Practise with cards
One card at a time. Think of the answer, turn the card, and say whether you knew it. A card you did not know comes back in this round; one you knew returns a few days later.
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कैसे इस्तेमाल करें — बाईं ओर के प्रश्न पर उँगली रखिए, दाईं ओर का उत्तर ढँक लीजिए, मन में उत्तर बोलिए, फिर मिलाइए। जो ग़लत हो, उसके आगे एक बिंदु लगाइए।
सेट 1 — मुद्रा और दोहरा संयोग (10 कार्ड)★★
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| ★★वस्तु विनिमय में आवश्यकताओं का दोहरा संयोग क्या है — दोनों पक्षों के बारे में परिभाषा का पहला वाक्य बताइए। | “दोनों पक्ष एक दूसरे से चीज़ें ख़रीदने और बेचने पर सहमति रखते हों।” |
| आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की परिभाषा का दूसरा वाक्य क्या कहता है — बेचने वाले की वस्तु के बारे में? | “एक व्यक्ति जो वस्तु बेचने की इच्छा रखता है, वही वस्तु दूसरा व्यक्ति ख़रीदने की भी इच्छा रखता हो।” |
| वस्तु विनिमय प्रणाली क्या है, और उसमें आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की क्या स्थिति है? | “जहाँ मुद्रा का उपयोग किये बिना वस्तुओं का विनिमय होता है” — वहाँ दोहरा संयोग अनिवार्य विशिष्टता है। |
| ★मुद्रा आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की समस्या कैसे हल करती है? | “मुद्रा महत्त्वपूर्ण मध्यवर्ती भूमिका प्रदान करके आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत को ख़त्म कर देती है।” |
| जूता निर्माता को गेहूँ के लिए अपने जूते बेचने हों और मुद्रा न हो, तो उसे कैसा किसान ढूँढ़ना पड़ता? | ऐसा किसान ढूँढ़ना जो “न केवल गेहूँ बेचना चाहता हो, बल्कि साथ में जूते भी ख़रीदना चाहता हो”। |
| मुद्रा होने पर जूता निर्माता को अपने जूते बेचने के लिए क्या करना है? | “उसे केवल अपने जूते के लिए ख़रीददार ढूँढ़ना है।” |
| ★मुद्रा को विनिमय का माध्यम क्यों कहते हैं? | “चूँकि मुद्रा विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थता का काम करती है।” |
| लोग वस्तु के बदले मुद्रा लेना क्यों पसंद करते हैं? | क्योंकि “जिस व्यक्ति के पास मुद्रा है, वह इसका विनिमय किसी भी वस्तु या सेवा ख़रीदने के लिए आसानी से कर सकता है।” |
| आज भी जहाँ मुद्रा के बिना वस्तु विनिमय होता है, उसके तीन उदाहरण बताइए। | बटाईदारी में फसल का हिस्सा · मज़दूरी के बदले अनाज · गाँव में नाई-लुहार को फसल के समय अनाज। |
| मुद्रा के सफ़र के तीन पड़ाव बताइए — शुरुआत से आज तक। | अनाज और पशु → सोना, चाँदी, ताँबे के सिक्के → करेंसी |
सेट 2 — करेंसी और माँग जमा (12 कार्ड)★★
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| आधुनिक मुद्रा में कौन-सी चीज़ें शामिल हैं? | करेंसी — काग़ज़ के नोट और सिक्के |
| ★आधुनिक मुद्रा (नोट और सिक्के) अनाज या सोने-चाँदी से किस बात में अलग है? | “आधुनिक मुद्रा का इस प्रकार का अपना कोई इस्तेमाल नहीं है” — न धातु का मूल्य, न अनाज की तरह उपयोग। |
| ★★नोट और सिक्कों को विनिमय के माध्यम के रूप में क्यों स्वीकार किया जाता है? | “क्योंकि किसी देश की सरकार इसे प्राधिकृत करती है।” |
| भारत में करेंसी नोट कौन जारी करता है, और किसकी तरफ़ से? | भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय सरकार की तरफ़ से। |
