अध्याय 1लेखन कला और शहरी जीवन

रिवीजन नोट्स13 मिनट

00-Master-Teaching-Notes.md (NCERT पृ. 1–28)

★★★= अति महत्त्वपूर्ण • ★★= महत्त्वपूर्ण • ★= सहायक

1. एक पंक्ति में अध्याय

मेसोपोटामिया (दज़ला-फ़रात के बीच, वर्तमान इराक) में विश्व के पहले नगर और पहली लेखन-प्रणाली (कीलाकार लिपि) विकसित हुए — नगर मंदिर, व्यापार और राजा की संस्थाओं से बने, और लेखन लेन-देन के हिसाब की ज़रूरत से जन्मा।

2. मूल तथ्य-कोश★★★

विषयतथ्य
नामयूनानी मेसोस (मध्य) + पोटैमोस (नदी) — दज़ला (Tigris) व फ़रात (Euphrates) के बीच
प्रसिद्धिसंपन्नता, शहरी जीवन, विशाल साहित्य, गणित, खगोलविद्या
क्षेत्र-नामदक्षिण: सुमेर व अक्कद → (2000 ई.पू. बाद) बेबीलोनिया; उत्तर (1100 ई.पू. से): असीरिया
भाषाएँसुमेरियन → अक्कदी (2400 ई.पू. बाद; सिकंदर-काल तक) → अरामाइक (1400/1000 ई.पू. से; आज भी इराक के कुछ भागों में)
पुरातत्त्व1840 के दशक से; उरुक व मारी में दशकों की खुदाई
बाइबिल-संबंधओल्ड टेस्टामेंट का ‘शिमार’ = सुमेर; 1873 का ब्रिटिश म्यूज़ियम जलप्लावन-पट्टिका अभियान; जलप्लावन-नायक: नोआ (बाइबल) = ज़िउसूद्र/उतनापिष्टिम (मेसोपोटामिया)

3. भूगोल★★★

  • पूर्वोत्तर: हरे-भरे मैदान, पर्याप्त वर्षा → 7000–6000 ई.पू. में खेती शुरू।
  • उत्तर: ‘स्टेपी’ घास के मैदान → पशुपालन श्रेष्ठ।
  • पूर्व: दज़ला की सहायक नदियाँ → ईरान का परिवहन-मार्ग।
  • दक्षिण: रेगिस्तान → यहीं पहले नगर व लेखन; कारण — फ़रात-दज़ला की उपजाऊ बारीक मिट्टी (सिल्ट) व फ़रात की धाराएँ = सिंचाई-नहरें (गेहूँ, जौ, मटर, मसूर)।
  • ★★★रोम साम्राज्य सहित सभी पुरानी व्यवस्थाओं में दक्षिणी मेसोपोटामिया की खेती सबसे अधिक उपज देने वाली।
  • अन्य साधन: भेड़-बकरी (मांस-दूध-ऊन), मछली, पिंड खजूर।
  • ! सावधानी: शहर केवल ग्रामीण समृद्धि से नहीं बने।

4. शहरीकरण की शर्तें★★★

  1. खाद्य से आगे की अर्थव्यवस्था — व्यापार, उत्पादन, सेवाएँ; जनसंख्या-घनत्व।
  2. श्रम-विभाजन (Division of Labour) — शहरी जीवन की विशेषता; उदाहरण: मुद्रा-निर्माता को काँसे के औज़ार, रंगीन पत्थर, कोयला — सब दूसरों से।
  3. सामाजिक संगठन — आयात-भंडारण, गाँवों से अनाज का संग्रह-वितरण, आदेश-पालन, लिखित हिसाब।
  4. कुशल परिवहन — जलमार्ग सबसे सस्ता (धारा/हवा से चलती नावें; चारे का खर्च नहीं); फ़रात = ‘विश्व-मार्ग’।
  5. विनिमय-व्यापार — दक्षिण में पत्थर/लकड़ी/धातु नहीं → तुर्की-ईरान-खाड़ी से लकड़ी, ताँबा, टिन, चाँदी, सोना, सीपी ↔ बदले में कपड़ा व कृषि-उत्पाद।
  • काँसा = ताँबा + राँगा (टिन); प्राचीनतम नगर = कांस्य युग (लगभग 3000 ई.पू.)। ★★
  • वार्का शीर्ष: उरुक, 3000 ई.पू., सफ़ेद संगमरमर; लाजवर्द-सीपी-डामर की जड़ाई; विश्व-प्रसिद्ध। ★★

