बैंक सेवाएँ और व्यापार भी ऐसी ही सेवाएँ हैं। कपास की खेती और खनिज निकालना प्राथमिक हैं, और मिट्टी से ईंट बनाना द्वितीयक।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 20

5किसान चीनी मिल को गन्ना बेचने से मना कर दें, तो मिल बंद हो जाएगी। यह उदाहरण क्या दिखाता है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) द्वितीयक क्षेत्रक प्राथमिक क्षेत्रक पर निर्भर है

व्याख्या: मिल (द्वितीयक) का कच्चा माल गन्ना खेत (प्राथमिक) से आता है, इसलिए गन्ना न मिले तो मिल नहीं चल सकती। यह पृष्ठ 21 की तालिका 2.1 की पहली पंक्ति है, जिसका उत्तर किताब में छपा है। चीनी मिल द्वितीयक क्षेत्रक की इकाई है और गन्ने की खेती प्राथमिक क्षेत्रक की गतिविधि; और तीनों क्षेत्रक स्वतंत्र नहीं, एक-दूसरे पर निर्भर हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 21

6किसान ने गेहूँ ₹20 प्रति कि.ग्रा. पर आटा-मिल को बेचा, मिल ने आटा ₹25 प्रति कि.ग्रा. पर बिस्कुट कंपनी को बेचा, और कंपनी ने बिस्कुट के 4 पैकेट ₹80 में बेचे। स.घ.उ. में कितना मूल्य गिना जाएगा?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) ₹80

व्याख्या: सिर्फ़ अंतिम वस्तु, यानी बिस्कुट का मूल्य ₹80 गिना जाता है। ₹80 में आटे के ₹25 पहले से शामिल हैं, इसलिए ₹20 + ₹25 + ₹80 = ₹125 जोड़ना एक ही मूल्य को कई बार गिनना होगा। गेहूँ और आटा यहाँ मध्यवर्ती वस्तुएँ हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 22

7सकल घरेलू उत्पाद (स.घ.उ.) किसका मूल्य है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) किसी देश के भीतर किसी विशेष वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का

व्याख्या: किताब के शब्दों में: “यह किसी देश के भीतर किसी विशेष वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य है।” गिनती एक विशेष वर्ष की होती है, पाँच वर्षों की नहीं; मूल्य जोड़ा जाता है, संख्या नहीं; और मध्यवर्ती वस्तुएँ अलग से नहीं गिनी जातीं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 22, 23

8भारत में स.घ.उ. मापने का काम कौन करता है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) केन्द्र सरकार का मंत्रालय, राज्यों और केन्द्र शासित क्षेत्रों के सरकारी विभागों की मदद से

व्याख्या: भारत में स.घ.उ. मापने का कठिन काम केन्द्र सरकार का मंत्रालय करता है। वह राज्यों और केन्द्र शासित क्षेत्रों के सरकारी विभागों की मदद से वस्तुओं और सेवाओं की संख्या और मूल्य की सूचना जुटाता है, और फिर स.घ.उ. का अनुमान लगाता है। नीति आयोग का नाम इस अध्याय में रोज़गार के एक अध्ययन के साथ आता है, स.घ.उ. मापने के साथ नहीं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 23

9तीनों क्षेत्रकों का योगदान दिखाने के लिए सरकार ने हाल में, वैश्विक प्रथाओं की तरह, स.घ.उ. की जगह किसका प्रयोग शुरू किया है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) सकल मूल्य वर्धित (जी.वी.ए.)

व्याख्या: “जी.वी.ए. करों तथा सब्सिडी के लिए समायोजन के बाद अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्रकों के योगदान को मापता है।” आलेख 1 और 2 भी तीनों क्षेत्रकों का जी.वी.ए. ही दिखाते हैं। रोज़गार में हिस्सेदारी आलेख 3 में है, पर वह उत्पादन का माप नहीं है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 23

10ज़्यादातर विकसित देशों में पिछले 100 वर्षों में किस ओर बदलाव हुआ है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) द्वितीयक से तृतीयक की ओर

व्याख्या: इन देशों में पहले प्राथमिक क्षेत्रक सबसे महत्त्वपूर्ण था, फिर कारखाने फैलने पर द्वितीयक, और पिछले 100 वर्षों में बदलाव द्वितीयक से तृतीयक की ओर हुआ। आज वहाँ ज़्यादातर श्रमजीवी लोग सेवा क्षेत्रक में काम करते हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 23

112017–18 में भारत का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्रक कौन-सा था?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) तृतीयक

व्याख्या: 1977–78 से 2017–18 के चालीस वर्षों में तीनों क्षेत्रकों का उत्पादन बढ़ा, पर सबसे ज़्यादा वृद्धि तृतीयक क्षेत्रक में हुई। 2017–18 में उसने प्राथमिक क्षेत्रक की जगह ले ली और सबसे बड़ा उत्पादक बन गया।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 24

12आलेख 3 के अनुसार 2017–18 में रोज़गार में प्राथमिक क्षेत्रक की हिस्सेदारी कितनी थी?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) 44 प्रतिशत

व्याख्या: आलेख 3 में 2017–18 के आँकड़े हैं: प्राथमिक 44, द्वितीयक 25 और तृतीयक 31 प्रतिशत। 71 प्रतिशत 1977–78 में प्राथमिक क्षेत्रक का हिस्सा था। 44 प्रतिशत के साथ प्राथमिक क्षेत्रक अब भी सबसे बड़ा नियोक्ता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 25

13किताब के अनुसार सेवा क्षेत्रक में उत्पादन 14 गुना बढ़ा। उसमें रोज़गार कितना बढ़ा?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) 5 गुना से भी कम

व्याख्या: किताब के शब्दों में: “सेवा क्षेत्रक में उत्पादन में 14 गुना वृद्धि हुई, परन्तु रोज़गार में 5 गुना से भी कम वृद्धि हुई।” यानी उत्पादन जितनी तेज़ी से बढ़ा, उतने रोज़गार नहीं बने। रोज़गार बढ़ा ज़रूर: आलेख 3 में तृतीयक क्षेत्रक का हिस्सा 18 से 31 प्रतिशत हुआ।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 25, 26

14भूस्वामी सुखराम लक्ष्मी के परिवार के एक या दो सदस्यों को अपनी ज़मीन पर काम के लिए ले जाए, तो क्या होगा?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) लक्ष्मी के खेत का उत्पादन नहीं घटेगा और परिवार की आय बढ़ेगी

व्याख्या: लक्ष्मी के दो हेक्टेयर के छोटे खेत पर ज़रूरत से ज़्यादा लोग लगे हैं, और किसी को पूरा काम नहीं मिलता। एक-दो लोग हट जाएँ, तो भी खेत का उत्पादन नहीं घटता, और बाहर की कमाई से परिवार की आय बढ़ती है। यही छिपी हुई बेरोज़गारी की पहचान है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 26

15शहरों में अल्प बेरोज़गारी का उदाहरण कौन-सा है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) रोज़ काम खोजने वाले प्लम्बर, पेन्टर और मरम्मत करने वाले अनियत श्रमिक

