अध्याय 11आधारभूत लोकतंत्र — भाग 2: ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार

शिक्षक संदर्शिका18 मिनटस्रोत जाँचे गए

! यह फ़ाइल केवल शिक्षक के लिए है

यह क्या पढ़ाना है नहीं बताती — वह 01-Lesson-Plan.md का काम है। यह बताती है कि पुस्तक ऐसा क्यों कहती है, ताकि आप कक्षा में उस प्रश्न का सामना कर सकें जो पाठ्यपुस्तक में नहीं है।

0. सबसे पहले — इस अध्याय के दो असली भेद

यह अध्याय छोटा है — केवल 10 पृष्ठ — और उसमें याद करने को बहुत कुछ नहीं है।

पर उसमें दो भेद हैं, और उन्हीं पर सब कुछ टिका है।

!! भेद 1 — दो पिरामिड

अध्याय 10 में एक पिरामिड था (चित्र 10.4) — केंद्र, राज्य, स्थानीय। अध्याय 11 में भी एक पिरामिड है (चित्र 11.1) — जिला, खंड, ग्राम।

दोनों तीन-स्तरीय हैं। दोनों ‘सरकार के’ हैं। और दोनों एक-दूसरे के अगले अध्याय में हैं।

परिणाम: परीक्षा में बच्चा लिखता है — “पंचायती राज के तीन स्तर हैं: केंद्र, राज्य और स्थानीय।” यह इस अध्याय की सबसे आम भूल है।

★रोकने का तरीक़ा — एक वाक्य, तीन बार: “पिछला पिरामिड पूरे देश का था। यह पिरामिड उसके सबसे नीचे वाले हिस्से का है।”

!! भेद 2 — ग्राम सभा और ग्राम पंचायत

ग्राम सभाग्राम पंचायत
गाँव के सभी वयस्क मतदाताचुने हुए सदस्य
चुनती हैचुनी जाती है
प्रत्यक्ष लोकतंत्रप्रतिनिधि लोकतंत्र

★एक वाक्य में: ग्राम सभा चुनती है; ग्राम पंचायत चुनी जाती है।

★दोनों भेद बोर्ड के एक कोने में लिखकर चारों कालांश टँगे रहने दीजिए। यही इस अध्याय का पूरा शिक्षण-उपकरण है।

1. अध्याय की शुरुआत अध्याय 10 से होनी चाहिए, न कि गाँधी के उद्धरण से★

पुस्तक स्वयं अपना पहला वाक्य इसी जोड़ से शुरू करती है:

“आइए, अब देखें कि सरकार स्थानीय स्तर पर किस प्रकार से कार्य करती है।”

और अध्याय 10 ने पृष्ठ 160 पर वादा किया था:

”…जैसे कि पृष्ठ 155 पर चित्र 10.4 में दिखाए गए पिरामिड का आधार है…” “भारतीय लोकतंत्र की अन्य विशेषताओं का अध्ययन हम आगे के दो अध्यायों में करेंगे।”

★इसलिए कालांश 1 की पहली चार मिनट अध्याय 10 का पिरामिड बोर्ड पर बनाने और उसके सबसे नीचे वाले हिस्से पर घेरा लगाने में लगाइए।

इसके बिना बच्चों को पता ही नहीं चलता कि वे कहाँ उतर रहे हैं — और तब दोनों पिरामिड मिलना लगभग तय है।

2. लक्ष्मणपुर — कहानी नहीं, एक प्रश्न-यंत्र★★

पुस्तक एक काल्पनिक गाँव देती है, पर उसका उद्देश्य कहानी सुनाना नहीं है।

वह गाँव तीन आवश्यकताएँ देता है, फिर चार प्रश्न पूछता है, और चौथा प्रश्न पूरे अध्याय का द्वार खोल देता है:

“क्या ऐसी प्रत्येक समस्याओं के लिए गाँव के लोग राज्य या राष्ट्र की राजधानी जा सकते हैं?”

