कक्षा: XII | बोर्ड: RBSE (NCERT पाठ्यपुस्तक) | माध्यम: हिंदी कुल कालांश: 11 (प्रत्येक 40-45 मिनट) + 1 मूल्यांकन कालांश पुस्तक: भारतीय इतिहास के कुछ विषय, भाग-3 | पृष्ठ: 286–315
अ. अधिगम उद्देश्य
| क्रम | उद्देश्य | संज्ञानात्मक स्तर |
|---|---|---|
| 1 | “नेता इतिहास बनाता भी है, इतिहास से बनता भी है” — इस सूत्र को गाँधी-जीवन पर लागू कर सकेंगे | बोध/मूल्यांकन |
| 2 | 1915 की वापसी से BHU-भाषण तक — गाँधी की ‘उद्घोषणा’ का दोहरा अर्थ समझा सकेंगे | विश्लेषण |
| 3 | चंपारन-खेड़ा-अहमदाबाद → रॉलेट → असहयोग-खिलाफ़त → चौरी-चौरा की शृंखला बता सकेंगे | बोध |
| 4 | ‘महात्मा’-छवि के निर्माण (धोती-चरखा; शाहिद अमीन की अफ़वाहें) का विश्लेषण कर सकेंगे | विश्लेषण |
| 5 | नमक-चयन की रणनीति, दांडी-यात्रा और उसके तीन ऐतिहासिक महत्त्व समझा सकेंगे | बोध/विश्लेषण |
| 6 | गोलमेज़-वार्ताओं की विफलता व गाँधी-अम्बेडकर पृथक-निर्वाचिका बहस के दोनों पक्ष रख सकेंगे | मूल्यांकन |
| 7 | 1935-47 (एक्ट, इस्तीफ़े, क्रिप्स, भारत छोड़ो, ध्रुवीकरण, विभाजन) का क्रम बता सकेंगे | बोध |
| 8 | गाँधी के अंतिम दिनों व शहादत के ऐतिहासिक अर्थ की विवेचना कर सकेंगे | बोध/संवेदनशीलता |
| 9 | ★चार स्रोत-प्रकारों (भाषण/पत्र, आत्मकथा, पुलिस-रिपोर्ट, अख़बार) की स्थिति-सापेक्ष जाँच कर सकेंगे | मूल्यांकन/सृजन |
★सर्वोच्च उद्देश्य (9): §6 ‘गाँधी को समझना’ इस अध्याय की विशिष्ट देन है — बोर्ड में अभ्यास 4 व 9 सीधे यहीं से।
ब. पूर्व-ज्ञान की जाँच
- अध्याय 10 — अफ़वाह-विधि (“दबे डर की अनुगूँज”) — शाहिद अमीन-प्रसंग में सीधे प्रयुक्त (पृ. 294 का बॉक्स ख़ुद अध्याय 10 का हवाला देता है)
- अध्याय 9-10 — सरकारी स्रोतों की पक्षधरता — पाक्षिक रिपोर्टों पर लागू होगी
- कक्षा X — असहयोग/सविनय अवज्ञा की रूपरेखा (अब स्रोत-गहराई से)
- समसामयिक — 26 जनवरी, 2 अक्टूबर, राष्ट्रपिता — इनके ऐतिहासिक मूल इसी अध्याय में
स. आवश्यक सामग्री
| सामग्री | उपयोग |
|---|---|
| NCERT पाठ्यपुस्तक (भाग-3) | अनिवार्य |
| 02-Presentation.pptx | सभी कालांश |
| गुजरात का नक्शा (दांडी-मार्ग हेतु) | कालांश 6, 11 |
| ★नमक की डली व चरखे का चित्र/मॉडल | hooks |
| ₹ के नोट पर गाँधी-चित्र | कालांश 4 (छवि-चर्चा) |
| स्रोत 7 के तीन पत्रों की प्रतियाँ (भूमिका-पाठ हेतु) | कालांश 9 |
कालांश-वार योजना
🕐 कालांश 1 — वापसी और उद्घोषणा (प्रस्तावना + §1)
उपविषय: दक्षिण अफ्रीका; 1915 का भारत; BHU-भाषण (पृ. 286-289)
(क) आरंभ — 8 मिनट★
“फरवरी 1916। बनारस में राजाओं-रईसों से भरा मंच — जिनके दान से विश्वविद्यालय बना है। बोलने खड़ा होता है एक ‘अपेक्षाकृत अज्ञात’ आदमी — और राजाओं के सामने ही कहता है: अपने गहने उतारकर देश के हवाले कर दीजिए! यह आदमी कौन है, और इतना साहस कहाँ से लाया?”
