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1⭐ सोलहवीं–सत्रहवीं सदी के दौरान हिंदुस्तान के करीब–करीब कितने फ़ीसदी लोग गाँवों में रहते थे?
व्याख्या: अध्याय इसी बात से शुरू होता है: "सोलहवीं–सत्रहवीं सदी के दौरान हिंदुस्तान में करीब–करीब 85 फ़ीसदी लोग गाँवों में रहते थे।" 40 फ़ीसदी का आँकड़ा सोलहवीं–सत्रहवीं सदी में अखिल भारतीय स्तर पर जंगलों के फैलाव के औसत का अंदाज़ा है, गाँवों में रहने वालों का नहीं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 196, 208
2⭐⭐ मुग़ल काल के भारतीय–फ़ारसी स्रोत किसान के लिए आमतौर पर कौन-से शब्द इस्तेमाल करते थे?
व्याख्या: किताब के अनुसार इन स्रोतों में किसान के लिए आमतौर पर रैयत (बहुवचन, रिआया) या मुज़रियान शब्द आते हैं; साथ ही किसान और आसामी जैसे शब्द भी मिलते हैं। मुक़द्दम या मंडल गाँव के मुखिया के नाम हैं, अमील–गुज़ार और अमीन राज्य के मुलाज़िम थे, और पोलज व परौती ज़मीन की किस्में हैं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 197
3⭐⭐ सत्रहवीं सदी के स्रोत दो किस्म के किसानों की चर्चा करते हैं: खुद–काश्त और पाहि–काश्त। पाहि–काश्त किसान कौन थे?
व्याख्या: किताब कहती है: "दूसरे (पाहि–काश्त) वे खेतिहर थे जो दूसरे गाँवों से ठेके पर खेती करने आते थे।" विकल्प (अ) खुद–काश्त किसानों का वर्णन है। लोग अपनी मर्ज़ी से भी पाहि–काश्त बनते थे (जैसे किसी दूसरे गाँव में करों की शर्तें बेहतर मिलें) और मजबूरन भी (जैसे अकाल या भुखमरी के बाद आर्थिक परेशानी से)।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 198
4⭐ ⚠ आइन के अनुसार दोनों मौसम (खरीफ़ और रबी) मिलाकर मुग़ल प्रांत आगरा और दिल्ली प्रांत में कितनी किस्म की फ़सलें उगाई जाती थीं?
व्याख्या: किताब के अनुसार "मुग़ल प्रांत आगरा में 39 किस्म की फ़सलें उगाई जाती थीं जबकि दिल्ली प्रांत में 43 फ़सलों की पैदावार होती थी।" दोनों संख्याएँ उलटी मत कीजिए। 50 की संख्या बंगाल की है, जहाँ सिर्फ़ चावल की 50 किस्में पैदा होती थीं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 200
5⭐⭐ मुग़ल काल के स्रोतों में मिलने वाले शब्द जिन्स–ए–कामिल का क्या अर्थ है?
व्याख्या: किताब में जिन्स–ए–कामिल के आगे कोष्ठक में "(सर्वोत्तम फ़सलें)" लिखा है और बताया है कि "कपास और गन्ने जैसी फ़सलें बेहतरीन जिन्स–ए–कामिल थीं।" मुग़ल राज्य किसानों को ऐसी फ़सलें उगाने के लिए बढ़ावा देता था, क्योंकि इनसे राज्य को ज़्यादा कर मिलता था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 200
6⭐ तम्बाकू सबसे पहले दक्कन पहुँचा और सत्रहवीं सदी के शुरुआती वर्षों में उत्तर भारत लाया गया। अकबर और उसके अभिजातों ने पहली बार तम्बाकू कब देखा?
व्याख्या: किताब के बॉक्स "तम्बाकू का प्रसार" के अनुसार "अकबर और उसके अभिजातों ने 1604 ई. में पहली बार तम्बाकू देखा।" आइन उत्तर भारत की फ़सलों की सूची में तम्बाकू का ज़िक्र नहीं करती।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 200
7⭐ सत्रहवीं सदी तक मक्के की गिनती पश्चिम भारत की मुख्य फ़सलों में होने लगी थी। किताब के अनुसार मक्का भारत में किस रास्ते आया?
