कक्षा XI • इतिहास • विषय 3 — यायावर साम्राज्य
कक्षा — 11 · विषय — इतिहास (विश्व इतिहास के कुछ विषय)
क्या घुमक्कड़ लोग साम्राज्य बना सकते हैं? ये दो शब्द साथ क्यों अटपटे लगते हैं?
1 | अवधारणा और स्रोत | परिभाषा की सीमा; इतिहास कैसे जाना जाता है
यायावर बनाम साम्राज्य
यायावर लोग
- मूलत: घुमक्कड़
- सापेक्षिक रूप से अविभेदित आर्थिक जीवन
- प्रारंभिक राजनीतिक संगठन
- परिवारों के समूहों में संगठित
साम्राज्य शब्द
- भौतिक अवस्थितियों को दर्शाता है
- जटिल सामाजिक-आर्थिक ढाँचे में स्थिरता
- सुपरिष्कृत प्रशासनिक व्यवस्था
- व्यापक भूभागीय प्रदेश पर सुचारु शासन
परिभाषाओं की सीमा
NCERT की पद्धति-चेतावनी
- समाजशास्त्रियों की परिभाषाएँ कई बार बहुत संकीर्ण और गैर-ऐतिहासिक हो जाती हैं
- क्योंकि वे किसी बँधे-बँधाए साँचे में उन्हें ढालती हैं
- ये परिभाषाएँ तब त्रुटिपूर्ण सिद्ध होती हैं जब हम यायावर साम्राज्यों का अध्ययन करते हैं
- मंगोल एक अलग-थलग ‘द्वीप’ के निवासी नहीं थे
- उन्होंने विश्व के अनेक देशों से संपर्क रखा, प्रभाव छोड़ा और बहुत कुछ सीखा
मंगोलों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों को रूपांतरित कर एक भयानक सैनिक-तंत्र और शासन की प्रभावी पद्धतियाँ गढ़ीं
स्रोतों की मूल समस्या
- स्टेपी निवासियों ने आमतौर पर अपना कोई साहित्य नहीं रचा
- ज्ञान मुख्यत: इतिवृत्तों, यात्रा-वृत्तांतों और नगरीय साहित्यकारों के दस्तावेज़ों से
- इन लेखकों की सूचनाएँ अज्ञान और पूर्वाग्रहों से ग्रस्त हैं
- लेखक विविध थे — बौद्ध, कन्फ़्यूशियसवादी, ईसाई, तुर्क और मुसलमान
- कुछ ने सहानुभूतिपूर्ण विवरण और यहाँ तक कि प्रशस्तियाँ भी लिखीं
इनसे ‘स्टेपी लुटेरा’ वाले निंदापूर्ण लेखों को चुनौती मिली — तस्वीर पहले से कहीं ज़्यादा जटिल हो गई
‘बर्बर’ शब्द कहाँ से आया?
अंग्रेज़ी का ‘बारबेरियन’ यूनानी शब्द बारबरोस से बना है — गैर-यूनानी लोग, जिनकी भाषा यूनानियों को बेतरतीब कोलाहल “बर-बर” के समान लगती थी।
यूनानी ग्रंथों में बर्बर — डरपोक, विलासप्रिय, निष्ठुर, आलसी, स्वशासन में असमर्थ
एक शब्द की राजनीति
- रोमवासियों ने इसका प्रयोग गॉल और हूण जैसे लोगों के लिए किया
- चीनियों ने स्टेपी के लिए दूसरे शब्द प्रयोग किए
- पर उनमें से किसी भी शब्द के सकारात्मक अर्थ नहीं थे
- मंगोलों का इतिहास इस बात पर प्रश्नचिह्न लगाता है
- कि किस ढंग से यायावर समुदायों को आदिम-बर्बर के रूप में पेश किया गया
भाषा तटस्थ नहीं होती — शब्द ही तय कर देते हैं कि किसका इतिहास कैसे लिखा जाएगा
इतिहास-लेखन की राजनीति
रूसी और सोवियत शोध
- सबसे बहुमूल्य शोध अठारहवीं-उन्नीसवीं शताब्दी में रूसी विद्वानों ने किया
- यह औपनिवेशिक वातावरण में हुआ — सर्वेक्षण-टिप्पणियों के रूप में
- सोवियत काल में मार्क्सवादी इतिहास-लेखन: जनजातीय से सामंती उत्पादन-प्रणाली की ओर संक्रमण