(ख) विकास — 25 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | प्रस्तावना — गैरीबाल्डी-वाशिंगटन-हो ची मिन्ह ↔ ‘पिता’; ★“न केवल इतिहास बनाता है बल्कि स्वयं भी इतिहास द्वारा बनाया जाता है” | सूत्र लिखवाइए |
| 2 | जनवरी 1915 वापसी; दो दशक विदेश; ★देवनेसन — “दक्षिण अफ्रीका ने ही ‘महात्मा’ बनाया”; सत्याग्रह-तकनीक, धर्म-सौहार्द, जाति-भेद पर चेतावनी | — |
| 3 | 1915 ≠ 1893 — कांग्रेस-शाखाएँ; स्वदेशी 1905-07; लाल-बाल-पाल (अखिल भारतीय चरित्र); उदारवादी — गोखले + जिन्ना (गुजराती, लंदन-प्रशिक्षित वकील) | तीन-धारा तालिका |
| 4 | गोखले की सलाह — एक वर्ष ब्रिटिश भारत की यात्रा | — |
| 5 | ★★BHU फरवरी 1916 — निमंत्रण का आधार; भाषण-उद्धरण; दोहरा अर्थ (तथ्य + मंशा की प्रथम सार्वजनिक उद्घोषणा) | उद्धरण-वाचन |
| 6 | दिसंबर 1916 लखनऊ — चंपारन का किसान | अगले कालांश का सेतु |
(ग) समेकन — 7 मिनट
🗣️ चर्चा (पृ. 289) — 1915-पूर्व आंदोलनों की सूची बनवाइए; क्या गाँधी की टिप्पणी न्यायसंगत थी — दो पक्ष।
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- गाँधी भारत कब लौटे? 2. ‘महात्मा’ किसने-कहाँ बनाया (देवनेसन)? 3. लाल-बाल-पाल कौन? 4. BHU-भाषण में मुक्ति किसके माध्यम से बताई गई?
🕐 कालांश 2 — चंपारन से जलियाँवाला तक (§2 आरंभ)
उपविषय: तीन स्थानिक संघर्ष; रॉलेट सत्याग्रह (पृ. 289-290)
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | 1917 चंपारन — काश्तकारी की सुरक्षा + फ़सल-चयन की आज़ादी | — |
| 2 | 1918 गुजरात — अहमदाबाद (मिल-मज़दूर, बेहतर स्थितियाँ); खेड़ा (फ़सल चौपट → लगान माफ़ी) | — |
| 3 | ★तीनों से — “ग़रीबों के लिए गहरी सहानुभूति” वाले राष्ट्रवादी; पर स्थानिक संघर्ष | — |
| 4 | 1919 — युद्धकालीन प्रतिबंध; रॉलेट समिति की संस्तुतियाँ → रॉलेट एक्ट | — |
| 5 | देशव्यापी अभियान — बंद; ★पंजाब की कड़वाहट (युद्ध-सेवा के बदले ईनाम की जगह एक्ट); गाँधी क़ैद; अप्रैल 1919 — जलियाँवाला बाग: ब्रिगेडियर का हुक्म, 400+ मृत | — |
| 6 | ★“रॉलेट सत्याग्रह से ही गाँधी जी एक सच्चे राष्ट्रीय नेता बन गए” | वाक्य रेखांकित |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- चंपारन में मुद्दा क्या था? 2. खेड़ा की माँग? 3. रॉलेट समिति के अध्यक्ष? 4. जलियाँवाला में कितने मारे गए?