व्याख्या: शहरों के सेवा क्षेत्रक में हज़ारों अनियत श्रमिक रोज़ काम खोजते हैं। सड़कों पर ठेला खींचने या चीज़ें बेचने वाले भी इसी हालत में हैं, “जहाँ वे पूरा दिन बिता देते हैं, परन्तु बहुत कम कमा पाते हैं।” बाकी तीनों विकल्प संगठित क्षेत्रक के नियमित काम हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 26, 30

16म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005 ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष में कितने दिन के रोज़गार की गारंटी देता था?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) 100 दिन

व्याख्या: काम करने में सक्षम और काम चाहने वाले सभी लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष में 100 दिन के रोज़गार की गारंटी दी गई थी; सरकार काम न दे पाए, तो वह बेरोज़गारी भत्ता देती। किताब के अनुसार 2025 में इसका स्थान विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (विकसित भारत - जी राम जी 2025) ने ले लिया। 50 दिन वाला आँकड़ा एक हेक्टेयर गेहूँ की फसल से मिलने वाले काम का है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 27, 29

17कोई व्यक्ति अपना काम करता है, सरकार के पास पंजीकृत है और नियमों का पालन करता है। रोज़गार की परिस्थितियों के आधार पर वह किस क्षेत्रक में है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) संगठित क्षेत्रक

व्याख्या: संगठित क्षेत्रक की पहचान सरकार के पास पंजीकरण और नियमों का पालन है, किसी और की नौकरी करना नहीं। इसलिए अपना काम करने वाले लोग भी, पंजीकृत हों और नियम मानें, तो संगठित क्षेत्रक में आते हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 30

18पृष्ठ 31 की तालिका “विभिन्न क्षेत्रकों में श्रमिकों की संख्या (दस लाख में)” के अनुसार 1990 के अंत में लगभग कितने प्रतिशत श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) लगभग 83 प्रतिशत

व्याख्या: तालिका में संगठित श्रमिकों का कुल 82 छपा है। खाली खाने भरने पर असंगठित श्रमिक 231 + 74 + 88 = 393 और कुल श्रमिक 475 (दस लाख) आते हैं: 393 ÷ 475 × 100 = 82.7, यानी लगभग 83 प्रतिशत। संगठित क्षेत्रक में 82, यानी लगभग 17 प्रतिशत। 44 प्रतिशत आलेख 3 में 2017–18 के रोज़गार में प्राथमिक क्षेत्रक का हिस्सा है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 31

19सार्वजनिक क्षेत्रक के बारे में कौन-सा कथन सही है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) उसका ध्येय केवल लाभ कमाना नहीं होता

व्याख्या: सार्वजनिक क्षेत्रक में ज़्यादातर परिसंपत्तियों पर सरकार का स्वामित्व होता है, और वही सेवाएँ उपलब्ध कराती है; रेलवे और डाकघर इसके उदाहरण हैं। उसका ध्येय केवल लाभ कमाना नहीं होता। लाभ कमाना ध्येय होना और व्यक्ति या कंपनी का स्वामित्व निजी क्षेत्रक की पहचान है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 33

20सरकार उद्योगों को उस दर पर बिजली क्यों उपलब्ध कराती है, जिस पर वे उसे ख़रीद सकें?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) क्योंकि उत्पादन-मूल्य पर बिजली बिके, तो उत्पादन-लागत बढ़ सकती है और अनेक इकाइयाँ, ख़ासकर छोटी इकाइयाँ, बंद हो सकती हैं

व्याख्या: उत्पादन-मूल्य पर बिजली बेचने से बहुत-से उद्योगों में उत्पादन-लागत बढ़ सकती है, और अनेक इकाइयाँ, ख़ासकर छोटी इकाइयाँ, बंद हो सकती हैं। इसलिए सरकार उस दर पर बिजली देने के कदम उठाती है जिस पर ये उद्योग उसे ख़रीद सकें, और लागत का कुछ अंश ख़ुद उठाती है। यह ऐसी गतिविधि है जिसे सरकारी समर्थन की ज़रूरत पड़ती है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 34

खण्ड ख — रिक्त स्थान (1 अंक) — 10 प्रश्न

1प्राथमिक क्षेत्रक को ______ भी कहते हैं, और द्वितीयक क्षेत्रक को ______। (पृष्ठ 20)

उत्तर देखिए

प्राथमिक क्षेत्रक को कृषि एवं सहायक क्षेत्रक भी कहते हैं, और द्वितीयक क्षेत्रक को औद्योगिक क्षेत्रक। (पृष्ठ 20)

2तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियाँ वस्तुओं के बजाय सेवाओं का सृजन करती हैं, इसलिए इसे ______ भी कहते हैं। (पृष्ठ 20)

उत्तर देखिए

तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियाँ वस्तुओं के बजाय सेवाओं का सृजन करती हैं, इसलिए इसे सेवा क्षेत्रक भी कहते हैं। (पृष्ठ 20)

3स.घ.उ. में सिर्फ़ ______ वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य गिना जाता है, क्योंकि ______ वस्तुओं का मूल्य उनमें पहले से शामिल होता है। (पृष्ठ 22)

उत्तर देखिए

स.घ.उ. में सिर्फ़ अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य गिना जाता है, क्योंकि मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य उनमें पहले से शामिल होता है। (पृष्ठ 22)

4“स. घ. उ. अर्थव्यवस्था की ______ प्रदर्शित करता है।” (पृष्ठ 23)

उत्तर देखिए

“स. घ. उ. अर्थव्यवस्था की विशालता प्रदर्शित करता है।” (पृष्ठ 23)

51977–78 में रोज़गार में प्राथमिक क्षेत्रक की हिस्सेदारी ______ प्रतिशत थी, जो 2017–18 में घटकर ______ प्रतिशत रह गई। (पृष्ठ 25)

उत्तर देखिए

1977–78 में रोज़गार में प्राथमिक क्षेत्रक की हिस्सेदारी 71 प्रतिशत थी, जो 2017–18 में घटकर 44 प्रतिशत रह गई। (पृष्ठ 25)

62017–18 में जी.वी.ए. में प्राथमिक क्षेत्रक का योगदान ______ भाग था। (पृष्ठ 26)

उत्तर देखिए

2017–18 में जी.वी.ए. में प्राथमिक क्षेत्रक का योगदान लगभग एक-छठा भाग था। (पृष्ठ 26)

7एक हेक्टेयर गेहूँ की फसल ______ लोगों को ______ दिनों तक रोज़गार दे सकती है। (पृष्ठ 27)

उत्तर देखिए

एक हेक्टेयर गेहूँ की फसल दो लोगों को 50 दिनों तक रोज़गार दे सकती है। (पृष्ठ 27)

8म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005 का कानून भारत के लगभग ______ जिलों में ______ लागू करने के लिए बनाया गया। (पृष्ठ 29)

उत्तर देखिए

म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005 का कानून भारत के लगभग 625 जिलों में काम का अधिकार लागू करने के लिए बनाया गया। (पृष्ठ 29)