| भारतीय क़ानून के अनुसार, क्या रिज़र्व बैंक के अलावा कोई व्यक्ति या संस्था मुद्रा जारी कर सकती है? | नहीं — “किसी व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं है।” |
| ★भारत में क्या कोई व्यक्ति क़ानूनी तौर पर रुपयों में अदायगी लेने से मना कर सकता है? | नहीं — “कोई व्यक्ति क़ानूनी तौर पर रुपयों में अदायगी को अस्वीकार नहीं कर सकता।” |
| ★भारत के 10 रुपये के नोट पर कौन-सा वचन लिखा होता है, और किसके हस्ताक्षर होते हैं? | “मैं धारक को दस रुपये अदा करने का वचन देता हूँ” + RBI गवर्नर के हस्ताक्षर। |
| लोग अपना पैसा बैंक में क्यों रखते हैं? तीन कारण बताइए। | धन सुरक्षित रहता है · सूद मिलता है · ज़रूरत पर निकालने की सुविधा |
| ★★बैंक खातों में जमा धन को ‘माँग जमा’ क्यों कहा जाता है? | “चूँकि बैंक खातों में जमा धन को माँग के ज़रिए निकाला जा सकता है, इसलिए इस जमा को ‘माँग जमा’ कहा जाता है।” |
| ★बैंक के लेन-देन में चैक क्या होता है? | “वह काग़ज़ है, जो बैंक को किसी व्यक्ति के खाते से चैक पर लिखे नाम के किसी दूसरे व्यक्ति को एक ख़ास रकम का भुगतान करने का आदेश देता है।” |
| चैक से भुगतान करने पर लेन-देन में नकद की क्या भूमिका रहती है? | “यह लेन-देन बिना नकद की अदायगी के पूरा हो जाता है।” |
| ★माँग जमा को भी करेंसी की तरह मुद्रा क्यों समझा जाता है? | “चूँकि माँग जमाओं को करेंसी के साथ-साथ व्यापक स्तर पर भुगतान का माध्यम स्वीकार किया जाता है।” |
सलीम-प्रेम वाला उत्तर — सलीम के खाते में शेष घटता है और प्रेम के खाते में बढ़ता है।
सेट 3 — बैंकों की ऋण गतिविधियाँ (5 कार्ड)★
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| ★★भारत में बैंक जमा राशि का कितना हिस्सा नकद के रूप में अपने पास रखते हैं? | केवल 15 प्रतिशत। |
| बैंक जमा का केवल 15 प्रतिशत ही नकद क्यों रखते हैं? | “क्योंकि किसी एक विशेष दिन में, केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने के लिए आते हैं।” |
| नकद रखने के बाद बैंक जमा राशि के बाक़ी हिस्से का क्या करते हैं? | “जमा राशि के एक बड़े भाग को ऋण देने के लिए इस्तेमाल करते हैं।” |
| ★★जमाकर्ताओं और कर्ज़दारों के बीच बैंक की क्या भूमिका होती है? | “बैंक जिनके पास अतिरिक्त राशि है (जमाकर्ता) एवं जिन्हें राशि की ज़रूरत है (कर्ज़दार) के बीच मध्यस्थता का काम करते हैं।” |
| ★बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत क्या है? | “कर्ज़दारों से लिए गए ब्याज और जमाकर्ताओं को दिये गये ब्याज के बीच का अंतर।” |
सेट 4 — साख की दो स्थितियाँ (12 कार्ड)★★
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| ★ऋण (उधार) की परिभाषा क्या है? | “एक सहमति जहाँ साहूकार कर्ज़दार को धन, वस्तुएँ या सेवाएँ मुहैया कराता है और बदले में भविष्य में भुगतान करने का वादा लेता है।” |
| जूते बनाने वाले सलीम को त्यौहार के मौसम में कितने जूतों का ऑर्डर मिला, और कितने समय में पूरा करना था? | 3000 जोड़ी जूते, एक महीने के अंदर। |
| जूतों का बड़ा ऑर्डर पूरा करने के लिए सलीम को किन दो चीज़ों की ज़रूरत थी? | अतिरिक्त मज़दूर (सिलाई और चिपकाने के लिए) और कच्चा माल। |
| जूतों का ऑर्डर पूरा करने के लिए सलीम ने किन दो स्रोतों से ऋण लिया, और कैसे? | (1) चमड़ा व्यापारी — चमड़ा अभी, भुगतान बाद में; (2) बड़ा व्यापारी — 1000 जूतों का अग्रिम भुगतान। |