🕐 कालांश 3 — असहयोग : उठान और वापसी (§2 शेष)
उपविषय: असहयोग-खिलाफ़त; अभूतपूर्व भागीदारी; चौरी-चौरा; मुक़दमा (पृ. 290-291)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“गाँधी ने वादा किया — असहयोग ठीक से चले तो एक वर्ष के भीतर स्वराज। वादा पूरा नहीं हुआ — फिर भी NCERT कहती है: 1857 के बाद पहली बार अंग्रेज़ी राज की नींव हिल गई। असफल आंदोलन नींव कैसे हिलाता है?”
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | असहयोग का कार्यक्रम — स्कूल-कॉलेज-न्यायालय का त्याग; कर-बंदी; “ऐच्छिक संबंधों का परित्याग”; एक वर्ष में स्वराज का दावा | — |
| 2 | खिलाफ़त — बॉक्स: 1919-20; मुहम्मद-शौकत अली; ऑटोमन पवित्र स्थान; जज़ीरात-उल-अरब; अतातुर्क; हिंदू-मुस्लिम संयुक्त मोर्चे की आशा | बॉक्स-वाचन |
| 3 | ★भागीदारी — विद्यार्थी-वकील; 1921: 396 हड़तालें, 6 लाख श्रमिक, 70 लाख कार्यदिवस; आंध्र की पहाड़ी जनजातियाँ (वन-क़ानून); अवध (कर-बंदी); कुमाऊँ (सामान ढोने से इनकार) | संख्या-चिप्स |
| 4 | ★★“अपने हितों से मेल खाते तरीक़े” — स्थानीय नेतृत्व की अवज्ञा भी | 🧭 अ.9-10 की जन-कार्रवाई से जोड़ |
| 5 | लुई फिशर-उद्धरण; “ताश के क़िले” ≠ यहाँ — “नींव हिल गई” | — |
| 6 | फरवरी 1922 चौरी-चौरा — थाने में आग, पुलिसकर्मियों की मृत्यु → तत्काल वापसी; गाँधी का तर्क-उद्धरण | ★नैतिक-चर्चा |
| 7 | मार्च 1922 — राजद्रोह-गिरफ़्तारी; ★जज ब्रूमफील्ड का भाषण — “महान देशभक्त…”; 6 वर्ष; रिहाई पर प्रसन्नता की बात | उद्धरण-वाचन |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- 1921 की हड़तालों के आँकड़े? 2. खिलाफ़त के नेता? 3. चौरी-चौरा कब-क्या? 4. गाँधी को सज़ा किस जज ने, कितनी?
🕐 कालांश 4 — ‘महात्मा’ कैसे बने (§2.2 + स्रोत 1-2)
उपविषय: जन-नेता; धोती-चरखा; शाहिद अमीन की अफ़वाहें; संगठन (पृ. 291-295)
(क) आरंभ — 5 मिनट
₹ के नोट पर गाँधी-चित्र दिखाकर: “धोती और चश्मा — दुनिया के सबसे पहचाने चेहरों में। पर 1916 में यह आदमी सूट पहनता था। धोती एक ‘चुनाव’ थी — आज समझेंगे किसका और क्यों।”
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | 1922 तक रूपांतरण — BHU-वायदा पूरा; किसान-श्रमिक-कारीगर; ‘महात्मा’ संबोधन — वस्त्र-जीवन-भाषा की समानता | — |
| 2 | ★धोती बनाम सूट/बंदगला; प्रतिदिन चरखा; ★सूत-कताई से मानसिक-शारीरिक श्रम की दीवार टूटी | — |
| 3 | स्रोत 1 — चरखा: मशीन-सनक पर आपत्ति; “सभी के लिए समय-श्रम”; धन का केंद्रीकरण सबके हाथों; “पहिया स्वयं मशीनरी का उत्कृष्ट नमूना” | 🔎 उद्धरण-विश्लेषण |
| 4 | ★★शाहिद अमीन — पूर्वी उ.प्र., फरवरी 1921; गोरखपुर-रिपोर्ट (15-20 हज़ार; भेनी; रुपयों की बारिश; ‘दर्शन’) | कथा-वाचन |
| 5 | स्रोत 2 — कड़ाहा, गेहूँ→तिल; विरोधियों की त्रासदियाँ (आग, बकरी, रोड़ों की बारिश) | 🔎 अ.10-विधि से पाठ |
| 6 | ★‘गाँधी बाबा-महाराज-महात्मा’ = उद्धारक-छवि; व्यापारी-जाति व वकील-पेशे के बावजूद समानुभूति | — |
| 7 | संगठन — नयी शाखाएँ; प्रजा मंडल; मातृभाषा-प्रचार; ★भाषाई-क्षेत्र आधारित प्रांतीय समितियाँ | — |
| 8 | समर्थक-वर्ग — जी.डी. बिड़ला आदि; ★“गरीब किसान और धनी उद्योगपति — कारण भिन्न, संभवत: परस्पर विरोधी”; 1917-22 के अनुयायी (देसाई, पटेल, बोस, आज़ाद, नेहरू, नायडू…) | नाम-सूची |
| 9 | 1924 रिहाई → खादी + छुआछूत-विरोध; ★“राजनीतिक जितने, उतने ही समाज सुधारक” | — |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- सूत-कताई ने कौन-सी दीवार तोड़ी? 2. शाहिद अमीन ने किन स्रोतों से किसान-कल्पना खोजी? 3. प्रजा मंडल क्या थे? 4. प्रांतीय समितियाँ किस आधार पर?