व्याख्या: किताब लिखती है: "मक्का भारत में अफ्रीका और स्पेन के रास्ते आया"। टमाटर, आलू और मिर्च जैसी सब्ज़ियाँ और अनानास व पपीता जैसे फल नयी दुनिया से लाए गए। दक्कन से उत्तर भारत की ओर तम्बाकू आया था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 201
8⭐⭐ किसान व्यक्तिगत ज़मीन के मालिक थे, फिर भी कई मायनों में वे एक सामूहिक ग्रामीण समुदाय का हिस्सा थे। इस समुदाय के तीन घटक कौन-से थे?
व्याख्या: किताब के अनुसार "इस समुदाय के तीन घटक थे – खेतिहर किसान, पंचायत और गाँव का मुखिया (मुक़द्दम या मंडल)।" बाकी विकल्पों में ऐसे लोग हैं जो गाँव में तो आते हैं, पर किताब उन्हें इन तीन घटकों में नहीं गिनती।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 201
9⭐⭐ मुग़ल काल में गाँव की पंचायत का सरदार मुखिया (मुक़द्दम या मंडल) होता था। उसका मुख्य काम क्या था, और इसमें उसकी मदद कौन करता था?
व्याख्या: किताब कहती है: "गाँव के आमदनी व खर्चे का हिसाब–किताब अपनी निगरानी में बनवाना मुखिया का मुख्य काम था और इसमें पंचायत का पटवारी उसकी मदद करता था।"
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 202
10⭐ ⚠ ग्राम पंचायत के अलावा गाँव में हर जाति की अपनी पंचायत होती थी। राजस्थान में जाति पंचायतें क्या काम करती थीं?
व्याख्या: किताब के अनुसार "राजस्थान में जाति पंचायतें अलग–अलग जातियों के लोगों के बीच दीवानी के झगड़ों का निपटारा करती थीं।" फ़ौजदारी न्याय की बात अलग थी: "फ़ौजदारी न्याय को छोड़ दें तो ज़्यादातर मामलों में राज्य जाति पंचायत के फ़ैसलों को मानता था।"
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 203
11⭐⭐ उन्नीसवीं सदी के कुछ अंग्रेज़ अफ़सरों ने भारतीय गाँवों को एक "छोटे गणराज्य" के रूप में देखा, जहाँ लोग भाईचारे के साथ संसाधनों और श्रम का बँटवारा करते थे। किताब इस धारणा के बारे में क्या कहती है?
व्याख्या: किताब के अनुसार "ऐसा नहीं लगता कि गाँव में सामाजिक बराबरी थी।" कुछ ताकतवर लोग गाँव के मसलों पर फ़ैसले लेते थे, कमज़ोर वर्गों का शोषण करते थे और न्याय का अधिकार भी उन्हीं के पास था। विकल्प (ब) भी ग़लत है: गाँवों और शहरों के बीच व्यापार की वजह से गाँवों में भी नकद के रिश्ते फैल चुके थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 205
12⭐⭐ मुग़ल काल के कई ग्रामीण संप्रदायों में शादी के लिए दहेज की जगह क्या अदा करने की ज़रूरत होती थी?
व्याख्या: किताब के अनुसार "कई ग्रामीण संप्रदायों में शादी के लिए 'दुलहन की कीमत' अदा करने की ज़रूरत होती थी, न कि दहेज की।" कारण यह था कि कुपोषण, बार–बार माँ बनने और प्रसव के वक़्त मौत की वजह से महिलाओं में मृत्युदर बहुत ज़्यादा थी, इसलिए शादी–शुदा महिलाओं की कमी थी।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 207
13⭐ सोलहवीं सदी की बंगाली कविता चंडीमंगल में नायक कालकेतु जंगल खाली करवा के एक साम्राज्य की स्थापना करता है। यह कविता किसने लिखी?
व्याख्या: स्रोत 3 ("कृषि बस्तियों के लिए जंगलों का सफ़ाया") किताब में इस तरह शुरू होता है: "यह सोलहवीं सदी में मुकुंदराम चक्रवर्ती की लिखी एक बंगाली कविता चंडीमंगल का एक अंश है।" अबुल फ़ज़्ल ने आइन लिखी; कारेरी (इटली) और तैवर्नियर (फ़्रांस) विदेशी यात्री थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 209
14⭐ असम में अहोम राजाओं के पायक कौन थे?
