अध्याय 4 — वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था · आर्थिक विकास की समझ · कक्षा 10
कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र (आर्थिक विकास की समझ) · पृष्ठ — 55 से 73
अपने घर की पाँच चीज़ें गिनाओ जो तुम्हारे दादा-दादी के ज़माने में नहीं थीं।
और किताब की पहली ही पंक्ति यही पूछती है
“वो दिन गुज़र गए, जब भारत की सड़कों पर केवल एम्बेसडर और फिएट कारें ही दिखाई देती थीं… कुछ ही वर्षों में हमारा बाज़ार पूर्णत: परिवर्तित हो गया है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 55
हमारे बाज़ारों में वस्तुओं के बहुव्यापी विकल्प अपेक्षाकृत नवीन परिघटना है। दो दशक पहले भी आपको भारत के बाज़ारों में वस्तुओं की ऐसी विविधता नहीं मिलेगी।
अध्याय के तीन सवाल
पृष्ठ 55
- हम इस तीव्र परिवर्तन को कैसे समझ सकते हैं?
- ऐसे कौन से कारक हैं जो इन परिवर्तनों को ला रहे हैं?
- और ये परिवर्तन लोगों का जीवन किस प्रकार प्रभावित कर रहे हैं?
★यह तीसरा सवाल ही अध्याय का असली सवाल है — और उसका उत्तर आपको चौंका देगा।
1 | बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ
पहले क्या था
“बीसवी शताब्दी के मध्य तक उत्पादन मुख्यत: देशों की सीमाओं के अंदर ही सीमित था। इन देशों की सीमाओं को लाँघने वाली वस्तुओं में केवल कच्चा माल, खाद्य पदार्थ और तैयार उत्पाद ही थे।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 56
“भारत जैसे उपनिवेशों से कच्चा माल एवं खाद्य पदार्थ निर्यात होते थे और तैयार वस्तुओं का आयात होता था।” — यह वही बात है जो तुमने ईस्ट इंडिया कंपनी के बारे में पढ़ी थी।
बहुराष्ट्रीय कंपनी — शब्दश: याद कीजिए★★
“एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।”
और वे जाती वहीं हैं जहाँ मिले — “सस्ता श्रम एवं अन्य संसाधन”; उद्देश्य — “उत्पादन लागत में कमी करने तथा अधिक लाभ कमाने” के लिए
एक चीज़, पाँच देश★
- अमेरिकाअनुसंधान केन्द्र में उत्पादों का डिज़ाइन
- चीनउसके पुर्ज़े विनिर्मित होते हैं
- मेक्सिको व पूर्वी यूरोपजहाज़ों से ले जाकर पुर्ज़ों को जोड़ा जाता है
- विश्व भर मेंतैयार उत्पाद बेचा जाता है
- भारतग्राहक सेवा कॉल सेंटरों के माध्यम से
और हर देश क्यों चुना गया
पृष्ठ 56
| देश | कारण |
|---|---|
| चीन | “एक सस्ता विनिर्माण केन्द्र होने का लाभ” |
| मेक्सिको, पूर्वी यूरोप | “अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों से अपनी निकटता के कारण लाभप्रद” |
| भारत | “अत्यंत कुशल इंजीनियर” और “अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवक” |
और इस पूरी व्यवस्था से बचत कितनी?
“ये सभी चीज़ें बहुराष्ट्रीय कंपनी की लागत का लगभग 50-60 प्रतिशत बचत कर सकती हैं।”
★“वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन विश्व स्तर पर कर रही है। परिणामत: उत्पादन प्रक्रिया क्रमश: जटिल ढंग से संगठित हुई है।”
एक लेबल पर लिखा है ‘मेड इन थाईलैण्ड’ — पर उसमें एक भी थाई उत्पाद नहीं है। कैसे?