9पृष्ठ 31 की तालिका में प्राथमिक क्षेत्रक के कुल 232 (दस लाख) श्रमिकों में से 1 (दस लाख) संगठित क्षेत्रक में थे, यानी असंगठित क्षेत्रक में ______ (दस लाख)। (पृष्ठ 31)

उत्तर देखिए

पृष्ठ 31 की तालिका में प्राथमिक क्षेत्रक के कुल 232 (दस लाख) श्रमिकों में से 1 (दस लाख) संगठित क्षेत्रक में थे, यानी असंगठित क्षेत्रक में 231 (दस लाख)। (पृष्ठ 31)

10भारत में लगभग ______ प्रतिशत ग्रामीण परिवार छोटे और सीमांत किसानों की श्रेणी में आते हैं। (पृष्ठ 32)

उत्तर देखिए

भारत में लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण परिवार छोटे और सीमांत किसानों की श्रेणी में आते हैं। (पृष्ठ 32)

खण्ड ग — सही/ग़लत (1 अंक) — 6 प्रश्न

1विनिर्माण की प्रक्रिया सिर्फ़ कारखाने में ही हो सकती है।

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ग़लत

(वह किसी कारखाने, किसी कार्यशाला या घर में भी हो सकती है; पृष्ठ 20)

2स.घ.उ. निकालने के लिए देश में बनी वस्तुओं की संख्या जोड़ी जाती है।

उत्तर देखिए

ग़लत

(संख्या नहीं, मूल्य जोड़ा जाता है, और सिर्फ़ अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का; पृष्ठ 22, 23)

32017–18 में तृतीयक क्षेत्रक सबसे बड़ा उत्पादक भी था और सबसे बड़ा नियोक्ता भी।

उत्तर देखिए

ग़लत

(सबसे बड़ा उत्पादक तृतीयक था, पर सबसे बड़ा नियोक्ता अब भी प्राथमिक क्षेत्रक है, रोज़गार में 44 प्रतिशत के साथ; पृष्ठ 24, 25)

4छिपी हुई बेरोज़गारी में कुछ लोगों को काम से हटा दें, तो भी उत्पादन नहीं घटता।

उत्तर देखिए

सही (पृष्ठ 26)

5असंगठित क्षेत्रक के लिए कोई नियम है ही नहीं।

उत्तर देखिए

ग़लत

(नियम और विनियम तो हैं, पर उनका पालन नहीं होता; पृष्ठ 31)

6ओडिशा (36) और मध्य प्रदेश (43) की शिशु मृत्यु दर विश्व के कुछ निर्धनतम भागों से भी ज़्यादा है।

उत्तर देखिए

सही (पृष्ठ 34)

खण्ड घ — अति लघूत्तरीय प्रश्न (2 अंक) — 10 प्रश्न

1★★प्राथमिक क्षेत्रक को “प्राथमिक” क्यों कहा जाता है?

उत्तर देखिए

क्योंकि यह उन सभी उत्पादों का आधार है, जिन्हें हम आगे चलकर बनाते हैं। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का सीधे उपयोग करके वस्तुएँ बनती हैं, जैसे कपास, दूध, खनिज और अयस्क। इसकी ज़्यादातर गतिविधियाँ कृषि और उससे जुड़े कामों की हैं, इसलिए इसे कृषि एवं सहायक क्षेत्रक भी कहते हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 20

2★★अंतिम वस्तु और मध्यवर्ती वस्तु में क्या अंतर है? गेहूँ से बिस्कुट के उदाहरण से समझाइए।

उत्तर देखिए

गेहूँ से बिस्कुट की कड़ी में बिस्कुट अंतिम वस्तु है, और गेहूँ और आटा मध्यवर्ती वस्तुएँ हैं, क्योंकि वे बिस्कुट बनाने में लग जाती हैं। स.घ.उ. में सिर्फ़ बिस्कुट के 4 पैकेट का ₹80 गिना जाता है, क्योंकि उसमें आटे का ₹25 (और उसमें गेहूँ का ₹20) पहले से शामिल है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 22

3★स.घ.उ. और जी.वी.ए. क्या मापते हैं?

उत्तर देखिए

स.घ.उ. किसी देश के भीतर किसी विशेष वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य है; “स. घ. उ. अर्थव्यवस्था की विशालता प्रदर्शित करता है।” जी.वी.ए. तीनों क्षेत्रकों का योगदान बताता है: “जी.वी.ए. करों तथा सब्सिडी के लिए समायोजन के बाद अर्थव्यवस्था के तीनों क्षेत्रकों के योगदान को मापता है।”

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 23

4★आय बढ़ने और सूचना-संचार प्रौद्योगिकी से भारत में तृतीयक क्षेत्रक कैसे बढ़ा?

उत्तर देखिए

आय बढ़ने पर कुछ लोग रेस्तरां, पर्यटन, शॉपिंग, निजी अस्पताल, निजी विद्यालय और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी सेवाएँ माँगने लगते हैं; यह बदलाव नगरों में, ख़ासकर बड़े नगरों में, तेज़ दिखता है। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित नई सेवाएँ, जैसे इंटरनेट कैफे, ए.टी.एम. बूथ, कॉल सेंटर और सॉफ़्टवेयर कंपनी, ज़रूरी हो गई हैं, और इनका उत्पादन तेज़ी से बढ़ रहा है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 20, 25

5★★लक्ष्मी के परिवार के सभी सदस्य खेत पर काम करते हैं। फिर भी इसे बेरोज़गारी क्यों कहा जाता है?

उत्तर देखिए

क्योंकि दो हेक्टेयर के छोटे खेत पर ज़रूरत से ज़्यादा लोग लगे हैं और किसी को भी पूरा काम नहीं मिलता; एक-दो सदस्य हट जाएँ, तो भी उत्पादन नहीं घटेगा। किताब के शब्दों में, “इस प्रकार की अल्प बेरोज़गारी को छिपी हुई बेरोज़गारी कहते हैं”; इसे प्रच्छन्न बेरोज़गारी भी कहते हैं। यह खुली बेरोज़गारी से अलग है, जिसमें व्यक्ति के पास कोई काम नहीं होता।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 26

6★पानी के अलावा लक्ष्मी को खेती के लिए और क्या चाहिए, और किताब इसका क्या हल बताती है?

उत्तर देखिए

उसे बीज, उर्वरक, कृषि उपकरण और पानी निकालने के लिए पम्पसेट भी चाहिए। निर्धन किसान होने के कारण उसे साहूकार से उधार लेना पड़ेगा और ऊँची ब्याज दर पर लौटाना पड़ेगा। स्थानीय बैंक उचित ब्याज दर पर साख (कर्ज़) दे, तो वह ये सब चीज़ें समय पर ख़रीदकर अपनी ज़मीन पर खेती कर सकेगी।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 28

7★दाल मिल और शीत भण्डारण गृह खुलने से गाँव के लोगों को क्या फ़ायदा होगा?

