पाठ्यपुस्तक — आर्थिक विकास की समझ, कक्षा 10 अर्थशास्त्र · NCERT · पृष्ठ 55 से 73 (20 पृष्ठ)
शून्य — पढ़ाने से पहले यह समझ लीजिए
यह अध्याय एक ही सवाल के इर्द-गिर्द घूमता है —
“हमारा बाज़ार पिछले बीस-तीस वर्षों में इतना बदल क्यों गया?”
किताब की पहली पंक्तियाँ ही यह पूछती हैं — “वो दिन गुज़र गए, जब भारत की सड़कों पर केवल एम्बेसडर और फिएट कारें ही दिखाई देती थीं… कुछ ही वर्षों में हमारा बाज़ार पूर्णत: परिवर्तित हो गया है।”
और अध्याय की बनावट पाँच सीढ़ियों की है —
| सीढ़ी | पृष्ठ | विषय |
|---|---|---|
| 1 | 56–58 | बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ — उत्पादन का विश्व-स्तरीय बँटवारा |
| 2 | 59–61 | विदेश व्यापार और बाज़ारों का एकीकरण |
| 3 | 61–63 | वैश्वीकरण क्या है और उसे संभव बनाने वाले कारक |
| 4 | 64–66 | उदारीकरण और विश्व व्यापार संगठन |
| 5 | 66–71 | ★भारत में प्रभाव — और न्यायसंगत वैश्वीकरण का संघर्ष |
★★इस अध्याय की आत्मा एक वाक्य में — “वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है।” किताब के अपने शब्दों में — “शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर, अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है।”
बोर्ड पर लिखने और पूरे अध्याय भर रहने देने वाली पंक्ति —
“एक ही वैश्वीकरण ने शहर के अमीर उपभोक्ता को ज़्यादा विकल्प दिए — और होसुर के रवि की फैक्ट्री बंद करवा दी।”
1 — शुरुआत: बाज़ार कैसे बदला (पृष्ठ 55)
“आज के विश्व में, उपभोक्ता के रूप में हममें से कुछ के सामने वस्तुओं और सेवाओं के विस्तृत विकल्प हैं। विश्व के शीर्षस्थ विनिर्माताओं द्वारा निर्मित डिजिटल कैमरे, मोबाइल फोन और टेलीविज़न के नवीनतम मॉडल हमारे लिए सुलभ हैं।” “हमारे बाज़ारों में वस्तुओं के बहुव्यापी विकल्प अपेक्षाकृत नवीन परिघटना है। दो दशक पहले भी आपको भारत के बाज़ारों में वस्तुओं की ऐसी विविधता नहीं मिलेगी।”
और अध्याय के तीन सवाल —
- “हम इस तीव्र परिवर्तन को कैसे समझ सकते हैं?”
- “ऐसे कौन से कारक हैं जो इन परिवर्तनों को ला रहे हैं?”
- “और ये परिवर्तन लोगों का जीवन किस प्रकार प्रभावित कर रहे हैं?”
कक्षा में यह करके शुरू कीजिए — “अपने घर की पाँच चीज़ें गिनाओ जो तुम्हारे दादा-दादी के ज़माने में नहीं थीं।” (मोबाइल, टीवी के नए मॉडल, कोल्ड ड्रिंक, चिप्स के पैकेट, ब्रांडेड जूते) — यही अध्याय की शुरुआत है।
2 — अन्तरदेशीय उत्पादन और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (पृष्ठ 56)★★
पहले क्या था
“बीसवी शताब्दी के मध्य तक उत्पादन मुख्यत: देशों की सीमाओं के अंदर ही सीमित था। इन देशों की सीमाओं को लाँघने वाली वस्तुओं में केवल कच्चा माल, खाद्य पदार्थ और तैयार उत्पाद ही थे।” “भारत जैसे उपनिवेशों से कच्चा माल एवं खाद्य पदार्थ निर्यात होते थे और तैयार वस्तुओं का आयात होता था। व्यापार ही दूरस्थ देशों को आपस में जोड़ने का मुख्य ज़रिया था।”
बहुराष्ट्रीय कंपनी की परिभाषा — शब्दश: याद कीजिए★★
“एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।” “बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उन प्रदेशों में कार्यालय तथा उत्पादन के लिए कारख़ाने स्थापित करती हैं, जहाँ उन्हें सस्ता श्रम एवं अन्य संसाधन मिल सकते हैं। उत्पादन लागत में कमी करने तथा अधिक लाभ कमाने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ऐसा करती हैं।”
एक बहुराष्ट्रीय कंपनी द्वारा उत्पादन का विस्तार — यह उदाहरण बोर्ड पर बनाइए★
| चरण | कहाँ | क्या |
|---|---|---|
| 1 | संयुक्त राज्य अमेरिका | अनुसंधान केन्द्र में उत्पादों का डिज़ाइन |
| 2 | चीन | उसके पुर्ज़े विनिर्मित होते हैं |
| 3 | मेक्सिको और पूर्वी यूरोप | जहाज़ों में लादकर ले जाकर पुर्ज़ों को जोड़ा जाता है |
| 4 | विश्व भर में | तैयार उत्पाद बेचा जाता है |
| 5 | भारत | कंपनी की ग्राहक सेवा कॉल सेंटरों के माध्यम से |
★“इस उदाहरण में, बहुराष्ट्रीय कंपनी केवल वैश्विक स्तर पर ही अपना तैयार उत्पाद नहीं बेच रही है बल्कि अधिक महत्त्वपूर्ण यह है कि वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन विश्व स्तर पर कर रही है। परिणामत: उत्पादन प्रक्रिया क्रमश: जटिल ढंग से संगठित हुई है।”
और हर देश क्या देता है
| देश | क्या फ़ायदा देता है |
|---|---|
| चीन | “एक सस्ता विनिर्माण केन्द्र होने का लाभ” |
| मेक्सिको और पूर्वी यूरोप | “यूरोप, अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों से अपनी निकटता के कारण लाभप्रद” |
| भारत | “अत्यंत कुशल इंजीनियर उपलब्ध हैं, जो उत्पादन के तकनीकी पक्षों को समझ सकते हैं” और “अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवक भी हैं, जो ग्राहक देखभाल सेवायें उपलब्ध करा सकते हैं” |
★★“ये सभी चीज़ें बहुराष्ट्रीय कंपनी की लागत का लगभग 50-60 प्रतिशत बचत कर सकती हैं। अत: वास्तव में, सीमाओं के पार बहुराष्ट्रीय उत्पादन प्रक्रिया के प्रसार से असीमित लाभ हो सकता है।”
पृष्ठ 57 की क्रियाकलाप — “एक ब्रांड लेबल पर ‘मेड इन थाईलैण्ड’ लिखा है, परन्तु उसमें एक भी थाई उत्पाद नहीं है।” पूरा कीजिए — “वस्त्र निर्माण में कंपनी कोरिया से सूत ले सकती है, भारत से कपास, बांग्लादेश से बटन और ज़िप, डिज़ाइन इटली से, और सिलाई थाईलैंड में — फिर लेबल पर ‘मेड इन थाईलैण्ड’ लिख देती है।”
3 — बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन कैसे नियंत्रित करती हैं (पृष्ठ 57–58)★
पहले — कहाँ उत्पादन इकाई लगाती हैं
“सामान्यत: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उसी स्थान पर उत्पादन इकाई स्थापित करती हैं जो — (1) बाज़ार के नज़दीक हो, (2) जहाँ कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम उपलब्ध हो, और (3) जहाँ उत्पादन के अन्य कारकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो।” “साथ ही, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ सरकारी नीतियों पर भी नज़र रखती हैं, जो उनके हितों की देखभाल करती हैं।”
निवेश और विदेशी निवेश — दो परिभाषाएँ★