- व्लादिमीरस्तॉव ने भाषा, समाज और संस्कृति पर अतिउत्तम शोध किया
- बारतोल्ड ने सोवियत विचारधारा का समर्थन नहीं किया
- उनका सहानुभूतिपरक विवरण उन्हें अभिवेचकों के रोष का पात्र बना गया
रचनाओं पर कठोर पाबंदी — और केवल 1960 के दशक में नौ खंडों में प्रकाशन
एक ही ग्रंथ, दो अलग पाठ
- निर्णायक स्रोत: चीनी, मंगोली, फ़ारसी और अरबी भाषा में
- साथ में इतालवी, लातिनी, फ्राँसीसी और रूसी
- ‘मंगोलों का गोपनीय इतिहास’ — मंगोल और चीनी पाठ एक-दूसरे से अलग
- मार्कोपोलो का यात्रावृत्तांत — इतालवी और लातिनी पाठ मेल नहीं खाते
- इसलिए इतिहासकार को वाङ्ग्मीमांसक (Philologist) की भूमिका निभानी पड़ती है
इगोर दे रखेविल्ट्स और गेरहार्ड डोरफर — इन कठिनाइयों को उजागर करने वाले विद्वान
2 | भूमिका | तेरहवीं शताब्दी का मंगोल-भय
एक नयी शक्ति का अभ्युदय
- तेरहवीं शताब्दी के प्रारंभिक दशकों में यूरो-एशियाई साम्राज्यों ने बड़े खतरे का अनुभव किया
- चंगेज़ खान (मृत्यु 1227) ने मंगोलों को संगठित किया
- उसकी दूरदर्शिता महासंघ बनाने से कहीं अधिक दूरगामी थी
- उसे ईश्वर से विश्व पर शासन करने का आदेश प्राप्त था
- उसका जीवन उत्तरी चीन, तुरान, अफ़गानिस्तान, पूर्वी ईरान और रूसी स्टेपी के अभियानों में बीता
उसके वंशजों ने और आगे जाकर दुनिया के सबसे विशाल साम्राज्य का निर्माण किया
मोंके का फ्रांस के राजा को संदेश
स्वर्ग में केवल एक शाश्वत आकाश है और पृथ्वी का केवल एक अधिपति — चंगेज़ खान, स्वर्ग पुत्र… ऐसा उस शाश्वत स्वर्ग को भी पता है जिसने कठिनाई को आसान बनाया और सुदूर को निकट ला दिया।
मोंके (1251–60) से लुई नौवें (1226–70) को
ये कोरी धमकियाँ नहीं थीं
- यूरोप का बहाना: “हमारा देश दूर है, हमारे पर्वत विराट हैं और हमारे समुद्र विशाल हैं”
- बातू — चंगेज़ खान का एक और पोता, जोची का पुत्र
- 1236–1241 के अभियानों में रूस की भूमि मास्को तक रौंद डाली
- पोलैंड और हंगरी पर विजय; वियना के बाहर पड़ाव
- चीन, मध्यपूर्व एशिया और यूरोप मानने लगे —
- यह विजय ‘ईश्वर का गुस्सा’ है और क़यामत के दिन की शुरुआत है
बुखारा पर कब्ज़ा — जुवैनी का वृत्तांत
“अरे लोगों! तुम लोगों ने अनेक पाप किए हैं… अगर तुम पूछो कि इसका प्रमाण क्या है तो मैं कहूँगा कि मैं ईश्वर का दंड हूँ। यदि तुमने पाप न किए होते तो ईश्वर ने मुझे दंड हेतु तुम्हारे पास न भेजा होता…”
जुवैनी — इल-खानी ईरान का फ़ारसी इतिवृत्तकार; बुखारा-विजय, 1220 ई.
नगर का भाग्य — छह शब्दों में
बुखारा से भागे एक व्यक्ति से पूछा गया
- “वे आए”
- “दीवारों को ध्वस्त कर दिया”
- “जला दिया”
- “लोगों का वध किया”
- “लूटा”
- “और चल दिए”
क्रियाकलाप: आप बुखारा के निवासी होते तो उस भाषण का आप पर क्या प्रभाव पड़ता?
3 | पृष्ठभूमि | मंगोल कौन थे? वे कहाँ रहते थे?