| ★ऋण लेने के बाद सलीम के साथ क्या हुआ — ऑर्डर, लाभ और उधार के बारे में बताइए। | जूते पहुँचाने में कामयाब · अच्छा-ख़ासा लाभ · उधार की अदायगी भी। |
| ★सलीम की कहानी से ऋण की भूमिका के बारे में कौन-सा निष्कर्ष निकलता है? | “इस प्रकार ऋण एक महत्त्वपूर्ण तथा सकारात्मक भूमिका अदा करता है।” |
| किसान स्वप्ना के पास कितनी ज़मीन थी, और उसने कौन-सी फसल उगाई? | 3 एकड़; मूँगफली। |
| स्वप्ना की मूँगफली की फसल क्यों बर्बाद हुई? | कीटनाशकों के हमले से। |
| स्वप्ना के ऋण का अंत क्या हुआ — कर्ज़ की रकम और उसकी ज़मीन के बारे में बताइए। | कर्ज़ साल के अंदर बड़ी रकम बन गया; अगले साल दुबारा उधार; अंतत: ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा। |
| ★★कर्ज़-जाल क्या होता है? स्वप्ना के उदाहरण से समझाइए। | “ऋण ने स्वप्ना की कमाई को बढ़ाने के बजाय उसकी स्थिति बदतर कर दी… ऋण कर्ज़दार को ऐसी परिस्थिति में धकेल देता है, जहाँ से बाहर निकलना काफ़ी कष्टदायक होता है।” |
| ★★ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह किन बातों पर निर्भर करता है? ‘मुद्रा और साख’ अध्याय का केंद्रीय वाक्य लिखिए। | “ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थिति के ख़तरों और हानि होने पर प्राप्त सहयोग की संभावना पर निर्भर करता है।” |
| ★स्वप्ना की स्थिति को जोखिम भरा बनाने वाले तीन कारण कौन-से थे? | कीटनाशक दवाइयाँ · साहूकार की भूमिका · मौसम |
ग्रामीण साख की बात — आगत ख़रीदने और फसल बिकने के बीच 3-4 महीने का अंतराल; और “उधार की अदायगी मुख्यत: फसल की कमाई पर निर्भर है।”
सेट 5 — ऋण की शर्तें (8 कार्ड)★
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| ★ऋण की शर्तों में कौन-सी चार बातें आती हैं? | ब्याज दर · समर्थक ऋणाधार · आवश्यक कागज़ात · भुगतान के तरीक़े |
| ★★ऋण के संदर्भ में समर्थक ऋणाधार की परिभाषा क्या है? | “ऐसी संपत्ति है, जिसका मालिक कर्ज़दार है… और इसका इस्तेमाल वह उधारदाता को गारंटी देने के रूप में करता है, जब तक कि ऋण का भुगतान नहीं हो जाता।” |
| समर्थक ऋणाधार के रूप में किन-किन संपत्तियों के उदाहरण दिए गए हैं? | भूमि · इमारत · गाड़ी · पशु · बैंकों में पूँजी |
| ★अगर कर्ज़दार उधार वापस न कर पाए, तो उधारदाता को क्या अधिकार होता है? | “उधारदाता को भुगतान प्राप्ति के लिए संपत्ति या समर्थक ऋणाधार बेचने का अधिकार होता है।” |
| मेघा ने आवास ऋण कितना लिया, और कितने साल के लिए? | 5 लाख रुपये, 10 साल। |
| मेघा के आवास ऋण की ब्याज दर क्या थी, और अदायगी कैसे होनी थी? | 12 प्रतिशत वार्षिक; मासिक किस्तों में। |
| मेघा के आवास ऋण के लिए कौन-से कागज़ात लगे, और ऋणाधार क्या था? | नौकरी और वेतन संबंधी रिकार्ड; ऋणाधार — घर के सभी कागज़। |
| ऋण की आसान शर्तों का मतलब क्या है — ब्याज दर, अदायगी, ऋणाधार और कागज़ात के बारे में बताइए। | निम्न ब्याज दर, आसान अदायगी की शर्तें, कम समर्थक ऋणाधार एवं आवश्यक कागज़ात। |
सेट 6 — सोनपुर गाँव (10 कार्ड)★★
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| सोनपुर गाँव के किसान श्यामल के पास कितनी ज़मीन है? | 1.5 एकड़ |
| ★सोनपुर के श्यामल पहले महाजन को कितना ब्याज देते थे? | 5 प्रतिशत मासिक (60 प्रतिशत वार्षिक) |
