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कक्षा 10 · भूगोल

राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ

अध्याय 7

भरत चौधरी और वनिता कुमारी ने बनाया · marushala.com

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अध्याय 7 — राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की जीवन रेखाएँ · समकालीन भारत-2 (भूगोल) · कक्षा 10

कक्षा — 10 · विषय — भूगोल (समकालीन भारत–2) · पृष्ठ — 72 से 85

एक सेब, एक कॉपी और एक मोबाइल — ये तीनों यहाँ तक कैसे पहुँचे?

तीन चीज़ें, तीन रास्ते

कक्षा की पहली गतिविधि

चीज़कहाँ सेकैसे आई
सेबहिमाचल / कश्मीरट्रक → सड़क
कॉपीकाग़ज़ मिलरेल / ट्रक
मोबाइलविदेशजहाज़ → पत्तन → ट्रक

अगर ये तीनों रास्ते बंद हो जाएँ तो? — नस कट जाए तो शरीर काम नहीं करता

और किताब यही कहती है

“वस्तुएँ तथा सेवाएँ माँग स्थल से आपूर्ति स्थल पर अपने आप नहीं पहुँच जातीं। वस्तुओं तथा सेवाओं के आपूर्ति स्थानों से माँग स्थानों तक ले जाने हेतु परिवहन की आवश्यकता होती है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 72

जो व्यक्ति उत्पाद को परिवहन द्वारा उपभोक्ताओं तक पहुँचाते हैं, उन्हें व्यापारी कहा जाता है

और यह पूरे अध्याय की आत्मा है

✦

“अगर देश एक शरीर है, तो परिवहन और संचार उसकी नसें हैं। खून बनना काफ़ी नहीं — उसका पूरे शरीर में पहुँचना ज़रूरी है।”

इसीलिए किताब कहती है — “परिवहन, संचार व व्यापार एक दूसरे के पूरक हैं।”

यह पुस्तक का अंतिम अध्याय है — और यह बाक़ी छह को जोड़ता है

तीन सवाल — तीनों का एक ही उत्तर

पिछले अध्यायों से जोड़िए

सवालअध्याय
फसल मंडी तक कैसे जाएगी?अध्याय 4 — कृषि
बेलाडिला का लौह-अयस्क विशाखापट्टनम् तक कैसे पहुँचा?अध्याय 5 — खनिज
कारख़ाने का माल दुकान तक कैसे आया?अध्याय 6 — उद्योग

तीनों का उत्तर एक ही — परिवहन

1 | परिवहन के साधन | स्थल, जल और वायु

चित्र 7.1 — परिवहन के साधन

पृष्ठ 72

मुख्य वर्गउपवर्ग
स्थलसड़क परिवहन · रेल परिवहन · पाइपलाइन
जलआंतरिक जल परिवहन · समुद्री परिवहन
वायुघरेलू विमान सेवा (सार्वजनिक प्राधिकरण, निजी विमान सेवा) · अंतर्राष्ट्रीय विमान सेवा

तीन शब्द — स्थल · जल · वायु; और स्थल के तीन — सड़क · रेल · पाइपलाइन

और परिवहन ने दुनिया को क्या बना दिया

“सक्षम व तीव्र गति वाले परिवहन से आज संसार एक बड़े गाँव में परिवर्तित हो गया है। परिवहन का यह विकास संचार साधनों के विकास की सहायता से ही संभव हो सका है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 72

“स्थानिक से अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय व्यापार ने अर्थव्यवस्था को जीवन शक्ति दी है।”

2 | सड़क परिवहन | विश्व में दूसरा

भारत का सड़क जाल

2nd

“भारत विश्व का दूसरा सर्वाधिक सड़क जाल वाला देश है, यह सड़क जाल लगभग 62.16 लाख किमी. है (2020-21)।” और “भारत में सड़क परिवहन, रेल परिवहन से पहले प्रारंभ हुआ”

