Chapter 4वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

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RBSE परीक्षा पैटर्न के अनुसार · कुल 60 प्रश्न


खण्ड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक) — 20 प्रश्न

1बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है जो

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सही उत्तर: (ब) एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है

2बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन इकाई वहाँ लगाती हैं जहाँ मिले

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सही उत्तर: (ब) सस्ता श्रम एवं अन्य संसाधन

3भूमि, भवन, मशीन आदि की ख़रीद में व्यय की गई मुद्रा कहलाती है

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सही उत्तर: (ब) निवेश

4बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किया गया निवेश कहलाता है

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सही उत्तर: (ब) विदेशी निवेश

5कारगिल फ़ूड्स ने किस भारतीय कंपनी को ख़रीदा?

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सही उत्तर: (ब) परख फ़ूड्स

6कारगिल की भारत में खाद्य तेल निर्माण क्षमता है

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सही उत्तर: (स) 50 लाख पैकेट प्रतिदिन

7फोर्ड मोटर्स भारत में आई

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सही उत्तर: (ब) 1995

8फोर्ड मोटर्स ने चेन्नई के निकट निवेश किया

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सही उत्तर: (स) 1,700 करोड़

9फोर्ड मोटर्स ने भारत में किस कंपनी के सहयोग से संयंत्र लगाया?

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सही उत्तर: (ब) महिन्द्रा एंड महिन्द्रा

10एक वर्ष में कितने प्रतिशत खिलौना-दुकानों में भारतीय खिलौनों का स्थान चीनी खिलौनों ने लिया?

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सही उत्तर: (स) 70-80%

11“विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया” कहलाती है

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सही उत्तर: (ब) वैश्वीकरण

12वैश्वीकरण में मुख्य भूमिका निभा रही हैं

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सही उत्तर: (ब) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ

13आयात पर कर एक उदाहरण है

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सही उत्तर: (ब) व्यापार अवरोधक का

14आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या सीमित करना कहलाता है

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सही उत्तर: (ब) कोटा

15भारत में नीतियों में दूरगामी परिवर्तन किए गए

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सही उत्तर: (स) 1991 से

16विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देश हैं लगभग

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सही उत्तर: (स) 160

17अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का हिस्सा है

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सही उत्तर: (अ) मात्र एक प्रतिशत

18विशेष आर्थिक क्षेत्र में नई इकाइयों को कर से छूट मिलती है

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सही उत्तर: (स) पाँच वर्ष

19रवि किस वस्तु का निर्माण करता था?

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सही उत्तर: (ब) संधारित्र (कैपेसिटर)

20लघु और मध्यम उद्योगों में नियोजित श्रमिकों की संख्या है

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सही उत्तर: (स) 11 करोड़

खण्ड ख — रिक्त स्थान (1 अंक) — 10 प्रश्न

1बीसवी शताब्दी के मध्य तक उत्पादन मुख्यत: देशों की ______ के अंदर सीमित था।

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बीसवी शताब्दी के मध्य तक उत्पादन मुख्यत: देशों की सीमाओं के अंदर सीमित था।

2उत्पादन का विश्व-स्तरीय बँटवारा कंपनी की लागत का लगभग ______ बचा सकता है।

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उत्पादन का विश्व-स्तरीय बँटवारा कंपनी की लागत का लगभग 50-60 प्रतिशत बचा सकता है।

3बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता ______ है।

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बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को ख़रीदना है।

4फोर्ड मोटर्स विश्व के ______ देशों में फैली है।

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फोर्ड मोटर्स विश्व के 26 देशों में फैली है।

5______ विभिन्न देशों के बाज़ारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।

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विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाज़ारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।

6विगत कुछ दशकों में अनेक प्रतिबंधों के कारण देशों के बीच ______ के आवागमन में अधिक वृद्धि नहीं हुई है।

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विगत कुछ दशकों में अनेक प्रतिबंधों के कारण देशों के बीच लोगों के आवागमन में अधिक वृद्धि नहीं हुई है।

7______ के प्रयोग से ढुलाई-लागत में भारी बचत हुई है।

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कंटेनर के प्रयोग से ढुलाई-लागत में भारी बचत हुई है।

8सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया ______ कहलाती है।

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सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण कहलाती है।