| सोनपुर के श्यामल अब ऋण किससे लेते हैं, और कितने ब्याज पर? | गाँव के एक व्यापारी से, 3 प्रतिशत मासिक। |
| ★सोनपुर में श्यामल को ऋण देते समय व्यापारी उससे क्या वादा लेता है? | कि वह अपनी फसल उसी को बेचेगा। |
| श्यामल से फसल उसी को बेचने का वादा लेकर व्यापारी को क्या फ़ायदा? | “फसल की क़ीमतें फसल काटते समय कम होती हैं इसलिए वह कम क़ीमत पर ख़रीदकर बाद में क़ीमत बढ़ने पर बेचकर भारी मुनाफ़ा कमाता है।” |
| सोनपुर गाँव के किसान अरुण के पास कितनी ज़मीन है? | 7 एकड़ |
| ★सोनपुर के अरुण बैंक से लिए ऋण पर कितना ब्याज देते हैं, और कितने समय में लौटा सकते हैं? | 8.5 प्रतिशत वार्षिक; अगले तीन वर्षों में कभी भी लौटा सकता है। |
| सोनपुर की रमा कौन है, और वह ऋण किससे और कितने ब्याज पर लेती है? | भूमिहीन कृषि मज़दूर; अपने भूस्वामी-नियोक्ता से, 5 प्रतिशत मासिक पर। |
| सोनपुर की रमा अपना कर्ज़ कैसे चुकाती है, और अभी कितना बाक़ी है? | भूस्वामी के यहाँ काम करके; अभी ₹5,000 देने हैं। |
| सोनपुर की कृषक सहकारी समिति के कितने सदस्य हैं, और वह बैंक से बड़ा ऋण कैसे लेती है? | 2300 किसान सदस्य; वह जमा को ऋणाधार मानकर बैंक से बड़ा ऋण लेती है। |
★★एक ही नियम — “जिसके पास पहले से है, उसे सस्ता कर्ज़ मिलता है। जिसके पास नहीं है, उसे महँगा।” रमा का ऋण समय के साथ — बढ़ जाएगा। अरुण बैंक से ले पाता है क्योंकि “बैंक समर्थक ऋणाधार की माँग करते हैं जो कि हर किसी के पास नहीं होती।”
सेट 7 — औपचारिक और अनौपचारिक साख (12 कार्ड)★★
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| ऋण के औपचारिक स्रोत कौन-से हैं? | बैंक और सहकारी समितियाँ |
| ऋण के अनौपचारिक स्रोत कौन-से हैं? | साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार, दोस्त |
| ★2019 में ग्रामीण भारत के कुल ऋण में व्यावसायिक बैंकों का हिस्सा कितना था? | 51 प्रतिशत |
| ★2019 में ग्रामीण भारत के कुल ऋण में साहूकारों का हिस्सा कितना था? | 23 प्रतिशत |
| 2019 में ग्रामीण भारत के कुल ऋण में सहकारी समितियों/बैंकों का हिस्सा कितना था? | 10 प्रतिशत |
| 2019 में ग्रामीण भारत के कुल ऋण में रिश्तेदारों एवं मित्रों का हिस्सा कितना था? | 7 प्रतिशत |
| 2019 में ग्रामीण भारत के कुल ऋण में अन्य औपचारिक एजेंसियों, अन्य अनौपचारिक एजेंसियों और ज़मींदारों का हिस्सा क्रम से कितना था? | 5% / 3% / 1% |
| 2019 में ग्रामीण भारत के कुल ऋण में औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों का हिस्सा क्रम से कितना था? | 66 प्रतिशत / 34 प्रतिशत |
| ★बैंकों की निगरानी में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का पहला काम क्या है? | नज़र रखना कि बैंक वास्तव में नकद शेष बनाए हुए हैं। |
| ★बैंकों की निगरानी में RBI का दूसरा काम क्या है — ऋण किन-किन को मिल रहा है, इस बारे में? | कि बैंक “केवल लाभ अर्जित करने वाले व्यवसायियों और व्यापारियों को ही ऋण मुहैया नहीं करा रहे, बल्कि छोटे किसानों, छोटे उद्योगों, छोटे कर्ज़दारों को भी” दे रहे हैं। |
| बैंकों की निगरानी में RBI का तीसरा काम क्या है — बैंकों को RBI को क्या बताना पड़ता है? | बैंकों को आर.बी.आई. को बताना पड़ता है कि वे कितना और किनको ऋण दे रहे हैं और ब्याज की दरें क्या हैं। |