🕐 कालांश 5 — पूर्ण स्वराज और 26 जनवरी (§3 आरंभ)
उपविषय: साइमन-बारदोली; लाहौर 1929; स्वतंत्रता दिवस 1930 (पृ. 295-296)
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | 1928 — राजनीति में वापसी की सोच; साइमन कमीशन (सभी श्वेत) का अखिल भारतीय विरोध — गाँधी का ‘आशीर्वाद’; बारदोली को भी | — |
| 2 | ★लाहौर, दिसंबर 1929 — दो महत्त्व: नेहरू की अध्यक्षता (युवा पीढ़ी को छड़ी); ‘पूर्ण स्वराज’ की उद्घोषणा | — |
| 3 | ★26 जनवरी 1930 — ‘स्वतंत्रता दिवस’: ध्वज, देशभक्ति-गीत; गाँधी के निर्देश — नगाड़े से समय; ध्वज-वंदन; रचनात्मक कार्य (कताई/‘अछूतों’ की सेवा/हिंदू-मुस्लिम पुनर्मिलन…) | निर्देश-सूची |
| 4 | प्रतिज्ञा — “स्वतंत्रता… अहरणीय अधिकार…; सरकार वंचित करे-दमन करे तो बदलने अथवा समाप्त करने का भी अधिकार” | उद्धरण |
| 5 | 🧭 आज के गणतंत्र दिवस से जोड़ — 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू करने का चुनाव इसी स्मृति से | समसामयिक सेतु |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- साइमन कमीशन का विरोध क्यों? 2. लाहौर अधिवेशन के दो महत्त्व? 3. पहला ‘स्वतंत्रता दिवस’ कब-कैसे मना?
🕐 कालांश 6 — मुट्ठी भर नमक (§3.1 + स्रोत 3-4)
उपविषय: नमक-चयन की रणनीति; दांडी-यात्रा; 60,000 गिरफ़्तारियाँ (पृ. 296-299)
(क) आरंभ — 8 मिनट★
हाथ में नमक की डली: “यह दुनिया की सबसे सस्ती चीज़ों में है — और 1930 में इसी ने दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य की नींव हिला दी। कैसे? क्योंकि क़ानून कहता था — यह डली बनाना जुर्म है।”
(ख) विकास — 27 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | ★★नमक-चयन = “कुशल समझदारी” — हर घर में अपरिहार्य; घरेलू निर्माण भी वर्जित; ऊँचे दाम; एकाधिपत्य अलोकप्रिय → व्यापक असंतोष का संगठन | — |
| 2 | भारतीय समझ गए, अंग्रेज़ नहीं — इर्विन को पूर्व-सूचना, पर महत्त्व नहीं समझे | — |
| 3 | ★12 मार्च 1930 — साबरमती से; तीन हफ़्ते; 6 अप्रैल — मुट्ठी भर नमक, “क़ानून की निगाह में अपराधी”; समानांतर यात्राएँ | मानचित्र-कार्य (अभ्यास 10) |
| 4 | स्रोत 3 — नमक कर की चौतरफा मार (14 गुना कर; विनाश-नीति; चार अभिशाप) | 🔎 दोनों प्रश्न |
| 5 | स्रोत 4 (5 अप्रैल, दांडी) — शांति की सेना; गिरफ़्तारी-प्रश्न; ★“जब एक पूरा राष्ट्र उठ खड़ा होता है… नेता की ज़रूरत नहीं रह जाती” | 🔎 औपनिवेशिक राज्य-दृष्टि |