तीन ज़रूरी परिभाषाएँ
निवेश
- “परिसंपत्तियों जैसे — भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरणों की ख़रीद में व्यय की गई मुद्रा”
- “इस आशा से किया जाता है कि ये परिसंपत्तियाँ लाभ अर्जित करेंगी”
विदेशी निवेश
- “बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को विदेशी निवेश कहते हैं”
- MNC वहीं जाती है जहाँ — बाज़ार नज़दीक · सस्ता कुशल-अकुशल श्रम · अनुकूल सरकारी नीतियाँ
2 | नियंत्रण के चार तरीक़े
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन कैसे फैलाती हैं★★
पृष्ठ 57-58
| # | तरीक़ा | उदाहरण / ख़ास बात |
|---|---|---|
| 1 | स्वयं कारख़ाना लगाना | जैसे फोर्ड मोटर्स ने चेन्नई के निकट |
| 2 | संयुक्त उत्पादन | स्थानीय कंपनी को दोहरा लाभ |
| 3 | ★स्थानीय कंपनी ख़रीदना | “सबसे आम रास्ता” — कारगिल ने परख फ़ूड्स को |
| 4 | छोटे उत्पादकों को ऑर्डर | वस्त्र · जूते-चप्पल · खेल का सामान |
संयुक्त उत्पादन का दोहरा लाभ
पहला लाभ
- अतिरिक्त निवेश के लिए धन
- जैसे — तीव्र उत्पादन के लिए मशीनें ख़रीदने के लिए
दूसरा लाभ
- उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी
- यानी स्थानीय कंपनी एक छलाँग में आगे पहुँच जाती है
कारगिल फ़ूड्स — “सबसे आम रास्ता”★
“एक बहुत बड़ी अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी कारगिल फ़ूड्स ने परख फ़ूड्स जैसी छोटी भारतीय कंपनियों को ख़रीद लिया है… परख फ़ूड्स के चार तेल शोधक केन्द्र भी थे, जिस पर अब कारगिल का नियंत्रण हो गया है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 58
★“अब कारगिल 50 लाख पैकेट प्रतिदिन निर्माण क्षमता के साथ भारत में खाद्य तेलों की सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी है।”
और शक्ति का असली पैमाना यह हैध्यान
“कई शीर्षस्थ बहुराष्ट्रीय कंपनियों की संपत्ति विकासशील देशों की सरकारों के सम्पूर्ण बजट से भी अधिक है।”
छोटे उत्पादकों पर पकड़ — “दूरस्थ उत्पादकों के मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तों का निर्धारण करने की प्रचण्ड क्षमता”
3 | फोर्ड मोटर्स
फोर्ड मोटर्स — भारत में
- कौनविश्व की सबसे बड़ी मोटरगाड़ी निर्माता, 26 देशों में प्रसार
- 1995भारत आई
- निवेशचेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए का विशाल संयंत्र
- किसके साथमहिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से
- 2017 तकभारत में 88,000 कारें बेचीं
- निर्यात1,81,000 कारें — दक्षिण अफ़्रीका, मेक्सिको, ब्राज़ील, अमेरिका
इस आँकड़े पर रुकिए★
भारत में बनी 1,81,000 कारें भारत के लिए नहीं थीं — वे दूसरे देशों के बाज़ारों के लिए थीं
यानी फोर्ड ने भारत में केवल विशाल बाज़ार का नहीं, कम उत्पादन लागत का भी लाभ उठाया
भारत को पुर्ज़ा-आपूर्ति केन्द्र क्यों बनाना चाहती है?