उत्तर देखिए

दाल मिल अरहर और मटर जैसी दलहन फसलों की ख़रीद, प्रसंस्करण और शहरों में बिक्री का काम देगी। शीत भण्डारण गृह में किसान आलू और प्याज़ जैसे उत्पाद रखकर अच्छी कीमत मिलने पर बेच सकेंगे। ऐसे उद्योग अर्द्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार देते हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 28

8★★कान्ता और कमल के काम में कोई दो अंतर लिखिए।

उत्तर देखिए
1

नौकरी की सुरक्षा —

कान्ता को काम शुरू करते समय नियुक्ति-पत्र मिला था; कमल को कोई औपचारिक पत्र नहीं मिला, और उसका नियोक्ता उसे कभी भी काम से हटा सकता है। (2) वेतन और लाभ — कान्ता को हर महीने नियमित वेतन, भविष्य निधि, चिकित्सा और दूसरे भत्ते और रविवार की सवेतन छुट्टी मिलती है; कमल को दैनिक मज़दूरी मिलती है, न कोई भत्ता, न सवेतन छुट्टी। कान्ता संगठित क्षेत्रक में काम करती है, कमल असंगठित क्षेत्रक में।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 30

9★बुनियादी सेवाएँ किन्हें कहते हैं? किसी विकासशील देश में इनकी ज़िम्मेदारी कौन उठाता है?

उत्तर देखिए

हर देश को अस्पताल, शैक्षिक संस्थाएँ, डाक एवं तार सेवा, थाना, कचहरी, ग्रामीण प्रशासनिक कार्यालय, नगर निगम, रक्षा, परिवहन, बैंक और बीमा कंपनी जैसी सेवाएँ चाहिए; इन्हें बुनियादी सेवाएँ माना जाता है। किसी विकासशील देश में इनके प्रबंधन की ज़िम्मेदारी सरकार उठाती है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 24

10★★रेलवे और टिस्को किस-किस क्षेत्रक में आते हैं, और किस आधार पर?

उत्तर देखिए

स्वामित्व के आधार पर। रेलवे सार्वजनिक क्षेत्रक में है: उसकी ज़्यादातर परिसंपत्तियों पर सरकार का स्वामित्व है, और उसका ध्येय केवल लाभ कमाना नहीं। टिस्को (टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड) निजी क्षेत्रक में है: उसका स्वामित्व निजी हाथों में है, और उसका ध्येय लाभ कमाना है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 33

खण्ड ङ — लघूत्तरीय प्रश्न (3 अंक) — 8 प्रश्न

1★★पृष्ठ 21 की तालिका 2.1 के उदाहरणों से दिखाइए कि तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं।

उत्तर देखिए
1

गन्ना और चीनी मिल —

किसान मिल को गन्ना बेचने से मना कर दें, तो मिल बंद हो जाएगी: द्वितीयक क्षेत्रक प्राथमिक पर निर्भर है।

2

उर्वरक और पम्पसेट —

इनकी कीमत बढ़े, तो खेती की लागत बढ़ेगी और किसानों का लाभ घटेगा: प्राथमिक क्षेत्रक द्वितीयक पर निर्भर है।

3

ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल —

गाँवों से सब्ज़ियाँ और दूध शहर नहीं पहुँचेंगे; शहरों में भोजन की कमी होगी और किसान अपनी उपज नहीं बेच पाएँगे: प्राथमिक क्षेत्रक तृतीयक पर निर्भर है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 21

2★★भारत में तृतीयक क्षेत्रक का महत्त्व बढ़ने के कोई तीन कारण लिखिए।

उत्तर देखिए
1

बुनियादी सेवाएँ —

अस्पताल, शैक्षिक संस्थाएँ, डाक, थाना, कचहरी, परिवहन, बैंक और बीमा जैसी सेवाएँ हर देश को चाहिए; विकासशील देश में इनकी ज़िम्मेदारी सरकार उठाती है।

2

खेती और उद्योग का विकास —

इनके बढ़ने से परिवहन, व्यापार और भण्डारण जैसी सेवाओं की माँग बढ़ती है।

3

बढ़ती आय —

आय बढ़ने पर लोग रेस्तरां, पर्यटन, शॉपिंग, निजी अस्पताल, निजी विद्यालय और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी सेवाएँ माँगने लगते हैं।

किताब चौथा कारण भी देती है: सूचना और संचार प्रौद्योगिकी पर आधारित नई सेवाएँ, जिनका उत्पादन तेज़ी से बढ़ रहा है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 24, 25

3★★चालीस वर्षों में भारत में उत्पादन का ढाँचा बदल गया, पर रोज़गार का उतना नहीं। किताब के आँकड़ों से समझाइए।

उत्तर देखिए
1

उत्पादन —

1977–78 से 2017–18 के बीच तीनों क्षेत्रकों का उत्पादन बढ़ा, पर सबसे ज़्यादा तृतीयक का; 2017–18 में तृतीयक सबसे बड़ा उत्पादक बन गया।

2

रोज़गार —

आलेख 3 में प्राथमिक क्षेत्रक का हिस्सा 71 से घटकर 44 प्रतिशत हुआ, फिर भी वह सबसे बड़ा नियोक्ता है।

3

अंतर —

सेवा क्षेत्रक में उत्पादन 14 गुना बढ़ा, पर रोज़गार 5 गुना से भी कम। 2017–18 में जी.वी.ए. में प्राथमिक क्षेत्रक का योगदान लगभग एक-छठा था, जबकि रोज़गार में उसका हिस्सा 44 प्रतिशत।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 24–26

4★लक्ष्मी जैसे किसानों के लिए गाँव में ही रोज़गार बढ़ाने के कोई तीन उपाय लिखिए।

उत्तर देखिए
1

सिंचाई —

सरकार पैसा लगाए या बैंक ऋण दे और लक्ष्मी के खेत पर कुआँ बने, तो वह रबी मौसम में दूसरी फसल गेहूँ उगा सकेगी; एक हेक्टेयर गेहूँ दो लोगों को 50 दिन काम दे सकता है। कई खेतों की सिंचाई के लिए नया बाँध या नहर बने, तो खेती में रोज़गार के अनेक अवसर बनेंगे।

2

सड़क, परिवहन और भण्डारण —

सरकार परिवहन, फसलों के भण्डारण या बेहतर ग्रामीण सड़कों पर पैसा लगाए, तो छोटे ट्रक हर जगह पहुँचेंगे; किसान उपज बेच सकेंगे, और परिवहन और व्यापार में लगे लोगों को भी काम मिलेगा।

3

अर्द्ध-ग्रामीण उद्योग —

दाल मिल, शीत भण्डारण गृह, शहद संग्रह केन्द्र और सब्ज़ियों-फलों के प्रसंस्करण उद्योग खोले जा सकते हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 27, 28

5★शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन से रोज़गार कैसे बढ़ सकता है? किताब के आँकड़े दीजिए।

उत्तर देखिए
1

शिक्षा —

भारत की 60 प्रतिशत जनसंख्या 5–29 वर्ष की है, और इनमें से लगभग 51 प्रतिशत ही विद्यालय जाते हैं। बाकी बच्चे भी पढ़ने आएँ, तो और भवन, शिक्षक और कर्मचारी चाहिए होंगे; योजना आयोग (अब नीति आयोग) के एक अध्ययन के अनुसार अकेले शिक्षा क्षेत्र में लगभग 20 लाख रोज़गार बन सकते हैं।

2

स्वास्थ्य —

गाँवों में काम करने वाले और ज़्यादा डॉक्टर, नर्सें और स्वास्थ्य कर्मचारी चाहिए होंगे।

3

पर्यटन —

योजना आयोग के अध्ययन के अनुसार पर्यटन में सुधार हो, तो हर वर्ष 35 लाख से अधिक लोगों को अतिरिक्त रोज़गार मिल सकता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 28, 29

6★★संगठित क्षेत्रक के श्रमिकों को कौन-कौन से लाभ मिलते हैं?

