अध्याय 1लेखन कला और शहरी जीवन

परख प्रश्न8 मिनट

00-Master-Teaching-Notes.md (NCERT पृ. 1–28)

आयाम: जागरूकता (50%) • संवेदनशीलता (20%) • सृजनात्मकता (30%) आधार: 00-Master-Teaching-Notes.md (NCERT पृ. 1–28)

भाग अ — जागरूकता (Awareness)

अ-1. केस/परिस्थिति-आधारित प्रश्न

1एक पुरातत्त्वविद को खुदाई में एक भवन मिला जिसकी बाहरी दीवारें कुछ-कुछ अंतरालों के बाद भीतर और बाहर की ओर मुड़ी हुई हैं; फ़र्श पर मछली की हड्डियों की परतें जमी हैं और पास से राशन-सूचियों वाली पट्टिकाएँ मिली हैं।
(क) यह भवन क्या रहा होगा? अपने निष्कर्ष के तीन आधार लिखिए।
(ख) राशन-सूचियाँ इस भवन की किस भूमिका की ओर संकेत करती हैं?
मंदिर — मुड़ी दीवारें मंदिर की पहचान; मछली-हड्डियाँ = भेंट-अवशेष; राशन-सूचियाँ = नियोक्ता/वितरण-केंद्र की भूमिका (मुख्य शहरी संस्था)।

उत्तर देखिए

उत्तर-संकेत:

2मान लीजिए 3000 ई.पू. के उरुक में एक मुद्रा-निर्माता है। सूची बनाइए —
(क) उसे किन-किन वस्तुओं/सेवाओं की आवश्यकता होगी और वे कौन देगा?
(ख) इस सूची से शहरी अर्थव्यवस्था का कौन-सा सिद्धांत सिद्ध होता है?
काँसे के औज़ार (औज़ार-निर्माता), रंगीन पत्थर (व्यापारी), कोयला/ईंधन, भोजन (गाँव-मंदिर वितरण);

उत्तर देखिए

श्रम-विभाजन व परस्पर निर्भरता।

उत्तर-संकेत:

3मारी के एक अधिकारी की डायरी के अंश की कल्पना कीजिए: “आज दक्षिण जाता जलपोत रोका; उसमें 300 पीपे मदिरा, कुछ चक्कियाँ और लकड़ी थी; प्रभार वसूल कर आगे जाने दिया।”
(क) प्रभार की दर क्या रही होगी?
(ख) यह प्रकरण मारी की समृद्धि का कौन-सा स्रोत दर्शाता है?
(ग) जलपोत में सम्भावित माल कहाँ से कहाँ जा रहा था?
माल-मूल्य का ~10%; पारगमन-व्यापार (Transit trade) पर नियंत्रण; तुर्की-सीरिया-लेबनान के ऊँचे इलाकों से फ़रात-मार्ग से दक्षिणी नगरों को।

उत्तर देखिए

उत्तर-संकेत:

अ-2. दावा-कारण (Assertion–Reason)

निर्देश:

  1. अदावा-कारण दोनों सही, कारण दावे की सही व्याख्या
  2. बदोनों सही पर कारण सही व्याख्या नहीं
  3. सदावा सही, कारण गलत
  4. ददावा गलत, कारण सही।

4दावा (A): मेसोपोटामिया के खुदाई-स्थलों से सैकड़ों पट्टिकाएँ मिली हैं।
कारण (R): सूखी पट्टिका पर नया चिह्न नहीं लिखा जा सकता था, इसलिए हर सौदे के लिए नई पट्टिका बनानी पड़ती थी।

उत्तर देखिए

उत्तर: (अ)

5दावा (A): उर नगर में जल-निकासी की नालियाँ घरों के भीतरी आँगनों में मिलीं।
कारण (R): उर के नगर-नियोजकों ने मोहनजोदड़ो की नालियों की नकल की थी।

उत्तर देखिए

उत्तर: (स) — छतों का ढलान भीतर; वर्षा-जल हौज़ों में; उर में नगर-नियोजन था ही नहीं।

6दावा (A): दक्षिणी मेसोपोटामिया के लोग लकड़ी, धातु और पत्थर के लिए व्यापार पर निर्भर थे।
कारण (R): दक्षिणी मेसोपोटामिया में खाद्य-संसाधनों की भी भारी कमी थी।

उत्तर देखिए

उत्तर: (स) — खाद्य-संसाधन समृद्ध थे; कमी खनिज-संसाधनों की थी।

7दावा (A): 650 ई.पू. में भी 2000 ई.पू. की पुरानी पट्टिकाएँ पढ़ी-समझी जा सकती थीं।
कारण (R): सुमेरियन उस समय भी आम बोलचाल की भाषा थी।

उत्तर देखिए

उत्तर: (स) — सुमेरियन ~1800 ई.पू. बाद बोली नहीं जाती थी; विद्यालयों में द्विभाषी पट्टिकाओं से पढ़ाई जाती थी।

