अध्याय 6विनिर्माण उद्योग

पाठ्यपुस्तक से आगे12 मिनट

यह फ़ाइल किसके लिए है — शिक्षक के लिए। यहाँ वे बातें हैं जो पाठ्यपुस्तक में नहीं हैं, या जो पाठ्यपुस्तक में हैं पर अब पुरानी पड़ चुकी हैं।

! परीक्षा में उत्तर पाठ्यपुस्तक के अनुसार ही लिखवाइए। यह फ़ाइल कक्षा को जीवित बनाने के लिए है। जहाँ नया आँकड़ा है, वहाँ बच्चों से कहिए: “किताब में जो लिखा है वही लिखना; पर आज असल में क्या है, वह भी जान लो।” हर तथ्य नीचे स्रोत-कड़ी के साथ जाँचा हुआ है।


भाग 1 — अध्याय का सबसे बड़ा छेद: राजस्थान का नाम ही नहीं है★

पाठ्यपुस्तक इस पूरे अध्याय में राजस्थान का नाम सिर्फ़ एक बार लेती है — उर्वरक उद्योग की राज्य-सूची में। मानचित्रों में बीकानेर, जयपुर (ऊनी वस्त्र) और जयपुर (सॉफ़्टवेयर पार्क) दिखते ज़रूर हैं, पर पाठ में कहीं नहीं।

असल में राजस्थान भारत के दो बड़े उद्योगों में सबसे आगे की क़तार में है।

1.1 भीलवाड़ा — भारत की ‘वस्त्र नगरी’

पाठ्यपुस्तक वस्त्र उद्योग पर दो पूरे पृष्ठ लिखती है और महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु का नाम लेती है — पर राजस्थान का नहीं।

बातविवरण
कहाँभीलवाड़ा ज़िला, राजस्थान
पहचानभारत की ‘टेक्सटाइल सिटी’ (वस्त्र नगरी)
इकाइयाँ400 से अधिक विनिर्माण इकाइयाँ
क्या बनता हैकृत्रिम (सिंथेटिक) कपड़ा, सूत (yarn) और डेनिम
हिस्सेदारीभारत में बनने वाले पॉलिएस्टर कपड़े और सूटिंग का लगभग आधा भाग भीलवाड़ा से आता है; और राजस्थान के सूत उत्पादन का 44 प्रतिशत भी यहीं से

कक्षा में कहने योग्य वाक्य — “किताब कहती है कि सूती वस्त्र उद्योग महाराष्ट्र-गुजरात में है। सही है। पर तुम्हारे अपने राज्य में एक शहर ऐसा है जिसे भारत की वस्त्र नगरी कहते हैं — भीलवाड़ा। भारत में जो पॉलिएस्टर का कपड़ा और सूटिंग बनता है, उसका लगभग आधा वहीं बनता है। यह तुम्हारी किताब में नहीं है, पर यह सच है।” ★यह RBSE की दृष्टि से सबसे कीमती जानकारी है — क्योंकि राजस्थान बोर्ड के प्रश्न-पत्र में ‘अपने राज्य का उदाहरण’ देने पर अलग से अंक मिलते हैं। स्रोत — Fibre2Fashion — The Textile Industry of Bhilwara, Rising Rajasthan — Textiles

1.2 सीमेंट — राजस्थान भारत में पहले स्थान पर पहुँचने वाला है

पाठ्यपुस्तक सीमेंट उद्योग पर लिखती है कि इकाइयाँ गुजरात में लगाई गई हैं — और फिर एक क्रियाकलाप में पूछती है “भारत में यह उद्योग अन्य किन राज्यों में स्थित है?” पर उत्तर नहीं देती।

बातविवरण
राजस्थान का हिस्साभारत के कुल सीमेंट उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत
स्थापित क्षमता55 मिलियन टन — आंध्र प्रदेश (62.5 मिलियन टन) के बाद दूसरा
आगे क्याजैसलमेर की नई परियोजनाओं के बाद राजस्थान के देश का सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक राज्य बनने की राह पर होने की ख़बरें हैं