★पढ़ाने का सही क्रम

1. गाँव का चित्र बनाइए — 200 घर, लगभग 700 लोग, अधिकांश किसान। 2. आवश्यकताएँ कक्षा से निकलवाइए, पढ़कर मत सुनाइए: “ऐसे गाँव को क्या-क्या चाहिए होगा?” 3. फिर पुस्तक की तीनों से मिलाइए। 4. और तब वह चौथा प्रश्न पूछिए। 5. ‘पंचायत’ शब्द तभी दीजिए, पहले नहीं।

! शब्द पहले देने पर यह पूरा क्रम बेकार हो जाता है — क्योंकि तब उत्तर पहले आ जाता है और प्रश्न बाद में।

और एक जोड़ जो कक्षा में बहुत अच्छा लगता है★

अध्याय 10 की बल्ब वाली उपमा (बल्ब → मिस्त्री → बिजली विभाग) और यह प्रश्न — दोनों एक ही बात कहते हैं:

समस्या वहीं हल होनी चाहिए जो उसके सबसे निकट है।

★यह जोड़ बनाइए। इसमें तीस सेकंड लगते हैं।

3. पुस्तक ने प्रश्न पहले रखे, उत्तर एक पृष्ठ बाद दिए★

यह इस अध्याय की सबसे साफ़-सुथरी रचना है, और उसे दिखाना चाहिए —

लक्ष्मणपुर की आवश्यकता (पृ. 164)पंचायत का कार्य (पृ. 165)
खेतों के लिए पानीजल संसाधनों का प्रबंधन
खराब हुई मुख्य सड़कसड़कों का रख-रखाव
प्राथमिक विद्यालयशिक्षा

और इससे भी आगे —

लक्ष्मणपुर की सड़क वाली समस्याउसका पूरा उत्तर (पृ. 169)
“भारी वर्षा से खराब हुई मुख्य सड़क”प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना — “बारहमासी सड़कों” के लिए

★★‘बारहमासी’ शब्द पर एक क्षण रुकिए — यानी ऐसी सड़क जो बरसात में भी चले। वही तो लक्ष्मणपुर की समस्या थी।

यह वृत्त कालांश 4 में पूरा कीजिए और कक्षा से कहिए: “याद है, पहले दिन यह समस्या थी?”

4. ग्राम सभा — और वह बात जो पुस्तक नहीं कहती★★

पुस्तक की परिभाषा को शब्दश: पढ़िए:

”…जो कि मतदाता के रूप में नामांकित गाँव (या आस-पास के गाँवों) के वयस्कों का समूह होता है।”

बहुत से पाठक इसे ‘गाँव के सब लोग’ पढ़ लेते हैं। पर परिभाषा सँकरी है —

ग्राम सभा में हैंनहीं हैं
वे वयस्क जो मतदाता के रूप में नामांकित हैंबच्चे

★★और यहीं से अध्याय का सबसे सुंदर जोड़ बनता है

यदि ग्राम सभा में केवल वयस्क हैं, तो बच्चों की बात कौन सुनेगा?

और उत्तर अगला ही खंड है — बाल सभा और बाल पंचायत।

★कक्षा में यह प्रश्न पूछिए, और फिर पृष्ठ 167 पर जाइए। पुस्तक ने यह जोड़ नहीं लिखा, पर वह वहीं है।

पढ़ाने का सबसे अच्छा तरीक़ा — चित्र से

पृष्ठ 165 पर एक चित्र है: बरामदे में कुर्सियों पर पाँच लोग, और सामने ज़मीन पर बहुत से गाँववाले।

पूछिए: “कुर्सी पर कौन बैठे हैं और ज़मीन पर कौन?” और फिर बताइए — ज़मीन पर बैठे सब लोग मिलकर ग्राम सभा हैं।

यह एक चित्र पूरी परिभाषा से बेहतर काम करता है।

5. दोनों प्रकार का लोकतंत्र, एक ही गाँव में★

अध्याय 10 ने प्रत्यक्ष और प्रतिनिधि लोकतंत्र को दो अलग प्रकार बताया था — पिकनिक का मतदान (प्रत्यक्ष) और कक्षा-मॉनीटर (प्रतिनिधि)।

अध्याय 11 दिखाता है कि एक ही गाँव में दोनों एक साथ चलते हैं।

और पुस्तक यह बात अंत में स्वयं लिख देती है (पृ. 171):

“पंचायती राज व्यवस्था में लोकतंत्र जनता द्वारा प्रत्यक्ष भागीदारी और उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों, दोनों द्वारा कार्य करता है।”

★★यह वाक्य अध्याय का वैचारिक शिखर है, और वह ‘आगे बढ़ने से पहले’ के तीन बिंदुओं में छिपा रहता है — जहाँ प्राय: कोई नहीं रुकता।

कालांश 4 के अंत में बोर्ड की उस तालिका की ओर लौटिए जो कालांश 2 में बनी थी, और कहिए: “किताब ने वही बात यहाँ लिख दी है।”

6. तीनों सरपंच — पुस्तक का चुप निष्कर्ष★

पुस्तक तीन कहानियाँ देती है और कोई साझा निष्कर्ष नहीं लिखती। पर तीनों को एक साथ रखकर उसने वह कह दिया है।

कौनकहाँ से आए
दयानेश्वर कांबलेकिन्नर समुदाय से — और छह उम्मीदवारों को हराया
वंदना बहादुर मैदाजनजातीय समुदाय की महिला — और पितृसत्तात्मक मान्यताओं के विरुद्ध
पोपटराव बागुजी पवारएक सूखाग्रस्त, पिछड़े गाँव से

★कक्षा में केवल एक प्रश्न पूछिए: “इन तीनों में क्या समान है?”