अ-3. आँकड़ा/मानचित्र-व्याख्या

8नीचे दी गई संख्याओं का ऐतिहासिक अर्थ एक-एक वाक्य में लिखिए

उत्तर देखिए
संख्यासंदर्भ
3.5 से.मी.पहली पट्टिकाओं की अधिकतम ऊँचाई
5000उरुक-मंदिरों की सूचियों की संख्या
250 हैक्टेयर3000 ई.पू. में उरुक का विस्तार (मोहनजोदड़ो का दोगुना)
1500 × 5 × 10एक मंदिर का श्रम-अनुमान (आदमी × वर्ष × घंटे/दिन)
260ज़िमरीलिम के राजमहल के कक्ष
10%मारी का व्यापार-प्रभार
30,000असुरबनिपाल के पुस्तकालय की पट्टिकाएँ
12गिल्गेमिश महाकाव्य की पट्टिकाएँ

9मानचित्र-कार्य: पश्चिम एशिया के रेखा-मानचित्र पर अंकित कीजिए — दज़ला, फ़रात, उर, उरुक, मारी, बेबीलोन, निनवैह, असीरिया, स्टेपी क्षेत्र, फ़ारस की खाड़ी। फिर बताइए: मारी और उर में से कौन ‘पारगमन-व्यापार’ के लिए बेहतर स्थित है और क्यों?
मारी — फ़रात की उर्ध्वधारा पर, ऊँचे संसाधन-क्षेत्रों व दक्षिणी उपभोक्ता-नगरों के ठीक बीच।

उत्तर देखिए

उत्तर-संकेत:

अ-4. वर्गीकरण

10निम्न को ‘आवश्यक दशा’ और ‘शहरी विकास का परिणाम’ में छाँटिए: उत्पादक खेती • जल-परिवहन • धातु-पत्थर की कमी • श्रम-विभाजन • मुद्राओं का प्रयोग • अनिवार्य श्रम कराने वाली सैन्य-शक्ति • कुम्हार का चाक • राशन-सूचियाँ।

उत्तर देखिए

उत्तर-संकेत: दशाएँ — खेती, जल-परिवहन, संसाधन-कमी (व्यापार-प्रेरक), श्रम-विभाजन; परिणाम — मुद्राएँ, सैन्य-शक्ति/अनिवार्य श्रम, चाक-उत्पादन, राशन-सूचियाँ।

(तर्क-सहित उत्तर स्वीकार्य।)

भाग आ — संवेदनशीलता (Sensitivity)

11(दृष्टिकोण-विविधता) एक ही घटना — “उरुक का 250 हैक्टेयर में विस्तार” — पर तीन दृष्टिकोणों से 3–4 वाक्य लिखिए:
(क) नगर के शासक की दृष्टि से (गौरव, सेना, मंदिर);
(ख) उजड़े हुए गाँव के किसान की दृष्टि से (विस्थापन, अनिवार्य श्रम);
(ग) आधुनिक इतिहासकार की दृष्टि से (साक्ष्य-आधारित संतुलित मूल्यांकन)।

12(श्रम का पक्ष) राशन-सूचियों में मज़दूरों के नाम के आगे अनाज, कपड़ा और तेल की मात्रा लिखी जाती थी। “काम के बदले अनाज” व्यवस्था के बारे में — यह व्यवस्था किन अर्थों में सुरक्षा देती थी और किन अर्थों में विवशता थी? दोनों पक्ष लिखिए।
सुरक्षा — भोजन-वस्त्र की निश्चितता, अकाल-रक्षा; विवशता — कर के स्थान पर अनिवार्य श्रम, विकल्पहीनता, युद्धबंदियों की स्थिति।

उत्तर देखिए

संकेत:

13(लैंगिक दृष्टि) पाठ के आधार पर मेसोपोटामियाई स्त्रियों की स्थिति के संकेत जुटाइए — वधू की दाय, सास की भूमिका, इन्नाना देवी, नैबोनिडस की पुत्री (पुरोहित), वार्का शीर्ष (स्त्री-मूर्ति), दरवाज़े वाला अपशकुन (“पत्नी पति के लिए यंत्रणा”)। इन बिखरे संकेतों से क्या चित्र बनता है और क्या नहीं बन सकता? सावधानी सहित लिखिए।

14(समावेशिता) मेसोपोटामिया का समाज बाहर से आने वालों (अक्कदी, एमोराइट, असीरियाई, आर्मीनियन) के लिए खुला था — वे मज़दूर से राजा तक बने। आज के समाज में प्रवासियों के प्रति दृष्टिकोण से इसकी तुलना करते हुए 5–6 वाक्य लिखिए: “विविधता से जीवन-शक्ति” वाला NCERT-निष्कर्ष आज क्या सिखाता है?