5. लेखन कला★★★

  • लेखन = उच्चरित ध्वनियों के दृश्य संकेत।
  • 3200 ई.पू.: पहली पट्टिकाएँ — चित्र-चिह्न व संख्याएँ; उरुक के मंदिरों की लगभग 5000 सूचियाँ (बैल, मछली, रोटी)।
  • कारण: समाज को लेन-देन का स्थायी हिसाब चाहिए था (सौदे अलग-अलग समय, कई लोग, कई माल)।
  • तकनीक: गीली चिकनी मिट्टी → हाथ-भर पट्टी → चिकनी सतह → सरकंडे की तीखी नोक से कीलाकार चिह्न (Cuneiform) → धूप में पक्की (बर्तन-जैसी मज़बूत); सूखने पर नया चिह्न असंभव → हर सौदे की अलग पट्टिका → इसीलिए सैकड़ों पट्टिकाएँ मिलीं। क्यूनीफ़ार्म = लातिनी क्यूनियस (खूँटी) + फ़ोर्मा (आकार)।
  • 2600 ई.पू.: वर्ण कीलाकार; भाषा सुमेरियन; प्रयोग बढ़े — शब्दकोश, भूमि-हस्तांतरण की कानूनी मान्यता, राजाओं के कार्य, कानून-उद्घोषणा।
  • प्रणाली: चिह्न = अक्षर (Syllables) (-put-, -la-, -in- जैसे), स्वर-व्यंजन नहीं → सैकड़ों चिह्न → लेखन बड़ी कुशलता; किसी भाषा की ध्वनियों का दृश्य प्रस्तुतीकरण = महान बौद्धिक उपलब्धि।
  • साक्षरता: बहुत कम लोग; पढ़ सकने वाला राजा प्रशस्ति में लिखवाता; पत्र पढ़कर सुनाए जाते — “मेरे ‘अमुक’ मालिक को… उनका ‘अमुक’ सेवक…”
  • एनमर्कर-महाकाव्य (उरुक): मंदिर सजाने हेतु लाजवर्द के लिए अरट्टा को दूत; थका दूत संदेश भूला → राजा ने पहली पट्टिका लिखी। निष्कर्ष: (1) मेसोपोटामियाई सोच — राजा ने ही व्यापार व लेखन की व्यवस्था की, (2) लेखन = सूचना एकत्र कर दूर भेजने का साधन, (3) शहरी संस्कृति की श्रेष्ठता का प्रतीक। ★★★

6. मंदिर और राजा★★★

  • 5000 ई.पू. से दक्षिण में बस्तियाँ; नगर-प्रकार: मंदिर-नगर, व्यापार-केंद्र, शाही नगर।
  • पहला ज्ञात मंदिर: कच्ची ईंटों का छोटा देवालय। देवता: उर के चंद्र देवता; इन्नाना (प्रेम व युद्ध की देवी)।
  • मंदिर बनाम घर: मंदिर की बाहरी दीवारें खास अंतरालों पर भीतर-बाहर मुड़ी होती थीं।
  • देवता खेतों, मत्स्य-क्षेत्रों, पशुधन का सैद्धांतिक स्वामी; मंदिर में उपज-प्रसंस्करण (तेल, पिसाई, कताई-बुनाई); मंदिर = व्यवस्थापक, नियोक्ता, अभिलेख-पालक → मुख्य शहरी संस्था।
  • कृषि-संकट: बाढ़ / धारा-मार्ग बदलना; ऊपरी गाँव पानी रोकते/गाद नहीं निकालते → ज़मीन-पानी के झगड़े।
  • युद्ध-नेतृत्व → राजत्व: विजयी मुखिया — लूट बाँटते, बंदी = चौकीदार/नौकर; पहले अस्थायी (“आज हैं तो कल गए”); बाद में कल्याण + मंदिर-भेंटें + संगठित वितरण → स्थायी राजा, समुदाय पर पूर्ण नियंत्रण।
  • उरुक: 3000 ई.पू. के आसपास 250 हैक्टेयर (बाद के मोहनजोदड़ो का दोगुना); दर्जनों गाँव उजड़े (विस्थापन); प्राचीर पहले से; अस्तित्व 4200 ई.पू.–400 ईसवी; 2800 ई.पू. में 400 हैक्टेयर।
  • अनिवार्य श्रम: कर नहीं तो श्रम अनिवार्य; बदले में अनाज — राशन-सूचियाँ (नाम + अनाज, कपड़ा, तेल); एक मंदिर = 1500 आदमी × 5 वर्ष × 10 घंटे/दिन। ★★★
  • उरुक की तकनीकी प्रगति (3000 ई.पू.): काँसे के औज़ार; ईंटों के स्तंभ (शहतीर-लकड़ी नहीं थी); रंगीन मिट्टी-शंकुओं की मोज़ेक; आयातित पत्थर की मूर्तिकला; कुम्हार का चाक → बड़े पैमाने पर एक-जैसे बर्तन। ★★