9विश्व व्यापार संगठन ______ देशों की पहल पर शुरू किया गया था।

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विश्व व्यापार संगठन विकसित देशों की पहल पर शुरू किया गया था।

10सुशीला अपने घर से ______ किमी दूर काम करने जाती है।

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सुशीला अपने घर से 30 किमी दूर काम करने जाती है।

खण्ड ग — सही/ग़लत (1 अंक) — 5 प्रश्न

1बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ केवल एक देश में उत्पादन करती हैं।

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ग़लत

2वैश्वीकरण से देशों के बीच लोगों के आवागमन में बहुत वृद्धि हुई है।

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ग़लत (अनेक प्रतिबंधों के कारण अधिक वृद्धि नहीं हुई)

3विकसित देशों ने भी विकास के प्रारंभिक चरणों में अपने घरेलू उत्पादकों को संरक्षण दिया था।

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सही

4वैश्वीकरण का प्रभाव सभी पर एक समान पड़ा है।

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ग़लत

5संगठित क्षेत्र में कार्य-परिस्थितियाँ क्रमश: असंगठित क्षेत्र के समान होती जा रही हैं।

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सही

खण्ड घ — अति लघूत्तरीय प्रश्न (2 अंक) — 10 प्रश्न

1बहुराष्ट्रीय कंपनी किसे कहते हैं?

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“एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।” वे वहाँ कारख़ाने लगाती हैं जहाँ सस्ता श्रम एवं अन्य संसाधन मिलें, ताकि उत्पादन लागत घटे और अधिक लाभ हो।

2निवेश और विदेशी निवेश में अंतर बताइए।

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निवेश — “भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरणों की ख़रीद में व्यय की गई मुद्रा।” विदेशी निवेश — वही निवेश जब बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किया जाए।

3व्यापार अवरोधक क्या है? एक उदाहरण दीजिए।

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वह प्रतिबंध जो सरकार विदेश व्यापार पर लगाती है, ताकि विदेश व्यापार में वृद्धि या कटौती की जा सके। उदाहरण — आयात पर कर और कोटा।

4उदारीकरण की परिभाषा दीजिए।

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“सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है।” इससे व्यावसायी मुक्त रूप से तय कर सकते हैं कि क्या आयात-निर्यात करना है।

5वैश्वीकरण किसे कहते हैं?

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“विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।” यह अधिक विदेश व्यापार और अधिक विदेशी निवेश का परिणाम है, और इसमें बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ मुख्य भूमिका निभाती हैं।

6कंटेनर से क्या लाभ हुआ?

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वस्तुओं को कंटेनरों में रखकर जहाज़, रेल, वायुयान और ट्रक पर बिना क्षति के लादा जा सकता है। इससे ढुलाई-लागत में भारी बचत हुई और माल पहुँचाने की गति में वृद्धि हुई।

7विश्व व्यापार संगठन का ध्येय और काम क्या है?

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ध्येय — अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना। काम — “अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से संबंधित नियमों को निर्धारित करता है और यह देखता है कि इन नियमों का पालन हो।” इसके लगभग 160 देश सदस्य हैं।

8विशेष आर्थिक क्षेत्र क्या है?

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ऐसा औद्योगिक क्षेत्र जहाँ विश्व स्तरीय सुविधाएँ — बिजली, पानी, सड़क, परिवहन, भण्डारण, मनोरंजन और शैक्षिक सुविधाएँ — उपलब्ध कराई जाती हैं, और जहाँ इकाई लगाने वाली कंपनियों को आरंभिक पाँच वर्षों तक कोई कर नहीं देना पड़ता।

9न्यायसंगत वैश्वीकरण से क्या आशय है?

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“न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।”

10संयुक्त उत्पादन से स्थानीय कंपनी को क्या दोहरा लाभ होता है?