उत्तर कक्षा से आने दीजिए। यह प्रश्न लगभग हमेशा अच्छा उत्तर लाता है।

! और उत्तर को एक ही वाक्य में मत बाँधिए। कई सही उत्तर हैं।

एक भाषिक बात, जो शिक्षक को जाननी चाहिएध्यान

दयानेश्वर कांबले के बारे में प्रकाशित समाचार-विवरणों में स्त्रीलिंग रूप प्रयुक्त हुए हैं, और वे स्थानीय रूप से ‘माउली’ नाम से जानी जाती हैं; पुस्तक के हिंदी वाक्य में पुल्लिंग क्रिया-रूप है।

! यह कक्षा में उठाने का विषय नहीं है — और उसे उठाना उस व्यक्ति की कहानी को उसकी उपलब्धि से हटाकर उसकी पहचान पर ले जाना होगा, जो इस पाठ का उद्देश्य नहीं है।

★पर यदि कोई विद्यार्थी बाहर से पढ़कर पूछे, तो सीधा और सम्मानजनक उत्तर यही है: “किसी व्यक्ति की पहचान वही होती है जो वह स्वयं बताए।” और फिर बात वापस उस काम पर ले आइए जो उन्होंने अपने गाँव के लिए किया।

और अध्याय 9 से एक जोड़★

अध्याय 9 — हलमाअध्याय 11 — हिवरे बाजार
भील समुदाय, झाबुआअहमदनगर, महाराष्ट्र
जल-संचयन, हज़ारों पेड़जल-संचयन, लाखों पेड़
कोई पारिश्रमिक नहींसरपंच का नेतृत्व और ग्रामवासियों का सहयोग
पद्मश्री 2019 (महेश शर्मा)पद्मश्री 2020 (पोपटराव पवार)

★यह जोड़ बच्चों को बहुत अच्छा लगता है, और उसमें एक मिनट लगता है।

7. बाल हितैषी पंचायत — इस अध्याय का सबसे अच्छा कालांश★★

यह अकेला खंड है जिसमें पुस्तक बच्चों को विषय नहीं, कर्ता बनाकर दिखाती है।

और वह इसे एक बहुत सीधी पंक्ति से खोलती है:

“पंचायतों को सभी ग्रामवासियों की बात सुननी होती है — जिसमें बच्चे भी सम्मिलित हैं।”

तीनों उदाहरण एक तालिका में

कहाँक्या किया
महाराष्ट्रबाल-श्रम और बाल-विवाह समाप्त करने पर काम; अभिभावकों को समझाना कि बच्चों को पुन: विद्यालय भेजें, बालिकाओं को पढ़ाएँ, और पढ़ने की आयु में विवाह न करें
पश्चिमी सिक्किमसांगखू राधू खांडू — विद्यालयों के परिसर की दीवारें और रसोईघर (मध्याह्न भोजन के लिए) → बाल हितैषी घोषित
राजस्थानबंकर रॉय की ‘बेयरफुट कॉलेज’ की ‘बाल संसद’ — 8–14 वर्ष, रात्रि विद्यालय, संसद जैसे चुनाव, मंत्रिमंडल, 2001 का पुरस्कार

और पृष्ठ 169 की गतिविधि — इसे सचमुच कीजिए★★

“कक्षा की एक गतिविधि के रूप में चार अथवा पाँच विद्यार्थी मिलकर एक बाल पंचायत का गठन करें और कक्षा के शेष विद्यार्थी स्वयं को ग्रामवासी मान लें। यह ग्राम सभा किन विषयों पर विचार-विमर्श करेगी?”