| 6 | विरोध की धाराएँ — वन-क़ानून उल्लंघन, हड़तालें, बहिष्कार; ★~60,000 गिरफ़्तार (गाँधी सहित) | — |
| 7 | वसना-भाषण — ऊँची जातियों से: “अछूतों की सेवा… प्रायश्चित… हिंदू-मुसलमान-पारसी-सिख एकजुट — ये स्वराज की सीढ़ियाँ” | उद्धरण-वाचन |
| 8 | निगरानी-रिपोर्टें — DPS: “शांत और निश्चिंत… ताकत बढ़ती जा रही”; ★टाइम — ‘तकुए जैसा शरीर’ के मज़ाक से हफ़्ते भर में ‘साधु-राजनेता’ तक | दृष्टि-परिवर्तन |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- यात्रा कब शुरू, कब नमक बना? 2. नमक-कर कभी-कभी मूल्य का कितना गुना? 3. कितने गिरफ़्तार? 4. टाइम ने पहले-बाद में क्या कहा?
🕐 कालांश 7 — गोलमेज़ की तीन चुनौतियाँ (§3.2 + स्रोत 5-6)
उपविषय: यात्रा के तीन महत्त्व; RTC-1/2; गाँधी-इर्विन; अम्बेडकर-बहस (पृ. 300-302)
(ख) विकास — 32 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | ★★यात्रा के तीन कारण — विश्व-नज़र (यूरोप-अमेरिका प्रेस); महिला-भागीदारी (कमलादेवी चट्टोपाध्याय — ‘पुरुषों तक सीमित न रखें’); ★राज की नश्वरता का अहसास | तीन-बिंदु |
| 2 | RTC-1 (नवंबर 1930) — प्रमुख नेता अनुपस्थित → निरर्थक | — |
| 3 | जनवरी 1931 रिहाई → ★गाँधी-इर्विन समझौता — तीन शर्तें (आंदोलन वापस; क़ैदी रिहा; तटीय नमक-अनुमति); रैडिकल आलोचना — स्वतंत्रता का आश्वासन नहीं | — |
| 4 | RTC-2 (1931 अंत) — गाँधी का दावा बनाम ★तीन चुनौतियाँ: मुस्लिम लीग; राजे-रजवाड़े; अम्बेडकर (निचली जातियों का प्रतिनिधित्व नहीं) | तीन-पक्ष तालिका |
| 5 | स्रोत 5 (गाँधी) — पृथक निर्वाचिका से “दासता स्थायी”; कलंक मज़बूत; अस्पृश्यता का विनाश ही हल | — |
| 6 | स्रोत 6 (अम्बेडकर) — “कोढ़ियों की तरह”; आर्थिक आश्रितता; इतिहास ने रास्ते बंद किए; ★“एकमात्र रास्ता — राजनीतिक सत्ता में हिस्सा” | 🗣️ काल्पनिक संवाद (पृ. 302) — गृहकार्य |
| 7 | खाली हाथ वापसी → आंदोलन फिर; विलिंग्डन का निजी ख़त — “अगर गाँधी न होता…” | — |
| 8 | 1935 एक्ट → 1937 चुनाव — ★11 में से 8 प्रांतों में कांग्रेस-‘प्रधानमंत्री’ | — |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- यात्रा के तीन महत्त्व? 2. गाँधी-इर्विन की शर्तें? 3. RTC-2 में किसने चुनौती दी? 4. 1937 में कांग्रेस कितने प्रांतों में?