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1

अतिरिक्त निवेश के लिए धन मिलता है — जैसे तीव्र उत्पादन के लिए मशीनें ख़रीदने के लिए; (2) उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी मिलती है।

खण्ड ङ — लघूत्तरीय प्रश्न (3 अंक) — 8 प्रश्न

1बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन को विश्व स्तर पर कैसे बाँटती हैं? उदाहरण दीजिए।

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किताब का उदाहरण — अनुसंधान केन्द्र में उत्पाद का डिज़ाइन अमेरिका में, पुर्ज़े चीन में, जोड़ाई मेक्सिको और पूर्वी यूरोप में, बिक्री विश्व भर में, और ग्राहक सेवा भारत के कॉल सेंटरों से।

हर देश अपनी ख़ूबी देता है — चीन “सस्ता विनिर्माण केन्द्र”, मेक्सिको-पूर्वी यूरोप “बाज़ारों से निकटता”, और भारत “अत्यंत कुशल इंजीनियर” तथा “अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवक”।

★इस पूरी व्यवस्था से कंपनी की लागत का लगभग 50-60 प्रतिशत बच जाता है, और इसीलिए “उत्पादन प्रक्रिया क्रमश: जटिल ढंग से संगठित हुई है।”

2बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन पर नियंत्रण के कौन-से चार तरीक़े अपनाती हैं?

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1

स्वयं कार्यालय और कारख़ाने स्थापित करना — जैसे फोर्ड मोटर्स ने चेन्नई के निकट।

2

स्थानीय कंपनियों के साथ संयुक्त उत्पादन — जिससे स्थानीय कंपनी को धन और नवीनतम प्रौद्योगिकी दोनों मिलती हैं।

3

★स्थानीय कंपनियों को ख़रीदना — यह “सबसे आम रास्ता” है; जैसे कारगिल फ़ूड्स ने परख फ़ूड्स को ख़रीदा और अब 50 लाख पैकेट प्रतिदिन क्षमता के साथ भारत की सबसे बड़ी खाद्य तेल उत्पादक है।

4

छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देना — वस्त्र, जूते-चप्पल और खेल के सामान में; उनमें “मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तों का निर्धारण करने की प्रचण्ड क्षमता” होती है।

3चीनी खिलौनों के उदाहरण से समझाइए कि विदेश व्यापार से किसे लाभ और किसे हानि होती है।

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चीनी विनिर्माताओं को पता चला कि भारत में खिलौने अधिक मूल्य पर बिक रहे हैं, इसलिए उन्होंने निर्यात शुरू किया। सस्ते दाम और नवीन डिज़ाइनों के कारण “एक वर्ष में ही खिलौने की 70-80 प्रतिशत दुकानों में भारतीय खिलौनों का स्थान चीनी खिलौनों ने ले लिया।”

लाभ — भारतीय ख़रीददारों को “कम क़ीमत पर खिलौनों के अपेक्षाकृत अधिक विकल्प” मिले, और चीनी निर्माताओं को “अपना व्यवसाय फैलाने के लिए एक अवसर”।

हानि — भारतीय खिलौना निर्माताओं को, “क्योंकि उनके खिलौने कम बिकते हैं”।

4विदेश व्यापार बाज़ारों के एकीकरण में कैसे सहायक है?

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तीन तरह से — (1) “वस्तुओं का एक बाज़ार से दूसरे बाज़ार में आवागमन” होने लगता है; (2) “बाज़ार में वस्तुओं के विकल्प बढ़ जाते हैं”; और (3) ★“दो बाज़ारों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है।”

परिणामत: “दो देशों के उत्पादक एक दूसरे से हज़ारों मील दूर होकर भी एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।” इसीलिए किताब कहती है — “विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाज़ारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।”

5वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कारकों की व्याख्या कीजिए।

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“प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति वह मुख्य कारक है जिसने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित किया।”

1

परिवहन प्रौद्योगिकी — विगत पचास वर्षों में इसने “लम्बी दूरियों तक वस्तुओं की तीव्रतर आपूर्ति को कम लागत पर संभव” किया। कंटेनरों से “ढुलाई-लागत में भारी बचत” हुई और गति बढ़ी; वायु यातायात की लागत में भी गिरावट आई।

2

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी — दूरसंचार (टेलीग्राफ़, टेलीफोन, मोबाइल, फैक्स — संचार उपग्रहों द्वारा), कंप्यूटर और इंटरनेट, जिससे “तत्काल इलेक्ट्रॉनिक डाक” और “अत्यंत कम मूल्य पर विश्व-भर में बात” संभव हुई।

6भारत ने 1950-60 के दशकों में व्यापार अवरोधक क्यों लगाए थे?