| ★★ऋण के अनौपचारिक स्रोतों की सबसे बड़ी कमी क्या है? | “देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है… उन्हें नाजायज़ तरीक़ों से अपने पैसे वापस लेने से रोकने वाला कोई नहीं है।” |
ऊँची लागत के तीन नुक़सान
- “कर्ज़दार की आय का अधिकतर हिस्सा ऋण की अदायगी में ही ख़र्च हो जाता है” (श्यामल)
- “कर्ज़ वापस करने की रकम कर्ज़दार की आय से भी अधिक हो जाती है… व्यक्ति ऋण-जाल में फँस जाता है” (रमा)
- “जो लोग कर्ज़ लेकर अपना उद्यम शुरू करना चाहते हैं, वे ऋण की अधिक लागत को देख कर पीछे हट जाएँ”
सेट 8 — किसे क्या मिलता है (6 कार्ड)★★
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| शहरी भारत में गरीब परिवारों को औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों से ऋण का कितना-कितना हिस्सा मिलता है? | 46% / 54% |
| शहरी भारत में कम संपत्ति वाले परिवारों को औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों से ऋण का कितना-कितना हिस्सा मिलता है? | 62% / 38% |
| शहरी भारत में समृद्ध परिवारों को औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों से ऋण का कितना-कितना हिस्सा मिलता है? | 73% / 27% |
| ★शहरी भारत में अमीर परिवारों को औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों से ऋण का कितना-कितना हिस्सा मिलता है? | 83% / 17% |
| ★★शहरी परिवारों के औपचारिक/अनौपचारिक ऋण के आँकड़ों से क्या पता चलता है? | “अमीर परिवार औपचारिक ऋणदाताओं से सस्ता ऋण ले रहे हैं, जबकि गरीब परिवारों को कर्ज़ के लिए बहुत सारा पैसा देना पड़ता है।” |
| ★ग्रामीण परिवारों की कुल ऋण ज़रूरतों का कितना हिस्सा औपचारिक स्रोत पूरा कर पाते हैं? | ग्रामीण परिवारों की कुल ऋण ज़रूरतों का केवल 50 प्रतिशत। |
दो निष्कर्ष — (1) “बैंकों और सहकारी समितियों को अपनी गतिविधियाँ विशेषकर ग्रामीण इलाक़ों में बढ़ाने की ज़रूरत” है; (2) “यह ज़रूरी है कि औपचारिक ऋण का अधिक समान वितरण हो, ताकि गरीब परिवार भी सस्ते ऋण का फ़ायदा उठा सकें।”
सेट 9 — स्वयं सहायता समूह (10 कार्ड)★★
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| ★गरीब लोग बैंकों से ऋण क्यों नहीं ले पाते? | “ऋणाधार की अनुपलब्धता एक प्रमुख कारण है।” |
| साहूकार गरीब कर्ज़दारों को बिना ऋणाधार के ऋण क्यों दे देते हैं? | क्योंकि वे कर्ज़दारों को व्यक्तिगत स्तर पर जानते हैं। |
| बिना ऋणाधार ऋण देने पर भी साहूकार से ऋण लेना ठीक क्यों नहीं माना जाता — महाजन में क्या कमियाँ हैं? | “महाजन ब्याज की दरें बहुत ऊँची रखते हैं, लेन-देन की लिखा पढ़ी भी पूरी नहीं करते और निर्धन कर्ज़दारों को तंग करते हैं।” |
| स्वयं सहायता समूह में कितने सदस्य होते हैं, और वे कौन होते हैं? | 15-20 पड़ोसी, विशेषकर महिलाएँ। |
| स्वयं सहायता समूह में हर सदस्य कितनी बचत करता है? | प्रति व्यक्ति 25 रुपए से 100 रुपए या अधिक। |
| स्वयं सहायता समूह से कर्ज़ लेने पर ब्याज कैसा होता है — साहूकार के ब्याज की तुलना में? | साहूकार द्वारा लिए जाने वाले ब्याज से कम। |
| ★स्वयं सहायता समूह को बैंक से ऋण कब मिलता है, और किसके नाम पर? | एक या दो वर्षों की नियमित बचत के बाद; ऋण समूह के नाम पर। |
| स्वयं सहायता समूह से किन-किन कामों के लिए कर्ज़ लिया जाता है? | गिरवी ज़मीन छुड़वाने · कार्यशील पूँजी (बीज, खाद, बाँस, कपड़े) · घर बनाने · सिलाई मशीन, हथकरघा, पशु |