7. मोहरें (बेलनाकार मुद्राएँ)★★

  • भारत: ठप्पेदार पत्थर-मोहरें; मेसोपोटामिया: बेलनाकार, आर-पार छिदी, तीली से गीली मिट्टी पर घुमाई → लगातार चित्र।
  • कुशल कारीगर; लेख — मालिक का नाम, इष्टदेव, पदीय स्थिति।
  • उपयोग: गठरी/बर्तन के मुँह पर लीपकर मोहरबंद; पत्र-पट्टिका पर घुमाने से प्रामाणिकता; मुद्रा = सार्वजनिक जीवन में नगरवासी की भूमिका।

8. शहरी समाज व उर नगर★★★

  • संभ्रांत वर्ग: धन-दौलत छोटे वर्ग में केंद्रित — उर की शाही कब्रों में आभूषण, सोने के पात्र, सीपियाँ, लाजवर्द-जड़े वाद्य, सोने के खंजर।
  • परिवार: एकल परिवार (Nuclear family) आदर्श (विवाहित बेटा प्रायः माता-पिता संग); पिता मुखिया।
  • विवाह-विधि: घोषणा → वधू के माता-पिता की सहमति → वर पक्ष के उपहार → रस्म + उपहार-विनिमय + सह-भोजन + मंदिर-भेंट → सास के आने पर पिता से दाय-हिस्सा। उत्तराधिकार (घर, पशुधन, खेत) पुत्रों को।
  • उर नगर (खुदाई 1930 का दशक):
    • टेढ़ी-मेढ़ी संकरी गलियाँ → गाड़ियाँ नहीं पहुँचतीं; माल गधों पर।
    • अनियमित भू-खंड → नगर-नियोजन का अभाव; गली-नालियाँ नहीं (★मोहनजोदड़ो में थीं)।
    • नालियाँ-नलिकाएँ भीतरी आँगनों में — छतों का ढलान भीतर; वर्षा-जल हौज़ों में (गलियाँ कीचड़ से बचाने हेतु)।
    • कूड़ा गलियों में → सतह ऊँची → दहलीज़ें ऊँची।
    • रोशनी दरवाज़ों से (आँगन-मुखी) → गोपनीयता।
    • शकुन: ऊँची देहली = धन; सामने का दरवाज़ा दूसरे के घर की ओर न खुले = सौभाग्य; मुख्य दरवाज़ा बाहर की ओर खुले = पत्नी पति के लिए यंत्रणा।
    • कब्रिस्तान (शासक + जन-साधारण); कुछ शव घर के फ़र्श के नीचे।

9. मारी — व्यापारिक नगर★★★

  • 2000 ई.पू. के बाद शाही राजधानी; स्थिति — फ़रात की उर्ध्वधारा (उपजाऊ दक्षिण में नहीं)।
  • कृषि + पशुपालन साथ-साथ; अधिकांश भूमि भेड़-बकरी चराने हेतु।
  • विनिमय: पशुचारक ← अनाज, धातु-औज़ार | किसान ← पनीर, चमड़ा, मांस, गोबर-खाद।
  • संघर्ष: गड़रियों के पशु फसल रौंदते; खानाबदोश लूट; बस्ती वाले रास्ता/पानी रोकते।
  • यायावरों का क्रम: मज़दूर/भाड़े के सैनिक → समृद्ध होकर बसे → कुछ ने सत्ता पाई — अक्कदी, एमोराइट, असीरियाई, आर्मीनियन।
  • मारी के राजा एमोराइट: पोशाक मूल निवासियों से भिन्न; मेसोपोटामियाई देवों का आदर + स्टेपी-देवता डैगन का मंदिर। → समाज खुला; मिश्रण से सभ्यता में जीवन-शक्ति। ★★★
  • ज़िमरीलिम का राजमहल (1810–1760 ई.पू.): 2.4 हैक्टेयर, 260 कक्ष, एक ही प्रवेश द्वार (उत्तर); आँगन 106 (सफ़ेद पत्थर) व 131; कमरा 132 — भित्ति-चित्र; निवास + प्रशासन + कीमती धातु-आभूषण उत्पादन; इतना प्रसिद्ध कि देखने उत्तरी सीरिया का राजा आया; राजा की मेज़ — आटा, रोटी, मांस, मछली, फल, मदिरा, बीयर।
  • सतर्कता: चरवाहों की आवाजाही की छूट पर कड़ी नज़र; अग्नि-संकेतों की रिपोर्ट (छापे की आशंका)।
  • व्यापार: फ़रात के रास्ते लकड़ी, ताँबा, टिन, तेल, मदिरा; जलपोत मारी में रुकते — जाँच + माल-मूल्य का ~10% प्रभार; (एक नाव = 300 मदिरा-पीपे); अलाशिया (साइप्रस) से ताँबा; टिन भी; काँसा = मुख्य औद्योगिक सामग्री।
  • सूत्र-वाक्य: मारी सैनिक दृष्टि से उतना सबल नहीं, पर व्यापार-समृद्धि में अद्वितीय। ★★★