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“देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण प्रदान करने के लिए यह अनिवार्य माना गया।” उस समय “उद्योगों का उदय हो रहा था और इस अवस्था में आयात से प्रतिस्पर्धा इन उद्योगों को बढ़ने नहीं देती।” इसीलिए भारत ने केवल अनिवार्य चीज़ों — मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम — के आयात की अनुमति दी।

★और ध्यान रहे — “सभी विकसित देशों ने विकास के प्रारंभिक चरणों में घरेलू उत्पादकों को विभिन्न तरीक़ों से संरक्षण दिया है।”

7विश्व व्यापार संगठन की आलोचना क्यों की जाती है?

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क्योंकि व्यवहार में “विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को बरकरार रखा है”, जबकि “विश्व व्यापार संगठन के नियमों ने विकासशील देशों के व्यापार अवरोधों को हटाने के लिए विवश किया है।”

सबसे स्पष्ट उदाहरण कृषि है — अमेरिका में कृषि का जी.डी.पी. में हिस्सा मात्र एक प्रतिशत और रोज़गार में केवल 0.5 प्रतिशत है, फिर भी वहाँ के किसान सरकार से भारी धन राशि पाते हैं और “अधिशेष कृषि उत्पादों को दूसरे देशों के बाज़ारों में कम क़ीमत पर” बेच देते हैं, “जो इन देशों के कृषकों को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।” इसीलिए सवाल उठता है — “क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?”

8श्रम-क़ानूनों में लचीलेपन का श्रमिकों पर क्या प्रभाव पड़ा है?

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इससे कंपनियाँ “नियमित आधार पर श्रमिकों को रोज़गार देने के बजाय… लोचदार ढंग से छोटी अवधि के लिए श्रमिकों को कार्य पर” रखती हैं, और इसका उद्देश्य साफ़ है — “कंपनी की श्रम लागत में कटौती करने के लिए ऐसा किया जाता है।”

श्रमिकों पर असर — “श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है”; उन्हें “बहुत लम्बे कार्य-घंटों” तक और “नियमित रूप से रात में भी” काम करना पड़ता है, मज़दूरी काफ़ी कम होती है, और स्वास्थ्य बीमा व भविष्य निधि जैसे लाभ नहीं मिलते। सुशीला इसका जीता-जागता उदाहरण है।

खण्ड च — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) — 7 प्रश्न

1★★“वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है” — विस्तार से समझाइए।

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जिन्हें लाभ हुआ

1

शहरी क्षेत्र के धनी उपभोक्ता — उनके सामने वस्तुओं और सेवाओं के विस्तृत विकल्प हैं; उन्हें उत्कृष्ट गुणवत्ता और कम क़ीमत मिली, और “ये लोग पहले की तुलना में आज अपेक्षाकृत उच्चतर जीवन स्तर का आनन्द ले रहे हैं।”

2

नये रोज़गार — बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने सेलफोन, मोटर गाड़ियों, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों, ठंडे पेय पदार्थों, जंक खाद्य पदार्थों एवं बैंकिंग में निवेश किया, जिससे नये रोज़गार बने और कच्चा माल देने वाली स्थानीय कंपनियाँ भी समृद्ध हुईं।

3

शीर्ष भारतीय कंपनियाँ — इन्होंने नवीनतम प्रौद्योगिकी और उत्पादन प्रणाली में निवेश किया और अपने उत्पादन-मानक ऊँचे उठाए; कुछ तो स्वयं बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बन गईं — टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी, एशियन पेंट्स और सुंदरम फास्नर्स।

4

सेवा क्षेत्र — कॉल सेंटर, डाटा एन्ट्री, लेखाकरण, प्रशासनिक कार्य और इंजीनियरिंग जैसी सेवाएँ अब भारत से विकसित देशों को निर्यात होती हैं।

जिन्हें हानि हुई

5

छोटे उत्पादक — बैटरी, संधारित्र, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी उत्पाद और खाद्य तेल के उद्योगों में “कई इकाइयाँ बंद हो गईं, जिसके चलते अनेक श्रमिक बेरोज़गार हो गए।” रवि की कंपनी इसका उदाहरण है — 2001 में आयात प्रतिबंध हटने के बाद आज वह आधे से भी कम उत्पादन करता है और उसके पास केवल सात श्रमिक बचे हैं। यह गंभीर बात है, क्योंकि “लघु और मध्यम उद्योगों में कृषि के बाद सबसे अधिक श्रमिक (11 करोड़) नियोजित हैं।”