“परिसंपत्तियों जैसे — भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरणों की ख़रीद में व्यय की गई मुद्रा को निवेश कहते हैं।” “बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को विदेशी निवेश कहते हैं। कोई भी निवेश इस आशा से किया जाता है कि ये परिसंपत्तियाँ लाभ अर्जित करेंगी।”
चार तरीक़े जिनसे बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन फैलाती हैं★★
| # | तरीक़ा | विवरण और उदाहरण |
|---|---|---|
| 1 | स्वयं कारख़ाना लगाना | “कार्यालयों और कारख़ानों की स्थापना” — जैसे फोर्ड मोटर्स ने चेन्नई के निकट संयंत्र लगाया |
| 2 | संयुक्त उत्पादन (साझेदारी) | “कभी-कभी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इन देशों की स्थानीय कंपनियों के साथ संयुक्त रूप से उत्पादन करती हैं।” दोहरा लाभ — (क) अतिरिक्त निवेश के लिए धन (जैसे तीव्र उत्पादन के लिए मशीनें ख़रीदने के लिए); (ख) उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी |
| 3 | ★स्थानीय कंपनियों को ख़रीदना | “बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को ख़रीदना और उसके बाद उत्पादन का प्रसार करना है।” — जैसे कारगिल फ़ूड्स ने परख फ़ूड्स को ख़रीदा |
| 4 | छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देना | “विकसित देशों की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देती हैं” — वस्त्र, जूते-चप्पल एवं खेल के सामान जैसे उद्योगों में; फिर अपने ब्राण्ड नाम से ग्राहकों को बेचती हैं |
कारगिल फ़ूड्स का उदाहरण★
“एक बहुत बड़ी अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी कारगिल फ़ूड्स ने परख फ़ूड्स जैसी छोटी भारतीय कंपनियों को ख़रीद लिया है। परख फ़ूड्स ने भारत के विभिन्न भागों में एक बड़ा विपणन तंत्र तैयार किया था… परख फ़ूड्स के चार तेल शोधक केन्द्र भी थे, जिस पर अब कारगिल का नियंत्रण हो गया है।” ★“अब कारगिल 50 लाख पैकेट प्रतिदिन निर्माण क्षमता के साथ भारत में खाद्य तेलों की सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी है।”
और शक्ति का असली पैमाना
★★“वास्तव में, कई शीर्षस्थ बहुराष्ट्रीय कंपनियों की संपत्ति विकासशील देशों की सरकारों के सम्पूर्ण बजट से भी अधिक है।” और छोटे उत्पादकों पर — “इन बड़ी कंपनियों में दूरस्थ उत्पादकों के मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तों का निर्धारण करने की प्रचण्ड क्षमता होती है।”
★निष्कर्ष — “स्थानीय कंपनियों के साथ साझेदारी द्वारा, आपूर्ति के लिए स्थानीय कंपनियों का इस्तेमाल करके और स्थानीय कंपनियों से निकट प्रतिस्पर्धा करके अथवा उन्हें ख़रीद कर बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूरस्थ स्थानों के उत्पादन पर अपना प्रभाव जमा रही हैं। परिणामत: दूर-दूर स्थानों पर फैला उत्पादन परस्पर संबंधित हो रहा है।”
4 — फोर्ड मोटर्स का उदाहरण (पृष्ठ 59)★
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| क्या है | “विश्व के 26 देशों में प्रसार के साथ विश्व की सबसे बड़ी मोटरगाड़ी निर्माता कंपनी” |
| भारत कब आई | 1995 में |
| निवेश | “चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए का निवेश करके एक विशाल संयंत्र की स्थापना की” |
| किसके सहयोग से | “भारत में जीपों एवं ट्रकों के प्रमुख निर्माता महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से स्थापित” |
| 2017 तक बिक्री | भारतीय बाज़ारों में 88,000 कारें |
| ★निर्यात | “1,81,000 कारों का निर्यात भी भारत से दक्षिण अफ़्रीका, मेक्सिको, ब्राज़ील और संयुक्त राज्य अमेरिका किया गया” |
| आगे की योजना | “कंपनी विश्व के दूसरे देशों में अपने संयंत्रों के लिए फोर्ड इंडिया का विकास पुर्ज़ा आपूर्ति केन्द्र के रूप में करना चाहती है” |
पृष्ठ 59 के सात प्रश्नों के उत्तर★
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| 1. क्या फोर्ड मोटर्स एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है? क्यों? | हाँ — क्योंकि यह विश्व के 26 देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है, जो बहुराष्ट्रीय कंपनी की परिभाषा है। |
| 2. विदेशी निवेश क्या है? फोर्ड ने भारत में कितना निवेश किया? | बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किया गया निवेश विदेशी निवेश कहलाता है; फोर्ड ने चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए का निवेश किया। |
| 3. फोर्ड जैसी कंपनियाँ केवल विशाल बाज़ार का ही लाभ नहीं उठातीं… | सही — वे कम उत्पादन लागत का भी लाभ लेती हैं; इसीलिए फोर्ड ने भारत से 1,81,000 कारें निर्यात कीं, यानी यहाँ बनी कारें दूसरे देशों के बाज़ारों के लिए थीं। |
| 4. कंपनी भारत को पुर्ज़ों का विनिर्माण केन्द्र क्यों बनाना चाहती है? | (अ) श्रम और अन्य संसाधनों पर लागत कम है; (ब) कई स्थानीय विनिर्माताओं की उपस्थिति जो कल-पुर्ज़ों की आपूर्ति करते हैं; (स) भारत और चीन के ग्राहकों से निकटता — यानी बड़ी संख्या में ख़रीददार पास हैं। |
| 5. फोर्ड द्वारा कारों के निर्माण से उत्पादन कैसे परस्पर संबंधित होगा? | भारत में बनी कारें दक्षिण अफ़्रीका, मेक्सिको, ब्राज़ील और अमेरिका जाएँगी और भारत में बने पुर्ज़े विश्व के दूसरे संयंत्रों में लगेंगे — इस तरह दूर-दूर स्थानों पर फैला उत्पादन परस्पर संबंधित हो जाएगा। |
| 6. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अन्य कंपनियों से किस प्रकार अलग हैं? | क्योंकि वे एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण या स्वामित्व रखती हैं; उनकी संपत्ति विकासशील देशों के पूरे बजट से भी अधिक हो सकती है; और उनमें दूरस्थ उत्पादकों के मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तों का निर्धारण करने की प्रचण्ड क्षमता होती है। |
| 7. लगभग सभी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अमेरिका, जापान या यूरोप की क्यों हैं? | क्योंकि ये विकसित देश हैं जहाँ भारी पूँजी, उन्नत प्रौद्योगिकी और अनुसंधान की सुविधाएँ पहले से मौजूद थीं; उनकी कंपनियों के पास इतनी संपत्ति थी कि वे दूसरे देशों में निवेश कर सकें। |
5 — विदेश व्यापार और बाज़ारों का एकीकरण (पृष्ठ 59–61)★
विदेश व्यापार का बुनियादी कार्य