उत्तर देखिए
1

सुनिश्चित काम —

रोज़गार की अवधि नियमित होती है; तय समय से ज़्यादा काम करें, तो नियोक्ता अतिरिक्त वेतन देता है।

2

दूसरे लाभ —

सवेतन छुट्टी, अवकाश काल में भुगतान, भविष्य निधि, सेवानुदान और चिकित्सा लाभ।

3

काम की जगह और सेवानिवृत्ति —

नियमों के अनुसार कारखाना मालिक को पेयजल और सुरक्षित कार्य-पर्यावरण देना होता है, और सेवानिवृत्त होने पर पेंशन मिलती है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 30, 31

7★★असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों की समस्या क्यों बढ़ती जा रही है?

उत्तर देखिए
1

धीमी वृद्धि —

संगठित क्षेत्रक में रोज़गार के अवसर बहुत धीमी गति से बढ़ रहे हैं।

2

नियमों से बचना —

कई संगठित उद्यम असंगठित क्षेत्रक की तरह काम करते हैं, ताकि कर से और श्रमिकों को संरक्षण देने वाले कानूनों के पालन से बच सकें।

3

1990 से रोज़गार का खोना —

सन् 1990 से संगठित क्षेत्रक के बहुत-से श्रमिक अपना रोज़गार खो रहे हैं, और असंगठित क्षेत्रक में कम वेतन पर काम करने को विवश हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 32

8★सड़कें, पुल, रेलवे, पत्तन, बिजली और बाँध से सिंचाई जैसी सुविधाएँ सरकार ख़ुद क्यों उपलब्ध कराती है?

उत्तर देखिए
1

भारी ख़र्च —

इन पर इतना ख़र्च आता है कि यह निजी क्षेत्रक की क्षमता से बाहर है।

2

वसूली कठिन —

इनका प्रयोग करने वाले हज़ारों लोगों से पैसा वसूलना भी आसान नहीं।

3

ऊँची कीमत —

निजी क्षेत्रक ये सुविधाएँ दे भी, तो वह इनकी ऊँची कीमत वसूलेगा। इसलिए सरकार यह भारी ख़र्च ख़ुद उठाती है और सभी लोगों के लिए ये सुविधाएँ सुनिश्चित करती है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 33, 34

खण्ड च — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) — 6 प्रश्न

1★★कार्य के स्वभाव के आधार पर अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्रक कौन-से हैं? उदाहरण देकर बताइए कि वे एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं।

उत्तर देखिए

कार्य के स्वभाव के आधार पर आर्थिक गतिविधियाँ तीन क्षेत्रकों में बँटती हैं, और तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं।

1

प्राथमिक क्षेत्रक —

प्राकृतिक संसाधनों के सीधे उपयोग से वस्तुएँ बनती हैं; इसे कृषि एवं सहायक क्षेत्रक भी कहते हैं।

उदाहरण कपास की खेती, डेयरी उत्पादन (दूध), खनिज और अयस्क।

2

द्वितीयक क्षेत्रक —

प्राकृतिक उत्पादों को विनिर्माण से दूसरे रूपों में बदला जाता है; इसे औद्योगिक क्षेत्रक भी कहते हैं।

उदाहरण कपास के रेशे से कपड़ा, गन्ने से चीनी या गुड़, मिट्टी से ईंट।

3

तृतीयक क्षेत्रक —

ये गतिविधियाँ ख़ुद वस्तुएँ नहीं बनातीं, उत्पादन में मदद करती हैं और सेवाएँ देती हैं; इसे सेवा क्षेत्रक भी कहते हैं।

उदाहरण परिवहन, भण्डारण, संचार, बैंक सेवाएँ, व्यापार; शिक्षक, डॉक्टर और वकील की सेवाएँ भी।

4

द्वितीयक, प्राथमिक पर निर्भर —

मिल का कच्चा माल खेत से आता है।

उदाहरण किसान गन्ना बेचने से मना कर दें, तो चीनी मिल बंद हो जाएगी।

5

प्राथमिक, तृतीयक पर निर्भर —

खेत की उपज को बाज़ार तक पहुँचाने के लिए सेवाएँ चाहिए।

उदाहरण ट्रांसपोर्टर हड़ताल कर दें, तो गाँवों की सब्ज़ियाँ और दूध शहर नहीं पहुँचेंगे, और किसान अपनी उपज नहीं बेच पाएँगे।

निष्कर्ष ★ तीनों क्षेत्रकों का काम अलग है, पर कोई भी क्षेत्रक दूसरे के बिना नहीं चल सकता।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 19–21

2★★किसी देश का सकल घरेलू उत्पाद (स.घ.उ.) कैसे गिना जाता है? किताब के उदाहरणों से समझाइए।

उत्तर देखिए

देश में हज़ारों तरह की वस्तुएँ और सेवाएँ बनती हैं; उन्हें एक संख्या में जोड़ने का तरीका यह है।

1

संख्या नहीं, मूल्य —

कारों, कंप्यूटरों, कीलों और फ़र्नीचर की संख्या आपस में नहीं जोड़ी जा सकती, इसलिए उनका मूल्य जोड़ा जाता है।

उदाहरण ₹20 प्रति कि.ग्रा. पर 10,000 कि.ग्रा. गेहूँ का मूल्य ₹2,00,000 है, और ₹15 प्रति नारियल पर 5000 नारियल का मूल्य ₹75,000।

2

सिर्फ़ अंतिम वस्तुएँ —

मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य अंतिम वस्तु के मूल्य में पहले से शामिल होता है।

उदाहरण गेहूँ ₹20, आटा ₹25, बिस्कुट के 4 पैकेट ₹80: गिनती सिर्फ़ ₹80 की होगी, ₹125 की नहीं।

3

एक वर्ष, देश के भीतर —

स.घ.उ. “किसी देश के भीतर किसी विशेष वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य है।”

उदाहरण किसी वर्ष में तीनों क्षेत्रकों के उत्पादन का योगफल ही उस वर्ष देश का स.घ.उ. है।

4

कौन मापता है —

यह कठिन काम केन्द्र सरकार का मंत्रालय करता है।

उदाहरण वह राज्यों और केन्द्र शासित क्षेत्रों के सरकारी विभागों की मदद से वस्तुओं-सेवाओं की संख्या और मूल्य की सूचना जुटाकर स.घ.उ. का अनुमान लगाता है।

5

जी.वी.ए. —

क्षेत्रकों का योगदान दिखाने के लिए सरकार ने हाल में, वैश्विक प्रथाओं की तरह, सकल मूल्य वर्धित (जी.वी.ए.) का प्रयोग शुरू किया है।

उदाहरण आलेख 1 और 2 तीनों क्षेत्रकों का जी.वी.ए. दिखाते हैं।

निष्कर्ष ★ “स. घ. उ. अर्थव्यवस्था की विशालता प्रदर्शित करता है।”

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 22, 23

3★★भारत के प्राथमिक क्षेत्रक में अल्प बेरोज़गारी क्यों है, और इसे घटाने के लिए किताब कौन-से उपाय सुझाती है?