6

श्रमिक — “श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है”; स्थायी के बदले अस्थायी रोज़गार, लम्बे कार्य-घंटे, रात की पाली और कम मज़दूरी। सुशीला अस्थायी श्रमिक है, आधे से भी कम कमाती है और सातों दिन सुबह 7.30 से रात 10 बजे तक काम करती है।

निष्कर्ष ★ “शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर, अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है।”

2वैश्वीकरण क्या है? इसे संभव बनाने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।

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परिभाषा “विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।” यह अधिक विदेश व्यापार और अधिक विदेशी निवेश से होता है, और “बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वैश्वीकरण की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभा रही हैं।” देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ा है। ! पर लोगों के आवागमन में “अनेक प्रतिबंधों के कारण अधिक वृद्धि नहीं हुई है।”

कारक “प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति वह मुख्य कारक है जिसने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित किया।”

1

परिवहन प्रौद्योगिकी — विगत पचास वर्षों में इसने “लम्बी दूरियों तक वस्तुओं की तीव्रतर आपूर्ति को कम लागत पर संभव” किया। कंटेनरों में सामान रखने से “ढुलाई-लागत में भारी बचत” हुई और “माल को बाज़ारों तक पहुँचाने की गति में वृद्धि” हुई; वायु यातायात की लागत में गिरावट से अधिक मात्रा में परिवहन संभव हुआ।

2

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी — दूरसंचार सुविधाएँ (टेलीग्राफ़, टेलीफोन, मोबाइल फोन, फैक्स) संचार उपग्रहों द्वारा सुगम हुईं; कंप्यूटर और इंटरनेट से तत्काल ई-मेल और अत्यंत कम मूल्य पर वॉयस मेल संभव हुए।

उदाहरणलंदन के पाठकों के लिए पत्रिका का पाठ्य-विषय इंटरनेट से दिल्ली भेजा जाता है, डिज़ाइन और छपाई दिल्ली में होती है, पत्रिकाएँ वायुमार्ग से लंदन जाती हैं, और भुगतान ई-बैंकिंग से तत्काल हो जाता है।

3उदारीकरण क्या है? भारत में इसकी प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

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परिभाषा “सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है।”

पहले क्या था स्वतंत्रता के बाद भारत ने विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर अवरोधक लगाए थे, क्योंकि “देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण प्रदान करने के लिए यह अनिवार्य माना गया।” 1950 और 1960 के दशकों में उद्योगों का उदय हो रहा था और “आयात से प्रतिस्पर्धा इन उद्योगों को बढ़ने नहीं देती।” इसीलिए केवल मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम जैसी अनिवार्य चीज़ों के आयात की अनुमति थी।

1991 का मोड़ “भारत में करीब सन् 1991 के प्रारंभ से नीतियों में कुछ दूरगामी परिवर्तन किए गए।” सरकार ने माना कि “भारतीय उत्पादकों के लिए विश्व के उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा करने का समय आ गया है” और “प्रतिस्पर्धा से देश में उत्पादकों के प्रदर्शन में सुधार होगा, क्योंकि उन्हें अपनी गुणवत्ता में सुधार करना होगा।” इस निर्णय का प्रभावशाली अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने समर्थन किया।

परिणाम अवरोधक काफ़ी हद तक हटा दिए गए; अब “वस्तुओं का आयात-निर्यात सुगमता से किया जा सकता था और विदेशी कंपनियाँ यहाँ अपने कार्यालय और कारख़ाने स्थापित कर सकती थीं।” व्यावसायियों को मुक्त रूप से निर्णय लेने की छूट मिली और “सरकार पहले की तुलना में कम नियंत्रण करती है और इसलिए उसे अधिक उदार कहा जाता है।”

4बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूसरे देशों में उत्पादन पर नियंत्रण कैसे स्थापित करती हैं? उदाहरण सहित।

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कहाँ जाती हैं वहाँ जहाँ (1) बाज़ार नज़दीक हो, (2) कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम उपलब्ध हो, (3) उत्पादन के अन्य कारक सुनिश्चित हों; और वे “सरकारी नीतियों पर भी नज़र रखती हैं, जो उनके हितों की देखभाल करती हैं।”