“विदेश व्यापार घरेलू बाज़ारों अर्थात् अपने देश के बाज़ारों से बाहर के बाज़ारों में पहुँचने के लिए उत्पादकों को एक अवसर प्रदान करता है।” “उत्पादक केवल अपने देश के बाज़ारों में ही अपने उत्पाद नहीं बेच सकते हैं, बल्कि विश्व के अन्य देशों के बाज़ारों में भी प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।” “इसी प्रकार, दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं के आयात से ख़रीददारों के समक्ष उन वस्तुओं के घरेलू उत्पादन के अन्य विकल्पों का विस्तार होता है।”
भारत में चीन के खिलौने — यह पूरा उदाहरण याद कीजिए★★
| चरण | क्या हुआ |
|---|---|
| 1 | “चीन के विनिर्माताओं को भारत में खिलौने निर्यात करने के एक अवसर का पता चलता है, जहाँ खिलौने अधिक मूल्य पर बेचे जा रहे हैं” |
| 2 | “अब भारत में ख़रीददारों के पास भारतीय और चीनी खिलौनों के बीच चयन करने का विकल्प है” |
| 3 | “सस्ते दाम एवं नवीन डिजाइनों के कारण चीनी खिलौने भारतीय बाज़ारों में अधिक लोकप्रिय हैं” |
| ★4 | “एक वर्ष में ही खिलौने की 70-80 प्रतिशत दुकानों में भारतीय खिलौनों का स्थान चीनी खिलौनों ने ले लिया है” |
| 5 | “अब भारत के बाज़ारों में खिलौने पहले की तुलना में सस्ते हैं” |
किसे लाभ, किसे हानि★
| कौन | असर |
|---|---|
| भारतीय ख़रीददार | लाभ — “कम क़ीमत पर खिलौनों के अपेक्षाकृत अधिक विकल्प” |
| चीन के खिलौना निर्माता | लाभ — “अपना व्यवसाय फैलाने के लिए एक अवसर प्राप्त होता है” |
| भारतीय खिलौना निर्माता | हानि — “क्योंकि उनके खिलौने कम बिकते हैं” |
और विदेश व्यापार का असली नतीजा★★
“सामान्यत: व्यापार के खुलने से वस्तुओं का एक बाज़ार से दूसरे बाज़ार में आवागमन होता है। बाज़ार में वस्तुओं के विकल्प बढ़ जाते हैं। दो बाज़ारों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है। अब दो देशों के उत्पादक एक दूसरे से हज़ारों मील दूर होकर भी एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।” ★“इस प्रकार, विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाज़ारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।”
पृष्ठ 61 के प्रश्नों के उत्तर —
- “अतीत में देशों को जोड़ने वाला मुख्य माध्यम क्या था? अब यह अलग कैसे है?” → अतीत में व्यापार ही मुख्य ज़रिया था, और वह भी केवल कच्चे माल, खाद्य पदार्थ और तैयार उत्पाद का। अब वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का भी आदान-प्रदान होता है, और उत्पादन ही विश्व स्तर पर बँट गया है।
- “विदेश व्यापार और विदेशी निवेश में अंतर?” → विदेश व्यापार में वस्तुओं और सेवाओं का देशों के बीच आयात-निर्यात होता है; विदेशी निवेश में बहुराष्ट्रीय कंपनी दूसरे देश में भूमि, भवन, मशीन जैसी परिसंपत्तियाँ ख़रीदने पर मुद्रा व्यय करती है।
- “चीन भारत से इस्पात आयात करे तो?” → (क) चीन की इस्पात कंपनियों को — प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उनकी बिक्री घट सकती है; (ख) भारत की इस्पात कंपनियों को — नया बाज़ार मिलेगा, बिक्री और उत्पादन बढ़ेगा; (ग) चीन में इस्पात ख़रीदने वाले उद्योगों को — सस्ता और अधिक विकल्प वाला इस्पात मिलेगा, लागत घटेगी।
- “यह दोनों देशों के इस्पात-बाज़ार के एकीकरण में कैसे सहायता करेगा?” → क्योंकि दोनों देशों में इस्पात का मूल्य एक समान होने लगेगा और दोनों देशों के उत्पादक आपस में प्रतिस्पर्धा करने लगेंगे — यही बाज़ारों का एकीकरण है।
6 — वैश्वीकरण क्या है? (पृष्ठ 61)★★
परिभाषा — शब्दश: याद कीजिए
“अधिक विदेश व्यापार और अधिक विदेशी निवेश के परिणामस्वरूप विभिन्न देशों के बाज़ारों एवं उत्पादनों में एकीकरण हो रहा है। विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।” “बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वैश्वीकरण की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। विभिन्न देशों के बीच अधिक से अधिक वस्तुओं और सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान हो रहा है।”
और एक बहुत ज़रूरी अपवाद★
“वस्तुओं, सेवाओं, निवेशों और प्रौद्योगिकी के अतिरिक्त विभिन्न देशों को आपस में जोड़ने का एक और माध्यम हो सकता है। यह माध्यम है विभिन्न देशों के बीच लोगों का आवागमन। प्राय: लोग बेहतर आय, बेहतर रोज़गार एवं शिक्षा की तलाश में एक देश से दूसरे देश में आवागमन करते हैं” ★★“किन्तु, विगत कुछ दशकों में अनेक प्रतिबंधों के कारण विभिन्न देशों के बीच लोगों के आवागमन में अधिक वृद्धि नहीं हुई है।”
★यह अपवाद बहुत ज़रूरी है — अभ्यास प्रश्न 13(अ) सीधे इसी पर है। “वस्तुएँ, सेवाएँ और निवेश तो आसानी से आर-पार जाते हैं — पर लोग नहीं।”
पृष्ठ 62 का बहुविकल्पी — “देशों को जोड़ने से वैश्वीकरण के परिणाम होंगे…” → (ख) उत्पादकों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा होगी।
7 — वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कारक (पृष्ठ 62–63)★
“प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति वह मुख्य कारक है जिसने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित किया।”
कारक 1 — परिवहन प्रौद्योगिकी
- “विगत पचास वर्षों में परिवहन प्रौद्योगिकी में बहुत उन्नति हुई है। इसने लम्बी दूरियों तक वस्तुओं की तीव्रतर आपूर्ति को कम लागत पर संभव किया है।”
- ★कंटेनर — “वस्तुओं को कंटेनरों में रखा गया है, जिससे इन्हें जहाज़ों, रेलों, वायुयानों एवं ट्रकों पर बिना क्षति के लादा जा सके। कंटेनरों से ढुलाई-लागत में भारी बचत हुई है और माल को बाज़ारों तक पहुँचाने की गति में वृद्धि हुई है।”
- “इसी प्रकार, वायु यातायात की लागत में गिरावट आयी है। परिणामत: वायुमार्ग से अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में वस्तुओं का परिवहन संभव हुआ है।”
कारक 2 — सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आई.टी.)★★
- “वर्तमान समय में दूरसंचार, कंप्यूटर और इंटरनेट के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी द्रुत गति से परिवर्तित हो रही है।”
- “दूरसंचार सुविधाओं (टेलीग्राफ़, टेलीफोन, मोबाइल फोन एवं फैक्स) का विश्व भर में एक-दूसरे से सम्पर्क करने… में प्रयोग किया जाता है। ये सुविधाएँ संचार उपग्रहों द्वारा सुगम हुई हैं।”
- “इंटरनेट से हम तत्काल इलेक्ट्रॉनिक डाक (ई-मेल) भेज सकते हैं और अत्यंत कम मूल्य पर विश्व-भर में बात (वॉयस मेल) कर सकते हैं।”