10. गिल्गेमिश महाकाव्य★★

  • 12 पट्टिकाओं पर; गिल्गेमिश — एनमर्कर के कुछ बाद उरुक का शासक, महान योद्धा।
  • मित्र की मृत्यु → अमरत्व की खोज → सागर-महासागर पार, विफल → उरुक लौटा → प्राचीर की पकी ईंटों को देख भावविभोर → कथा का अंत नगर की प्राचीर पर।
  • अर्थ: जनजातीय योद्धा की तरह पुत्रों में नहीं — प्रजा के बनाए नगर में सांत्वना = नगर ही स्मारक/अमरता। युद्ध में नष्ट शहरों को काव्यों में याद किया जाता था।

11. लेखन की देन — कालगणना और गणित★★★

  • विज्ञान हेतु लिखित दस्तावेज़ आवश्यक; सबसे बड़ी देन: कालगणना व गणित की विद्वत्तापूर्ण परंपरा।
  • 1800 ई.पू. की पट्टिकाएँ: गुणा-भाग, वर्ग-वर्गमूल, चक्रवृद्धि ब्याज; √2 = 1 + 24/60 + 51/60² + 10/60³ (= 1.41421296; सही 1.41421356)।
  • समय-विभाजन (आज तक): वर्ष = 12 महीने (चंद्र-परिक्रमा), महीना = 4 हफ़्ते, दिन = 24 घंटे, घंटा = 60 मिनट; प्रसार: सिकंदर के उत्तराधिकारी → रोम → इस्लाम जगत → मध्ययुगीन यूरोप।
  • ग्रहणों (वर्ष-मास-दिन सहित) व तारों-तारामंडलों की स्थिति का अभिलेखन।
  • आधार: विद्यालय — पुरानी पट्टिकाओं का पठन व नकल; कुछ छात्र लेखाकार नहीं, परंपरा को आगे बढ़ाने वाले विद्वान बनाए जाते।

12. परंपरा-संरक्षण के दो प्रयत्न★★

असुरबनिपाल (668–627 ई.पू.) — निनवैह का पुस्तकालय

  • असीरियाई साम्राज्य (लौहयुग): शिखर 720–610 ई.पू., मिस्र तक; अर्थव्यवस्था लूटमार (बेगार-नज़राना)।
  • असीरियाई शासक बेबीलोनिया को उच्च संस्कृति का केंद्र मानते।
  • संग्रह: इतिहास, महाकाव्य, शकुन साहित्य, ज्योतिष, स्तुतियाँ, कविताएँ; दक्षिण भेजे लिपिक; सुमेरियन 1800 ई.पू. बाद बोली नहीं जाती थी पर द्विभाषी पट्टिकाओं से पढ़ाई जाती → 650 ई.पू. में 2000 ई.पू. की पट्टिकाएँ पठनीय।
  • गिल्गेमिश की प्रतियाँ + लिपिक का नाम-तिथि; सूचीकरण (टोकरी-लेबल); 1000 मूलपाठ, ~30,000 पट्टिकाएँ, विषयानुसार वर्गीकृत।

नैबोनिडस — स्वतंत्र बेबीलोन का अंतिम शासक

  • पृष्ठभूमि: नैबोपोलास्सर ने 625 ई.पू. में असीरियाई आधिपत्य से बेबीलोनिया मुक्त कराया; बेबीलोन 539 ई.पू. (एकेमेनिड-विजय) और 331 ई.पू. (सिकंदर) तक दुनिया का प्रमुख नगर — 850+ हैक्टेयर, तिहरी चहारदीवारी, ज़िगुरात (सीढ़ीदार मीनार), शोभायात्रा-मार्ग।
  • स्वप्न: उर के देवता का आदेश — महिला पुरोहित नियुक्त करे; ~1150 ई.पू. के राजा का स्टेल मिला → वेशभूषा देख अपनी पुत्री को पुरोहित बनाया।
  • सारगोन (अक्कद, ~2370 ई.पू.) की टूटी मूर्ति → कुशल शिल्पियों से खंडित सिर बदलवाया।