चार तरीक़े

1

स्वयं कारख़ाने लगाना — फोर्ड मोटर्स, जो विश्व के 26 देशों में फैली है, 1995 में भारत आई और चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए के निवेश से महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से संयंत्र लगाया; 2017 तक भारत में 88,000 कारें बेचीं और 1,81,000 कारें निर्यात कीं।

2

संयुक्त उत्पादन — स्थानीय कंपनी को दोहरा लाभ: अतिरिक्त निवेश के लिए धन और उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी।

3

★स्थानीय कंपनियों को ख़रीदना — यह “सबसे आम रास्ता” है। कारगिल फ़ूड्स ने परख फ़ूड्स को ख़रीद लिया, जिसके पास बड़ा विपणन तंत्र और चार तेल शोधक केन्द्र थे; अब कारगिल 50 लाख पैकेट प्रतिदिन की क्षमता के साथ भारत में खाद्य तेलों की सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी है। यह इसलिए संभव है क्योंकि “कई शीर्षस्थ बहुराष्ट्रीय कंपनियों की संपत्ति विकासशील देशों की सरकारों के सम्पूर्ण बजट से भी अधिक है।”

4

छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देना — वस्त्र, जूते-चप्पल और खेल के सामान जैसे उद्योगों में; उत्पाद अपने ब्राण्ड नाम से बेचे जाते हैं, और इन कंपनियों में “दूरस्थ उत्पादकों के मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तों का निर्धारण करने की प्रचण्ड क्षमता” होती है।

निष्कर्ष “इस प्रकार बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूरस्थ स्थानों के उत्पादन पर अपना प्रभाव जमा रही हैं। परिणामत: दूर-दूर स्थानों पर फैला उत्पादन परस्पर संबंधित हो रहा है।”

5वैश्वीकरण ने छोटे उत्पादकों और श्रमिकों को कैसे प्रभावित किया है?

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छोटे उत्पादक — “प्रतिस्पर्धा करो या नष्ट हो जाओ” — “वैश्वीकरण ने बड़ी संख्या में छोटे उत्पादकों और श्रमिकों के लिए बड़ी चुनौतियाँ खड़ी की हैं।”

रवि का उदाहरण — उसने 1992 में तमिलनाडु के होसुर में बैंक-ऋण लेकर संधारित्रों की कंपनी शुरू की और तीन वर्षों में 20 कर्मचारी रखने लगा। पर 2001 में सरकार ने “विश्व व्यापार संगठन के समझौते के अनुसार संधारित्रों के आयात पर से प्रतिबंधों को हटा दिया”, और आयातित सामान की क़ीमत रवि की क़ीमत से आधी थी। आज वह वर्ष 2000 से आधे से भी कम संधारित्र बनाता है और उसके पास केवल सात श्रमिक हैं; उसके हैदराबाद-चेन्नई के मित्रों ने इकाइयाँ बंद कर दीं।

यही हाल बैटरी, संधारित्र, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी उत्पाद और खाद्य तेल का हुआ — “कई इकाइयाँ बंद हो गईं, जिसके चलते अनेक श्रमिक बेरोज़गार हो गए।” और यह इसलिए गंभीर है क्योंकि “लघु और मध्यम उद्योगों में कृषि के बाद सबसे अधिक श्रमिक (11 करोड़) नियोजित हैं।”

श्रमिक — अनिश्चित रोज़गार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण “अधिकांश नियोक्ता इन दिनों श्रमिकों को रोज़गार देने में लचीलापन पसंद करते हैं… श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है।” वस्त्र-निर्यात उद्योग में निर्यातक कच्चे माल की लागत नहीं घटा सकते, इसलिए श्रम-लागत घटाते हैं — स्थायी के बदले अस्थायी रोज़गार, बहुत लम्बे कार्य-घंटे, रात की पाली और कम मज़दूरी।

सुशीला का उदाहरण — 35 वर्षीया यह दिल्ली की वस्त्र-श्रमिक जब स्थायी थी तब स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि और ओवरटाइम की दुगुनी मज़दूरी की हकदार थी। 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में फैक्ट्री बंद हुई; छह माह बाद 30 किमी दूर काम मिला; आज भी वह अस्थायी श्रमिक है, आधे से भी कम कमाती है, सप्ताह के सातों दिन सुबह 7.30 से रात 10 बजे तक काम करती है और “एक दिन काम नहीं करने का अर्थ है, उस दिन की मज़दूरी नहीं मिलना।”

निष्कर्ष ★ “संगठित क्षेत्र में क्रमश: कार्य-परिस्थितियाँ असंगठित क्षेत्र के समान होती जा रही हैं” और “वैश्वीकरण के कारण मिले लाभ में श्रमिकों को न्यायसंगत हिस्सा नहीं दिया गया है।”

6★वैश्वीकरण को न्यायसंगत कैसे बनाया जा सकता है?