मंगोल — एक विविध जनसमुदाय
- पूर्व में तातार, खितान और मंचू लोगों से भाषागत समानता
- पश्चिम में तुर्की कबीलों से — इसी कारण परस्पर सम्बद्ध
- कुछ पशुपालक — घोड़े, भेड़, बकरी और ऊँट पालते थे
- कुछ शिकारी-संग्राहक — साइबेरियाई वनों में, पशुपालकों के उत्तर में
- शिकारी-संग्राहक अधिक गरीब थे
- वे ग्रीष्म में पकड़े गए जानवरों की खाल के व्यापार से जीविका चलाते थे
मंगोलिया का भूगोल
- पश्चिम: अल्ताई पहाड़ों की बर्फ़ीली चोटियाँ
- दक्षिण: शुष्क गोबी का मरुस्थल
- उत्तर-पश्चिम: ओनोन और सेलेंगा नदियाँ; बर्फ़ीली पहाड़ियों के सैकड़ों झरने
- अनेक हरी घास के मैदान और अनुकूल ऋतुओं में छोटे-मोटे शिकार
- जलवायु: कठोर और लंबा शीत, फिर अल्पकालीन और शुष्क ग्रीष्म
क्षितिज अत्यंत विस्तृत और लहरिया मैदानों से घिरा — परिदृश्य आज भी उतना ही मनोरम
सबसे बड़ा परिणाम
मंगोलों ने (अपने पश्चिम के तुर्कों के विपरीत) कृषि नहीं अपनाई; न पशुपालन और न शिकार की अर्थव्यवस्था घनी आबादी का भरण-पोषण कर सकती थी — इसलिए इन क्षेत्रों में कोई नगर नहीं उभर पाए
समाज: वंश, संघर्ष, परिसंघ
- निवास तंबुओं और जरों (Gers) में; शीत से ग्रीष्म चारण भूमि की ओर आवागमन
- संसाधनों की कमी से समाज अनेक पितृपक्षीय वंशों में विभाजित
- धनी परिवार विशाल — अधिक पशु व चारण भूमि → अधिक अनुयायी → अधिक दबदबा
- भीषण शीत में भंडार समाप्त या वर्षा न होने पर चरागाहों की खोज में भटकना
- पशुधन पाने के लिए लूटपाट भी
- रक्षा और आक्रमण हेतु शक्तिशाली कुलों से मित्रता = परिसंघ
कुछ अपवादों को छोड़कर ऐसे परिसंघ प्राय: बहुत छोटे और अल्पकालिक होते थे
मध्य-एशियाई स्टेपी के महान परिसंघ
| परिसंघ | काल | पहचान |
|---|---|---|
| सिउंग-नु | 200 ई.पू. | तुर्क |
| जुआन-जुआन | 400 ई. | मंगोल |
| एफ़्थलैट हूण | 400 ई. | मंगोल |
| तू-चे | 550 ई. | तुर्क |
| उइगुर | 740 ई. | तुर्क |
| खितान | 940 ई. | मंगोल |
चंगेज़ बनाम अट्टीला — असली अंतर
- चंगेज़ खान का परिसंघ अट्टीला (मृत्यु 453 ई.) के परिसंघ के बराबर था
- लेकिन अट्टीला की व्यवस्था के विपरीत —
- चंगेज़ खान की राजनीतिक व्यवस्था बहुत अधिक स्थायी रही
- और अपने संस्थापक की मृत्यु के बाद भी कायम रही
- वह चीन, ईरान और यूरोप की उन्नत शस्त्रों से लैस विशाल सेनाओं का मुकाबला कर सकी
और उसने स्थानबद्ध समाजों का भी बड़ी कुशलता से प्रशासन किया
व्यापार और संघर्ष — चीन के साथ
- स्टेपी में संसाधनों की कमी → चीन के स्थायी निवासियों के पास जाना पड़ता था
- मंगोल लाते: खेती के उत्पाद और लोहे के उपकरण
- बदले में देते: घोड़े, फ़र और स्टेपी में पकड़े गए शिकार
- तनाव: दोनों पक्ष अधिक लाभ की होड़ में सैनिक कार्यवाही कर बैठते
- मिलकर व्यापार करने पर वे चीनियों को बेहतर शर्तें मानने पर मजबूर कर देते
- कभी-कभी व्यापार छोड़कर केवल लूटपाट करने लगते
मंगोलों का जीवन अस्त-व्यस्त होने पर चीनी लोग स्टेपी में अपना प्रभाव जमाते थे
भय का एक स्मारक
आठवीं शताब्दी ई.पू. से चीनी शासकों ने किलेबंदी शुरू की; तीसरी शताब्दी ई.पू. में उनका एकीकरण हुआ — यह उत्तरी चीन के कृषक समाजों पर यायावर हमलों और उनसे पनपे भय का प्रभावशाली चाक्षुष साक्ष्य है
4 | चंगेज़ खान | तेमुजिन से सार्वभौम शासक तक
विपत्तियों का बचपन
जन्म लगभग 1162 ई., ओनोन नदी के निकट
- प्रारंभिक नाम तेमुजिन
- पिता येसूगेई — कियात कबीले का मुखिया, बोरजिगिद कुल से
- पिता की अल्पायु में ही हत्या; माता ओलुन-इके ने कठिनाई से पालन किया