यानी रेल से पहले भी हम चलते थे — पहिया पटरी से पुराना है

रेल की अपेक्षा सड़क की बढ़ती महत्ता — छह कारण★

पृष्ठ 73 · यह उत्तर हर साल आता है

#कारण
1“रेलवे लाइन की अपेक्षा सड़कों की निर्माण लागत बहुत कम है”
2“अपेक्षाकृत ऊबड़-खाबड़ व विच्छिन्न भू-भागों पर सड़कें बनाई जा सकती हैं”
3“अधिक ढाल प्रवणता तथा पहाड़ी क्षेत्रों में भी सड़कें निर्मित की जा सकती हैं”
4“कम व्यक्तियों, कम दूरी व कम वस्तुओं के परिवहन में सड़क मितव्ययी है”
5“यह घर-घर सेवाएँ उपलब्ध करवाता है तथा सामान चढ़ाने व उतारने की लागत भी कम है”
6“अन्य परिवहन साधनों के उपयोग में एक कड़ी — सड़कें रेलवे स्टेशन, वायु व समुद्री पत्तनों को जोड़ती हैं”

सूत्र — “सस्ती · ऊबड़-खाबड़ · पहाड़ · थोड़े के लिए · घर तक · कड़ी”

स्वर्णिम चतुर्भुज — और उसके दो गलियारे★

उत्तर-दक्षिण गलियारा

  • श्रीनगर ↔ कन्याकुमारी
  • सीधा ऊपर से नीचे
  • पूरे देश को लंबाई में चीरता है

पूर्व-पश्चिम गलियारा

  • सिलचर (असम) ↔ पोरबंदर (गुजरात)
  • सीधा दाएँ से बाएँ
  • पूरे देश को चौड़ाई में चीरता है

6 लेन; दिल्ली-कोलकाता, चेन्नई-मुंबई व दिल्ली को जोड़ता है; उद्देश्य — मेगासिटी के मध्य दूरी व परिवहन समय न्यूनतम; NHAI के अधिकार क्षेत्र में

सड़कों के छह वर्ग

पृष्ठ 73

वर्गपहचान
स्वर्णिम चतुर्भुज महा राजमार्ग6 लेन · दो गलियारे · NHAI
राष्ट्रीय राजमार्ग“देश के दूरस्थ भागों को जोड़ते हैं; ये प्राथमिक सड़क तंत्र हैं”
राज्य राजमार्ग“राज्यों की राजधानियों को ज़िला मुख्यालयों से जोड़ने वाली सड़कें”
ज़िला मार्ग“ज़िले के विभिन्न प्रशासनिक केंद्रों को ज़िला मुख्यालय से जोड़ती हैं”
अन्य सड़कें“ग्रामीण क्षेत्रों तथा गाँवों को शहरों से जोड़ती हैं” — प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क परियोजना
सीमांत सड़केंसीमा सड़क संगठन (BRO), 1960 · सामरिक महत्त्व की सड़कें

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क परियोजना — “देश के प्रत्येक गाँव को प्रमुख शहरों से पक्की सड़कों (वे सड़कें जिन पर वर्ष भर वाहन चल सकें) द्वारा जोड़ना प्रस्तावित है”

अटल टनल — विश्व की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग★

9.02

सीमा सड़क संगठन द्वारा बनाई गई 9.02 किलोमीटर लंबी यह सुरंग पूरे साल मनाली को लाहौल-स्पीति घाटी से जोड़ती है। यह हिमालय की पीरपंजाल पर्वतमाला में औसत समुद्र तल से 3000 मीटर की ऊँचाई पर है

! “पहले यह घाटी भारी बर्फ़बारी के कारण लगभग 6 महीने तक अलग-थलग रहती थी।” — छह महीने तक अपने ही देश से कटे रहना कैसा होता होगा?

निर्माण सामग्री के आधार पर

पक्की सड़कें

  • सीमेंट, कंक्रीट व तारकोल से निर्मित
  • बारहमासी सड़कें
  • वर्ष भर वाहन चल सकते हैं

कच्ची सड़कें

  • मिट्टी की
  • वर्षा ऋतु में अनुपयोगी हो जाती हैं
  • इसीलिए हर गाँव को पक्की सड़क से जोड़ने की योजना है

सोचिए — तुम्हारे गाँव तक जो रास्ता है, वह कैसा है?

