अध्याय 2वन एवं वन्य जीव संसाधन

शिक्षक संदर्शिका21 मिनट

यह फ़ाइल केवल शिक्षक के लिए है। इसमें वे बातें हैं जो विद्यार्थी की फ़ाइलों में नहीं दीं — कक्षा की असली दिक़्क़तें, उनके हल, और विषय की वह गहराई जो पढ़ाने का आत्मविश्वास देती है।


भाग 1 — अध्याय की असली संरचना

यह पूरी पुस्तक का सबसे छोटा अध्याय है — केवल छह पृष्ठ। पर इसे ‘आसान’ मानकर जल्दी निपटाने की ग़लती मत कीजिए।

कारण यह है कि इसमें तथ्य कम और नाम ज़्यादा हैं। और परीक्षा में नाम अकेले नहीं, जोड़ियों में पूछे जाते हैं — उद्यान+राज्य, जनजाति+पेड़, आंदोलन+जगह, वर्ष+घटना।

पढ़ाने के लिए अध्याय को दो हिस्सों में बाँटिए —

हिस्सापृष्ठयह क्या हैकैसे पढ़ाएँ
हिस्सा 1 — सरकार क्या कर रही है13–161972 का अधिनियम, बाघ परियोजना, राष्ट्रीय उद्यान, वनों के तीन प्रकारतालिका और नक़्शे से — यह हिस्सा तथ्यों का है
हिस्सा 2 — समुदाय क्या कर रहा है16–17सरिस्का, भैरोंदेव डाकव, पवित्र झुरमट, बिश्नोई, चिपको, JFMकहानियों से — यह हिस्सा लोगों का है

★यही इस अध्याय की सबसे बड़ी शिक्षण-कुंजी है — दोनों हिस्सों को एक ही तरीक़े से मत पढ़ाइए। पहला हिस्सा बोर्ड और नक़्शे का है; दूसरा हिस्सा बोलकर सुनाने का है।

अध्याय की एक-वाक्य आत्मा

“वन को क़ानून नहीं, समुदाय बचाता है — पर क़ानून के बिना समुदाय भी अकेला पड़ जाता है।”

पाठ्यपुस्तक का अपना निष्कर्ष यही है (पृष्ठ 17) — “स्थानीय समुदायों को हर जगह प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन में शामिल करना चाहिए।” और इसका सबसे अच्छा व्यावहारिक रूप संयुक्त वन प्रबंधन है — जिसका नाम ही ‘संयुक्त’ है।

इस अध्याय की तीन कहानियाँ

कक्षा 10 के कमज़ोर विद्यार्थी सूची नहीं, कहानी याद रखते हैं। इन तीन पर टिकिए —

#कहानीएक वाक्य में
1बाघों की गिरावट55,000 से घटकर 1,827 — और फिर प्रोजेक्ट टाईगर।
2अलवर के पाँच गाँव1,200 हेक्टेयर जंगल को गाँववालों ने ख़ुद ‘सोंचुरी’ घोषित कर दिया।
3बिश्नोई के हिरणवहाँ कोई बाड़ नहीं, कोई वन-रक्षक नहीं — फिर भी कोई हिरण को नुक़सान नहीं पहुँचाता।

भाग 2 — वे आठ जगहें जहाँ बच्चे सबसे ज़्यादा अटकते हैं

1. उद्यान और राज्य की जोड़ियाँ आपस में मिल जाती हैं

दिक़्क़त — छह उद्यान, छह राज्य — और सारे अनजाने नाम। बच्चे कॉर्बेट को असम और मानस को उत्तराखण्ड लिख आते हैं।

हल — हर उद्यान को एक दिशा से बाँध दीजिए —

उद्यानराज्यदिशा
कॉर्बेटउत्तराखण्डउत्तर
सुंदरबनपश्चिम बंगालपूर्व
बांधवगढ़मध्य प्रदेशमध्य
सरिस्काराजस्थानपश्चिम
मानसअसमपूर्वोत्तर
पेरियारकेरलदक्षिण