★यह जोड़ बच्चों से ख़ुद निकलवाइए — “सीमेंट किससे बनता है?” → चूना पत्थर “पिछले अध्याय में चूना पत्थर में कौन-सा राज्य पहला था?” → राजस्थान, 22% “तो सीमेंट के कारख़ाने कहाँ ज़्यादा होंगे?” → राजस्थान में जिस दिन बच्चा यह जोड़ ख़ुद बना लेता है, उस दिन उसने भूगोल पढ़ना सीख लिया। स्रोत — Drishti IAS — Rajasthan to Become India’s Largest Cement Producer, IBEF — Indian Cement Industry

भाग 2 — जहाँ पाठ्यपुस्तक के आँकड़े अब बदल चुके हैं

2.1 लोहा-इस्पात — भारत अब विश्व मेंदूसरे स्थान पर है

पाठ्यपुस्तक लोहा-इस्पात उद्योग का पूरा वर्णन करती है पर भारत का विश्व में स्थान नहीं बताती (जबकि चीनी और पटसन के लिए बताती है)।

  • भारत 2018 से लगातार विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात (crude steel) उत्पादक है, केवल चीन से पीछे।
  • 2025 में उत्पादन लगभग 156 मिलियन टन रहा।

कक्षा में यह जोड़िए — “किताब कहती है कि इस्पात के उत्पादन और खपत को देश के विकास का पैमाना माना जाता है। तो सोचो — भारत आज दुनिया में दूसरे नंबर पर है। इससे क्या पता चलता है?” स्रोत — Akashvani News — India retains second-largest steel producer position, IBEF — Steel, Ministry of Steel — Overview of Steel Sector

2.2 वस्त्र उद्योग — भारत विश्व में सबसे ऊपर की क़तार में

पाठ्यपुस्तक कहती है कि वस्त्र उद्योग “देश का अकेला उद्योग है जो… परिपूर्ण तथा आत्मनिर्भर है” — पर विश्व में स्थान नहीं बताती।

  • वस्त्र उत्पादन की दृष्टि से भारत चीन के बाद विश्व में दूसरे स्थान पर है, और उसका वैश्विक हिस्सा लगभग 15 प्रतिशत है।
  • वहीं वस्त्र बाज़ार के आकार की दृष्टि से सरकारी स्रोत भारत को पाँचवें स्थान पर बताते हैं।

! यह अंतर बच्चों को समझाइए — “कोई कहता है दूसरा, कोई कहता है पाँचवाँ। दोनों सही हो सकते हैं — क्योंकि एक कितना बनाते हैं नाप रहा है और दूसरा कितने का बाज़ार है नाप रहा है। आँकड़ा पढ़ते समय हमेशा देखो कि किसका आँकड़ा है।” यह बात भूगोल पढ़ने का असली कौशल है, और PARAKH के प्रश्नों में काम आती है। स्रोत — IBEF — Textiles, PIB Press Release, Invest India — Textiles & Apparel

भाग 3 — भोपाल गैस त्रासदी: वह प्रश्न जो किताब पूछकर छोड़ देती है

पृष्ठ 66 पर पाठ्यपुस्तक लिखती है — “ज़हरीली गैसों का रिसाव बहुत भयानक तथा दूरगामी प्रभावों वाला हो सकता है। क्या आप भोपाल गैस त्रासदी के विषय में जानते हैं?” — और फिर आगे बढ़ जाती है।