3 | रेल परिवहन | 34 किलोमीटर से 67,956 तक

भारत की पहली रेलगाड़ी

1853

“देश की पहली रेलगाड़ी 1853 में मुंबई और थाणे के मध्य चलाई गई जो 34 किमी. की दूरी तय करती थी।”

और आज कुल रेल मार्ग — 67,956 किलोमीटर। 34 से 67,956 — यही भारत की कहानी है

भारतीय रेल — चार बड़ी बातें

पृष्ठ 75

  • “भारत में रेल परिवहन, वस्तुओं तथा यात्रियों के परिवहन का प्रमुख साधन है”
  • ★“भारतीय रेल परिवहन देश का सर्वाधिक बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का प्राधिकरण है”
  • “पिछले 150 वर्षों से भी अधिक समय से भारतीय रेल एक महत्त्वपूर्ण समन्वयक के रूप में जानी जाती है”
  • “भारतीय रेलवे देश की अर्थव्यवस्था, उद्योगों व कृषि के तीव्र गति से विकास के लिए उत्तरदायी है”
  • “भारतीय रेल परिवहन को 17 रेल प्रखंडों में पुन: संकलित किया गया है”

किन कार्यों में सहायक — व्यापार, भ्रमण, तीर्थ यात्राएँ व लंबी दूरी तक सामान का परिवहन

तालिका 7.1 — भारत के रेलवे मार्ग

पृष्ठ 76

गेज (मीटर में)रूट (किमी.)
बड़ी लाइन (1.676)63,950
मीटर लाइन (1.000)2,402
छोटी लाइन (0.762 व 0.610)1,604
कुल67,956

गिनकर देखिए — कुल का लगभग 94 प्रतिशत बड़ी लाइन है; यानी देश एक ही गेज की ओर बढ़ रहा है

रेल का वितरण किन कारकों पर — “भू-आकृतिक, आर्थिक व प्रशासकीय”★

पृष्ठ 76

क्षेत्रस्थिति
उत्तरी मैदानअनुकूल — “विस्तृत समतल भूमि, सघन जनसंख्या घनत्व, संपन्न कृषि व प्रचुर संसाधनों” के कारण; पर नदियों पर पुलों के निर्माण में बाधाएँ
प्रायद्वीप भारतरेलमार्ग ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी क्षेत्रों, छोटी पहाड़ियों और सुरंगों से होकर
हिमालयप्रतिकूल — “दुर्लभ उच्चावच, विरल जनसंख्या तथा आर्थिक अवसरों की कमी”
★कठिन क्षेत्र“पश्चिमी राजस्थान, गुजरात के दलदली भाग, म.प्र. के वन-क्षेत्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा व झारखंड”
सह्याद्रि“घाट या दर्रों के द्वारा ही पार कर पाना संभव”
कोंकण रेलवेपश्चिमी तट को सुविधाजनक बनाया; पर भूस्खलन तथा रेलवे ट्रैक का धँसना

रेल की तीन समस्याएँ — बिना टिकट यात्रा · संपत्ति की हानि व चोरी · ज़ंजीर खींचकर गाड़ी रोकना

किताब ख़ुद पूछती है — “हम अपनी रेलगाड़ियों को निर्धारित समय पर चलने में कैसे मदद कर सकते हैं?”

4 | पाइपलाइन | नया साधन, अलग हिसाब

पाइपलाइन — क्या और क्यों

पृष्ठ 76

  • “भारत के परिवहन मानचित्र पर पाइपलाइन एक नया परिवहन का साधन है”
  • “पहले पाइपलाइन का उपयोग शहरों व उद्योगों में पानी पहुँचाने हेतु होता था”
  • आज — कच्चा तेल, पेट्रोल उत्पाद तथा प्राकृतिक गैस; शोधनशालाओं, उर्वरक कारख़ानों व बड़े ताप विद्युत गृहों तक
  • “ठोस पदार्थों को तरल अवस्था (Slurry) में परिवर्तित कर पाइपलाइनों द्वारा ले जाया जाता है”

★“सुदूर आंतरिक भागों में स्थित शोधनशालाएँ जैसे बरौनी, मथुरा, पानीपत… की स्थापना पाइपलाइनों के जाल के कारण ही संभव हो पाई है”