और कक्षा में यह वाक्य कहिए — “छह अलग राज्य, छह अलग दिशाएँ। यानी बाघ पूरे भारत में हैं।” एक बार दिशा बैठ गई तो जोड़ी कभी नहीं टूटती।

2. दोनों जानवर-सूचियाँ गड्डमड्ड हो जाती हैं

दिक़्क़त — पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 14) में दो अलग सूचियाँ हैं और बच्चे उन्हें एक मान लेते हैं।

हल — बोर्ड पर दो ख़ाने बनाइए और साफ़ कहिए कि ये अलग-अलग हैं —

परियोजनाएँ किनके लिए बनींशिकार-व्यापार पर प्रतिबंध किन पर लगा
बाघ · एक सींग वाला गैंडा · हंगुल · तीन मगरमच्छ · एशियाई शेरभारतीय हाथी · काला हिरण · चिंकारा · गोडावन · हिम तेंदुआ

याद रखने का सूत्र — “परियोजना वाले पाँच, प्रतिबंध वाले पाँच।”

3. “काला हिरण दोनों जगह क्यों है?”

दिक़्क़त — तेज़ बच्चे पकड़ लेते हैं कि काला हिरण प्रतिबंध वाली सूची में भी है और बिश्नोई वाले हिस्से में भी।

हल — यह कोई ग़लती नहीं, बल्कि अध्याय की सबसे सुंदर बात है।

  • सरकार ने काले हिरण को क़ानून से बचाया (शिकार-व्यापार पर प्रतिबंध)।
  • बिश्नोई समुदाय उसे आस्था से बचाता है (वह उनका ‘अभिन्न हिस्सा’ है)।

कक्षा में कहिए — “एक ही जानवर, दो तरीक़े। और दोनों ज़रूरी हैं।” यह पूरे अध्याय का सार एक वाक्य में आ जाता है।

4. आरक्षित / रक्षित / अवर्गीकृत में उलझ जाते हैं

दिक़्क़त — तीनों नाम मिलते-जुलते हैं और परिभाषाएँ भी।

हल — तीन शब्द रटाइए, परिभाषा बाद में —

आरक्षित = सबसे मूल्यवान · रक्षित = और नष्ट होने से बचाना · अवर्गीकृत = बाक़ी सब

फिर आँकड़े जोड़िए — आरक्षित = आधे से अधिक; रक्षित = एक-तिहाई।

और एक चेतावनी ज़रूर दीजिए — ‘स्थायी वन क्षेत्र’ में सिर्फ़ आरक्षित और रक्षित आते हैं, अवर्गीकृत नहीं। यह एक अंक का पक्का प्रश्न है और अकसर छूटता है।

5. अभ्यास प्रश्न 2 (मेल करें) उलटा छपा है

दिक़्क़त — पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ 18) में मिलान जान-बूझकर उलट-पुलट करके छापा गया है, और कमज़ोर बच्चे उसे ही ‘सही उत्तर’ मान लेते हैं।

हल — बोर्ड पर सही मिलान लिखवा दीजिए —

वन का प्रकारसही परिभाषा
आरक्षित वनवन और वन्य जीव संसाधन संरक्षण की दृष्टि से सर्वाधिक मूल्यवान
रक्षित वनवन भूमि जो और अधिक क्षरण से बचाई जाती है
अवर्गीकृत वनसरकार, व्यक्तियों के निजी और समुदायों के अधीन अन्य वन और बंजर भूमि

और समझाइए कि किताब में यह इसीलिए उलटा दिया गया है ताकि विद्यार्थी ख़ुद मिलान करे।

6. अभ्यास प्रश्न 3(ii) का आधार किताब में नहीं हैध्यान

यह इस अध्याय की सबसे बड़ी व्यावहारिक दिक़्क़त है, और हर शिक्षक को इसका पता होना चाहिए।

प्रश्न है — “विस्तारपूर्वक बताएँ कि मानव क्रियाएँ किस प्रकार प्राकृतिक वनस्पतिजात और प्राणिजात के ह्रास के कारक हैं?”