- 1170 का दशक विपर्ययों से भरा — तेमुजिन का अपहरण, दास बनाया गया
- पत्नी बोरटे का भी विवाह के बाद अपहरण — छुड़ाने के लिए लड़ाई लड़नी पड़ी
विपत्ति के इन वर्षों में भी वह अनेक मित्र बनाने में कामयाब रहा
मित्रता, विश्वासघात और सत्ता
- बोघूरचू — प्रथम-मित्र, सदैव विश्वस्त साथी
- जमूका — सगा भाई (आंडा), जो बाद में शत्रु बन गया
- ओंग खान (तुगरिल) — कैराईट शासक, पिता का वृद्ध सगा भाई
- 1180 और 90 के दशक: ओंग खान की मित्रता से जमूका जैसे प्रतिद्वंद्वियों को परास्त
- 1203: तातार, कैराईट और स्वयं ओंग खान के विरुद्ध युद्ध
- 1206: जमूका और नेमन लोगों की निर्णायक पराजय
1206 — कुरिलताई
मंगोल कबीलों के सरदारों की सभा (कुरिलताई) ने तेमुजिन को ‘समुद्री खान’ या ‘सार्वभौम शासक’ की उपाधि के साथ मंगोलों का महानायक (क़ान) घोषित किया
चीन की ओर
उस समय चीन तीन राज्यों में विभक्त था
- सी-सिआ — उत्तर-पश्चिमी प्रांतों के तिब्बती मूल के लोग
- चिन राजवंश — जरचेन लोग, पेकिंग से उत्तरी चीन का शासन
- शुंग राजवंश — दक्षिणी चीन
- 1209: सी-सिआ लोग परास्त
- 1213: चीन की महान दीवार का अतिक्रमण
- 1215: पेकिंग नगर लूटा गया; चिन वंश से लड़ाइयाँ 1234 तक
1216 में वह सैनिक मामले अधीनस्थों को सौंपकर मंगोलिया लौट आया
पश्चिम की ओर — ख्वारज़म अभियान
- 1218: करा खिता की पराजय → साम्राज्य अमू दरिया, तुरान, ख्वारज़म तक
- ख्वारज़म के सुल्तान मोहम्मद ने मंगोल दूतों का वध कर दिया
- 1219–1221: ओट्रार, बुखारा, समरकंद, बल्ख़, गुरगंज, मर्व, निशापुर, हेरात ने समर्पण किया
- जिन नगरों ने प्रतिरोध किया उनका विध्वंस कर दिया गया
- मंगोल सेनाएँ अज़रबैजान तक; क्रीमिया में रूसी सेनाओं को हराया; कैस्पियन को घेरा
दूसरी टुकड़ी ने सुल्तान के पुत्र जलालुद्दीन का अफ़ग़ानिस्तान और सिंध तक पीछा किया
निशापुर का आदेश
“नगर को इस तरह विध्वंस किया जाए कि संपूर्ण नगर में हल चलाया जा सके; अपने प्रतिशोध को उग्र रूप देने के लिए ऐसा संहार किया जाए कि नगर के समस्त बिल्ली और कुत्तों को भी जीवित न रहने दिया जाए।”
घेरे के दौरान एक मंगोल राजकुमार की हत्या के बाद, 1220 ई.
भारत के द्वार से वापसी
एक निर्णय जिसने भारतीय इतिहास बदला
- सिंधु नदी के तट पर चंगेज़ खान पहुँचा
- उसने उत्तरी भारत और असम मार्ग से मंगोलिया लौटने का विचार किया
- परंतु असह्य गर्मी
- प्राकृतिक आवास की कठिनाइयाँ
- और उसके शमन द्वारा दिए गए अशुभ संकेतों के आभास ने
- उसे अपने विचारों को बदलने के लिए बाध्य किया
1227 में, अपने जीवन का अधिकांश भाग युद्धों में बिताने के बाद उसकी मृत्यु हो गई
सैन्य सफलता का रहस्य
स्टेपी युद्ध-शैली का रूपांतरण
- घुड़सवारी कौशल ने सेना को गति दी
- घोड़े पर तीरंदाज़ी — जंगलों में पशुओं का आखेट करते हुए अर्जित कौशल
- भूभागों और मौसम की जानकारी → अकल्पनीय कार्य करने की क्षमता
- घोर शीत-ऋतु में अभियान; बर्फ़ से जमी नदियों का राजमार्ग की तरह प्रयोग
- घेराबंदी-यंत्र और नेप्था बमबारी के महत्त्व को शीघ्र जाना
- इंजीनियरों ने हल्के चल-उपस्कर बनाए — युद्ध में घातक प्रभाव
विनाश का आकलन — इतिवृत्तों के आँकड़े
| वर्ष | नगर | मारे गए (इतिवृत्तों के अनुसार) |
|---|---|---|
| 1220 | निशापुर | 17,47,000 |
| 1222 | हिरात | 16,00,000 |
| 1258 | बग़दाद | 8,00,000 |
| — | नासा / बैहाक | 70,000 / 70,000 |
| — | मर्व (जुवैनी) | 13,00,000 |
इन आँकड़ों पर भरोसा करें?