अधिकांश बच्चे नहीं जानते। यह जगह दो मिनट माँगती है।

  • रात 2–3 दिसंबर 1984, भोपाल (मध्य प्रदेश) के एक कीटनाशक कारख़ाने से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) नामक ज़हरीली गैस का रिसाव हुआ।
  • सोते हुए शहर पर गैस फैल गई; हज़ारों लोग उसी रात मर गए, और लाखों प्रभावित हुए।
  • इसे विश्व की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटना माना जाता है।
  • इसका असर दूरगामी रहा — बाद में जन्मे बच्चों में विकार, और आसपास की ज़मीन तथा भूमिगत जल में आज तक प्रदूषण।

कक्षा में इस तरह जोड़िए — “किताब में जो ‘दूरगामी प्रभाव’ लिखा है, उसका मतलब यह है कि जो लोग उस रात पैदा भी नहीं हुए थे, वे भी उसका असर भुगत रहे हैं। प्रदूषण एक रात में होता है, पर उसका हिसाब पीढ़ियाँ चुकाती हैं।” और फिर उसी पन्ने पर लौटिए — “अब समझ आया कि किताब क्यों कहती है कि कारख़ानों में सुरक्षा नियम ज़रूरी हैं?”

भाग 4 — पटसन उद्योग: किताब की चुप्पी

पाठ्यपुस्तक कहती है कि 2010-11 में लगभग 80 पटसन उद्योग थे — यह आँकड़ा अब पंद्रह साल पुराना है, और उद्योग की हालत तब से लगातार कठिन रही है।

बच्चों से पूछने लायक़ प्रश्न —

“1947 में मिलें भारत में रह गईं और तीन-चौथाई जूट का खेत बांग्लादेश चला गया। यह समस्या कैसे हल हुई होगी?”

उत्तर की दिशा (यह किताब में नहीं है) —

  • भारत को पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और ओडिशा में जूट की खेती बढ़ानी पड़ी
  • और साथ ही प्लास्टिक की बोरियों ने जूट की जगह लेनी शुरू कर दी, जिससे उद्योग पर दोहरी मार पड़ी
  • आज सरकार जूट को पर्यावरण-मित्र विकल्प के रूप में बढ़ावा देती है, क्योंकि यह प्राकृतिक रूप से गल जाता है जबकि प्लास्टिक नहीं

★यहाँ एक सुंदर जोड़ बनता है — “अध्याय के आख़िर में किताब प्रदूषण की बात करती है। और यहाँ शुरू में जूट की। सोचो — जूट की बोरी और प्लास्टिक की बोरी में से कौन-सी बेहतर है, और क्यों?” — यही अध्याय के दोनों हिस्सों को जोड़ देता है।

भाग 5 — पाँच बातें जो पाठ्यपुस्तक नहीं बताती, पर बच्चे पूछते हैं

बच्चों का प्रश्नसीधा उत्तर
“सूती कपड़ा बनाने के लिए नमीयुक्त जलवायु क्यों चाहिए?”क्योंकि सूखी हवा में धागा बार-बार टूट जाता है। नमी में रेशा लचीला रहता है। इसीलिए मुंबई जैसे समुद्र के पास वाले शहरों में मिलें लगीं।
“मिल कपास के खेत के पास लगती है, पर लोहे का कारख़ाना खान के पास — फ़र्क़ क्यों?”दोनों एक ही नियम मानते हैं — जो चीज़ ढुलाई में भारी या ख़राब हो जाती है, उद्योग उसी के पास जाता है। गन्ना ढुलाई में सूक्रोस खो देता है, कोयला जलकर राख हो जाता है — इसलिए दोनों उद्योग कच्चे माल के पास हैं।
“बेंगलुरु ही सॉफ़्टवेयर की राजधानी क्यों बना?”किताब सिर्फ़ ‘हार्डवेयर व सॉफ़्टवेयर का निरंतर विकास’ कहती है। असल कारण यह भी है कि सॉफ़्टवेयर उद्योग को न कच्चा माल चाहिए, न भारी परिवहन — उसे चाहिए पढ़े-लिखे लोग और अच्छा मौसम। इसीलिए यह उद्योग खान या खेत के पास नहीं, शहरों के पास लगता है।
“गर्म पानी भी प्रदूषण कैसे हुआ?”क्योंकि गर्म पानी में घुली हुई ऑक्सीजन कम हो जाती है, और मछलियों का दम घुटने लगता है। पानी गंदा न हो तब भी वह जानलेवा हो सकता है।
“उद्योग बंद क्यों नहीं कर देते?”क्योंकि तब रोज़गार, निर्यात, विदेशी मुद्रा और विकास — सब रुक जाएगा। इसीलिए किताब का उत्तर है — “पर्यावरणीय संचेतना से युक्त आर्थिक विकास”, यानी उद्योग चलें पर समझदारी से।