उत्तर देखिए

उत्पादन का ढाँचा बदला, पर बाकी क्षेत्रकों में पर्याप्त रोज़गार नहीं बने, इसलिए खेती पर ज़रूरत से ज़्यादा लोग टिके हैं।

1

कारण —

2017–18 में भी 44 प्रतिशत श्रमिक प्राथमिक क्षेत्रक में थे, जबकि जी.वी.ए. में उसका योगदान लगभग एक-छठा था।

उदाहरण लक्ष्मी के दो हेक्टेयर के खेत पर पूरा परिवार काम करता है; एक-दो सदस्य हट जाएँ, तो भी उत्पादन नहीं घटता।

2

सिंचाई —

खेत पर कुआँ बने, तो रबी में दूसरी फसल हो सकती है; कई खेतों के लिए नया बाँध या नहर बने, तो खेती में रोज़गार के अनेक अवसर बनते हैं।

उदाहरण लक्ष्मी रबी में गेहूँ उगाए, तो एक हेक्टेयर गेहूँ दो लोगों को 50 दिन काम दे सकता है।

3

सस्ता कर्ज़ —

स्थानीय बैंक उचित ब्याज दर पर साख दें।

उदाहरण तब लक्ष्मी को बीज, उर्वरक और पम्पसेट के लिए साहूकार से ऊँचे ब्याज पर उधार नहीं लेना पड़ेगा।

4

अर्द्ध-ग्रामीण उद्योग और ग्रामीण सड़कें —

ऐसे उद्योग और सेवाएँ, जिनमें बहुत लोग काम पा सकें।

उदाहरण दाल मिल, शीत भण्डारण गृह, शहद संग्रह केन्द्र; बेहतर ग्रामीण सड़कें और भण्डारण।

5

काम का अधिकार —

म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005 ने ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष में 100 दिन के रोज़गार की गारंटी दी।

उदाहरण इसमें उन कामों को प्राथमिकता दी गई जो भूमि से उत्पादन बढ़ाएँ; 2025 में इसका स्थान विकसित भारत-रोज़गार गारंटी और आजीविका मिशन (विकसित भारत - जी राम जी 2025) ने लिया।

निष्कर्ष ★ खेती को उत्पादक बनाना और गाँव के पास नए काम खोलना, दोनों से अल्प बेरोज़गारी घटती है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 25–29

4★★असंगठित क्षेत्रक में किन लोगों को संरक्षण की ज़रूरत है, और क्यों?

उत्तर देखिए

असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों को न सुरक्षित काम मिलता है, न नियमों का लाभ, इसलिए उन्हें संरक्षण और सहायता चाहिए।

1

काम की हालत —

यह छोटी-छोटी, बिखरी इकाइयों से बना है, जो ज़्यादातर सरकारी नियंत्रण से बाहर हैं; नियम हैं, पर उनका पालन नहीं होता।

उदाहरण वेतन कम और अक्सर अनियमित; न अतिरिक्त समय का भुगतान, न सवेतन छुट्टी, न बीमारी की छुट्टी; बिना कारण काम से हटाया जा सकता है।

2

घटते सुरक्षित रोज़गार —

संगठित क्षेत्रक में रोज़गार बहुत धीमी गति से बढ़ रहा है।

उदाहरण सन् 1990 से संगठित क्षेत्रक के बहुत-से श्रमिक रोज़गार खोकर असंगठित क्षेत्रक में कम वेतन पर काम करने को विवश हैं।

3

गाँवों में —

भूमिहीन कृषि श्रमिक, छोटे और सीमांत किसान, फसल बँटाईदार और कारीगर (बुनकर, लुहार, बढ़ई, सुनार)।

उदाहरण लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण परिवार छोटे और सीमांत किसान हैं; उन्हें समय पर बीज, कृषि उपकरण, साख, भण्डारण और विपणन की सुविधा चाहिए।

4

शहरों में —

लघु उद्योगों के श्रमिक, निर्माण, व्यापार और परिवहन के आकस्मिक श्रमिक, सड़कों पर विक्रेता, सिर पर बोझा ढोने वाले, वस्त्र-निर्माण करने वाले और कबाड़ उठाने वाले।

उदाहरण लघु उद्योगों को कच्चा माल पाने और अपना उत्पाद बेचने में सरकारी मदद चाहिए।

5

सामाजिक भेदभाव —

असंगठित क्षेत्रक के बहुसंख्यक श्रमिक अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जातियों से हैं।

उदाहरण अनियमित और कम मज़दूरी के साथ वे सामाजिक भेदभाव के भी शिकार हैं।

निष्कर्ष ★ आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों को संरक्षण और सहायता अनिवार्य है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 31, 32

5★★स्वास्थ्य और शिक्षा पर ख़र्च करना सरकार की अनिवार्यता क्यों है? किताब के आँकड़े देकर समझाइए।

उत्तर देखिए

किताब कहती है, “इन पर व्यय करना सरकार की अनिवार्यता है।” इसके पीछे ये बातें हैं।

1

शिक्षा —

विद्यालय ठीक से चलाना और अच्छी शिक्षा, ख़ासकर प्राथमिक शिक्षा, देना सरकार का कर्तव्य है।

उदाहरण भारत में निरक्षरों की संख्या विश्व में सबसे अधिक है।

2

पोषण —

बच्चों का बड़ा हिस्सा कुपोषण का शिकार है।

उदाहरण भारत के लगभग आधे बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, और उनमें से एक-चौथाई गंभीर रूप से बीमार हैं।

3

शिशु मृत्यु दर —

कुछ राज्यों में यह बहुत ऊँची है।

उदाहरण ओडिशा (36) और मध्य प्रदेश (43) की शिशु मृत्यु दर विश्व के कुछ निर्धनतम भागों से भी अधिक है।

4

मानव विकास के दूसरे पक्ष —

सरकार को इन पर भी ध्यान देना है।

उदाहरण सुरक्षित पेयजल, निर्धनों के लिए आवास, और भोजन और पोषण।

5

सबसे पीछे छूटे लोग —

बजट बढ़ाकर अत्यंत निर्धनों की देखभाल करना सरकार का कर्तव्य है।

उदाहरण देश के पूरी तरह उपेक्षित भागों पर भी विशेष ध्यान।

निष्कर्ष ★ ये सभी लोगों की बुनियादी ज़रूरतें हैं, इसलिए इन्हें सबके लिए सुनिश्चित करना सरकार की ज़िम्मेदारी है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 34