| स्वयं सहायता समूह के कर्ज़ से जुड़े फ़ैसले कौन लेता है, और किन बातों पर? | समूह के सदस्य स्वयं — ऋण का लक्ष्य, रकम, ब्याज दर और वापसी की अवधि। |
| ★★बैंक स्वयं सहायता समूह की निर्धन महिलाओं को बिना ऋणाधार के ऋण देने के लिए क्यों तैयार हो जाते हैं? | “एक भी सदस्य अगर ऋण वापस नहीं लौटाता तो समूह के अन्य सदस्य इस मामले को गंभीरता से लेते हैं।” |
★एक वाक्य में — यहाँ ज़मीन की जगह भरोसा गिरवी रखा जाता है। तीसरा लाभ — “समूह की नियमित बैठकों के ज़रिए लोगों को एक आम मंच मिलता है, जहाँ वह… स्वास्थ्य, पोषण और घरेलू हिंसा इत्यादि पर आपस में चर्चा कर पाती हैं।”
सेट 10 — बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक (3 कार्ड)
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक से ऋण लेने वाले ज़्यादातर लोग कौन हैं? | “ज़्यादातर महिलाएँ… समाज के गरीब तबके से।” |
| बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक से ऋण लेने वाली महिलाओं ने क्या साबित किया? | “न केवल गरीब महिलाएँ भरोसेमंद कर्ज़दार हैं, बल्कि वे विभिन्न तरह की छोटी आय वाली गतिविधियों को सफलतापूर्वक शुरू करने और चला सकने में सक्षम हैं।” |
| ★बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक के संस्थापक कौन हैं, और उन्हें कौन-सा पुरस्कार मिला? | प्रो. मोहम्मद युनूस; 2006 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार। |
★उनका कथन — “अगर गरीब लोगों को सही और उचित शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है, तो लाखों छोटे लोग अपनी लाखों छोटी-छोटी गतिविधियों के जरिए विकास का सबसे बड़ा चमत्कार कर सकते हैं।”
सेट 11 — अनिवार्य आँकड़े (1 कार्ड)
| आँकड़ा | किसका |
|---|---|
| सोनपुर में 1.5 एकड़ ज़मीन वाले किस किसान का ब्याज 60% वार्षिक से घटकर 36% हुआ? | श्यामल |
सेट 12 — शब्दावली (1 कार्ड)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| कार्यशील पूँजी क्या होती है? | उत्पादन के रोज़मर्रा के ख़र्चों के लिए चाहिए धन। |
सेट 13 — पाँच सूत्र
| सूत्र | क्या |
|---|---|
| “दोहरा संयोग = दोनों को दोनों चाहिए” — यह सूत्र किस समस्या की याद दिलाता है? | वस्तु विनिमय की समस्या |
| “15 नकद, 85 कर्ज़” — यह सूत्र किसके काम की याद दिलाता है? | बैंक का काम |
| “सलीम बनाम स्वप्ना” — यह सूत्र ऋण के किस पहलू की याद दिलाता है? | ऋण की दो स्थितियाँ |
| “ब्याज · ऋणाधार · कागज़ · अदायगी” — यह सूत्र ऋण की किस बात की याद दिलाता है? | ऋण की चार शर्तें |
| “83 बनाम 46” — यह सूत्र किस तुलना की याद दिलाता है? | अमीर बनाम गरीब — औपचारिक ऋण |
आख़िरी बात — इस अध्याय में सबसे ज़्यादा भूली जाने वाली दो चीज़ें हैं: समर्थक ऋणाधार की पूरी परिभाषा और सोनपुर की ब्याज दरें (8.5% बनाम 60%)। और यह वाक्य कभी मत भूलिए — “ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थिति के ख़तरों और हानि होने पर प्राप्त सहयोग की संभावना पर निर्भर करता है।”
सुधार, 7 अक्टूबर 2026 — ग्रामीण बैंक की शुरुआत और उसकी सदस्य-संख्या वाले दो कार्ड हटा दिए गए हैं। हिंदी पाठ्यपुस्तक में “1970 में” और “9 लाख सदस्य” छपा है, जबकि अंग्रेज़ी पाठ्यपुस्तक में “1970 के दशक में” और “over 9 million” (यानी 90 लाख से अधिक) है। जो आँकड़ा दोनों संस्करणों में एक जैसा नहीं है, उसे रटवाना ठीक नहीं।