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1महाभारत का समालोचनात्मक संस्करण तैयार करने की परियोजना संस्कृत विद्वान वी.एस. सुकथांकर के नेतृत्व में किस वर्ष शुरू हुई?
व्याख्या: परियोजना 1919 में शुरू हुई और इसे पूरा करने में सैंतालीस वर्ष लगे; किताब की कालरेखा 2 में संस्करण की परिकल्पना और प्रकाशन का समय 1919-66 दिया है, इसलिए 1966 शुरुआत का साल नहीं है। 1951-52 में बी.बी. लाल ने हस्तिनापुर में उत्खनन किया, और 1973 में जे.ए.बी. वैन बियुटेनेन ने समालोचनात्मक संस्करण का अंग्रेज़ी अनुवाद आरंभ किया।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 54, 75, 79
2महाभारत के समालोचनात्मक संस्करण के 13,000 पृष्ठों में से आधे से भी अधिक पृष्ठ किसका ब्योरा देते हैं?
व्याख्या: कुछ शताब्दियों के दौरान हुए महाभारत के प्रेषण में अनेक क्षेत्रीय प्रभेद उभरे; इनका संकलन मुख्य पाठ की पादटिप्पणियों और परिशिष्टों के रूप में हुआ, और 13,000 पृष्ठों में से आधे से भी अधिक इन्हीं का ब्योरा देते हैं। मुख्य पाठ के लिए वे श्लोक चुने गए जो लगभग सभी पांडुलिपियों में पाए गए थे। पांडुलिपियाँ विभिन्न लिपियों में थीं, पर संस्करण के पृष्ठ लिपियों की सूची नहीं हैं। महाभारत का फारसी अनुवाद (लगभग 1740-50) एक अलग ग्रंथ है, जिससे किताब का चित्र 3.9 लिया गया है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 54, 74
3किताब के अनुसार पितृवंशिकता का अर्थ क्या है?
व्याख्या: पितृवंशिकता में वंश पिता से पुत्र और आगे पौत्र, प्रपौत्र तक चलता है, और पुत्र पिता की मृत्यु के बाद उनके संसाधनों पर (राजाओं के संदर्भ में सिंहासन पर भी) अधिकार जमा सकते थे। माँ से जुड़ी वंश परंपरा मातृवंशिकता है, अपने गोत्र से बाहर विवाह बहिर्विवाह है, और एक स्त्री के अनेक पति होना बहुपति प्रथा है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 55, 57
4जब वैवाहिक संबंध किसी समूह के भीतर ही होते हैं (यह समूह एक गोत्र, कुल, जाति या एक ही स्थान पर बसने वालों का हो सकता है), तो इसे क्या कहते हैं?
व्याख्या: समूह के भीतर विवाह अंतर्विवाह है; सातवाहन रानियों के उदाहरण में बंधुओं के बीच विवाह इसी पद्धति को दर्शाता है, जिसका प्रचलन दक्षिण भारत के कई समुदायों में (भी) है। बहिर्विवाह अपने गोत्र से बाहर विवाह है, बहुपत्नी प्रथा एक पुरुष की एक से अधिक पत्नियाँ होने की प्रथा है, और कन्यादान विवाह में कन्या की भेंट है, जिसे पिता का महत्वपूर्ण धार्मिक कर्तव्य माना गया।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 57, 60
5धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र नामक संस्कृत ग्रंथों में से मनुस्मृति का संकलन कब हुआ?
व्याख्या: मनुस्मृति का संकलन लगभग 200 ई.पू. से 200 ईसवी के बीच हुआ। लगभग 500 ई.पू. से सामाजिक मानदंडों का संकलन धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र में होने लगा; लगभग 1000 ई.पू. के बाद लोगों को गोत्रों में वर्गीकृत करने की ब्राह्मणीय पद्धति प्रचलन में आई; और लगभग 200-400 ईसवी के बीच मनुस्मृति से मिलते-जुलते बृहत उपदेशात्मक प्रकरण महाभारत में जोड़े गए।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 58, 75
6धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र विवाह के कितने प्रकारों को स्वीकृति देते हैं, और उनमें से कौन-से 'उत्तम' माने जाते थे?