दिक़्क़त — यह प्रश्न पुराने संस्करण के उस पूरे भाग से आया था जो इस पुनर्संयोजित (rationalised) संस्करण में हटा दिया गया है। अब पाठ में इसका सीधा उत्तर कहीं नहीं है, और बच्चे परेशान होकर पन्ने पलटते रह जाते हैं।

हल — बच्चों से साफ़ कहिए —

“इस प्रश्न का उत्तर किताब में एक जगह नहीं लिखा। तुम्हें इसे तीन अलग जगहों से जोड़कर ख़ुद बनाना होगा।”

और फिर तीनों जगह दिखाइए —

कहाँ सेक्या कारण मिलेगा
बाघ परियोजना वाला बॉक्स (पृष्ठ 14)व्यापार के लिए शिकार और चोरी · आवासीय स्थलों का सिकुड़ना · भोजन की जंगली उपजातियों की कमी · जनसंख्या वृद्धि · खाल का व्यापार · हड्डियों का औषधियों में प्रयोग
अख़बारी कतरनें (पृष्ठ 16)प्रदूषण — यमुना के गंदे ठहरे पानी से पक्षियों की मौत; घड़ियाल की संख्या सबसे कम स्तर पर
सरिस्का वाला अनुच्छेद (पृष्ठ 16)खनन — जिसके विरुद्ध गाँववाले संघर्षरत हैं
पहला पन्ना (पृष्ठ 13)“पर्यावरण के प्रति हमारी असंवेदना” — यह उत्तर की भूमिका बनती है

इसे बोझ मत समझिए — इसे अवसर बनाइए। जब बच्चा तीन अलग पन्नों से एक उत्तर बना लेता है, तो वह सिर्फ़ प्रश्न हल नहीं करता — वह पाठ्यपुस्तक पढ़ना सीख जाता है। और यही इस विषय का असली कौशल है।

तैयार उत्तर फ़ाइल 00 (भाग 6) और फ़ाइल 05 (भाग ग, प्रश्न 2) में दिया गया है।

7. “जब बाघ इतने कम थे तो अब कितने हैं?”

दिक़्क़त — यह सवाल लगभग हर कक्षा में आता है, और पाठ्यपुस्तक 1973 पर रुक जाती है।

हल — सच बताइए, यह अच्छी ख़बर है। 2018 में 2,967 और 2022 में लगभग 3,682 बाघ थे; आज भारत में दुनिया के लगभग 75 प्रतिशत बाघ हैं, और 2023 में प्रोजेक्ट टाईगर के 50 वर्ष पूरे हुए।

पर तुरंत यह सवाल भी पूछिए —

“1973 में 1,827 थे, आज लगभग 3,682 हैं। तो क्या अब चिंता की कोई बात नहीं?”

उत्तर की दिशा — 20वीं सदी के आरंभ में 55,000 थे। यानी हम अब भी उसके दसवें हिस्से से कम पर हैं। यह तुलना बच्चों को आँकड़ा पढ़ना सिखाती है — और यही भूगोल का असली कौशल है। (विवरण फ़ाइल 07 भाग 1 में।)

8. समुदाय वाला हिस्सा ‘भावुक बात’ लगकर रह जाता है

दिक़्क़त — बच्चे बिश्नोई और पवित्र झुरमट को “पुरानी बात” या “धार्मिक बात” मानकर हल्के में ले लेते हैं, और परीक्षा में इसी हिस्से से 5 अंक का प्रश्न आता है।

हल — इसे आँकड़े और तर्क से जोड़िए, सिर्फ़ भावना से नहीं —

  • अलवर की सोंचुरी में तीन ठोस तथ्य हैं — 5 गाँव, 1,200 हेक्टेयर, अलवर ज़िला। तीनों लिखवाइए।
  • पूर्वोत्तर के राज्यों में अधिकतर वन अवर्गीकृत हैं और समुदायों के प्रबंधन में हैं — यह सरकारी वर्गीकरण ही मानता है कि समुदाय वन सँभाल सकते हैं।
  • JFM में समुदाय को गैर-इमारती वन उत्पादों का हक़ और इमारती लकड़ी के लाभ में हिस्सा मिलता है — यह भावना नहीं, अर्थशास्त्र है।