जुवैनी की गणना-विधि
- उसने मर्व की संख्या का अनुमान इस प्रकार लगाया —
- कि तेरह दिन तक 1,00,000 शव प्रतिदिन गिने जाते थे
- अब एक दूसरा साक्ष्य देखिए —
- एक चश्मदीद गवाह के अनुसार बुखारा के किले की रक्षा में 400 सैनिक तैनात थे
- पर एक इल-खानी इतिवृत्त कहता है कि उस आक्रमण में 30,000 सैनिक मारे गए
NCERT स्वयं यह विरोधाभास रखकर हमें आँकड़ों पर संदेह करना सिखाती है
5 | संगठन | कबीले से साम्राज्य तक
विस्तार के दो चरण
- पहला चरण 1236–1242: रूस के स्टेपी, बुलघार, कीव, पोलैंड, हंगरी
- दूसरा चरण 1255–1300: समस्त चीन (1279), ईरान, इराक और सीरिया
- इन अभियानों के बाद साम्राज्य की परिसीमाओं में स्थिरता आई
- पर 1260 के दशक के बाद पश्चिम में आवेग जारी रखना संभव नहीं हो पाया
- कारण 1: उत्तराधिकार की आंतरिक राजनीति — यूरोप से अधिक अपने हितों की रक्षा
- कारण 2: तोलूयिद वंश की चीन में बढ़ती रुचि → मिस्र के विरुद्ध अपर्याप्त सेना → पराजय
विरोधाभास: सबसे बड़ी सफलताओं के समय ही शासक-परिवार में आंतरिक विक्षोभ दिखने लगे
दशमलव पद्धति — पुरानी पहचानें मिटाना
चंगेज़ खान का सबसे बड़ा नवाचार
- सेना दस, सौ, हज़ार और दस हज़ार की इकाइयों में विभाजित
- सबसे बड़ी इकाई = तुमन (लगभग दस हज़ार सैनिक)
- पुरानी पद्धति में कुल, कबीले और सैनिक इकाइयाँ एक साथ थीं
- चंगेज़ खान ने इस प्रथा को समाप्त कर दिया
- प्राचीन जनजातीय समूह विभाजित कर सदस्य नयी सैनिक इकाइयों में बाँटे गए
- बिना अनुमति इकाई छोड़ने वाले को कठोर दंड
उसने पुरानी सामाजिक व्यवस्था बदलकर इन सभी को एक नवीन पहचान प्रदान की
नया अभिजात वर्ग
- नयी सैनिक टुकड़ियाँ चार पुत्रों और चयनित कप्तानों — नोयान — के अधीन
- कठिन वर्षों में साथ देने वालों को आंडा (सगा भाई) कहकर सार्वजनिक सम्मान
- उनसे निम्न श्रेणी के स्वतंत्र व्यक्तियों को ‘खास नौकर’ का पद
- नौकर का पद स्वामी के साथ गहरा संबंध दर्शाता था
- परिणाम: नए वर्गीकरण ने पुराने सरदारों के अधिकार सुरक्षित नहीं रखे
नया अभिजात्य वर्ग अपनी प्रतिष्ठा महानायक से करीबी रिश्ते से पाता था
उलुस — चार पुत्रों में बँटवारा
| पुत्र | क्षेत्र |
|---|---|
| जोची (ज्येष्ठ) | रूसी स्टेपी — “जहाँ तक उसके घोड़े स्वेच्छापूर्वक भ्रमण कर सकते थे” |
| चघताई | तूरान का स्टेपी-क्षेत्र और पामीर का उत्तरी क्षेत्र |
| ओगोदेई | घोषित उत्तराधिकारी; महान खान; राजधानी कराकोरम |
| तोलोए (कनिष्ठ) | पैतृक भूमि मंगोलिया |
साझा शासन की कल्पना
- ‘उलुस’ शब्द का मूल अर्थ निश्चित भूभाग नहीं था
- यह ऐसा युग था जिसकी सीमाएँ अत्यंत परिवर्तनशील थीं
- चंगेज़ का विचार था कि पुत्र परस्पर मिलजुल कर शासन करेंगे
- इसलिए हर राजकुमार के लिए अलग सैन्य-टुकड़ियाँ — तामा — तैनात कीं
- किरिलताई — सरदारों की परिषद में सामूहिक निर्णय
- विषय: परिवार-राज्य का भविष्य, अभियान, लूट के माल का बँटवारा, चरागाह भूमि, उत्तराधिकार