पत्रिका वाला उदाहरण — ‘वैश्वीकरण में संचार प्रौद्योगिकी का उपयोग’★
| चरण | क्या होता है |
|---|---|
| 1 | “लंदन के पाठकों के लिए प्रकाशित एक समाचार पत्रिका की डिज़ाइनिंग और छपाई दिल्ली में की जानी है” |
| 2 | “पत्रिका का पाठ्य-विषय इंटरनेट के द्वारा दिल्ली कार्यालय को भेज दिया जाता है” |
| 3 | “दिल्ली कार्यालय में डिज़ाइनर दूरसंचार सुविधाओं का उपयोग करके लंदन कार्यालय से निर्देश प्राप्त करते हैं” |
| 4 | “डिज़ाइन तैयार करने का काम कंप्यूटर पर किया जाता है” |
| 5 | “छपाई के बाद पत्रिकाओं को वायुमार्ग से लंदन भेजा जाता है” |
| 6 | ★“यहाँ तक कि डिज़ाइन और छपाई के पैसे का भुगतान इंटरनेट (ई-बैंकिंग) के द्वारा लंदन के एक बैंक से दिल्ली के एक बैंक को तत्काल कर दिया जाता है” |
किताब का प्रश्न — “क्या सूचना प्रौद्योगिकी के प्रसार के बिना वैश्वीकरण संभव होता?” उत्तर की दिशा — “नहीं। क्योंकि उत्पादन के अलग-अलग टुकड़े अलग-अलग देशों में करने के लिए तत्काल संपर्क, तत्काल डिज़ाइन भेजना और तत्काल भुगतान — तीनों ज़रूरी हैं, और तीनों आई.टी. से ही संभव हुए।”
8 — उदारीकरण (पृष्ठ 64)★★
पहले — व्यापार अवरोधक क्या है
“मान लीजिए कि भारत सरकार खिलौनों के आयात पर कर लगाती है… कर के कारण ख़रीददारों को आयातित खिलौनों की अधिक क़ीमत चुकानी होगी। चीन के खिलौने अब भारत के बाज़ारों में इतने सस्ते नहीं रह जाएँगे और चीन से उनका आयात स्वत: कम हो जाएगा। भारत के खिलौना-निर्माता अधिक समृद्ध हो जाएँगे।” ★“आयात पर कर, व्यापार अवरोधक का एक उदाहरण है। इसे अवरोधक इसलिए कहा गया है, क्योंकि यह कुछ प्रतिबंध लगाता है।” “सरकारें व्यापार अवरोधक का प्रयोग विदेश व्यापार में वृद्धि या कटौती (नियमित) करने और देश में किस प्रकार की वस्तुएँ कितनी मात्रा में आयातित होनी चाहिए, यह निर्णय करने के लिए कर सकती हैं।”
भारत ने पहले अवरोधक क्यों लगाए थे
| # | कारण |
|---|---|
| 1 | “देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण प्रदान करने के लिए यह अनिवार्य माना गया” |
| 2 | “1950 और 1960 के दशकों में उद्योगों का उदय हो रहा था और इस अवस्था में आयात से प्रतिस्पर्धा इन उद्योगों को बढ़ने नहीं देती” |
| 3 | इसीलिए भारत ने “केवल अनिवार्य चीज़ों जैसे — मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम के आयात की ही अनुमति” दी |
| ★4 | “ध्यान दीजिए कि सभी विकसित देशों ने विकास के प्रारंभिक चरणों में घरेलू उत्पादकों को विभिन्न तरीक़ों से संरक्षण दिया है।” |
1991 का बदलाव★★
“भारत में करीब सन् 1991 के प्रारंभ से नीतियों में कुछ दूरगामी परिवर्तन किए गए। सरकार ने यह निश्चय किया कि भारतीय उत्पादकों के लिए विश्व के उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा करने का समय आ गया है।” “यह महसूस किया गया कि प्रतिस्पर्धा से देश में उत्पादकों के प्रदर्शन में सुधार होगा, क्योंकि उन्हें अपनी गुणवत्ता में सुधार करना होगा। इस निर्णय का प्रभावशाली अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने समर्थन किया।” “अत: विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर से अवरोधों को काफ़ी हद तक हटा दिया गया।”
उदारीकरण की परिभाषा★★
“सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है।” “व्यापार के उदारीकरण से व्यावसायियों को मुक्त रूप से निर्णय लेने की अनुमति मिली है कि वे क्या आयात या निर्यात करना चाहते हैं। सरकार पहले की तुलना में कम नियंत्रण करती है और इसलिए उसे अधिक उदार कहा जाता है।”
पृष्ठ 64 का प्रश्न — “कोटा क्या है?” उत्तर — “सरकार आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या भी सीमित कर सकती है। इसे कोटा कहते हैं।” — जैसे सरकार तय कर दे कि साल में केवल इतने लाख चीनी खिलौने ही आयात होंगे।
9 — विश्व व्यापार संगठन (पृष्ठ 65)★
| बात | विवरण |
|---|---|
| क्या है | “एक ऐसा संगठन है, जिसका ध्येय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है” |
| किसकी पहल | “विकसित देशों की पहल पर शुरू किया गया” |
| काम | “विश्व व्यापार संगठन अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार से संबंधित नियमों को निर्धारित करता है और यह देखता है कि इन नियमों का पालन हो।” |
| ★सदस्य | “विश्व के लगभग 160 देश विश्व व्यापार संगठन के सदस्य हैं” |
| इन संगठनों का मानना | “विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर सभी अवरोधक हानिकारक हैं। कोई अवरोधक नहीं होना चाहिए।” |
और यहीं किताब सवाल उठाती हैध्यान
★★“यद्यपि विश्व व्यापार संगठन सभी देशों को मुक्त व्यापार की सुविधा देता है, परन्तु व्यवहार में यह देखा गया है कि विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को बरकरार रखा है। दूसरी ओर, विश्व व्यापार संगठन के नियमों ने विकासशील देशों के व्यापार अवरोधों को हटाने के लिए विवश किया है।”
कृषि पर वाद-विवाद — यह उदाहरण ज़रूर पढ़ाइए★
| भारत | अमेरिका |
|---|---|
| “भारत में अधिकांश रोज़गार और सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) का महत्त्वपूर्ण भाग कृषि क्षेत्र प्रदान करता है” | ★“अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का हिस्सा मात्र एक प्रतिशत और कुल रोज़गार में केवल 0.5 प्रतिशत है” |
“फिर भी, अमेरिका के कृषि क्षेत्र में कार्यरत इतने कम प्रतिशत लोग भी अमेरिकी सरकार से उत्पादन और दूसरे देशों को निर्यात करने के लिए बहुत अधिक धन राशि प्राप्त करते हैं।” “इस भारी धन राशि के कारण अमेरिकी किसान अपने कृषि उत्पादों को असाधारण रूप से कम क़ीमत पर बेच सकते हैं। अधिशेष कृषि उत्पादों को दूसरे देशों के बाज़ारों में कम क़ीमत पर बेचा जाता है जो इन देशों के कृषकों को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।” ★★इसीलिए विकासशील देश पूछते हैं — “हमने विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार व्यापार अवरोधकों को कम कर दिया, लेकिन आप लोगों ने विश्व व्यापार संगठन के नियमों को नज़रअंदाज़ कर दिया और अपने किसानों को भारी धन राशि देना बरकरार रखा है… क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?”