व्याख्या: धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र विवाह के आठ प्रकारों को स्वीकृति देते हैं; इनमें से पहले चार 'उत्तम' माने जाते थे और बाकियों को निंदित माना गया। सात और छ: की संख्या मनुस्मृति में धन अर्जित करने के तरीकों की है: पुरुषों के लिए सात, स्त्रियों के लिए छ:।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 58, 69
7लगभग 1000 ई.पू. के बाद प्रचलन में आई गोत्र पद्धति के नियमों के अनुसार विवाह के बाद स्त्री किसके गोत्र की मानी जाती थी?
व्याख्या: गोत्रों के दो नियम महत्वपूर्ण थे: विवाह के बाद स्त्रियों को पिता के स्थान पर पति के गोत्र का माना जाता था, और एक ही गोत्र के सदस्य आपस में विवाह संबंध नहीं रख सकते थे। पिता का गोत्र बनाए रखना नियम नहीं था; सातवाहन रानियों का उदाहरण इस नियम से हटकर था। (स) और (द) इन दोनों नियमों से मेल नहीं खाते।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 58, 60
8सातवाहन राजाओं (लगभग दूसरी शताब्दी ई.पू. से दूसरी शताब्दी ईसवी तक पश्चिमी भारत और दक्कन के कुछ भागों के शासक) से विवाह करने वाली रानियों के नामों के विश्लेषण से क्या पता चलता है?
व्याख्या: रानियों के नाम गौतम तथा वसिष्ठ गोत्रों से उद्भूत थे, जो उनके पिता के गोत्र थे; यानी उन्होंने ब्राह्मणीय व्यवस्था की अपेक्षा के अनुसार पति के कुल का गोत्र ग्रहण नहीं किया। कुछ रानियाँ एक ही गोत्र से भी थीं, इसलिए (ब) ग़लत है; यह बात बहिर्विवाह पद्धति के नियमों के विरुद्ध थी। (द) उलटा है: राजाओं को उनके मातृनाम (माता के नाम से उद्भूत) से चिह्नित किया जाता था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 58, 60
9धर्मसूत्रों और धर्मशास्त्रों के अनुसार कृषि, पशुपालन और व्यापार किस वर्ण की जीविका थी?
व्याख्या: वैश्य कृषि, पशुपालन और व्यापार में संलग्न रहते थे, और साथ ही वेदों और अन्य शास्त्रों का अध्ययन करते थे, यज्ञ करते और कराते थे तथा दान देते थे। ब्राह्मणों का मुख्य कर्तव्य वेदों तथा अन्य शास्त्रों का अध्ययन और अध्यापन, यज्ञ करना और कराना तथा दान देना और ग्रहण करना था; क्षत्रियों का प्रमुख कार्य युद्ध करना, लोगों की रक्षा करना और न्याय संचालन था; और शूद्रों से अपेक्षा थी कि वे समाज के सुचारु संचालन में अन्य तीन वर्णों की सहायता करें।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 61
10मौर्यों के उत्तराधिकारी शुंग और कण्व किस वर्ण के थे?
व्याख्या: शास्त्रों के अनुसार केवल क्षत्रिय राजा हो सकते थे, फिर भी शुंग और कण्व, जो मौर्यों के उत्तराधिकारी थे, ब्राह्मण थे। (अ) इसी शास्त्रीय नियम के कारण सही लगता है। मौर्यों के बारे में भी मत अलग हैं: बाद के बौद्ध ग्रंथ उन्हें क्षत्रिय बताते हैं, जबकि ब्राह्मणीय शास्त्र उन्हें 'निम्न' कुल का मानते हैं। किताब का निष्कर्ष है कि राजत्व क्षत्रिय कुल में जन्म लेने पर शायद ही निर्भर करता था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 62
11सुदर्शन सरोवर के जीर्णोद्धार का वर्णन संस्कृत के संभवत: आरंभिक अभिलेखों में से एक में मिलता है। यह जीर्णोद्धार किस शक राजा ने करवाया?