भाग 6 — कक्षा में तुरंत उपयोग करने योग्य छह पंक्तियाँ

  1. “तुम्हारी क़मीज़ किसी खेत में उगी थी। उसे यहाँ तक लाने में कम से कम आठ तरह के लोग लगे।”
  2. “1947 में मिलें भारत में रह गईं और खेत बांग्लादेश चला गया — आदमी बँट गया तो उद्योग भी बँट गया।”
  3. “एक टन एल्यूमिनियम के लिए छह टन तक चट्टान खोदनी पड़ती है। धातु हल्की है, पर उसकी क़ीमत भारी।”
  4. “किताब कहती है इस्पात देश के विकास का पैमाना है। भारत आज दुनिया में दूसरे नंबर पर है।”
  5. “भीलवाड़ा को भारत की वस्त्र नगरी कहते हैं — और वह तुम्हारे अपने राज्य में है।”
  6. “कारख़ाने का एक लिटर गंदा पानी आठ लिटर साफ़ पानी ख़राब कर देता है। सोचो, पूरे शहर का हिसाब क्या होगा।”

भाग 7 — एक कक्षा-गतिविधि जो पूरे अध्याय को समेट देती है

पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 70 पर प्रोजेक्ट कार्य देती है — “अपने क्षेत्र के एक कृषि आधारित तथा एक खनिज आधारित उद्योग को चुनें।” इसे ऐसे कराइए —

चरणक्या करना है
1हर विद्यार्थी अपने ज़िले/क़स्बे का एक उद्योग चुने — आटा चक्की, तेल घानी, ईंट का भट्टा, सीमेंट, संगमरमर कटाई, कपड़ा रंगाई — कुछ भी
2तीन प्रश्नों के उत्तर लिखे — (क) कच्चा माल क्या है? (ख) वह उद्योग वहीं क्यों लगा? (ग) क्या वह प्रदूषण करता है?
3कक्षा में सुनाए — और बोर्ड पर कृषि आधारित व खनिज आधारित दो ख़ाने बनाकर सबके उद्योग बाँटे जाएँ
4अंत में गिनती कीजिए — “हमारे ज़िले में कितने उद्योग प्रदूषण करते हैं? और उनमें से कितने कुछ रोकथाम करते हैं?”

यह गतिविधि इसलिए काम करती है क्योंकि यह अध्याय के दोनों पक्ष — उद्योग का लाभ और उसका नुक़सान — बच्चों के अपने मोहल्ले में दिखा देती है।


शिक्षक के लिए अंतिम टिप्पणी। यह अध्याय बच्चों को नामों की सूची लगता है — मुंबई, रिशरा, भिलाई, बेंगलुरु। इसे जीवित करने का तरीक़ा यह है कि हर उद्योग को एक प्रश्न से जोड़िए: “यह वहीं क्यों लगा?” एक बार यह सवाल पूछने की आदत पड़ गई, तो बच्चा राज्यों के नाम रटना छोड़ देता है और कारण से उत्तर बनाना सीख जाता है। और अध्याय के आख़िरी हिस्से में उसे यह भी समझ आ जाता है कि हर कारख़ाने की एक क़ीमत होती है, जो अक्सर वहाँ रहने वाले लोग चुकाते हैं।