पृष्ठ 66 की रिक्त-स्थान पूर्ति★
“विश्व व्यापार संगठन विकसित देशों की पहल पर शुरू हुआ था। विश्व व्यापार संगठन का ध्येय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है। विश्व व्यापार संगठन सभी देशों के लिए विदेश व्यापार से संबंधित नियम बनाता है और देखता है कि व्यवहार में, देशों के बीच व्यापार अवरोधक नहीं है। विकासशील देश, जैसे भारत व्यापार अवरोधक हटा चुका है जबकि अधिकांश स्थितियों में विकसित देशों ने अपने उत्पादकों को संरक्षण देना जारी रखा है।”
10 — भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव (पृष्ठ 66–67)★★
किसे लाभ हुआ — चार बातें
| # | कौन | कैसे |
|---|---|---|
| 1 | शहरी धनी उपभोक्ता | “वैश्वीकरण और उत्पादकों — स्थानीय एवं विदेशी दोनों — के बीच वृहतर प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं, विशेषकर शहरी क्षेत्र में धनी वर्ग के उपभोक्ताओं को लाभ हुआ… वे पहले की तुलना में आज अपेक्षाकृत उच्चतर जीवन स्तर का आनन्द ले रहे हैं” |
| 2 | बहुराष्ट्रीय कंपनियों का निवेश | “विगत 20 वर्षों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में अपने निवेश में वृद्धि की है”; रुचि दिखाई — सेलफोन, मोटर गाड़ियों, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों, ठंडे पेय पदार्थों, जंक खाद्य पदार्थों एवं बैंकिंग जैसी सेवाओं में। “इन उद्योगों और सेवाओं में नये रोज़गार उत्पन्न हुए” और “कच्चे माल की आपूर्ति करने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध” हुईं |
| 3 | शीर्ष भारतीय कंपनियाँ | “अनेक शीर्ष भारतीय कंपनियाँ बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा से लाभान्वित हुई हैं। इन कंपनियों ने नवीनतम प्रौद्योगिकी और उत्पादन प्रणाली में निवेश किया और अपने उत्पादन-मानकों को ऊँचा उठाया है” |
| ★4 | भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ | “वैश्वीकरण ने कुछ बड़ी भारतीय कंपनियों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रूप में उभरने के योग्य बनाया है” — टाटा मोटर्स (मोटरगाड़ियाँ), इंफोसिस (आई.टी.), रैनबैक्सी (दवाइयाँ), एशियन पेंट्स (पेंट), सुंदरम फास्नर्स (नट और बोल्ट) |
और सेवा क्षेत्र में नये अवसर★
“वैश्वीकरण ने सेवा प्रदाता कंपनियों विशेषकर सूचना और संचार प्रौद्योगिकी वाली कंपनियों के लिए नये अवसरों का सृजन किया है।” “भारतीय कंपनी द्वारा लंदन स्थित कंपनी के लिए पत्रिका का प्रकाशन और कॉल सेंटर इसके उदाहरण हैं। इसके अतिरिक्त आँकड़ा प्रविष्टि (डाटा एन्ट्री), लेखाकरण, प्रशासनिक कार्य, इंजीनियरिंग जैसी कई सेवायें भारत जैसे देशों में अब सस्ते में उपलब्ध हैं और विकसित देशों को निर्यात की जाती हैं।”
विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदम★
| कदम | विवरण |
|---|---|
| विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज़) | “औद्योगिक क्षेत्रों, जिन्हें विशेष आर्थिक क्षेत्र कहा जाता है, की स्थापना की जा रही है” |
| वहाँ क्या मिलेगा | “विश्व स्तरीय सुविधाएँ — बिजली, पानी, सड़क, परिवहन, भण्डारण, मनोरंजन और शैक्षिक सुविधाएँ” |
| ★कर में छूट | “विशेष आर्थिक क्षेत्र में उत्पादन इकाइयाँ स्थापित करने वाली कंपनियों को आरंभिक पाँच वर्षों तक कोई कर नहीं देना पड़ता है” |
| ! श्रम-क़ानूनों में लचीलापन | “विदेशी निवेश आकर्षित करने हेतु सरकार ने श्रम-क़ानूनों में लचीलापन लाने की अनुमति दे दी है… नियमित आधार पर श्रमिकों को रोज़गार देने के बजाय कंपनियों में जब काम का अधिक दबाव होता है, तो लोचदार ढंग से छोटी अवधि के लिए श्रमिकों को कार्य पर रखती हैं। कंपनी की श्रम लागत में कटौती करने के लिए ऐसा किया जाता है।” |
| फिर भी | “विदेशी कंपनियाँ अभी भी संतुष्ट नहीं हैं और श्रम क़ानूनों में और अधिक लचीलेपन की माँग कर रही हैं।” |
11 — और अब दूसरा पक्ष: छोटे उत्पादक — “प्रतिस्पर्धा करो या नष्ट हो जाओ” (पृष्ठ 68)★★
“वैश्वीकरण ने बड़ी संख्या में छोटे उत्पादकों और श्रमिकों के लिए बड़ी चुनौतियाँ खड़ी की हैं।”
रवि की कहानी — पूरी याद कीजिए★
| वर्ष | क्या हुआ |
|---|---|
| 1992 | रवि ने तमिलनाडु के औद्योगिक शहर होसुर में संधारित्रों (capacitors) का निर्माण करने वाली कंपनी शुरू की, बैंक से ऋण लेकर |
| तीन वर्षों में | “अपने उत्पादन का विस्तार करने में सक्षम हो गया और उसकी कंपनी में 20 कर्मचारी काम करने लगे” |
| ★2001 | “सरकार ने विश्व व्यापार संगठन के समझौते के अनुसार संधारित्रों के आयात पर से प्रतिबंधों को हटा दिया” |
| क्या हुआ | उसके ग्राहक (टेलीविजन कंपनियाँ) बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए संयोजन-कार्य करने के लिए विवश हो गईं; और जो संधारित्र ख़रीदती थीं, वे आयात करना पसंद करती थीं, क्योंकि आयातित सामानों की क़ीमत रवि द्वारा निर्धारित क़ीमत से आधी होती थी |
| ★आज | “रवि वर्ष 2000 में निर्मित संधारित्रों से आधे से भी कम संधारित्रों का निर्माण करता है और उसके लिए केवल सात श्रमिक काम कर रहे हैं। रवि के अनेक दोस्तों ने, जो हैदराबाद और चेन्नई में इसी व्यवसाय में थे, अपनी इकाइयाँ बंद कर दीं।” |
और यह अकेला उदाहरण नहीं है★
“बैटरी, संधारित्र, प्लास्टिक, खिलौने, टायरों, डेयरी उत्पादों एवं खाद्य तेल के उद्योग कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जहाँ प्रतिस्पर्धा के कारण छोटे विनिर्माताओं पर कड़ी मार पड़ी है। कई इकाइयाँ बंद हो गईं, जिसके चलते अनेक श्रमिक बेरोज़गार हो गए।” ★“भारत में लघु और मध्यम उद्योगों में कृषि के बाद सबसे अधिक श्रमिक (11 करोड़) नियोजित हैं।”
12 — प्रतिस्पर्धा और अनिश्चित रोज़गार (पृष्ठ 69)★★
श्रमिकों पर क्या बीती
“वैश्वीकरण और प्रतिस्पर्धा के दबाव ने श्रमिकों के जीवन को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण अधिकांश नियोक्ता इन दिनों श्रमिकों को रोज़गार देने में लचीलापन पसंद करते हैं। इसका अर्थ है कि श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है।”
वस्त्र निर्यात उद्योग की श्रृंखला — इसे तीर की तरह बोर्ड पर बनाइए★
अमेरिका-यूरोप की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ → भारतीय निर्यातकों को ऑर्डर → निर्यातक लागत घटाने की कोशिश → कच्चे माल पर कटौती संभव नहीं → इसलिए श्रम-लागत में कटौती → अस्थायी रोज़गार, लंबे कार्य-घंटे, रात की पाली, कम मज़दूरी
- “विश्वव्यापी नेटवर्क से युक्त बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ लाभ को अधिकतम करने के लिए सबसे सस्ती वस्तुएँ खोजती हैं।”
- “जहाँ पहले कारख़ाने श्रमिकों को स्थायी आधार पर रोज़गार देते थे, वहीं वे अब अस्थायी रोज़गार देते हैं, ताकि श्रमिकों को वर्ष भर वेतन न देना पड़े।”
- “श्रमिकों को बहुत लम्बे कार्य-घंटों तक काम करना पड़ता है और अत्यधिक माँग की अवधि में नियमित रूप से रात में भी काम करना पड़ता है। मज़दूरी काफ़ी कम होती है और श्रमिक अपनी रोज़ी-रोटी के लिए अतिरिक्त समय में भी काम करने के लिए विवश हो जाते हैं।”
- ★★“हालाँकि वस्त्र निर्यातकों के बीच प्रतिस्पर्धा से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अधिक लाभ कमाने में मदद मिली है, परन्तु वैश्वीकरण के कारण मिले लाभ में श्रमिकों को न्यायसंगत हिस्सा नहीं दिया गया है।”
सुशीला की कहानी — यह पूरा बॉक्स पढ़वाइए★
| पहले | अब |
|---|---|