और यही दो वाक्य परीक्षा में आते हैं★

2

“पाइपलाइन बिछाने की प्रारंभिक लागत अधिक है लेकिन इसको चलाने (Running) की लागत न्यूनतम है। वाहनांतरण देरी तथा हानियाँ इसमें लगभग नहीं के बराबर हैं।”

जैसे कुआँ खोदना महँगा, पर पानी निकालना सस्ता

देश में पाइपलाइन के तीन प्रमुख जाल

पृष्ठ 76–78

#जाल
1ऊपरी असम के तेल क्षेत्रों → गुवाहाटी, बरौनी व इलाहाबाद → कानपुर (उ.प्र.); शाखाएँ — बरौनी→राजबंध→हल्दिया, राजबंध→मौरी ग्राम, गुवाहाटी→सिलिगुड़ी
2गुजरात में सलाया → वीरमगाँव, मथुरा, दिल्ली व सोनीपत → जालंधर (पंजाब); शाखा — वडोदरा के निकट कोयली को चक्षु व अन्य स्थानों से
3एच.वी.जे. — हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर, 1,700 किमी.; मुंबई हाई और बसीन गैस क्षेत्रों को पश्चिमी-उत्तरी भारत के उर्वरक, बिजली और औद्योगिक परिसरों से

कुल मिलाकर भारत की गैस पाइपलाइन 1700 से बढ़कर 18,500 किलोमीटर हो गई है

5 | जल परिवहन | सबसे सस्ता रास्ता

जल परिवहन — तीन ख़ूबियाँ

पृष्ठ 78

  • “भारत के लोग प्राचीनकाल से समुद्री यात्राएँ करते रहे हैं; इसके नाविकों ने भारतीय संस्कृति व व्यापार को फैलाया”
  • ★“जल परिवहन, परिवहन का सबसे सस्ता साधन है”
  • “यह भारी व स्थूलकाय वस्तुएँ ढोने में अनुकूल है”
  • ★“यह परिवहन साधनों में ऊर्जा सक्षम तथा पर्यावरण अनुकूल है”

पर ध्यान — अंत:स्थलीय जलमार्ग 14,500 किमी. है, जिसमें केवल 5,685 किमी. ही मशीनीकृत नौकाओं द्वारा तय होता है

पाँच राष्ट्रीय जलमार्ग★

पृष्ठ 78

संख्यामार्गलंबाई
NW-1हल्दिया ↔ इलाहाबाद — गंगा1620 किमी.
NW-2सदिया ↔ धुबरी — ब्रह्मपुत्र891 किमी.
NW-3केरल — पश्चिम-तटीय नहर (कोट्टापुरम ↔ कोल्लम), उद्योगमंडल व चंपक्कारा नहरें205 किमी.
NW-4काकीनाडा-पुदुच्चेरी नहर + गोदावरी और कृष्णा1078 किमी.
NW-5मातई नदी, महानदी डेल्टा चैनल, ब्राह्मणी नदी व पूर्वी तटीय नहर588 किमी.

कुछ अन्य अंतर जलमार्ग — माण्डवी, जुआरी, कम्बरजुआ, सुन्दरवन, बराक, केरल का पश्चजल

और यह आँकड़ा हर उत्तर में लिखिए★

95%

“देश का 95 प्रतिशत व्यापार (मुद्रा रूप में 68 प्रतिशत) समुद्रों द्वारा ही होता है।”

यानी बारह दरवाज़ों से पूरा देश साँस लेता है

6 | बारह प्रमुख पत्तन | देश के समुद्री दरवाज़े

भारत की तट रेखा और पत्तन

12

भारत की 7,516.6 किमी. लंबी समुद्री तट रेखा के साथ 12 प्रमुख तथा 200 मध्यम व छोटे पत्तन हैं — और ये प्रमुख पत्तन देश का 95 प्रतिशत विदेशी व्यापार संचालित करते हैं

याद रखने का तरीक़ा — पश्चिम में छह, पूर्व में छह

पश्चिमी तट के छह पत्तन (उत्तर से दक्षिण)