कक्षा में कहिए — “समुदाय जंगल इसलिए नहीं बचाता कि वह अच्छा आदमी है। वह इसलिए बचाता है कि जंगल उसका घर और रोज़गार है।” पाठ्यपुस्तक ख़ुद यही कहती है — “क्योंकि इसी से ही दीर्घकाल में उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकती है।”

भाग 3 — कक्षा में पूछे जाने वाले कठिन प्रश्न

“सर, अगर जंगल में आदिवासी रहते हैं तो क्या वे जंगल नहीं काटते?”

यह सवाल संवेदनशील है और इसे टालिए मत। उत्तर: पाठ्यपुस्तक साफ़ कहती है कि “वन हमारे देश में कुछ मानव प्रजातियों के आवास भी हैं” और वे लोग “अपने आवास स्थलों के संरक्षण में जुटे हैं, क्योंकि इसी से ही दीर्घकाल में उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकती है।” समझाइए — जो व्यक्ति जंगल से रोज़ पत्ते, फल और लकड़ी लेता है, वह उसे ख़त्म नहीं होने देगा — क्योंकि उसका कल का खाना उसी पर टिका है। नुक़सान तब होता है जब जंगल का इस्तेमाल बाहर के व्यापार के लिए होता है — जैसे खनन, इमारती लकड़ी का व्यापार, या शिकार। और चित्र 2.1 दिखाइए — तीनों तस्वीरों में आदिवासी महिलाएँ जंगल से छोटे उत्पाद ले रही हैं और पौध लगा रही हैं।

“बाघ को ही क्यों बचाया जाता है? दूसरे जानवर भी तो हैं।”

यह अध्याय का सबसे अच्छा सवाल है। उत्तर: पाठ्यपुस्तक ख़ुद कहती है — “बाघ संरक्षण मात्र एक संकटग्रस्त जाति को बचाने का प्रयास नहीं है, अपितु इसका उद्देश्य बहुत बड़े आकार के जैवजाति को भी बचाना है।” बोर्ड पर एक छाता बनाइए — ऊपर ‘बाघ’, नीचे हिरण, पक्षी, कीड़े, पेड़, नदी। कहिए — “बाघ को बचाने के लिए पूरा जंगल बचाना पड़ता है। और जंगल बचने से ये सब अपने आप बच जाते हैं।” (इसे अंग्रेज़ी में ‘umbrella species’ कहते हैं, पर यह शब्द बच्चों को देने की ज़रूरत नहीं।)

“सरिस्का का नाम दो बार क्यों आया है?”

अच्छा सवाल — और इसका जवाब अध्याय की संरचना समझा देता है। उत्तर: पहली बार (पृष्ठ 15) वह सरकारी प्रयास की सूची में है — बाघ परियोजना का उदाहरण। दूसरी बार (पृष्ठ 16) वह समुदाय के प्रयास में है — जहाँ गाँववाले ख़ुद खनन के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं। यानी एक ही जगह पर अध्याय के दोनों हिस्से मिलते हैं। और अगर बच्चे और जानना चाहें, तो सरिस्का की असली कहानी सुनाइए — 2004–05 में वहाँ के सारे बाघ शिकारियों ने मार दिए थे, और 2008 में रणथंभौर से बाघ लाकर वहाँ फिर से बसाए गए। यह भारत में बाघ के पहले स्थानांतरण का मामला था। (विवरण फ़ाइल 07 भाग 2 में।)

“बिश्नोई इतने पक्के क्यों हैं?”