| 35 वर्षीया सुशीला ने दिल्ली के एक वस्त्र निर्यातक उद्योग में कई वर्ष काम किया | “1990 के दशक के अंतिम वर्षों में सुशीला की फैक्ट्री बंद हो गई” |
| “जब वह एक स्थायी श्रमिक के रूप में नियुक्त थी तो स्वास्थ्य बीमा एवं भविष्य निधि के लिए कार्य करने में दुगुनी मज़दूरी की हकदार थी” | “छह माह तक रोज़गार की तलाश करने के बाद अंतत: उसे अपने घर से 30 कि.मी. दूर एक रोज़गार मिला” |
| — | “कई वर्षों तक इस फैक्ट्री में काम करने के बावजूद वह एक अस्थायी श्रमिक है और पहले की तुलना में आधे से भी कम कमा पाती है” |
| — | “वह सप्ताह के सातों दिन सुबह 7.30 बजे अपने घर से निकलती है और शाम 10 बजे वापस आती है। एक दिन काम नहीं करने का अर्थ है, उस दिन की मज़दूरी नहीं मिलना। उसे अब कोई अन्य लाभ नहीं मिलता है जो पहले मिलता था।” |
★★और अध्याय 2 से जोड़िए — “उपरोक्त कार्य-परिस्थितियाँ और श्रमिकों की कठिनाइयाँ भारत के अनेक औद्योगिक इकाइयों और सेवाओं में सामान्य बात हो गई है। आज अधिकांश श्रमिक असंगठित क्षेत्र में नियोजित हैं। यही नहीं, संगठित क्षेत्र में क्रमश: कार्य-परिस्थितियाँ असंगठित क्षेत्र के समान होती जा रही हैं। संगठित क्षेत्रक के श्रमिकों जैसे सुशीला को अब कोई संरक्षण और लाभ नहीं मिलता है, जिसका वह पहले उपभोग करती थी।”
13 — न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष (पृष्ठ 70)★★
पहले समस्या
“उपर्युक्त प्रमाण यह संकेत करते हैं कि वैश्वीकरण सभी के लिए लाभप्रद नहीं रहा है। शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर, अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है।”
न्यायसंगत वैश्वीकरण क्या होगा★
“चूँकि वैश्वीकरण अब एक सच्चाई है, तो वैश्वीकरण को अधिक ‘न्यायसंगत’ कैसे बनाया जा सकता है? न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।”
सरकार क्या कर सकती है — पाँच काम★★
| # | काम |
|---|---|
| 1 | “इसकी नीतियों को केवल धनी और प्रभावशाली लोगों को ही नहीं बल्कि देश के सभी लोगों के हितों का संरक्षण करना चाहिए” |
| 2 | “सरकार यह सुनिश्चित कर सकती है कि श्रमिक क़ानूनों का उचित कार्यान्वयन हो और श्रमिकों को अपने अधिकार मिलें” |
| 3 | “यह छोटे उत्पादकों को कार्य-निष्पादन में सुधार के लिए उस समय तक मदद कर सकती है, जब तक वे प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम न हो जायें” |
| 4 | “यदि ज़रूरी हुआ तो सरकार व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग कर सकती है” |
| 5 | “यह ‘न्यायसंगत नियमों’ के लिए विश्व व्यापार संगठन से समझौते भी कर सकती है” |
और दो और ताक़तें★★
“विश्व व्यापार संगठन में विकसित देशों के वर्चस्व के विरुद्ध समान हितों वाले विकासशील देशों को मिलकर लड़ना होगा।” ★“विगत कुछ वर्षों में, बड़े अभियानों और जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने विश्व व्यापार संगठन के व्यापार और निवेश से संबंधित महत्त्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित किया है। यह प्रदर्शित करता है कि जनता भी न्यायसंगत वैश्वीकरण के संघर्ष में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।”
पृष्ठ 71 का चित्र — हांगकांग में डब्ल्यू.टी.ओ. के ख़िलाफ़ प्रदर्शन, 2005 — यह ज़रूर दिखाइए और कहिए: “ये लोग किसी सरकार के नहीं, आम लोग हैं। जनता भी बदल सकती है।”
14 — NCERT अभ्यास के पूरे उत्तर (पृष्ठ 72–73)
प्रश्न 1 — वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं?
“विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।” यह अधिक विदेश व्यापार और अधिक विदेशी निवेश के परिणामस्वरूप होता है, जिससे विभिन्न देशों के बाज़ारों एवं उत्पादनों में एकीकरण हो रहा है। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इस प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभा रही हैं, और विभिन्न देशों के बीच अधिक से अधिक वस्तुओं और सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान हो रहा है। ! पर एक अपवाद — “विगत कुछ दशकों में अनेक प्रतिबंधों के कारण विभिन्न देशों के बीच लोगों के आवागमन में अधिक वृद्धि नहीं हुई है।” यानी वस्तुएँ, सेवाएँ और निवेश तो आर-पार जाते हैं, पर लोग नहीं।
प्रश्न 2 — भारत सरकार ने अवरोधक क्यों लगाए थे और क्यों हटाना चाहती थी?
क्यों लगाए — “देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण प्रदान करने के लिए यह अनिवार्य माना गया।” 1950 और 1960 के दशकों में उद्योगों का उदय हो रहा था और इस अवस्था में आयात से प्रतिस्पर्धा इन उद्योगों को बढ़ने नहीं देती। इसीलिए भारत ने केवल अनिवार्य चीज़ों जैसे मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम के आयात की ही अनुमति दी। (ध्यान दीजिए — सभी विकसित देशों ने भी विकास के प्रारंभिक चरणों में घरेलू उत्पादकों को संरक्षण दिया है।) क्यों हटाना चाहती थी — करीब सन् 1991 के प्रारंभ से सरकार ने यह निश्चय किया कि भारतीय उत्पादकों के लिए विश्व के उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा करने का समय आ गया है; और “यह महसूस किया गया कि प्रतिस्पर्धा से देश में उत्पादकों के प्रदर्शन में सुधार होगा, क्योंकि उन्हें अपनी गुणवत्ता में सुधार करना होगा।” इस निर्णय का प्रभावशाली अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने समर्थन भी किया।
प्रश्न 3 — श्रम क़ानूनों में लचीलापन कंपनियों को कैसे मदद करेगा?★
इससे कंपनियाँ नियमित आधार पर श्रमिकों को रोज़गार देने के बजाय, जब काम का अधिक दबाव होता है तब लोचदार ढंग से छोटी अवधि के लिए श्रमिकों को कार्य पर रख सकती हैं। इसका सीधा उद्देश्य यही है — “कंपनी की श्रम लागत में कटौती करने के लिए ऐसा किया जाता है।” इससे उन्हें वर्ष भर वेतन नहीं देना पड़ता, और स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि तथा अन्य लाभ भी नहीं देने पड़ते। ! पर इसकी क़ीमत श्रमिक चुकाता है — सुशीला की तरह, जो कई वर्षों बाद भी अस्थायी श्रमिक है, आधे से भी कम कमाती है और जिसे कोई लाभ नहीं मिलता। और फिर भी “विदेशी कंपनियाँ अभी भी संतुष्ट नहीं हैं और श्रम क़ानूनों में और अधिक लचीलेपन की माँग कर रही हैं।”
प्रश्न 4 — दूसरे देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन पर नियंत्रण कैसे स्थापित करती हैं?★
चार तरीक़ों से — (1) स्वयं कार्यालय और कारख़ाने स्थापित करके — जहाँ बाज़ार नज़दीक हो, कम लागत पर कुशल-अकुशल श्रम मिले और अनुकूल सरकारी नीतियाँ हों; जैसे फोर्ड मोटर्स ने चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ का संयंत्र लगाया। (2) स्थानीय कंपनियों के साथ संयुक्त उत्पादन — इससे स्थानीय कंपनी को दोहरा लाभ होता है: अतिरिक्त निवेश के लिए धन और उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी। (3) स्थानीय कंपनियों को ख़रीदकर — यह “सबसे आम रास्ता” है; जैसे कारगिल फ़ूड्स ने परख फ़ूड्स को ख़रीदा और अब 50 लाख पैकेट प्रतिदिन क्षमता के साथ भारत में खाद्य तेलों की सबसे बड़ी उत्पादक है। (4) छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देकर — वस्त्र, जूते-चप्पल और खेल के सामान जैसे उद्योगों में; फिर अपने ब्राण्ड नाम से बेचती हैं, और उनमें “दूरस्थ उत्पादकों के मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तों का निर्धारण करने की प्रचण्ड क्षमता” होती है।
प्रश्न 5 — विकसित देश, विकासशील देशों से उदारीकरण क्यों चाहते हैं?