पृष्ठ 59
- श्रम और अन्य संसाधनों पर लागत कम है
- कई स्थानीय विनिर्माताओं की उपस्थिति जो कल-पुर्ज़ों की आपूर्ति करते हैं
- भारत और चीन के ग्राहकों से निकटता — बड़ी संख्या में ख़रीददार पास हैं
“कंपनी विश्व के दूसरे देशों में अपने संयंत्रों के लिए फोर्ड इंडिया का विकास पुर्ज़ा आपूर्ति केन्द्र के रूप में करना चाहती है।”
4 | विदेश व्यापार
विदेश व्यापार करता क्या है
पृष्ठ 59
- “घरेलू बाज़ारों से बाहर के बाज़ारों में पहुँचने के लिए उत्पादकों को एक अवसर प्रदान करता है”
- “उत्पादक… विश्व के अन्य देशों के बाज़ारों में भी प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं”
- “आयात से ख़रीददारों के समक्ष… अन्य विकल्पों का विस्तार होता है”
भारत में चीन के खिलौने★
- 1चीन के विनिर्माताओं को पता चला कि भारत में खिलौने अधिक मूल्य पर बिक रहे हैं
- 2अब ख़रीददारों के पास भारतीय और चीनी खिलौनों के बीच चयन का विकल्प है
- 3सस्ते दाम एवं नवीन डिज़ाइनों के कारण चीनी खिलौने अधिक लोकप्रिय हुए
- 4एक वर्ष में ही 70-80 प्रतिशत दुकानों में भारतीय खिलौनों का स्थान चीनी खिलौनों ने ले लिया
- 5अब भारत के बाज़ारों में खिलौने पहले की तुलना में सस्ते हैं
किसे लाभ, किसे हानि★
पृष्ठ 60
| कौन | असर |
|---|---|
| भारतीय ख़रीददार | ✓ “कम क़ीमत पर खिलौनों के अपेक्षाकृत अधिक विकल्प” |
| चीनी खिलौना निर्माता | ✓ “अपना व्यवसाय फैलाने के लिए एक अवसर” |
| भारतीय खिलौना निर्माता | ❌ हानि — “क्योंकि उनके खिलौने कम बिकते हैं” |
और विदेश व्यापार का असली नतीजा★★
“दो बाज़ारों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है। अब दो देशों के उत्पादक एक दूसरे से हज़ारों मील दूर होकर भी एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।”
★“इस प्रकार, विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाज़ारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।”
5 | वैश्वीकरण क्या है
परिभाषा — शब्दश:★★
“विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।”
“बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वैश्वीकरण की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभा रही हैं।” — वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ा है
पर एक बहुत ज़रूरी अपवादध्यान
“विगत कुछ दशकों में अनेक प्रतिबंधों के कारण विभिन्न देशों के बीच लोगों के आवागमन में अधिक वृद्धि नहीं हुई है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 61
★सामान तो आसानी से सरहद पार कर जाता है — पर आदमी नहीं। यह अभ्यास प्रश्न 13(अ) का सीधा उत्तर है।
6 | कारक — यह संभव कैसे हुआ
मुख्य कारक
“प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति वह मुख्य कारक है जिसने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को उत्प्रेरित किया।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 62
दो कारक
परिवहन प्रौद्योगिकी
- विगत पचास वर्षों में उन्नति
- ★कंटेनर — “ढुलाई-लागत में भारी बचत”
- “माल को बाज़ारों तक पहुँचाने की गति में वृद्धि”
- वायु यातायात की लागत में गिरावट
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी
- दूरसंचार — टेलीग्राफ़, टेलीफोन, मोबाइल, फैक्स
- “ये सुविधाएँ संचार उपग्रहों द्वारा सुगम हुई हैं”
- कंप्यूटर और इंटरनेट
- तत्काल ई-मेल और “अत्यंत कम मूल्य पर विश्व-भर में बात”
लंदन की पत्रिका, दिल्ली की छपाई★
- 1लंदन के पाठकों की पत्रिका की डिज़ाइनिंग और छपाई दिल्ली में होनी है
- 2पाठ्य-विषय इंटरनेट के द्वारा दिल्ली कार्यालय को भेज दिया जाता है
- 3दिल्ली के डिज़ाइनर दूरसंचार से लंदन कार्यालय के निर्देश लेते हैं
- 4डिज़ाइन कंप्यूटर पर तैयार होता है
- 5छपाई के बाद पत्रिकाएँ वायुमार्ग से लंदन भेजी जाती हैं
- 6भुगतान ई-बैंकिंग से लंदन के बैंक से दिल्ली के बैंक को तत्काल
सोचिए — क्या सूचना प्रौद्योगिकी के प्रसार के बिना वैश्वीकरण संभव होता?
7 | उदारीकरण
व्यापार अवरोधक क्या है
“आयात पर कर, व्यापार अवरोधक का एक उदाहरण है। इसे अवरोधक इसलिए कहा गया है, क्योंकि यह कुछ प्रतिबंध लगाता है।”
और कोटा — “सरकार आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या भी सीमित कर सकती है।”
अगर खिलौनों के आयात पर कर लगे तो?