6★विकसित देशों में क्षेत्रकों का जो क्रम दिखा, क्या भारत में भी वैसा ही हुआ? उत्पादन और रोज़गार, दोनों के आधार पर लिखिए।

उत्तर देखिए

पूरी तरह नहीं: उत्पादन में भारत में भी तृतीयक क्षेत्रक आगे निकल गया, पर रोज़गार में ऐसा नहीं हुआ।

1

विकसित देश, पहला दौर —

विकास की शुरुआत में प्राथमिक क्षेत्रक सबसे महत्त्वपूर्ण था।

उदाहरण ज़्यादातर लोग खेती और उससे जुड़े कामों में लगे थे।

2

विकसित देश, दूसरा दौर —

विनिर्माण की नई प्रणाली आई और कारखाने फैले, तो द्वितीयक क्षेत्रक सबसे महत्त्वपूर्ण बन गया।

उदाहरण जो लोग पहले खेतों में काम करते थे, उनमें से बहुत-से कारखानों में काम करने लगे; उन्हें इसके लिए मजबूर भी किया गया।

3

विकसित देश, तीसरा दौर —

पिछले 100 वर्षों में बदलाव द्वितीयक से तृतीयक क्षेत्रक की ओर हुआ।

उदाहरण आज वहाँ ज़्यादातर श्रमजीवी लोग सेवा क्षेत्रक में हैं।

4

भारत में उत्पादन —

1977–78 से 2017–18 तक सबसे ज़्यादा वृद्धि तृतीयक में हुई।

उदाहरण 2017–18 में तृतीयक क्षेत्रक सबसे बड़ा उत्पादक बन गया।

5

भारत में रोज़गार —

रोज़गार का ढाँचा उतना नहीं बदला।

उदाहरण आलेख 3 में 2017–18 में भी 44 प्रतिशत रोज़गार प्राथमिक क्षेत्रक में है, और वही सबसे बड़ा नियोक्ता है।

निष्कर्ष ★ भारत में उत्पादन तृतीयक क्षेत्रक की ओर गया, पर ज़्यादातर लोग अब भी प्राथमिक क्षेत्रक में काम करते हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 23–25

खण्ड छ — संख्यात्मक और तालिका-आधारित प्रश्न (3 अंक) — 6 प्रश्न

1★किताब के उदाहरण में एक वर्ष में ये वस्तुएँ बिकीं:
गेहूँ: 10,000 कि.ग्रा., ₹20 प्रति कि.ग्रा. · नारियल: 5000, ₹15 प्रति नारियल
(क) दोनों का मूल्य निकालिए। (ख) दोनों का कुल मूल्य कितना है? (ग) 10,000 और 5000 को सीधे जोड़ना ग़लत क्यों है?

उत्तर देखिए

(क) गेहूँ: 10,000 × ₹20 = ₹2,00,000; नारियल: 5000 × ₹15 = ₹75,000।

(ख) ₹2,00,000 + ₹75,000 = ₹2,75,000।

(ग) कि.ग्रा. गेहूँ और नारियल की गिनती अलग-अलग इकाइयों में है, इसलिए इनकी संख्या आपस में नहीं जुड़ती; रुपयों में मूल्य निकालने पर ही इन्हें जोड़ा जा सकता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 22

2★★गेहूँ ₹20 का बिका, उसका आटा ₹25 का, और उस आटे से बने बिस्कुट के 4 पैकेट ₹80 के।
(क) एक विद्यार्थी ने स.घ.उ. में ₹125 जोड़ा। उसकी ग़लती बताइए।
(ख) मान लीजिए 1 कि.ग्रा. आटे से ही ये 4 पैकेट बने और चीनी-तेल जैसी चीज़ों को छोड़ दें। हर चरण पर कितना मूल्य जुड़ा, और इनका जोड़ क्या है?

उत्तर देखिए

(क) ₹20 + ₹25 + ₹80 = ₹125 में गेहूँ का मूल्य तीन बार और आटे का दो बार गिना गया है, क्योंकि ₹80 में आटे का ₹25 और उसमें गेहूँ का ₹20 पहले से शामिल है। सही गिनती अंतिम वस्तु की है: ₹80।

(ख) किसान: ₹20; आटा-मिल: ₹25 − ₹20 = ₹5; बिस्कुट कंपनी: ₹80 − ₹25 = ₹55। जोड़: ₹20 + ₹5 + ₹55 = ₹80।

निष्कर्ष हर चरण पर जुड़ा मूल्य जोड़ें, या सिर्फ़ अंतिम वस्तु का मूल्य लें, उत्तर एक ही आता है: ₹80।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 22, 23

3★★आलेख 3 में रोज़गार में क्षेत्रकों की हिस्सेदारी (प्रतिशत):
1977–78: प्राथमिक 71 · द्वितीयक 11 · तृतीयक 18
2017–18: प्राथमिक 44 · द्वितीयक 25 · तृतीयक 31
(क) हर क्षेत्रक की हिस्सेदारी कितने अंक बदली? (ख) दोनों वर्षों का जोड़ कितना है? (ग) निष्कर्ष लिखिए।

उत्तर देखिए

(क) प्राथमिक: 44 − 71 = −27 (घटी); द्वितीयक: 25 − 11 = +14; तृतीयक: 31 − 18 = +13।

(ख) 71 + 11 + 18 = 100 और 44 + 25 + 31 = 100; एक की घटत दूसरों की बढ़त के बराबर है: 14 + 13 = 27।

(ग) प्राथमिक क्षेत्रक का हिस्सा घटा, फिर भी 2017–18 में 44 प्रतिशत के साथ वही सबसे बड़ा नियोक्ता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 25

4★★पृष्ठ 31 की तालिका “विभिन्न क्षेत्रकों में श्रमिकों की संख्या (दस लाख में)” के कुछ खाने खाली हैं (1990 के अंत के अनुमान):
प्राथमिक: संगठित 1 · असंगठित ? · कुल 232
द्वितीयक: संगठित 41 · असंगठित 74 · कुल 115
तृतीयक: संगठित 40 · असंगठित 88 · कुल 128
कुल: संगठित 82 · असंगठित ? · कुल ?
खाली खाने भरिए, और संगठित और असंगठित क्षेत्रक का प्रतिशत हिस्सा निकालिए।

उत्तर देखिए

चरण 1 प्राथमिक असंगठित: 232 − 1 = 231।

चरण 2 कुल असंगठित: 231 + 74 + 88 = 393; कुल श्रमिक: 82 + 393 = 475 (जाँच: 232 + 115 + 128 = 475)।

चरण 3 संगठित: 82 ÷ 475 × 100 = 17.3 प्रतिशत; असंगठित: 393 ÷ 475 × 100 = 82.7 प्रतिशत।

निष्कर्ष हर छह में से लगभग पाँच श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में थे।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 31

5★इसी तालिका से निकालिए:
(क) द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक के अपने-अपने श्रमिकों में से कितने प्रतिशत असंगठित थे?
(ख) सभी 393 (दस लाख) असंगठित श्रमिकों में से कितने प्रतिशत प्राथमिक क्षेत्रक में थे?