क्योंकि उदारीकरण से उनकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को विकासशील देशों के विशाल बाज़ार, सस्ता श्रम और सस्ते संसाधन मिल जाते हैं, और वे वहाँ बिना अवरोधक के वस्तुएँ बेच तथा निवेश कर सकती हैं। क्या विकासशील देशों को भी बदले में ऐसी माँग करनी चाहिए? — हाँ, बिल्कुल। क्योंकि व्यवहार में “विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को बरकरार रखा है”, जबकि “विश्व व्यापार संगठन के नियमों ने विकासशील देशों के व्यापार अवरोधों को हटाने के लिए विवश किया है।” इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण कृषि है — अमेरिका में जी.डी.पी. में कृषि का हिस्सा मात्र एक प्रतिशत और रोज़गार में केवल 0.5 प्रतिशत है, फिर भी वहाँ के किसान सरकार से भारी धन राशि पाते हैं और अधिशेष उत्पाद दूसरे देशों में कम क़ीमत पर बेच देते हैं, जो उन देशों के कृषकों को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। इसीलिए विकासशील देश पूछते हैं — “क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?”
प्रश्न 6 — ‘वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है’ — व्याख्या कीजिए★★
जिन्हें लाभ हुआ — (1) शहरी क्षेत्र के धनी उपभोक्ता — उनके सामने पहले से अधिक विकल्प हैं और वे उत्कृष्ट गुणवत्ता और कम क़ीमत से लाभान्वित हुए; “ये लोग पहले की तुलना में आज अपेक्षाकृत उच्चतर जीवन स्तर का आनन्द ले रहे हैं।” (2) शीर्ष भारतीय कंपनियाँ — जिन्होंने नवीनतम प्रौद्योगिकी में निवेश किया और उत्पादन-मानक ऊँचे उठाए; कुछ तो टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी, एशियन पेंट्स और सुंदरम फास्नर्स की तरह स्वयं बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बन गईं। (3) आई.टी. और सेवा क्षेत्र के कुशल कर्मचारी — कॉल सेंटर, डाटा एन्ट्री, लेखाकरण, प्रशासनिक कार्य और इंजीनियरिंग जैसी सेवाओं में नये अवसर बने। जिन्हें हानि हुई — (4) छोटे उत्पादक — बैटरी, संधारित्र, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी उत्पाद और खाद्य तेल के उद्योगों में “कई इकाइयाँ बंद हो गईं, जिसके चलते अनेक श्रमिक बेरोज़गार हो गए।” रवि इसका उदाहरण है — 2001 में आयात प्रतिबंध हटने के बाद आज वह आधे से भी कम उत्पादन करता है और केवल सात श्रमिक बचे हैं। (5) श्रमिक — “श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है”; अस्थायी रोज़गार, लम्बे कार्य-घंटे, रात की पाली और कम मज़दूरी। सुशीला अस्थायी श्रमिक है, आधे से भी कम कमाती है और सुबह 7.30 से रात 10 बजे तक सप्ताह के सातों दिन काम करती है। ★इसीलिए किताब कहती है — “शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर, अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है।”
प्रश्न 7 — व्यापार और निवेश नीतियों का उदारीकरण वैश्वीकरण में कैसे सहायता पहुँचाता है?
उदारीकरण का अर्थ है “सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया”। इससे “व्यावसायियों को मुक्त रूप से निर्णय लेने की अनुमति मिली है कि वे क्या आयात या निर्यात करना चाहते हैं” और “सरकार पहले की तुलना में कम नियंत्रण करती है।” इसका सीधा नतीजा यह हुआ कि “वस्तुओं का आयात-निर्यात सुगमता से किया जा सकता था और विदेशी कंपनियाँ यहाँ अपने कार्यालय और कारख़ाने स्थापित कर सकती थीं।” यानी उदारीकरण से विदेश व्यापार बढ़ा और विदेशी निवेश बढ़ा — और इन्हीं दोनों से “विभिन्न देशों के बाज़ारों एवं उत्पादनों में एकीकरण” यानी वैश्वीकरण होता है। इसी दिशा में विश्व व्यापार संगठन भी विकासशील देशों पर उदारीकरण के लिए दबाव डालता है।
प्रश्न 8 — विदेश व्यापार बाज़ारों के एकीकरण में कैसे मदद करता है? (नया उदाहरण सहित)
“विदेश व्यापार घरेलू बाज़ारों से बाहर के बाज़ारों में पहुँचने के लिए उत्पादकों को एक अवसर प्रदान करता है” और आयात से ख़रीददारों के समक्ष विकल्पों का विस्तार होता है। इससे तीन बातें होती हैं — (1) “वस्तुओं का एक बाज़ार से दूसरे बाज़ार में आवागमन” होता है; (2) “बाज़ार में वस्तुओं के विकल्प बढ़ जाते हैं”; और (3) ★“दो बाज़ारों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है” — इस तरह “दो देशों के उत्पादक एक दूसरे से हज़ारों मील दूर होकर भी एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।” नया उदाहरण — भारत से आम खाड़ी देशों को निर्यात होते हैं। इससे भारतीय किसानों को बड़ा बाज़ार और बेहतर क़ीमत मिलती है, खाड़ी के ख़रीददारों को अधिक विकल्प मिलते हैं, और धीरे-धीरे दोनों जगह आम की क़ीमत पास-पास आने लगती है — यही बाज़ारों का एकीकरण है।
प्रश्न 9 — बीस वर्ष बाद विश्व कैसा होगा?