अगर यह सवाल आए तो खेजड़ली की कहानी सुनाइए — सितंबर 1730 में जोधपुर के पास खेजड़ली गाँव में महाराजा अभय सिंह के सैनिक खेजड़ी के पेड़ काटने आए। अमृता देवी नाम की महिला ने अपनी तीन बेटियों के साथ पेड़ों से लिपटकर उन्हें रोकना चाहा और मार दी गईं। ख़बर फैली तो आसपास के गाँवों से लोग आते गए — कुल 363 बिश्नोइयों ने पेड़ों के लिए जान दे दी। आज उसी की याद में 11 सितंबर को राष्ट्रीय वन शहीद दिवस मनाया जाता है।

फिर यह जोड़िए — चिपको आंदोलन में भी लोग पेड़ से लिपटे थे। खेजड़ली उसका ढाई सौ साल पुराना पूर्वज है।

यह कहानी कक्षा में बहुत गहरा असर करती है, ख़ासकर राजस्थान में। (विवरण फ़ाइल 07 भाग 3 में।)

“क्या हमारे गाँव में भी ऐसा कुछ है?”

हाँ — और यह पूछने का सबसे अच्छा मौक़ा है। राजस्थान में पवित्र झुरमट को ‘ओरण’ कहते हैं, और राज्य में लगभग 25,000 ओरण हैं। पूरे भारत में अनुमानित 1 से 1.5 लाख पवित्र झुरमट हैं। बच्चों से पूछिए — “तुम्हारे गाँव के पास कोई ऐसी जगह है जहाँ पेड़ काटना मना है?” देवबनी, ओरण, गोचर भूमि, मंदिर के पेड़ — अकसर कुछ न कुछ निकल आता है। और तब कहिए — “जो तुम अभी बता रहे हो, वही किताब के पन्ने 16 पर लिखा है।” बच्चों के लिए यह बहुत बड़ा क्षण होता है।

भाग 4 — विषय की वह गहराई जो शिक्षक को पता होनी चाहिए

यह हिस्सा बोर्ड-उत्तर के लिए नहीं है। यह आपके अपने वैचारिक अधिकार के लिए है।

(क) राष्ट्रीय उद्यान और पशुविहार में असली अंतर

पाठ्यपुस्तक दोनों शब्द साथ-साथ इस्तेमाल करती है पर अंतर नहीं बताती —

राष्ट्रीय उद्यानवन्य जीव पशुविहार (Sanctuary)
सुरक्षा का स्तरअधिक सख़्ततुलनात्मक रूप से कम सख़्त
मानवीय गतिविधिपशुचारण, खेती आदि लगभग पूरी तरह वर्जितकुछ गतिविधियों की सीमित छूट संभव
किसके लिएपूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिएमुख्यत: किसी विशेष प्रजाति की सुरक्षा के लिए

इसीलिए पाठ्यपुस्तक ने कॉर्बेट को ‘राष्ट्रीय उद्यान’ और सरिस्का को ‘पशुविहार’ लिखा है। यह जानकारी तब काम आती है जब कोई तेज़ बच्चा पूछे कि दोनों शब्द अलग क्यों हैं।

(ख) ‘अवर्गीकृत वन’ कमी नहीं, व्यवस्था है

बच्चे (और कई बार शिक्षक भी) ‘अवर्गीकृत’ शब्द सुनकर मान लेते हैं कि वे ‘बेकार’ या ‘छूटे हुए’ वन हैं। यह ग़लत है।

  • पूर्वोत्तर के राज्यों — मेघालय, नागालैंड, मिज़ोरम आदि — में वन सदियों से गाँव और कबीले की सामूहिक संपत्ति रहे हैं।
  • वहाँ की पारंपरिक व्यवस्था में जंगल का मालिक गाँव होता है, सरकार नहीं।
  • इसीलिए वे सरकारी वर्गीकरण में ‘अवर्गीकृत’ दर्ज होते हैं — पर ज़मीन पर वे बहुत अच्छी तरह प्रबंधित होते हैं।

यह बात कक्षा में ज़रूर कहिए, क्योंकि यह अध्याय के मुख्य तर्क को ही मज़बूत करती है — समुदाय वन सँभाल सकते हैं, और सँभाल रहे हैं।