★ध्यान दीजिए कि पुस्तक ने यहाँ ‘ग्राम सभा’ शब्द का प्रयोग किया है — यानी बाक़ी पूरी कक्षा ग्राम सभा है।

यह वही भेद है जो कालांश 2 में सिखाया गया था, और यहाँ वह गतिविधि के भीतर लौट आता है। कक्षा में यह ज़ोर से कहिए — “देखो, अब हम खुद वही कर रहे हैं जो हमने पढ़ा था।”

! समय पर नज़र रखिए। 12 मिनट पर्याप्त हैं, और यह गतिविधि बहुत आसानी से पूरा कालांश खा जाती है।

8. पंचायत समिति में एक वाक्य, जो प्राय: छूट जाता है★

“इन संस्थाओं के सदस्य स्थानीय लोगों द्वारा चुने जाते हैं, परंतु उसमें क्षेत्र के गाँवों के सरपंच और राज्य विधान सभा के स्थानीय सदस्य जैसे अन्य सदस्य भी हो सकते हैं।” (पृ. 169)

यानी पंचायत समिति में तीन तरह के लोग हो सकते हैं —

  1. सीधे चुने हुए सदस्य
  2. गाँवों के सरपंच
  3. विधान सभा के स्थानीय सदस्य (यानी विधायक — अध्याय 10 का शब्द)

★★इसका अर्थ बहुत बड़ा है

सरकार के अलग-अलग स्तर एक-दूसरे से कटे हुए नहीं हैं — वे आपस में जुड़े हुए हैं।

एक ही व्यक्ति दो स्तरों में बैठ सकता है — सरपंच अपनी ग्राम पंचायत में भी, और पंचायत समिति में भी।

★यह अध्याय 10 के ‘शक्तियों का पृथक्करण’ से भिन्न बात है, और उसे उलझाइए मत। वहाँ बात अंगों की थी; यहाँ बात स्तरों की है।

9. आरक्षण — तीन बातें एक साथ पढ़ाइए★

पुस्तक तीन जगह, तीन अलग रूपों में, एक ही बात कहती है — और वे तीनों अलग-अलग पढ़ाने पर आधी रह जाती हैं।

कहाँक्या कहा
पृ. 165“गत वर्षों में अधिक से अधिक महिलाएँ सरपंच बनी हैं।”
पृ. 166वंदना बहादुर मैदा की पूरी कहानी
पृ. 169“इन संस्थाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रखने का भी प्रावधान है।”

★कालांश 4 में तीनों को एक साथ बोर्ड पर रखिए और कहिए: “ये तीन अलग बातें नहीं हैं। ये एक ही कहानी के तीन हिस्से हैं — एक नियम, एक आँकड़ा, और एक व्यक्ति।”

! और यह भी ध्यान दिलाइए कि पुस्तक कहती है “सभी तीनों स्तरों पर” — यानी यह प्रावधान केवल ग्राम पंचायत पर नहीं है।

10. अर्थशास्त्र वाला बॉक्स — क्या कहना है और क्या नहीं★

पुस्तक एक फटे काग़ज़ की तरह छपे बॉक्स में कौटिल्य का प्रशासनिक ढाँचा देती है:

इकाईकितने गाँवों पर
संग्रहण10
करवाटिका100
द्रोणमुख400
स्थानीय800

और फिर पूछती है — “आधुनिक भाषा में हम उक्त चार प्रवर्गों को क्या नाम देंगे? क्या यह आश्चर्य की बात नहीं है कि बहुत पहले इसी प्रकार की संरचना के बारे में सोचा गया था?”

!! यहाँ शिक्षक के लिए एक स्पष्ट सीमा-रेखा है

पुस्तक समानता दिखा रही है। वह उद्गम का दावा नहीं कर रही।

यह मत कहिए कि “आज की पंचायती राज व्यवस्था अर्थशास्त्र से निकली है।” कहिए: “दो हज़ार साल पहले भी लोग इसी तरह सोच रहे थे — गाँवों के समूह पर एक केंद्र।”

यह भेद छोटा दिखता है, पर वह इतिहास पढ़ाने का पूरा तरीक़ा बदल देता है।

! और दो बातें, जिन्हें कक्षा में नहीं उठाना है, पर शिक्षक को जानना चाहिए: (1) ‘करवाटिका’ के लिए कुछ प्रचलित अनुवादों में 200 गाँव मिलते हैं, 100 नहीं; (2) अर्थशास्त्र की तिथि और एकल लेखकत्व पर विद्वानों में वास्तविक मतभेद है। (विवरण 10-Verification-Log.md में।)