यह प्रश्न कल्पना का है, पर उत्तर में कारण होना चाहिए। संभावित बिंदु — (1) वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान और बढ़ेगा, क्योंकि परिवहन और सूचना प्रौद्योगिकी की लागत लगातार घट रही है; (2) सेवाओं का निर्यात और बढ़ेगा — डाटा एन्ट्री, लेखाकरण, इंजीनियरिंग जैसी सेवाएँ भारत जैसे देशों से और अधिक जाएँगी; (3) अधिक भारतीय कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय बनेंगी, जैसे टाटा मोटर्स और इंफोसिस बनीं; (4) पर छोटे उत्पादकों और श्रमिकों पर दबाव भी बना रह सकता है, इसलिए न्यायसंगत वैश्वीकरण की माँग और तेज़ होगी; (5) और शायद लोगों के आवागमन पर प्रतिबंध भी धीरे-धीरे बदलें, क्योंकि आज भी उसमें “अधिक वृद्धि नहीं हुई है।”
प्रश्न 10 — दो लोग बहस कर रहे हैं — एक कहता है वैश्वीकरण ने क्षति पहुँचाई, दूसरा कहता है सहायता की। आप क्या जवाब देंगे?★
मैं कहूँगा कि दोनों आंशिक रूप से सही हैं, क्योंकि “वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है।” जो कहता है कि सहायता की, वह सही है क्योंकि — शहरी धनी उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प, बेहतर गुणवत्ता और कम क़ीमत मिली; बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश से नये रोज़गार बने और कच्चा माल देने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध हुईं; शीर्ष भारतीय कंपनियों ने प्रौद्योगिकी में निवेश करके उत्पादन-मानक ऊँचे किए; और टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी जैसी कंपनियाँ स्वयं बहुराष्ट्रीय बन गईं। जो कहता है कि क्षति पहुँचाई, वह भी सही है क्योंकि — बैटरी, संधारित्र, खिलौने, टायर और खाद्य तेल जैसे उद्योगों में कई इकाइयाँ बंद हो गईं और श्रमिक बेरोज़गार हुए (रवि का उदाहरण); और श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है — सुशीला की तरह लोग अस्थायी श्रमिक बन गए, आधे से भी कम कमाते हैं और कोई लाभ नहीं पाते। ★इसलिए सही उत्तर यह है — वैश्वीकरण को रोका नहीं जा सकता क्योंकि “वैश्वीकरण अब एक सच्चाई है”; पर उसे न्यायसंगत बनाया जा सकता है, जो “सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।”
प्रश्न 11 — रिक्त स्थानों की पूर्ति
“दो दशक पहले की तुलना में भारतीय ख़रीददारों के पास वस्तुओं के अधिक विकल्प हैं। यह वैश्वीकरण की प्रक्रिया से नज़दीक से जुड़ा हुआ है। अनेक दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं को भारत के बाज़ारों में बेचा जा रहा है। इसका अर्थ है कि अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ रहा है। इससे भी आगे भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा उत्पादित ब्रांडों की बढ़ती संख्या हम बाज़ारों में देखते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में निवेश कर रही हैं क्योंकि यहाँ उत्पादन की लागत कम है, सस्ता श्रम उपलब्ध है और बाज़ार विशाल है। जबकि बाज़ार में उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प इसलिए बढ़ते व्यापार और निवेश के प्रभाव का अर्थ है उत्पादकों के बीच अधिकतम प्रतिस्पर्धा।”
प्रश्न 12 — सुमेलित कीजिए★
| कथन | उत्तर |
|---|---|
| (क) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ छोटे उत्पादकों से सस्ते दरों पर ख़रीदती हैं | (ब) कपड़ा, जूते-चप्पल, खेल के सामान |
| (ख) आयात पर कर और कोटा का उपयोग, व्यापार नियमन | (य) व्यापार अवरोधक |
| (ग) विदेशों में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियाँ | (द) टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी |
| (घ) आई.टी. ने सेवाओं के उत्पादन के प्रसार में सहायता की | (स) कॉल सेंटर |
| (ङ) अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने उत्पादन करने के लिए निवेश किया | (अ) मोटर गाड़ियाँ |
प्रश्न 13 — सही विकल्प का चयन★
| प्रश्न | उत्तर | कारण |
|---|---|---|
| (अ) विगत दो दशकों में द्रुत आवागमन देखा गया है — | (ख) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों का | क्योंकि लोगों के आवागमन में “अनेक प्रतिबंधों के कारण अधिक वृद्धि नहीं हुई है” |
| (आ) बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा निवेश का सबसे अधिक सामान्य मार्ग — | (ख) स्थानीय कंपनियों को ख़रीद लेना | किताब स्वयं इसे “सबसे आम रास्ता” कहती है |
| (इ) वैश्वीकरण ने जीवन-स्तर के सुधार में सहायता पहुँचाई है — | (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं | क्योंकि “वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है” — सबका नहीं, केवल कुछ लोगों का जीवन-स्तर सुधरा |
15 — इस अध्याय के अनिवार्य आँकड़े
| आँकड़ा | किसका |
|---|---|
| 50-60 प्रतिशत | बहुराष्ट्रीय कंपनी की लागत में बचत (अमेरिका-चीन-मेक्सिको-भारत वाला उदाहरण) |
| 50 लाख पैकेट प्रतिदिन | कारगिल की भारत में खाद्य तेल निर्माण क्षमता |
| 26 देश · 1995 · 1,700 करोड़ | फोर्ड मोटर्स — प्रसार · भारत आगमन · निवेश |
| 88,000 / 1,81,000 | फोर्ड — 2017 तक भारत में बिक्री / भारत से निर्यात |
| 70-80 प्रतिशत | खिलौने की दुकानों में चीनी खिलौनों ने भारतीय खिलौनों का स्थान लिया |
| लगभग 160 देश | विश्व व्यापार संगठन के सदस्य |
| 1 प्रतिशत / 0.5 प्रतिशत | अमेरिका में कृषि का जी.डी.पी. में हिस्सा / कुल रोज़गार में हिस्सा |
| सन् 1991 | भारत में नीतियों में दूरगामी परिवर्तन |
| पाँच वर्ष | विशेष आर्थिक क्षेत्र में कर से छूट की अवधि |
| 1992 · 20 कर्मचारी · 2001 · सात श्रमिक | रवि की कहानी |
| 11 करोड़ | लघु और मध्यम उद्योगों में नियोजित श्रमिक (कृषि के बाद सबसे अधिक) |
| 35 वर्ष · 30 किमी · 7.30 से 10 बजे | सुशीला |
| विगत 20 वर्ष / विगत 50 वर्ष | बहुराष्ट्रीय कंपनियों का निवेश / परिवहन प्रौद्योगिकी में उन्नति |
16 — शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| बहुराष्ट्रीय कंपनी | वह कंपनी जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है। |
| निवेश | भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरणों की ख़रीद में व्यय की गई मुद्रा। |
| विदेशी निवेश | बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किया गया निवेश। |
| विदेश व्यापार | देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आयात-निर्यात। |
| वैश्वीकरण | विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया। |
| व्यापार अवरोधक | वह प्रतिबंध जो सरकार विदेश व्यापार पर लगाती है — जैसे आयात पर कर। |
| कोटा | आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या सीमित करना। |
| उदारीकरण | सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया। |
| विश्व व्यापार संगठन | वह संगठन जिसका ध्येय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है; लगभग 160 देश सदस्य। |
| विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज़) | विश्व स्तरीय सुविधाओं वाला औद्योगिक क्षेत्र, जहाँ नई इकाइयों को पाँच वर्ष तक कर से छूट मिलती है। |
| श्रम-क़ानूनों में लचीलापन | नियमित के बजाय छोटी अवधि के लिए श्रमिक रखने की छूट, ताकि श्रम लागत घटे। |
| कंटेनर | वह बड़ा बक्सा जिसमें वस्तुएँ रखकर जहाज़, रेल, वायुयान और ट्रक पर बिना क्षति के लादी जाती हैं। |
| न्यायसंगत वैश्वीकरण | ऐसा वैश्वीकरण जो सभी के लिए अवसर दे और जिसके लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो। |
17 — एक वाक्य में पूरा अध्याय
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण रखती हैं) सस्ते श्रम और संसाधनों की तलाश में उत्पादन को दुनिया भर में बाँट देती हैं; विदेश व्यापार बाज़ारों को जोड़ता है; और इन दोनों से पैदा हुई परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है, जिसे परिवहन तथा सूचना-संचार प्रौद्योगिकी ने संभव बनाया और 1991 के उदारीकरण तथा विश्व व्यापार संगठन ने तेज़ किया; पर इसका प्रभाव एक समान नहीं रहा — शहरी धनी उपभोक्ता, शीर्ष भारतीय कंपनियाँ और कुशल कर्मचारी लाभान्वित हुए, जबकि रवि जैसे छोटे उत्पादक और सुशीला जैसे श्रमिक पिछड़ गए — इसीलिए ज़रूरत है न्यायसंगत वैश्वीकरण की, जिसमें सरकार, विकासशील देश और जनता — तीनों की भूमिका है।