व्याख्या: किताब के अनुसार "असम में, अहोम राजाओं के अपने पायक होते थे। ये वे लोग थे जिन्हें ज़मीन के बदले सैनिक सेवा देनी पड़ती थी।"
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 210
15⭐⭐ मुग़ल भारत में ज़मींदारों की विस्तृत व्यक्तिगत ज़मीन, जिस पर उनके निजी इस्तेमाल के लिए खेती होती थी, क्या कहलाती थी?
व्याख्या: किताब कहती है: "इन्हें मिल्कियत कहते थे, यानी संपत्ति।" ज़मींदार इन ज़मीनों को अपनी मर्ज़ी से बेच सकते थे, किसी और के नाम कर सकते थे या गिरवी रख सकते थे। ख़िदमत वे खास सेवाएँ थीं जो ज़मींदार राज्य को देते थे, और सनद राज्यादेश था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 211, 212
16⭐⭐ ⚠ मुग़ल भू–राजस्व के इंतज़ामात में दो चरण थे: कर निर्धारण और वास्तविक वसूली। जमा और हासिल का क्या अर्थ था?
व्याख्या: किताब के शब्दों में "जमा निर्धारित रक़म थी और हासिल सचमुच वसूली गई रक़म।" दोनों को उलटा मत लिखिए। राजस्व निर्धारित करते समय राज्य अपना हिस्सा ज़्यादा से ज़्यादा रखने की कोशिश करता था, पर स्थानीय हालात की वजह से कभी–कभी सचमुच इतनी वसूली संभव नहीं हो पाती थी।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 213
17⭐ आइन में दिए अकबर के भूमि वर्गीकरण (स्रोत 5) के अनुसार चचर कैसी ज़मीन थी?
व्याख्या: स्रोत 5 में लिखा है: "चचर वह ज़मीन है जो तीन या चार वर्षों तक खाली रहती है।" विकल्प (अ) पोलज है, (ब) परौती और (द) बंजर। पोलज और परौती की तीन किस्में थीं: अच्छी, मध्यम और खराब।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 214
18⭐ अकबर के बाद के बादशाहों के समय में भी ज़मीन की नपाई के प्रयास जारी रहे। 1665 ई. में औरंगज़ेब ने अपने राजस्व कर्मचारियों को क्या स्पष्ट निर्देश दिया?
व्याख्या: किताब के अनुसार "1665 ई. में, औरंगज़ेब ने अपने राजस्व कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि हर गाँव में खेतिहरों की संख्या का सालाना हिसाब रखा जाए"। तम्बाकू पर पाबंदी जहाँगीर ने लगाई थी।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 213, 215
19⭐ मुग़ल साम्राज्य एशिया के उन बड़े साम्राज्यों में एक था जो सोलहवीं व सत्रहवीं सदी में सत्ता और संसाधनों पर अपनी पकड़ मज़बूत बनाने में कामयाब रहे। किताब बाकी तीन साम्राज्य कौन-से बताती है?
व्याख्या: किताब के अनुसार "ये साम्राज्य थे–मिंग (चीन में), सफ़ावी (ईरान में), और ऑटोमन (तुर्की में)।" इन साम्राज्यों की राजनीतिक स्थिरता ने चीन से लेकर भूमध्य सागर तक ज़मीनी व्यापार का जीवंत जाल बिछाने में मदद की।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 215
20⭐⭐ अबुल फ़ज़्ल ने अकबर के हुक्म पर आइन–ए–अकबरी का ज़िम्मा उठाया। आइन–ए–अकबरी कब पूरी हुई?
व्याख्या: किताब कहती है: "अकबर के शासन के बयालीसवें वर्ष, 1598 ई. में, पाँच संशोधनों के बाद, इसे पूरा किया गया।" आइन इतिहास लिखने की उस बड़ी परियोजना का हिस्सा थी जिसका परिणाम अकबरनामा था; अकबरनामा तीन जिल्दों में रचा गया और उसकी तीसरी जिल्द आइन–ए–अकबरी है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 217