15(सहयोगात्मक बहस) कक्षा को दो दलों में बाँटिए —
पक्ष: “खानाबदोश पशुचारक शहरी जीवन के लिए खतरा थे।”
विपक्ष: “पशुचारक शहरी जीवन के पूरक और सभ्यता की जीवन-शक्ति थे।”
दोनों दल पाठ से 4-4 साक्ष्य जुटाएँ (फसल-नुकसान, लूट बनाम पनीर-चमड़ा-खाद-विनिमय, भाड़े के सैनिक, एमोराइट राजवंश)। अंत में मध्यस्थ-निष्कर्ष लिखवाइए।

भाग इ — सृजनात्मकता (Creativity)

16(कल्पनाशील पुनर्रचना) आप 3200 ई.पू. के उरुक-मंदिर के लिपिक हैं। अपने एक दिन की डायरी लिखिए (150 शब्द) — गीली मिट्टी तैयार करने से लेकर सूचियाँ बनाने और पट्टिका धूप में सुखाने तक; इसमें कम-से-कम पाँच प्रामाणिक विवरण (सरकंडे की तीली, अक्षर-चिह्न, बैल-मछली-रोटी की सूचियाँ, भंडार, सूखने पर अपरिवर्तनीयता) आने चाहिए।

17(डिज़ाइन-चुनौती) अपनी एक बेलनाकार मोहर डिज़ाइन कीजिए — कागज़ की पट्टी पर वह चित्र-पट्टी बनाइए जो मोहर घुमाने पर बने। उसमें शामिल करें: आपका ‘नाम’, आपका ‘इष्टदेव’, आपकी ‘पदीय स्थिति’। फिर दो वाक्य लिखिए कि आपकी मोहर किन दस्तावेज़ों/गठरियों पर लगेगी।

18(प्रति-तथ्यात्मक) “यदि फ़रात नदी न होती…” — तीन परिणाम तर्क-सहित लिखिए (सिंचाई-कृषि, जल-परिवहन/‘विश्व-मार्ग’, मारी का पारगमन-व्यापार)। इसी प्रकार: “यदि पट्टिकाएँ मिट्टी की जगह कागज़ की होतीं, तो आज हम मेसोपोटामिया के बारे में कितना जानते?”
मिट्टी की पक्की पट्टिकाएँ ही हज़ारों वर्ष बचीं; कागज़ नष्ट हो जाता — स्रोत-सम्पदा का प्रश्न।

उत्तर देखिए

संकेत:

19(विचार-संयोजन) गिल्गेमिश की नगर-प्राचीर वाली सांत्वना को आज से जोड़िए: “मनुष्य की अमरता उसकी संतान में नहीं, उसके बनाए सार्वजनिक निर्माणों/संस्थाओं में भी होती है।” — इस विचार पर 100 शब्दों का अनुच्छेद लिखिए; अपने नगर/गाँव का एक उदाहरण दीजिए।

20(रचनात्मक प्रस्तुति) असुरबनिपाल के पुस्तकालय की तर्ज पर अपनी कक्षा का ‘पट्टिका-पुस्तकालय’ बनाइए — हर विद्यार्थी एक ‘पट्टिका’ (कार्ड) पर अध्याय का एक तथ्य लिखे; फिर टोकरी-लेबल प्रणाली से विषयानुसार वर्गीकृत कीजिए (भूगोल / लेखन / मंदिर-राजा / उर / मारी / देन)। सूचीकरण का अनुभव 3 वाक्यों में लिखिए।

भाग ई — मूल्यांकन-रूब्रिक (तीनों आयामों हेतु)

स्तरजागरूकतासंवेदनशीलतासृजनात्मकता
प्रारंभिकतथ्य आंशिक/अशुद्ध; तिथि-स्थान का घालमेल; केस में साक्ष्य नहीं पहचानताएक ही दृष्टिकोण; श्रमिक/स्त्री/प्रवासी पक्ष की उपेक्षापुनर्कथन मात्र; कल्पना में प्रामाणिक विवरण नहीं
दक्षप्रमुख तथ्य सही; केस में 2–3 साक्ष्य पहचानकर सामान्य निष्कर्षदो दृष्टिकोण; सुरक्षा-विवशता जैसे दोनों पक्षों का उल्लेखकल्पना में 3–4 प्रामाणिक विवरण; सरल संयोजन
उन्नततथ्य + प्रक्रिया-समझ (दशा बनाम परिणाम); दावा-कारण में सटीक विवेक; संख्याओं की ऐतिहासिक व्याख्याबहु-दृष्टिकोण संतुलन; साक्ष्य की सीमा की स्वीकृति (“क्या नहीं कह सकते”); वर्तमान से विवेकपूर्ण जुड़ावप्रामाणिक विवरणों से समृद्ध मौलिक रचना; प्रति-तथ्यात्मक तर्क की स्पष्ट शृंखला; स्रोत-चेतना

सुझाया भार: जागरूकता 50% • संवेदनशीलता 20% • सृजनात्मकता 30%