उत्तर देखिए

(क) द्वितीयक: 74 ÷ 115 × 100 = 64.3 प्रतिशत; तृतीयक: 88 ÷ 128 × 100 = 68.75, यानी लगभग 68.8 प्रतिशत।

(ख) 231 ÷ 393 × 100 = 58.8, यानी लगभग 59 प्रतिशत।

निष्कर्ष हर क्षेत्रक में ज़्यादातर श्रमिक असंगठित हैं, और असंगठित श्रमिकों में भी सबसे बड़ा हिस्सा खेती से जुड़े प्राथमिक क्षेत्रक का है।

! प्रतिशत निकालते समय भाजक ध्यान से चुनिए: (क) में उस क्षेत्रक के कुल श्रमिक (115 या 128), (ख) में कुल असंगठित श्रमिक (393)।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 31

6★किताब मान लेती है कि एक हेक्टेयर गेहूँ की फसल दो लोगों को 50 दिनों तक रोज़गार दे सकती है। मान लीजिए किसी गाँव में नई नहर से 10 हेक्टेयर ज़मीन पर गेहूँ बोया जाता है। इसी हिसाब से (क) कितने लोगों को काम मिलेगा, और (ख) कुल कितने व्यक्ति-दिन का काम बनेगा?

उत्तर देखिए

(क) हर हेक्टेयर पर 2 लोग: 10 × 2 = 20 लोग।

(ख) हर व्यक्ति को 50 दिन: 20 × 50 = 1000 व्यक्ति-दिन।

निष्कर्ष किताब के अनुसार नया बाँध या नहर कई खेतों की सिंचाई करे, तो खेती में रोज़गार के अनेक अवसर बनते हैं और अल्प बेरोज़गारी अपने-आप कम होती है।

! 10 × 50 = 500 लिखना आम ग़लती है: इसमें हर हेक्टेयर के दो लोगों को एक ही गिन लिया जाता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 2, पृष्ठ 27

उत्तर लिखने का तरीक़ा

अंकलंबाईकैसे लिखें
1 अंकएक वाक्यसीधे उत्तर
2 अंक30–40 शब्दउत्तर + कारण या उदाहरण
3 अंक60–80 शब्दतीन बिंदु, पूरे वाक्यों में
5 अंकलगभग 120 शब्दभूमिका + पाँच बिंदु + निष्कर्ष

★इस अध्याय के लिए तीन सलाह —

  1. पहले आधार बताइए: कार्य का स्वभाव (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक), रोज़गार की परिस्थितियाँ (संगठित, असंगठित) या स्वामित्व (सार्वजनिक, निजी)। आधार साफ़ हो, तो क्षेत्रक का नाम अपने-आप सही बैठता है।
  2. किताब के अपने उदाहरण लिखिए: लक्ष्मी का खेत, कान्ता और कमल, गेहूँ से बिस्कुट, रेलवे और टिस्को।
  3. किताब के आँकड़े साल के साथ लिखिए: रोज़गार में प्राथमिक क्षेत्रक 71 से 44 प्रतिशत (1977–78 से 2017–18), सेवा क्षेत्रक में उत्पादन 14 गुना और रोज़गार 5 गुना से भी कम, शिशु मृत्यु दर ओडिशा 36 और मध्य प्रदेश 43। तालिका के खाली खाने भरकर निकाले गए आँकड़े, जैसे 393 और 475 (दस लाख), हिसाब के साथ लिखिए।

तीन नमूना परीक्षा-पत्र

हर पत्र के सभी प्रश्नों के उत्तर इसी पन्ने के ऊपर के खण्डों में हैं। पहले बिना देखे लिखिए, फिर मिलाइए।

नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1अर्थशास्त्र में “क्षेत्रक” किसे कहते हैं?1
2रिक्त स्थान भरिए: स.घ.उ. में सिर्फ़ ……… वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य गिना जाता है, क्योंकि ……… वस्तुओं का मूल्य उनमें पहले से शामिल होता है।1
3आलेख 3 के अनुसार 2017–18 में रोज़गार में प्राथमिक क्षेत्रक की हिस्सेदारी कितनी थी?1
4प्राथमिक क्षेत्रक को “प्राथमिक” क्यों कहा जाता है?2
5लक्ष्मी के परिवार के सभी सदस्य खेत पर काम करते हैं। फिर भी इसे बेरोज़गारी क्यों कहा जाता है?2
6पृष्ठ 21 की तालिका 2.1 के उदाहरणों से दिखाइए कि तीनों क्षेत्रक एक-दूसरे पर निर्भर हैं।3
7कार्य के स्वभाव के आधार पर अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्रक कौन-से हैं? उदाहरण देकर बताइए कि वे एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं।5
8असंगठित क्षेत्रक में किन लोगों को संरक्षण की ज़रूरत है, और क्यों?5

नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1भारत में स.घ.उ. मापने का काम कौन करता है?1
2म.गाँ.रा.ग्रा.रो.गा.अ.–2005 ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष में कितने दिन के रोज़गार की गारंटी देता था?1
3रिक्त स्थान भरिए: एक हेक्टेयर गेहूँ की फसल ……… लोगों को ……… दिनों तक रोज़गार दे सकती है।1
4अंतिम वस्तु और मध्यवर्ती वस्तु में क्या अंतर है? गेहूँ से बिस्कुट के उदाहरण से समझाइए।2
5कान्ता और कमल के काम में कोई दो अंतर लिखिए।2
6चालीस वर्षों में भारत में उत्पादन का ढाँचा बदल गया, पर रोज़गार का उतना नहीं। किताब के आँकड़ों से समझाइए।3
7किसी देश का सकल घरेलू उत्पाद (स.घ.उ.) कैसे गिना जाता है? किताब के उदाहरणों से समझाइए।5
8स्वास्थ्य और शिक्षा पर ख़र्च करना सरकार की अनिवार्यता क्यों है? किताब के आँकड़े देकर समझाइए।5

नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1ज़्यादातर विकसित देशों में पिछले 100 वर्षों में किस ओर बदलाव हुआ है?1
21990 के अंत में लगभग कितने प्रतिशत श्रमिक असंगठित क्षेत्रक में थे?1
3सही या ग़लत: असंगठित क्षेत्रक के लिए कोई नियम है ही नहीं।1
4बुनियादी सेवाएँ किन्हें कहते हैं? किसी विकासशील देश में इनकी ज़िम्मेदारी कौन उठाता है?2
5रेलवे और टिस्को किस-किस क्षेत्रक में आते हैं, और किस आधार पर?2
6सड़कें, पुल, रेलवे, पत्तन, बिजली और बाँध से सिंचाई जैसी सुविधाएँ सरकार ख़ुद क्यों उपलब्ध कराती है?3
7भारत के प्राथमिक क्षेत्रक में अल्प बेरोज़गारी क्यों है, और इसे घटाने के लिए किताब कौन-से उपाय सुझाती है?5
8विकसित देशों में क्षेत्रकों का जो क्रम दिखा, क्या भारत में भी वैसा ही हुआ? उत्पादन और रोज़गार, दोनों के आधार पर लिखिए।5