पृष्ठ 78–79

पत्तनपहचान
★कांडला (दीनदयाल)स्वतंत्रता के बाद पहला विकसित पत्तन — क्योंकि कराची पाकिस्तान में चला गया था और मुंबई का दबाव कम करना था; ज्वारीय पत्तन
मुंबईवृहत्तम पत्तन — “प्राकृतिक खुले, विस्तृत व सुचारु पोताश्रय”
जवाहरलाल नेहरूमुंबई के सामने; पूरे क्षेत्र को एक समूह पत्तन की सुविधा
मरमागाओलौह-अयस्क — देश के कुल निर्यात का आधा (50 प्रतिशत)
न्यू-मैंगलोरकुद्रेमुख खानों का लौह-अयस्क (कर्नाटक)
कोच्चिलैगून के मुहाने पर स्थित प्राकृतिक पोताश्रय

और यहाँ रुककर एक सवाल पूछिए★

“कांडला जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान व गुजरात के औद्योगिक तथा खाद्यान्नों के आयात-निर्यात को संचालित करता है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 78

★राजस्थान में समुद्र नहीं है — फिर भी कांडला हमारा पत्तन है। यही ‘जीवन रेखा’ का असली मतलब है

पूर्वी तट के छह पत्तन (दक्षिण से उत्तर)

पृष्ठ 79

पत्तनपहचान
तूतीकोरनप्राकृतिक पोताश्रय, समृद्ध पृष्ठभूमि; श्रीलंका, मालदीव से व्यापार
चेन्नईदेश का प्राचीनतम कृत्रिम पत्तन; व्यापार में मुंबई के बाद दूसरा
★विशाखापट्नमस्थल से घिरा, गहरा व सुरक्षित; प्रारंभ में लौह-अयस्क निर्यातक
पारादीपओडिशा; विशेषत: लौह-अयस्क का निर्यात
कोलकाताअंत:स्थलीय नदीय (Riverine) पत्तन; गंगा-ब्रह्मपुत्र बेसिन को सेवाएँ; ज्वारीय, हुगली की तलछट नियमित साफ़ करनी पड़ती है
हल्दियाकोलकाता पर बढ़ते व्यापार को कम करने हेतु सहायक पत्तन

ध्यान दीजिए — कोलकाता समुद्र के किनारे नहीं, नदी के किनारे है। इसीलिए वह नदीय पत्तन कहलाता है

7 | वायु परिवहन और संचार | तेज़ी और ख़बर

वायु परिवहन

पृष्ठ 79–81

  • “आज वायु परिवहन तीव्रतम, आरामदायक व प्रतिष्ठित परिवहन का साधन है”
  • “इसके द्वारा अति दुर्गम स्थानों जैसे ऊँचे पर्वत, मरुस्थलों, घने जंगलों व लंबे समुद्री रास्तों को सुगमता से पार किया जा सकता है”
  • ★“देश के उत्तरी पूर्वी राज्यों के विषय में सोचें, जहाँ बड़ी नदियाँ, विच्छिन्न धरातल, घने जंगल, निरंतर बाढ़ आदि एक सामान्य बात है — हवाई यात्रा ने इसे अधिक अभिगम्य बना दिया है”
  • पवन हंस हेलीकाप्टर लिमिटेड — ONGC की अपतटीय संक्रियाओं में तथा उत्तरी-पूर्वी राज्यों, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखण्ड के आंतरिक क्षेत्रों में

किताब ख़ुद पूछती है — “उत्तर पूर्वी राज्यों में वायु परिवहन अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों हैं?”

उड़ान — “उड़े देश का आम नागरिक”★

✈

विश्व स्तर पर अपनी तरह की पहली योजना, जिसे क्षेत्रीय विमानन बाज़ार में तेज़ी लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। आम नागरिक के लिए उड़ान को किफ़ायती बनाकर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने हेतु नागर विमानन मंत्रालय ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (RCS) की कल्पना की

नाम पर ध्यान दीजिए — योजना का नाम ही उसका उद्देश्य है

डाक-संचार — दो श्रेणियाँ

प्रथम श्रेणी की डाक

  • कार्ड व लिफ़ाफ़ा बंद चिट्ठी
  • हल्की और ज़रूरी
  • विभिन्न स्थानों पर वायुयान द्वारा