🕐 कालांश 8 — युद्ध, क्रिप्स और भारत छोड़ो (§3.2 शेष + §4)
उपविषय: 1939-42; भारत छोड़ो; सतारा; 1944-46 (पृ. 301-304)
(ख) विकास — 32 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | सितंबर 1939 — WW2; गाँधी-नेहरू हिटलर-नात्सियों के कट्टर आलोचक; प्रस्ताव — युद्धोत्तर स्वतंत्रता के बदले सहायता; ख़ारिज → अक्टूबर 1939 मंत्रिमंडलों के इस्तीफ़े; 1940-41 व्यक्तिगत सत्याग्रह | — |
| 2 | मार्च 1940 — लीग का स्वायत्तता-प्रस्ताव; ★“तीन धुरियों का संघर्ष” — कांग्रेस, लीग, ब्रिटिश | — |
| 3 | चर्चिल — “साम्राज्य को टुकड़े-टुकड़े करने के लिए नियुक्त नहीं”; 1942 बसंत — क्रिप्स; वार्ता-भंग का कारण — भारतीय रक्षा-सदस्य की माँग | — |
| 4 | ★अगस्त 1942 — “अंग्रेज़ों भारत छोड़ो” — गाँधी फ़ौरन गिरफ़्तार; युवाओं की हड़तालें-तोड़फोड़; जयप्रकाश नारायण व समाजवादी भूमिगत; सतारा-मेदिनीपुर की ‘प्रतिसरकारें’; दमन में साल से ज़्यादा | — |
| 5 | सतारा-बॉक्स — ग़ैर-ब्राह्मण आंदोलन-पृष्ठभूमि; सेवा दल-तूफ़ान दल; जन-अदालतें; कुनबी-दलित आधार; 1946 तक | बॉक्स-वाचन |
| 6 | ★“सही मायने में जनांदोलन — लाखों आम हिंदुस्तानी”; कॉलेज छोड़ जेल | — |
| 7 | ★इसी दौर में जिन्ना-लीग का विस्तार — पंजाब-सिंध में पहचान | — |
| 8 | जून 1944 रिहाई; जिन्ना-वार्ताएँ; 1945 लेबर-सरकार; वावेल की बैठकें; ★1946 चुनाव — सामान्य सीटें कांग्रेस, मुस्लिम सीटें लीग — “ध्रुवीकरण पूरा” | — |
| 9 | कैबिनेट मिशन (गर्मी 1946) विफल → ★16 अगस्त 1946 प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस — कलकत्ता से बंगाल-बिहार-संयुक्त प्रांत-पंजाब; “कुछ स्थानों पर मुसलमान, कुछ पर हिंदू निशाना” | — |
| 10 | फरवरी 1947 माउंटबेटन; अंतिम वार्ता विफल → स्वतंत्रता + विभाजन; 15 अगस्त; ★संविधान सभा में ‘राष्ट्रपिता’ की उपाधि; “करतल ध्वनि” | — |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- मंत्रिमंडलों ने इस्तीफ़ा कब-क्यों दिया? 2. क्रिप्स-वार्ता क्यों टूटी? 3. प्रतिसरकारें कहाँ बनीं? 4. प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस कब?
🕐 कालांश 9 — आख़िरी, बहादुराना दिन (§5)
उपविषय: 15 अगस्त 1947 कलकत्ता में; दिल्ली; 30 जनवरी (पृ. 305-306)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“15 अगस्त 1947 — दिल्ली में झंडे और रोशनी। पर जिस आदमी को उसी दिन ‘राष्ट्रपिता’ कहा गया, वह 1500 किलोमीटर दूर कलकत्ता में था — 24 घंटे के उपवास पर। क्यों?”