व्याख्या: प्रसिद्ध शक राजा रुद्रदामन (लगभग दूसरी शताब्दी ईसवी) के इस अभिलेख से पता चलता है कि शक्तिशाली मलेच्छ संस्कृतीय परिपाटी से अवगत थे; मध्य एशिया से भारत आए शकों को ब्राह्मण मलेच्छ, बर्बर अथवा अन्यदेशीय मानते थे। गोतमी-पुत्त सिरी-सातकनि सातवाहन कुल का शासक था, जिसने रुद्रदामन के परिवार से विवाह संबंध स्थापित किए; अवन्तिपुत्र मज्झिमनिकाय की कहानी (स्रोत 13) के राजा हैं; द्रुपद महाभारत में पांचाल नरेश हैं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 62, 63, 70, 76
12मंदसौर (मध्य प्रदेश) से मिले अभिलेख (लगभग पाँचवीं शताब्दी ईसवी) में किस श्रेणी का वर्णन है, जो लाट (गुजरात) से दशपुर आकर बसी थी?
व्याख्या: अभिलेख में रेशम के बुनकरों की एक श्रेणी का वर्णन है, जो मूलतः लाट (गुजरात) प्रदेश के निवासी थे और मंदसौर चले गए, जिसे उस समय दशपुर कहा जाता था; उन्होंने वहाँ के राजा की महानता के बारे में सुना था। सामूहिक रूप से उन्होंने शिल्पकर्म से अर्जित धन सूर्य देवता के सम्मान में मंदिर बनवाने पर खर्च किया। वणिक व्यापारियों के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है, और भाट सारथी ('सूत') संभवत: महाभारत की मूल कथा के रचयिता थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 63, 64, 74
13शूद्रक के नाटक मृच्छकटिकम् (लगभग चौथी शताब्दी ईसवी) में नायक चारुदत्त को क्या बताया गया है?
व्याख्या: शास्त्र व्यापार को वैश्यों की जीविका बताते हैं, पर मृच्छकटिकम् में नायक चारुदत्त को ब्राह्मण–वणिक बताया गया है। क्षत्रिय–वणिक पाँचवीं शताब्दी ईसवी के एक अभिलेख में उन दो भाइयों को कहा गया है जिन्होंने एक मंदिर के निर्माण के लिए धन दिया; अनूठा ब्राह्मण सातवाहन शासक गोतमी-पुत्त सिरी-सातकनि ने स्वयं को बताया था; और निषाद वर्ग वन प्रांतर में बसने वाले लोगों का उदाहरण है, जिससे एकलव्य जुड़ा माना जाता था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 63, 64
14शवों की अंत्येष्टि करने वालों और मृत पशुओं को छूने वालों को क्या कहा जाता था?
व्याख्या: ये कार्य खासतौर से 'दूषित' माने जाते थे, और इन्हें करने वाले चाण्डालों को वर्ण व्यवस्था वाले समाज में सबसे निम्न कोटि में रखा जाता था। निषाद वन प्रांतर में बसने वाले लोगों का उदाहरण है, जिनके लिए शिकार और कंद-मूल संग्रह जीवन-निर्वाह का महत्वपूर्ण साधन था; असंस्कृत भाषाएँ बोलने वाले लोगों को कभी-कभी मलेच्छ कहकर हेय दृष्टि से देखा जाता था; और सूत भाट सारथी थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 64, 65, 66, 74
15चीन से आए किस बौद्ध भिक्षु (लगभग पाँचवीं शताब्दी ईसवी) का कहना है कि अस्पृश्यों को सड़क पर चलते हुए करताल बजाकर अपने होने की सूचना देनी पड़ती थी?
व्याख्या: यह बात फा-शिएन (लगभग पाँचवीं शताब्दी ईसवी) ने कही, ताकि अन्य जन उन्हें देखने के दोष से बच जाएँ। श्वैन-त्सांग (लगभग सातवीं शताब्दी ईसवी) एक और चीनी तीर्थयात्री था, जिसने कहा कि वधिक और सफ़ाई करने वालों को नगर से बाहर रहना पड़ता था। कच्चन मज्झिमनिकाय की कहानी में बुद्ध के अनुयायी हैं, और मातंग मातंग जातक में चाण्डाल के पुत्र के रूप में जन्मे बोधिसत्त हैं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 66, 67, 70
16विवाह के समय मिले उपहारों पर स्त्रियों का स्वामित्व माना जाता था। इस संपत्ति को क्या कहा जाता था?