(ग) ‘प्राथमिक उत्पादक’ का पूरा अर्थ

पाठ्यपुस्तक कहती है कि वन ‘प्राथमिक उत्पादक’ हैं, पर यह नहीं समझाती कि इसका मतलब क्या है।

चरणक्या होता है
1हरे पौधे सूर्य की ऊर्जा से अपना भोजन ख़ुद बनाते हैं (प्रकाश-संश्लेषण)।
2शाकाहारी जीव उन्हीं पौधों को खाते हैं।
3माँसाहारी जीव शाकाहारियों को खाते हैं।
4यानी पूरी खाद्य शृंखला की पहली कड़ी पौधे ही हैं।

इसीलिए वन के कटने से सिर्फ़ पेड़ नहीं जाते — पूरी शृंखला हिल जाती है। यह बात कक्षा 10 की विज्ञान की पुस्तक (‘हमारा पर्यावरण’) में भी आती है; दोनों विषय जोड़कर पढ़ाइए।

(घ) संयुक्त वन प्रबंधन की असली चतुराई

JFM को सिर्फ़ ‘एक सरकारी योजना’ मत बताइए। उसकी बुनियादी सोच यह है —

पुरानी सोचJFM की सोच
समुदाय जंगल के लिए ख़तरा है, इसलिए उसे बाहर रखो।समुदाय जंगल का रक्षक है, इसलिए उसे हिस्सेदार बनाओ।
जंगल बचाने का फ़ायदा सरकार को।जंगल बचाने का फ़ायदा गाँव को भी — गैर-इमारती उत्पाद और इमारती लकड़ी में हिस्सा।

यही कारण है कि यह टिकाऊ है। जब गाँव को जंगल बचाने में अपना फ़ायदा दिखता है, तो निगरानी के लिए किसी कर्मचारी की ज़रूरत नहीं रहती — पूरा गाँव ही निगरानी करता है।

और ध्यान दीजिए — पाठ्यपुस्तक कहती है कि 1988 में ओडिशा ने पहला प्रस्ताव पास किया। ओडिशा में यह इसलिए पहले हुआ क्योंकि वहाँ आदिवासी समुदायों की वन-प्रबंधन की परंपरा पहले से मज़बूत थी।

(ङ) यह संस्करण ‘पुनर्संयोजित’ है — और इसका असर

कोविड के बाद NCERT ने सभी पुस्तकों में पाठ्य सामग्री कम की। इस अध्याय से भी काफ़ी हिस्सा हटाया गया है।

इसका सीधा असर तीन जगह दिखता है —

  1. अभ्यास प्रश्न 3(ii) का आधार-पाठ हट चुका है (भाग 2, बिंदु 6 देखिए)।
  2. अध्याय अब कारणों पर कम और समाधानों पर ज़्यादा केंद्रित है — यानी ‘क्यों ह्रास हुआ’ कम है, ‘कैसे बचाएँ’ ज़्यादा।
  3. इसीलिए अध्याय का ढाँचा थोड़ा असंतुलित लगता है — पहले संरक्षण, फिर वर्गीकरण, फिर समुदाय।

इसे जानकर पढ़ाना ज़रूरी है, ताकि जब बच्चा कहे “सर, इसका जवाब किताब में नहीं है”, तो आप कह सकें — “तुम सही हो। आओ, इसे हम मिलकर बनाते हैं।”