(ख) विकास — 30 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | 15 अगस्त — न कार्यक्रम, न झंडा; 24 घंटे उपवास; ★स्वतंत्रता “अकल्पनीय कीमत पर” — राष्ट्र विभाजित | — |
| 2 | तेंदुलकर — अस्पताल-शरणार्थी शिविरों के चक्कर; सिख-हिंदू-मुसलमानों से अतीत भुलाकर भाईचारे का आह्वान | — |
| 3 | ★कांग्रेस का ‘अल्पसंख्यकों के अधिकार’ प्रस्ताव — ‘दो राष्ट्र सिद्धांत’ अस्वीकार; “लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र” का संकल्प | उद्धरण |
| 4 | ★“श्रेष्ठतम क्षण” — बंगाल-शांति के बाद दिल्ली; पंजाब जाने की इच्छा; सभाओं में क़ुरान-पाठ पर आपत्तियाँ; “पाकिस्तान में भी अल्पसंख्यकों के लिए समान रूप से चिंतित” | — |
| 5 | 20 जनवरी हमला — अविचलित; 26 जनवरी की सभा — “बुरी घड़ी बीत चुकी”; “सभी वर्गों-धर्मों की समानता”; ★“भौगोलिक-राजनीतिक रूप से बँटे पर हृदय से सदैव मित्र एवं भाई” | — |
| 6 | ★★30 जनवरी 1948 — प्रार्थना-सभा में गोली; हत्यारे का आत्मसमर्पण — नाथूराम गोडसे | — |
| 7 | शोक — ऑरवेल-आइंस्टीन के संदेश; ★टाइम की लिंकन-तुलना — धर्मांध अमरीकी/धर्मांध हिंदू; मानव-समता/धर्म-मैत्री में विश्वास की कीमत | उद्धरण-वाचन |
| 8 | चित्र 11.15 — लोक-छवि में देवता-रूप; नेहरू-पटेल चिता के दोनों ओर | 🧭 §5.6 (अ.10) की छवि-विधि |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- 15 अगस्त को गाँधी कहाँ थे, क्या कर रहे थे? 2. हत्या कब-कहाँ? 3. टाइम ने किससे तुलना की? 4. किन दो विख्यात गैर-भारतीयों के शोक-संदेश?
🕐 कालांश 10 — गाँधी को समझना : चार खिड़कियाँ (§6 + स्रोत 7-8)
उपविषय: भाषण/पत्र; आत्मकथा; पुलिस-रिपोर्ट; अख़बार (पृ. 307-313)
(क) आरंभ — 5 मिनट
“एक ही आदमी — चार आईने: भाषण में वह नेता है, चिट्ठी में थका दोस्त, आत्मकथा में स्वयं का चित्रकार, पुलिस-फ़ाइल में ‘समस्या’। इतिहासकार चारों आईनों को मिलाकर चेहरा बनाता है।”
(ख) विकास — 32 मिनट
| क्रम | बिंदु | विधि |
|---|---|---|
| 1 | 6.1 — भाषण = सार्वजनिक; पत्र = निजी (गुस्सा-पीड़ा-हताशाएँ); ★पर फ़र्क़ टूटता भी है — प्रकाशन-आशंका भाषा तय करती है; ‘हरिजन’ में पत्र; ए बंच ऑफ़ ओल्ड लेटर्स | — |
| 2 | ★★स्रोत 7 — 1936 का संकट: पृष्ठभूमि (नेहरू-समाजवाद; प्रसाद-पटेल का इस्तीफ़ा-पत्र; उद्योगपतियों का बयान; वर्धा-मध्यस्थता) | कथा-स्थापना |
| 3 | तीन पत्रों का भूमिका-पाठ — तीन विद्यार्थी: प्रसाद (1 जुलाई), नेहरू (5 जुलाई), बापू (15 जुलाई — “काँटों का ताज… उतारना मत”) | नाटकीय वाचन |
| 4 | 🔎 (क)(ख)(ग) प्रश्न — आदर्शों का विकास (समाजवाद-बहस); गाँधी की मध्यस्थ-भूमिका; आंतरिक कार्यप्रणाली | चर्चा |
| 5 | 6.2 आत्मकथाएँ — स्मृति-आधारित; ★“अपनी तस्वीर गढ़ने का तरीक़ा”; चुप्पियों को पढ़ना | — |
| 6 | 6.3 पुलिस की नज़र — पाक्षिक रिपोर्टें; ★“आला अधिकारी क्या मानना चाहते थे”; नमक-यात्रा = ‘नाटक-करतब-हताश कोशिश’ की प्रस्तुति | — |
| 7 | स्रोत 8 — तीन पखवाड़ों की झलकियाँ (गुजरात की ‘व्यस्तता’, बंगाल का ‘उत्साह नहीं’ पर महिलाओं की बढ़ती संख्या, केसरी-उद्धरण, नेहरू-गिरफ़्तारी 14 अप्रैल) | 🔎 चारों प्रश्न |
| 8 | 6.4 अख़बार — पूर्वाग्रह; लंदन बनाम राष्ट्रवादी अख़बार; ★“जितनी नज़र… उतनी ही चिंता” | — |
(घ) मूल्यांकन-प्रश्न
- नेहरू का पत्र-संकलन? 2. आत्मकथा-पाठ में क्या खोजना चाहिए? 3. पाक्षिक रिपोर्टें कौन बनाता था? 4. गृह विभाग यात्रा को क्या कहता रहा?