व्याख्या: इसे स्त्रीधन (अर्थात् स्त्री का धन) कहा जाता था; इसे उनकी संतान विरासत में पा सकती थी, और इस पर उनके पति का कोई अधिकार नहीं होता था। कन्यादान विवाह में कन्या की भेंट है; एकलव्य की कहानी में द्रोण ने गुरु दक्षिणा के रूप में उसके दाहिने हाथ का अँगूठा माँगा; और पैतृक संपत्ति माता-पिता की मृत्यु के बाद संतानों में बँटती थी, जिसमें ज्येष्ठ पुत्र विशेष भाग का अधिकारी था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 57, 62, 68
17सुत्तपिटक के मिथक के अनुसार सब लोगों द्वारा चुने गए मनुष्य को कौन-सी उपाधि मिलनी थी?
व्याख्या: मिथक में लोग तय करते हैं कि वे एक ऐसे मनुष्य का चयन करें जो उचित बात पर क्रोधित हो और जिसे प्रताड़ित या निष्कासित किया जाना चाहिए उसे प्रताड़ित या निष्कासित करे; बदले में वे उसे चावल का अंश देंगे: "सब लोगों द्वारा चुने जाने के कारण उसे महासम्मत्त की उपाधि प्राप्त होगी।" बोधिसत्त का अर्थ है पूर्वजन्म में बुद्ध (मातंग जातक), सूत भाट सारथी थे, और अनूठा ब्राह्मण गोतमी-पुत्त सिरी-सातकनि ने स्वयं को बताया था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 63, 67, 72, 74
18आरंभिक संस्कृत परंपरा में महाभारत को किस श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है 'ऐसा ही था'?
व्याख्या: महाभारत को 'इतिहास' की श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है 'ऐसा ही था।' फिर भी किताब कहती है कि महाभारत में सचमुच हुए किसी युद्ध का स्मरण किया जा रहा था या नहीं, इस बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। 'मंत्र' ऐसे ग्रंथ थे जो अनुष्ठानकर्ताओं द्वारा पढ़े और उच्चरित किए जाते थे; उपदेशात्मक महाभारत की विषयवस्तु का एक भाग है; और मातंग जातक पालि में लिखी एक कहानी है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 67, 72, 73, 74
191951-52 में पुरातत्ववेत्ता बी.बी. लाल ने मेरठ ज़िले (उ.प्र.) के किस गाँव में उत्खनन किया, जिसका नाम महाभारत के एक नगर से मिलता है?
व्याख्या: बी.बी. लाल ने हस्तिनापुर नामक गाँव में उत्खनन किया। यह पुरास्थल गंगा के ऊपरी दोआब वाले क्षेत्र में है, जहाँ कुरु राज्य भी स्थित था, इसलिए यह कुरुओं की राजधानी हस्तिनापुर हो सकती थी; पर नामों की समानता मात्र एक संयोग भी हो सकता है। अहिच्छत्र (उत्तर प्रदेश) के एक मंदिर की दीवार पर महाभारत के एक युद्ध के दृश्य वाली मिट्टी की मूर्ति (चित्र 3.4) उत्कीर्ण है; इंद्रप्रस्थ और मथुरा पृष्ठ 56 के मानचित्र में दिखाए गए नगर हैं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 56, 60, 75
20समसामयिक बांग्ला लेखिका महाश्वेता देवी की लघु कथा "कुंती ओ निषादी" महाभारत के किस प्रसंग के अंत से शुरू होती है?
व्याख्या: संस्कृत पाठ में दुर्योधन पांडवों को छल से लाक्षागृह में जलाकर मार देना चाहता है; पांडव सुरंग खोदकर भाग निकलते हैं, और कुंती के भोज में आई एक निषादी और उसके पाँच पुत्र पांडवों द्वारा लगाई गई आग में उसी लाक्षागृह में भस्म हो जाते हैं। महाश्वेता देवी ने कथानक का प्रारंभ वहाँ से किया जहाँ यह प्रसंग खत्म होता है: युद्ध के बाद वनप्रांतर में रह रही कुंती को एक निषादी, जिसकी सास उस आग में मरी थी, याद दिलाती है कि उन्हें उन छ: निर्दोष लोगों की याद एक बार भी नहीं आई। द्रौपदी का स्वयंवर (स्रोत 16), द्यूत क्रीड़ा और एकलव्य की कहानी (स्रोत 7) इस अध्याय के अलग प्रसंग हैं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3, पृष्ठ 77, 78