भाग 5 — भाषा-संबंधी सावधानियाँ

ग़लत तरीक़ासही तरीक़ाकारण
“आदिवासी जंगल काटते हैं”“वन कुछ मानव प्रजातियों के आवास भी हैं, और वे लोग अपने आवास स्थलों के संरक्षण में जुटे हैं”पाठ्यपुस्तक ठीक उलटी बात कहती है
“बाघ बचाने से सिर्फ़ बाघ बचता है”“बाघ संरक्षण का उद्देश्य बहुत बड़े आकार के जैवजाति को भी बचाना है”यही परियोजना का असली तर्क है
“अवर्गीकृत वन बेकार वन हैं”“अवर्गीकृत वन वे हैं जो सरकार, व्यक्तियों और समुदायों के स्वामित्व में हैं”इनमें पूर्वोत्तर के सुव्यवस्थित सामुदायिक वन आते हैं
“स्थायी वन क्षेत्र में तीनों प्रकार आते हैं”“स्थायी वन क्षेत्र = आरक्षित + रक्षित”अवर्गीकृत इसमें नहीं आते — यह 1 अंक का प्रश्न है
“चिपको आंदोलन ने वन कटाई रोकी” (अधूरा)“वन कटाई भी रोकी और यह भी दिखाया कि स्थानीय प्रजातियों से सामुदायिक वनीकरण सफल हो सकता है”दूसरी उपलब्धि छोड़ने पर आधे अंक कटते हैं
“समुदाय भावना के कारण जंगल बचाते हैं”“क्योंकि इसी से ही दीर्घकाल में उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सकती है”पाठ्यपुस्तक का अपना तर्क आर्थिक है, केवल भावनात्मक नहीं

भाग 6 — मूल्यांकन की योजना

चरणकबक्या जाँचेंकैसे
1कालांश 2 के बाद1972 का अधिनियम और दोनों जानवर-सूचियाँपाँच मिनट की मौखिक जाँच
2कालांश 3 के बादबाघ परियोजना — आँकड़े और चार कारणलिखित, 10 अंक
3कालांश 3 के बादछह उद्यान + राज्यख़ाली मानचित्र पर, 6 अंक
4कालांश 4 के बादवनों के तीन प्रकार और राज्यवार वितरणख़ाली तालिका भरवाइए
5कालांश 5 के बादसमुदाय वाले उदाहरण (कम से कम चार)लिखित, 5 अंक
6अध्याय के बादपूरा अध्याय05-प्रश्न बैंक का कोई एक नमूना पत्र
7एक हफ़्ते बादधारण (retention)फ्लैशकार्ड समूह 9 (केवल जोड़ियाँ) से मौखिक

एक सुझाव: इस अध्याय की हर परीक्षा में मानचित्र और जोड़ियों का एक प्रश्न रखिए। ये दोनों सबसे आसान अंक हैं और सबसे ज़्यादा छूटते भी हैं।

भाग 7 — अंतिम शिक्षक-टिप्पणी

यह अध्याय छोटा है, इसलिए इसे जल्दी निपटाने का मन करेगा। मत कीजिए।

कारण यह है कि यह पूरी पुस्तक का सबसे भावनात्मक अध्याय है, और भूगोल में ऐसे मौक़े कम आते हैं।

देखिए — अध्याय एक लोकगीत से शुरू होता है और गौतम बुद्ध के उद्धरण पर ख़त्म होता है। बीच में क़ानून हैं, आँकड़े हैं, राज्यों की सूचियाँ हैं। पर लेखक ने शुरुआत और अंत जान-बूझकर ऐसे चुने हैं।

क्यों? क्योंकि वह यह कहना चाहता है कि क़ानून और परियोजनाएँ साधन हैं — असली बात प्रकृति के साथ हमारा रिश्ता है।

इसलिए —

  • अध्याय की शुरुआत लेपचा लोकगीत पढ़वाकर कीजिए, तथ्य से नहीं।
  • बीच में तीन कहानियाँ ज़रूर सुनाइए — बाघों की गिरावट, अलवर के पाँच गाँव, और बिश्नोई के हिरण।
  • और अंत में गौतम बुद्ध का उद्धरण पढ़वाकर कुछ मत बोलिए। उसे अपना काम करने दीजिए।

और आख़िरी कालांश में यह सवाल छोड़कर कक्षा से जाइए —

“1730 में खेजड़ली के 363 लोगों ने पेड़ों के लिए जान दे दी थी। तब न कोई वन्य जीव अधिनियम था, न प्रोजेक्ट टाईगर। तो उन्हें किसने रोका था?”

इसका जवाब कोई बच्चा उस दिन नहीं देगा। पर वह उसे घर तक साथ ले जाएगा — और भूगोल का यही सबसे बड़ा काम है।