🕐 कालांश 11 — पुनरावृत्ति : कालक्रम, मानचित्र, स्रोत
(क) गतिविधियाँ — 35 मिनट
| क्रम | गतिविधि |
|---|---|
| 1 | काल-रेखा-खेल — 1915→1948 के 15 पड़ाव क्रमबद्ध |
| 2 | मानचित्र (अभ्यास 10) — दांडी-मार्ग: साबरमती→नडियाद→आणंद→भरूच→सूरत→नवसारी→दांडी |
| 3 | स्रोत-मिलान — उद्धरण → स्रोत (BHU/चरखा/दांडी-भाषण/गाँधी-अम्बेडकर/तीन पत्र/पाक्षिक रिपोर्ट/टाइम) |
| 4 | तीन आंदोलनों की तुलना-तालिका — असहयोग/सविनय अवज्ञा/भारत छोड़ो (कारण-कार्यक्रम-भागीदारी-परिणाम) |
| 5 | पाँच भ्रांतियाँ (मास्टर 5.3) — सही/ग़लत + कारण |
| 6 | अभ्यास 1-9 के उत्तर-ढाँचे मौखिक |
(ख) समापन — 5 मिनट
सूत्र-वाक्य (मास्टर 5.4); अगला अध्याय-सेतु: “विभाजन की जिस क़ीमत पर स्वतंत्रता मिली, उसकी कहानियाँ अगले अध्याय में — मौखिक इतिहास से।”
(ग) गृहकार्य
- अभ्यास 6, 8, 9 लिखित; 🗣️ पृ. 302 का गाँधी-अम्बेडकर काल्पनिक संवाद; परियोजना 11/12 वैकल्पिक।
🕐 कालांश 12 — मूल्यांकन
| खंड | प्रारूप | अंक |
|---|---|---|
| क | 5 × MCQ (तिथियाँ, नाम, आँकड़े) | 5 |
| ख | 5 × एक-पंक्ति (लाल-बाल-पाल, खिलाफ़त, कमलादेवी, प्रजा मंडल, ए बंच ऑफ़ ओल्ड लेटर्स) | 5 |
| ग | 2 × लघूत्तर — नमक-चयन की रणनीति; चरखा-प्रतीक | 6 |
| घ | 1 × निबंधात्मक — आंदोलन का स्वरूप-परिवर्तन अथवा गोलमेज़-विफलता | 6 |
| ङ | 1 × स्रोत-आधारित — स्रोत 1/4/5-6/7 पर तीन प्रश्न | 4 |
| च | मानचित्र — दांडी-मार्ग | 4 |
| योग | 30 |
द. समावेशी शिक्षण-संकेत
- मूल्य-शिक्षा का स्वर्ण-अवसर: चौरी-चौरा (साधन-शुद्धता), गाँधी-अम्बेडकर संवाद (असहमति का शिष्टाचार), अंतिम दिन (क्षमा-भाईचारा) — उपदेश नहीं, स्रोत-आधारित चर्चा से।
- राजस्थान-जोड़: प्रजा मंडल आंदोलन राजस्थान की रियासतों में विशेष सक्रिय (जयपुर, मारवाड़, मेवाड़ प्रजा मंडल) — RBSE राजस्थान-पत्र से सीधा सेतु; बिजौलिया किसान आंदोलन का समांतर।
- धीमे अधिगमकर्ता: काल-रेखा के 15 पड़ाव + तीन आंदोलन-तालिका + दांडी-मार्ग — न्यूनतम सुरक्षित।
- प्रतिभाशाली: “इतिहास द्वारा बनाया जाता है” पर निबंध; अम्बेडकर-गाँधी बहस के दोनों पक्षों की तर्क-संरचना; पाक्षिक रिपोर्टों की ‘चयनित अंधता’।