11. दस प्रश्न जो कक्षा में पूछे जाएँगे — और उनके उत्तर

#प्रश्नउत्तर
1“ग्राम सभा और ग्राम पंचायत में क्या फ़र्क़ है?”ग्राम सभा = सभी वयस्क मतदाता · ग्राम पंचायत = चुने हुए सदस्य। सभा चुनती है; पंचायत चुनी जाती है।
2“पंचायती राज के तीन स्तर क्या केंद्र, राज्य और स्थानीय हैं?”नहीं। वे ग्राम, खंड और जिला हैं। केंद्र/राज्य/स्थानीय पिछले अध्याय के थे।
3“सरपंच और प्रधान में क्या अंतर है?”कोई नहीं — एक ही पद के दो नाम।
4“एक ही स्तर के तीन-तीन नाम क्यों हैं?”क्योंकि इन संस्थानों पर राज्यों का अधिकार है — पर लक्ष्य समान हैं (पृ. 170)।
5“क्या बच्चे ग्राम सभा में जा सकते हैं?”★बहुत अच्छा प्रश्न। ग्राम सभा वयस्क मतदाताओं की है — और इसीलिए बाल सभा तथा बाल पंचायत की अलग आवश्यकता पड़ी।
6“क्या सरपंच सबसे बड़ा अधिकारी होता है?”पुस्तक ऐसा नहीं कहती। वह ग्राम पंचायत का प्रमुख या अध्यक्ष है। सचिव और पटवारी नियुक्त होते हैं, चुने नहीं जाते।
7“पटवारी और सचिव में क्या फ़र्क़ है?”सचिव = बैठक और अभिलेख · पटवारी = भू-अभिलेख (और कई जगह पुराने मानचित्र)।
8“क्या हमारे विद्यालय में भी बाल पंचायत बन सकती है?”हाँ — और पुस्तक पृष्ठ 169 पर ठीक यही गतिविधि देती है।
9“आरक्षण केवल ग्राम पंचायत में है?”नहीं — पुस्तक कहती है “सभी तीनों स्तरों पर”।
10“क्या अर्थशास्त्र से ही आज की पंचायत बनी?”पुस्तक ऐसा नहीं कहती। वह केवल समानता दिखाती है।

12. पिछले अध्यायों से पाँच कड़ियाँ — इन्हें जोड़िए

कड़ीकहाँ
★★पिरामिड का आधारअध्याय 10, चित्र 10.4 और पृ. 160 → पूरा अध्याय 11
★प्रत्यक्ष ↔ प्रतिनिधि लोकतंत्रअध्याय 10, पृ. 160 → ग्राम सभा ↔ ग्राम पंचायत
विधायकअध्याय 10, पृ. 159 → पंचायत समिति के सदस्य (पृ. 169)
जल-संचयन और पद्मश्रीअध्याय 9 — हलमा, 2019 ↔ अध्याय 11 — हिवरे बाजार, 2020
ऐतिहासिक स्रोतअध्याय 4 ↔ पटवारी के पीढ़ियों पुराने मानचित्र (पृ. 167)

13. यदि आपके पास केवल दस मिनट हैं

इस अध्याय को पढ़ाने से पहले केवल ये पाँच चीज़ें अपने मन में बिठा लीजिए —

  1. ★★बोर्ड पर दो चीज़ें, पहले दिन: दोनों पिरामिड साथ-साथ, और ग्राम सभा ↔ ग्राम पंचायत वाली तालिका। चारों कालांश टँगी रहें।
  2. लक्ष्मणपुर की आवश्यकताएँ कक्षा से निकलवाइए, और ‘पंचायत’ शब्द बाद में दीजिए।
  3. पृष्ठ 165 का चित्र दिखाकर पूछिए — “कुर्सी पर कौन, ज़मीन पर कौन?” यह एक चित्र पूरी परिभाषा से बेहतर काम करता है।
  4. पृष्ठ 169 की बाल पंचायत वाली गतिविधि सचमुच कीजिए — और यह ज़रूर कहिए कि बाक़ी कक्षा ‘ग्राम सभा’ है।
  5. कालांश 4 के अंत में उस तालिका की ओर लौटिए, और पृष्ठ 171 का दूसरा बिंदु पढ़िए।

! और एक अंतिम बात:

इस अध्याय में जोड़ने को बहुत कुछ है — संवैधानिक अनुच्छेद, आरक्षण का इतिहास, अर्थशास्त्र की तिथि-बहस, गाँवों की गणना। और लगभग वह सब जोड़ना एक भूल होगी।

यदि कक्षा वर्ष के अंत तक ये दो बातें याद रखे — (1) दो पिरामिड अलग हैं, और (2) ग्राम सभा चुनती है, ग्राम पंचायत चुनी जाती है — तो यह अध्याय पूरी तरह सफल है।