13. कालरेखा (पृ. 28) — रटने योग्य★★★

7000-6000 खेती (उत्तर) → 5000 पुराने मंदिर (दक्षिण) → 3200 लेखन → 3000 उरुक विशाल नगर, काँसा → 2700-2500 आरंभिक राजा (गिल्गेमिश) → 2600 कीलाकार लिपि → 2400 अक्कदी → 2370 सारगोन → 2000 लिपि का प्रसार (सीरिया-तुर्की-मिस्र); मारी-बेबीलोन का उदय → 1800 गणित-पाठ; सुमेरियन बोलचाल बंद → 1100 असीरियाई राज्य → 1000 लोहा → 720-610 असीरियाई साम्राज्य → 668-627 असुरबनिपाल → 331 सिकंदर ने बेबीलोन जीता → पहली सदी ईसवी अक्कदी-कीलाकार प्रयोग में → 1850 ईसवी कीलाकार लिपि पढ़ी गई

14. स्मरण-सूत्र

  • भाषा-क्रम: “सु-अ-आ” — सुमेरियन → अक्कदी → आरामाइक।
  • यायावर जातियाँ: “अ-ए-अ-आ” — अक्कदी, एमोराइट, असीरियाई, आर्मीनियन।
  • शहरीकरण-शर्तें: “खेत-जल-श्रम-संगठन-लेख” (उत्पादक खेती, जल-परिवहन, श्रम-विभाजन, सामाजिक संगठन, लिखित हिसाब)।
  • मारी: “10% वाला नगर” (व्यापार-प्रभार); उरुक: “चाक व शंकु का नगर”; उर: “टेढ़ी गलियों का नगर”; निनवैह: “पुस्तकालय-नगर”; बेबीलोन: “तिहरी दीवार-ज़िगुरात”।

15. NCERT अभ्यास — उत्तर-संकेत

  1. प्राकृतिक उर्वरता/खाद्य-स्तर ही कारण? — आंशिक: सिल्ट-सिंचाई से सर्वाधिक उपज (रोम-तुलना), भेड़-मछली-खजूर; पर NCERT चेतावनी — केवल ग्रामीण समृद्धि नहीं; संगठन, व्यापार, परिवहन, श्रम भी आवश्यक।
  2. दशाएँ बनाम परिणाम: आवश्यक दशाएँ — (क) उत्पादक खेती, (ख) जल-परिवहन, (ग) धातु-पत्थर की कमी (व्यापार-प्रेरक), (घ) श्रम-विभाजन; फलस्वरूप — (ङ) मुद्राओं का प्रयोग, (च) राजाओं की सैन्य-शक्ति से अनिवार्य श्रम। (उत्तर में तर्क दें; कुछ बिंदु दोनों ओर तर्क-योग्य।)
  3. पशुचारक = खतरा: पशु फसल रौंदते; खानाबदोश गाँवों पर हमला कर माल लूटते; बदले में बस्ती वाले रास्ता-पानी रोकते → संघर्ष स्थायी; पर विनिमय-पक्ष भी लिखें।
  4. मंदिर घर जैसे: मंदिर देवता का घर ही था; खुले आँगन के चारों ओर कमरे — घर की तरह; अंतर केवल बाहरी दीवारों के मोड़।
  5. नयी संस्थाएँ: मंदिर (मुख्य शहरी संस्था), राजत्व/सेना, अनिवार्य श्रम व राशन-व्यवस्था, लेखन-अभिलेख, व्यापार-संगठन, मुद्रा-प्रणाली, विद्यालय; राजा की पहल पर — सेना, अनिवार्य श्रम, दूर-देशीय व्यापार-अभियान, मंदिर-निर्माण/वितरण-संचालन।
  6. पुरानी कहानियाँ: एनमर्कर-महाकाव्य (व्यापार-लेखन की शुरुआत), गिल्गेमिश-महाकाव्य (नगर-गौरव), जलप्लावन-कथा (ज़िउसूद्र/उतनापिष्टिम), सृष्टि-काव्य (मौखिक परंपरा)।