यम — साम्राज्य की तंत्रिका-प्रणाली
संचार ही नियंत्रण है
- अपेक्षित दूरी पर बनी सैनिक चौकियाँ
- वहाँ स्वस्थ एवं बलवान घोड़े तथा घुड़सवार संदेशवाहक तैनात
- व्यवस्था का खर्च: यायावर अपने पशुओं का दसवाँ हिस्सा देते थे
- इसे कुबकुर कर कहते थे — जो स्वेच्छा से दिया जाता था
- चंगेज़ की मृत्यु के बाद इस याम पद्धति में और सुधार हुआ
इसकी गति और विश्वसनीयता यात्रियों को आश्चर्य में डाल देती थी
6 | परिणाम | विनाश और पैक्स मंगोलिका
विजय की कीमत
- अनेक नगर नष्ट; कृषि भूमि को हानि; व्यापार चौपट
- दस्तकारी वस्तुओं की उत्पादन-व्यवस्था अस्त-व्यस्त
- सैकड़ों-हज़ारों लोग मारे गए और इससे कहीं अधिक दास बना लिए गए
- संभ्रांत लोगों से लेकर कृषक-वर्ग तक सभी को कष्ट
- ईरान के शुष्क पठार में भूमिगत नहरों (कनात) की नियमित मरम्मत संभव न रही
- मरुस्थल फैलने लगा — खुरासान के कुछ हिस्से कभी नहीं उबर पाए
“इसकी वास्तविक संख्या अतिशयोक्तिपूर्ण तथ्यों के जाल में खो गई है”
पैक्स मंगोलिका
जब सैन्य अभियानों में विराम आया
- यूरोप और चीन के भूभाग परस्पर संबद्ध हो गए
- मंगोल विजय के बाद उत्पन्न शांति से व्यापारिक संबंध परिपक्व हुए
- मंगोलों की देखरेख में रेशम मार्ग पर व्यापार और भ्रमण शिखर पर पहुँचा
- किंतु अब व्यापारिक मार्ग चीन में ही खत्म नहीं होते थे
- वे उत्तर की ओर मंगोलिया और कराकोरम तक बढ़ गए
जिन मार्गों से रेशम गया, उन्हीं से विचार और यात्री भी गए
यात्रा का पास और व्यापार का कर
- सुरक्षित यात्रा के लिए यात्रियों को पास जारी किए जाते थे
- फ़ारसी में पैज़ा (Paiza), मंगोल भाषा में गेरेगे (Gerege)
- इस सुविधा के लिए व्यापारी ‘बाज’ नामक कर अदा करते थे
- इसका तात्पर्य था कि वे मंगोल शासक (खान) की सत्ता स्वीकार करते हैं
- मंगोल शासन में सामंजस्य के लिए सुलभ यात्रा आवश्यक थी
कर केवल आय नहीं — राजनीतिक अधीनता की स्वीकृति भी था
लूट से शासन तक
- 1230 के दशक: एक क्रूद्ध मंगोल वर्ग ने प्रस्ताव रखा —
- कि समस्त कृषकों को मौत के घाट उतारकर उनकी भूमि चरागाह बना दी जाए
- 1270 के दशक: शुंग वंश की पराजय के बाद दक्षिण चीन साम्राज्य में शामिल
- तब चंगेज़ खान का पोता कुबलई खान — कृषकों और नगरों के रक्षक के रूप में उभरा
- गज़न खान ने अपने सेनापतियों को आगाह किया कि वे कृषकों को न लूटें
उसने कहा — ऐसा करने से राज्य में स्थायित्व और समृद्धि नहीं आती
गज़न खान का भाषण
“यदि आप कृषकों का अपमान करेंगे, उनसे उनके बैल और अनाज के बीज छीन लेंगे और उनकी फसलों को कुचल डालेंगे, तो आप भविष्य में क्या करेंगे? एक आज्ञाकारी कृषक वर्ग और एक विद्रोही कृषक वर्ग में अंतर समझना आवश्यक है।”
गज़न खान (1295–1304) — भाषण लिखा उसके ईरानी वज़ीर रशीदुद्दीन ने
विजितों के सचिव, विजेताओं के प्रशासक
- चंगेज़ खान के काल से ही मंगोलों ने विजित राज्यों से नागरिक प्रशासक भर्ती किए
- चीनी सचिवों का ईरान और ईरानी सचिवों का चीन में स्थानांतरण