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समस्या “वैश्वीकरण सभी के लिए लाभप्रद नहीं रहा है। शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर, अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है।”

लक्ष्य चूँकि “वैश्वीकरण अब एक सच्चाई है”, इसे रोका नहीं जा सकता, पर न्यायसंगत बनाया जा सकता है — “न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।”

सरकार की भूमिका

1

नीतियाँ “केवल धनी और प्रभावशाली लोगों को ही नहीं बल्कि देश के सभी लोगों के हितों का संरक्षण” करें।

2

“श्रमिक क़ानूनों का उचित कार्यान्वयन हो और श्रमिकों को अपने अधिकार मिलें।”

3

छोटे उत्पादकों को मदद — “उस समय तक, जब तक वे प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम न हो जायें।”

4

ज़रूरत हो तो “व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग”।

5

“‘न्यायसंगत नियमों’ के लिए विश्व व्यापार संगठन से समझौते”।

अन्य भूमिकाएँ

6

“विश्व व्यापार संगठन में विकसित देशों के वर्चस्व के विरुद्ध समान हितों वाले विकासशील देशों को मिलकर लड़ना होगा।”

7

★जनता — “बड़े अभियानों और जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने विश्व व्यापार संगठन के व्यापार और निवेश से संबंधित महत्त्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित किया है। यह प्रदर्शित करता है कि जनता भी न्यायसंगत वैश्वीकरण के संघर्ष में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।” (हांगकांग में डब्ल्यू.टी.ओ. के ख़िलाफ़ प्रदर्शन, 2005)

7विश्व व्यापार संगठन का परिचय दीजिए और बताइए कि विकासशील देश इससे असंतुष्ट क्यों हैं।

उत्तर देखिए

परिचय विश्व व्यापार संगठन “एक ऐसा संगठन है, जिसका ध्येय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है।” यह विकसित देशों की पहल पर शुरू हुआ। यह “अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से संबंधित नियमों को निर्धारित करता है और यह देखता है कि इन नियमों का पालन हो।” विश्व के लगभग 160 देश इसके सदस्य हैं। इसकी मूल मान्यता यह है कि “विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर सभी अवरोधक हानिकारक हैं। कोई अवरोधक नहीं होना चाहिए।”

असंतोष का कारण “यद्यपि विश्व व्यापार संगठन सभी देशों को मुक्त व्यापार की सुविधा देता है, परन्तु व्यवहार में यह देखा गया है कि विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को बरकरार रखा है। दूसरी ओर, विश्व व्यापार संगठन के नियमों ने विकासशील देशों के व्यापार अवरोधों को हटाने के लिए विवश किया है।”

कृषि का उदाहरण भारत में अधिकांश रोज़गार और जी.डी.पी. का महत्त्वपूर्ण भाग कृषि से आता है, जबकि अमेरिका में कृषि का जी.डी.पी. में हिस्सा मात्र एक प्रतिशत और कुल रोज़गार में केवल 0.5 प्रतिशत है। फिर भी अमेरिकी किसान सरकार से उत्पादन और निर्यात के लिए बहुत अधिक धन राशि पाते हैं, जिससे वे “अपने कृषि उत्पादों को असाधारण रूप से कम क़ीमत पर बेच सकते हैं” और “अधिशेष कृषि उत्पादों को दूसरे देशों के बाज़ारों में कम क़ीमत पर” बेच देते हैं — “जो इन देशों के कृषकों को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।”

इसीलिए विकासशील देश पूछते हैं ★ “हमने विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार व्यापार अवरोधकों को कम कर दिया, लेकिन आप लोगों ने… अपने किसानों को भारी धन राशि देना बरकरार रखा है… क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?”