द्वितीय श्रेणी की डाक

  • रजिस्टर्ड पैकेट, किताबें, अख़बार तथा मैगज़ीन
  • भारी सामान
  • धरातलीय डाक द्वारा — स्थल व जल परिवहन

★“भारत का डाक-संचार तंत्र विश्व का वृहत्तम है”; शीघ्रता हेतु छ: डाक मार्ग — राजधानी, मेट्रो, ग्रीन, व्यापार, भारी और दस्तावेज़ चैनल

संचार सेवाएँ — दूर संचार और जन-संचार

पृष्ठ 81–82

  • ★“दूर संचार तंत्र में भारत एशिया महाद्वीप में अग्रणी है”
  • “भारत के दो तिहाई से अधिक गाँव एस.टी.डी. दूरभाष सेवा से जुड़े हैं”; प्रत्येक गाँव में चौबीस घंटे एस.टी.डी. के विशेष प्रबंध
  • आकाशवाणी — राष्ट्रीय, क्षेत्रीय तथा स्थानीय भाषा में विविध कार्यक्रम
  • ★“दूरदर्शन देश का राष्ट्रीय समाचार व संदेश माध्यम है तथा विश्व के बृहत्तम संचार-तंत्र में एक है”
  • “समाचार-पत्र लगभग 100 भाषाओं तथा बोलियों में प्रकाशित होते हैं… सर्वाधिक हिंदी में, फिर अंग्रेज़ी व उर्दू”
  • ★“भारत विश्व में सर्वाधिक चलचित्रों का उत्पादक भी है”; प्रमाणन का अधिकार केंद्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड को

डिजिटल भारत — IT (भारतीय प्रतिभा) + IT (सूचना प्रौद्योगिकी) = IT (कल का भारत)

8 | अंतर्राष्ट्रीय व्यापार | देश का बैरोमीटर

अध्याय का सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला वाक्य★★

“एक देश के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की प्रगति उसके आर्थिक वैभव का सूचक है। इसीलिए इसे राष्ट्र का आर्थिक बैरोमीटर भी कहा जाता है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 82

बैरोमीटर से मौसम पता चलता है — और विदेश व्यापार से देश की सेहत

व्यापार — तीन स्तर और दो संतुलन

पृष्ठ 82

शब्दअर्थ
व्यापारराज्यों व देशों में व्यक्तियों के बीच वस्तुओं का आदान-प्रदान
बाज़ारवह जगह जहाँ विनिमय होता है
स्थानीय / राज्यस्तरीय / अंतर्राष्ट्रीयशहरों-क़स्बों-गाँवों में / दो या अधिक राज्यों के मध्य / दो देशों के मध्य
अनुकूल व्यापार संतुलनजब निर्यात मूल्य आयात मूल्य से अधिक हो
असंतुलित व्यापारजब निर्यात की अपेक्षा आयात अधिक हो

सभी देश इस पर निर्भर हैं क्योंकि “संसाधनों की उपलब्धता क्षेत्रीय है, अर्थात् इनका वितरण असमान है”

भारत क्या भेजता है, क्या मँगाता है

निर्यात

  • रत्न व जवाहरात
  • रसायन एवं संबंधित उत्पाद
  • कृषि एवं संबंधित उत्पाद

आयात

  • कच्चा पेट्रोलियम तथा उत्पाद
  • रत्न व जवाहरात
  • आधार धातुएँ · मशीनें
  • कृषि व अन्य उत्पाद

★“भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक सॉफ़्टवेयर महाशक्ति के रूप में उभरा है तथा सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से अत्यधिक विदेशी मुद्रा अर्जित कर रहा है”

9 | पर्यटन | जो पहले से है, वही कमाई देता है

पर्यटन — एक व्यापार के रूप में

150 लाख

“पिछले तीन दशकों में भारत में पर्यटन उद्योग में महत्त्वपूर्ण वृद्धि हुई है। 150 लाख से अधिक व्यक्ति पर्यटन उद्योग में प्रत्यक्ष रूप से संलग्न हैं।”

लाभ — राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहित करता है तथा स्थानीय हस्तकला व सांस्कृतिक उद्यमों को प्रश्रय देता है