- इससे दूरस्थ राज्यों को संघटित करने में मदद मिली
- और स्थानबद्ध जन-जीवन पर होने वाली लूटमारों की धार कम हो गई
- विश्वास तब तक बना रहता जब तक वे कर इकट्ठा करने की क्षमता रखते
- ये-लू चुत्साई ने 1230 के दशक में ओगोदेई की लूट-प्रवृत्ति बदल दी
7 | यास और विरासत | स्मृति की राजनीति
साम्राज्य चार वंशों में
- स्थानबद्धता का दबाव मूल स्टेपी-आवास से दूर के क्षेत्रों में अधिक था
- साझे धन की जगह व्यक्तिगत राजवंश बनाने की भावना ने ले ली
- तोलुई के वंशज: चीन का युआन वंश और ईरान का इल-खानी राज्य
- जोची: ‘सुनहरा गिरोह’ (गोल्डन होर्ड) — रूस के स्टेपी पर राज
- चघताई के उत्तराधिकारी: तुरान — आजकल का तुर्किस्तान
यायावर परंपराएँ चघताई और गोल्डन होर्ड में सबसे अधिक समय तक चलीं
अतीत को दोबारा लिखना
- वंशों के अलग होने से पिछले परिवार की स्मृतियों में बदलाव आया
- तोलिईद शाखा ने अपने पारिवारिक मतभेदों का वृत्तांत अपने संरक्षण के इतिहासों में दिया
- अर्थ यह हुआ कि पिछले शासकों की अपेक्षा प्रचलित शासकों के गुण अधिक लोकप्रिय किए जाएँ
- “तुलना की इस प्रक्रिया में स्वयं चंगेज़ खान को भी नहीं छोड़ा गया”
- इल-खानी ईरान के फ़ारसी इतिहासवृत्तों में रक्तरंजित हत्याओं का विस्तृत वर्णन
- और मृतकों की संख्या बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ा कर दी गई
उन्होंने जोड़ा — ‘समय बदल गया है, अब पहले जैसा खून-खराबा समाप्त हो चुका है’
यास — आदेश से विधि-संहिता तक
डेविड आयलॉन के शोध के बाद
- कहा जाता है कि चंगेज़ खान ने इसे 1206 के किरिलताई में लागू किया
- प्रारंभिक स्वरूप: यसाक — अर्थ विधि, आज्ञप्ति और आदेश
- प्रारंभिक विवरण प्रशासनिक विनियमों से जुड़े — आखेट, सैन्य और डाक प्रणाली का संगठन
- तेरहवीं शताब्दी के मध्य तक यास का प्रयोग ज़्यादा सामान्य रूप में होने लगा
- अब इसका मतलब था — चंगेज़ खान की विधि-संहिता
एक अल्पसंख्यक शासक-वर्ग की ज़रूरत
- मंगोलों ने अत्यंत जटिल शहरी समाजों पर शासन किया
- जिनके अपने-अपने इतिहास, संस्कृतियाँ और नियम थे
- मंगोलों का राजनीतिक प्रभुत्व रहा, फिर भी संख्यात्मक रूप में वे अल्पसंख्यक ही थे
- पहचान और विशिष्टता की रक्षा का एकमात्र उपाय — पवित्र नियम के अधिकार का दावा
- इसे ‘चंगेज़ खान की विधि-संहिता’ कहकर उन्होंने मूसा और सुलेमान की भाँति अपने स्मृतिकार का दावा किया
यास ने उन्हें कबीलाई पहचान बनाए रखने और पराजितों पर नियम लागू करने का आत्मविश्वास दिया
एक मैदान, चार शताब्दियाँ
1221 में चंगेज़ खान ने बुखारा के उत्सव मैदान में मुसलमान निवासियों को ‘पापी’ कहकर फटकारा था। सोलहवीं शताब्दी के अंत में जोची का वंशज अब्दुल्लाह खान उसी मैदान में छुट्टी की नमाज़ अदा करने गया।
इतिहासकार हफ़ीज़-ए-तानीश की टिप्पणी — “कि यह चंगेज़ खान के यास के अनुसार था”
8 | निष्कर्ष | दो चित्र, एक इतिहास
एक ही व्यक्ति, दो छवियाँ