छह प्रकार का पर्यटन — और राजस्थान में उनका मिलान★

पृष्ठ 82 · किताब सिर्फ़ प्रकार बताती है, राज्य नहीं

किताब का प्रकारराजस्थान में क्या
विरासत पर्यटनआमेर, मेहरानगढ़, चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़, हवा महल — क़िले और महल
सांस्कृतिक पर्यटनपुष्कर मेला, कालबेलिया नृत्य, हस्तशिल्प, बंधेज
रोमांचकारी पर्यटनमरुस्थल सफ़ारी, ऊँट सवारी, सम के धोरे
पारि-पर्यटन (eco-tourism)केवलादेव, रणथंभौर, सरिस्का — यही अध्याय 2 से जुड़ता है
चिकित्सा पर्यटनजयपुर के बड़े अस्पताल
व्यापारिक पर्यटनजयपुर में सम्मेलन व प्रदर्शनियाँ

★सरिस्का और रणथंभौर याद हैं? — अध्याय 2 में वे बाघ परियोजना थे, अध्याय 7 में वे पर्यटन हैं। यानी जंगल बचाना सिर्फ़ बाघ के लिए नहीं, रोज़गार के लिए भी है

10 | समापन | पूरी पुस्तक एक साथ

सातों अध्याय — एक-एक वाक्य में

और यह पूरी पुस्तक की कहानी है

अध्यायएक वाक्य
1. संसाधन एवं विकासजो कुछ हमारे पास है
2. वन एवं वन्य जीवजिसे बचाना है
3. जल संसाधनजिसके बिना कुछ नहीं
4. कृषिजो हमें खिलाती है
5. खनिज तथा ऊर्जाजो कारख़ाने चलाते हैं
6. विनिर्माण उद्योगजो सामान बनाते हैं
7. जीवन रेखाएँजो यह सब एक-दूसरे तक पहुँचाती हैं

एक रोटी की यात्रा — सातों अध्यायों से होकर

मिट्टी और भूमि (अ. 1) → जो जंगल कटकर खेत बना (अ. 2) → नहर का पानी (अ. 3) → रबी की फसल गेहूँ (अ. 4) → ट्रैक्टर का डीज़ल और पंप की बिजली (अ. 5) → आटा चक्की और उर्वरक कारख़ाना (अ. 6) → मंडी तक ट्रक, दुकान तक सड़क, तुम्हारे घर तक बाज़ार (अ. 7)

यानी पूरी पुस्तक एक ही कहानी थी — सात हिस्सों में बँटी हुई

और इसी आख़िरी कड़ी का नाम है — जीवन रेखाएँ

जाते-जाते — पाँच सूत्र जो सब कुछ बाँध देते हैं

  1. स्थल-जल-वायुपरिवहन के तीन मुख्य वर्ग
  2. सस्ती-ऊबड़-पहाड़-थोड़े-घर-कड़ीसड़क की महत्ता के छह कारण
  3. 1853 · 34 · 17 · 67,956रेल के चार आँकड़े
  4. 6 और 6पश्चिम में छह पत्तन, पूर्व में छह
  5. 95 और 68समुद्रों से व्यापार — मात्रा में 95%, मुद्रा में 68%

और अध्याय का अंतिम संदेश

✦

“स्थानिक से अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय व्यापार ने अर्थव्यवस्था को जीवन शक्ति दी है। इसने हमारे जीवन को समृद्ध किया है तथा आरामदायक जीवन के लिए सुविधाओं व साधनों में बढ़ोतरी की है।”

एक वाक्य में — बनाना काफ़ी नहीं; पहुँचाना भी उतना ही ज़रूरी है

और आख़िरी सवाल — कल जब कोई ट्रक, मालगाड़ी या जहाज़ देखो, तो सोचना: “इसमें क्या है, कहाँ से आ रहा है, और यह न चले तो किसका क्या रुक जाएगा?”

जो पढ़ाते हैं, वही लिखते और जाँचते हैं

इसे बनाने वाले

  • भरत चौधरीभरत चौधरीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. जेठान्तरी · ब्लॉक समदड़ी, जिला बालोतरा
  • वनिता कुमारीवनिता कुमारीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. रामसीन मूंगड़ा · ब्लॉक एवं जिला बालोतरा

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