विजित नगरों की दृष्टि
- एक विजेता, नगरों को ध्वस्त करने वाला
- हज़ारों लोगों की मृत्यु का उत्तरदायी
- चीन, ईरान और पूर्वी यूरोप के नगरवासी
- स्टेपी के गिरोहों को भय और घृणा से देखते थे
मंगोलों की दृष्टि
- अब तक का सबसे महान शासक
- मंगोलों को संगठित किया
- कबीलाई लड़ाइयों और चीनी शोषण से मुक्ति दिलाई
- व्यापार के रास्ते और बाज़ार पुनर्स्थापित किए
अध्याय की सबसे बड़ी सीख
इन परस्पर विरोधी चित्रों का कारण केवल परिप्रेक्ष्य की भिन्नता नहीं — ये विचार हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि किस तरह एक प्रभावशाली दृष्टिकोण अन्य को पूरी तरह से मिटा देता है
अपने समय के लिए असामान्य
- मंगोल शासक स्वयं विभिन्न धर्मों से संबंध रखते थे — शमन, बौद्ध, ईसाई और अंतत: इस्लाम
- लेकिन उन्होंने सार्वजनिक नीतियों पर अपने वैयक्तिक मत कभी नहीं थोपे
- उन्होंने सब जातियों और धर्मों के लोगों को प्रशासक और सैन्य दल में भर्ती किया
- उनका शासन बहु-जातीय, बहु-भाषी, बहु-धार्मिक था
- जिसे अपने बहुविध संविधान का कोई भय नहीं था
“यह उस समय के लिए एक असामान्य बात थी”
विरासत — तैमूर से बाबर तक
- इतिहासकार अब देखते हैं कि मंगोल बाद की शासन-प्रणालियों के लिए आदर्श कैसे बने
- जैसे कि भारत में मुगल शासकों की प्रणाली
- चौदहवीं शताब्दी के अंत में तैमूर ने अपने को राजा घोषित करने में संकोच किया
- क्योंकि वह चंगेज़ खान का वंशज नहीं था
- उसने अपने को ‘गुरेगेन’ — चंगेज़ खानी परिवार का शाही-दामाद बताया
- 1526 में चंगेज़ और तैमूर के वंशज बाबर ने भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखी
सम्पूर्ण कालरेखा
- लगभग 1162तेमुजिन का जन्म, ओनोन नदी के निकट
- 1206कुरिलताई — ‘चंगेज़ खान’, सार्वभौम शासक
- 1209–15सी-सिआ; महान दीवार का अतिक्रमण; पेकिंग लूटा गया
- 1219–21ख्वारज़म अभियान — बुखारा, समरकंद, निशापुर
- 1227चंगेज़ खान की मृत्यु; ओगोदेई का शासन-काल आरंभ
- 1236–42बातू — रूस, हंगरी, पोलैंड, आस्ट्रिया पर आक्रमण
- 1258बग़दाद; अब्बासी ख़िलाफ़त का अंत; इल-खानी राज्य
- 1260कुबलई खान का राज्यारोहण; साम्राज्य चार वंशों में
- 1295–1304गज़न खान — बौद्ध से इस्लाम में धर्मांतरण
- 1368चीन में यूआन राजवंश का अंत
- 1370–1405तैमूर — ‘गुरेगेन’ की उपाधि
- 1526 / 1921बाबर का मुगल साम्राज्य; मंगोलिया का गणराज्य
जिनका अपना कोई लिखित इतिहास नहीं था — उनका इतिहास हम कैसे लिखें?
सार-संक्षेप
- चंगेज़ खान की असली विजय नगरों पर नहीं, अपने ही समाज पर थी
- कुल और कबीले तोड़कर उसने तुमन, उलुस और यास गढ़े
- जो साम्राज्य तलवार से बना, वह पैज़ा और कर-रसीद से चला
- विनाश और पैक्स मंगोलिका — दोनों एक ही इतिहास के दो पन्ने हैं
- और यास बताता है कि अतीत हर पीढ़ी अपनी ज़रूरत से गढ़ती है
आज मंगोलिया में चंगेज़ खान राष्ट्र-नायक है — इतिहास फिर एक बार नए सिरे से लिखा जा रहा है