पृष्ठ 64
- “ख़रीददारों को आयातित खिलौनों की अधिक क़ीमत चुकानी होगी”
- “चीन के खिलौने… इतने सस्ते नहीं रह जाएँगे और चीन से उनका आयात स्वत: कम हो जाएगा”
- “भारत के खिलौना-निर्माता अधिक समृद्ध हो जाएँगे।”
भारत ने पहले अवरोधक क्यों लगाए थे
पृष्ठ 64
| # | कारण |
|---|---|
| 1 | “देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण प्रदान करने के लिए” |
| 2 | “1950 और 1960 के दशकों में उद्योगों का उदय हो रहा था… आयात से प्रतिस्पर्धा इन उद्योगों को बढ़ने नहीं देती” |
| 3 | केवल अनिवार्य चीज़ों — मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम — के आयात की अनुमति |
| 4 | ★“सभी विकसित देशों ने विकास के प्रारंभिक चरणों में घरेलू उत्पादकों को… संरक्षण दिया है।” |
और फिर 1991 आया★★
“भारत में करीब सन् 1991 के प्रारंभ से नीतियों में कुछ दूरगामी परिवर्तन किए गए। सरकार ने यह निश्चय किया कि भारतीय उत्पादकों के लिए विश्व के उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा करने का समय आ गया है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 64
“यह महसूस किया गया कि प्रतिस्पर्धा से देश में उत्पादकों के प्रदर्शन में सुधार होगा, क्योंकि उन्हें अपनी गुणवत्ता में सुधार करना होगा।”
उदारीकरण — परिभाषा★★
“सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है।”
“सरकार पहले की तुलना में कम नियंत्रण करती है और इसलिए उसे अधिक उदार कहा जाता है।”
8 | विश्व व्यापार संगठन
विश्व व्यापार संगठन — चार बातें
पृष्ठ 65
- ध्येय — “अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना”
- शुरुआत — “विकसित देशों की पहल” पर
- सदस्य — विश्व के लगभग 160 देश
- काम — “नियमों को निर्धारित करता है और यह देखता है कि इन नियमों का पालन हो”
इनकी मान्यता — “विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर सभी अवरोधक हानिकारक हैं। कोई अवरोधक नहीं होना चाहिए।”
और यहीं किताब सवाल उठाती हैध्यान
“व्यवहार में यह देखा गया है कि विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को बरकरार रखा है। दूसरी ओर, विश्व व्यापार संगठन के नियमों ने विकासशील देशों के व्यापार अवरोधों को हटाने के लिए विवश किया है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 65
कृषि पर वाद-विवाद★
भारत
- “अधिकांश रोज़गार कृषि क्षेत्र प्रदान करता है”
- “सकल घरेलू उत्पाद का महत्त्वपूर्ण भाग” भी
अमेरिका
- जी.डी.पी. में कृषि — मात्र एक प्रतिशत
- कुल रोज़गार में — केवल 0.5 प्रतिशत
- फिर भी किसानों को सरकार से बहुत अधिक धन राशि
- “अधिशेष कृषि उत्पादों को दूसरे देशों के बाज़ारों में कम क़ीमत पर” बेचते हैं
इसीलिए विकासशील देश पूछते हैं
“हमने विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार व्यापार अवरोधकों को कम कर दिया, लेकिन आप लोगों ने… अपने किसानों को भारी धन राशि देना बरकरार रखा है…”
★“क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?”
9 | भारत में प्रभाव — किसे लाभ
जिन्हें वैश्वीकरण से लाभ हुआ★
पृष्ठ 66-67
| कौन | कैसे |
|---|---|
| शहरी धनी उपभोक्ता | अधिक विकल्प, बेहतर गुणवत्ता, कम क़ीमत; “उच्चतर जीवन स्तर का आनन्द” |
| नये रोज़गार | सेलफोन, मोटर गाड़ी, इलेक्ट्रॉनिक, ठंडे पेय, जंक फ़ूड, बैंकिंग में MNC निवेश |
| स्थानीय आपूर्तिकर्ता | “कच्चे माल की आपूर्ति करने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध” हुईं |
| शीर्ष भारतीय कंपनियाँ | नवीनतम प्रौद्योगिकी में निवेश, “उत्पादन-मानकों को ऊँचा उठाया” |
और कुछ भारतीय कंपनियाँ ख़ुद बहुराष्ट्रीय बन गईं★
टाटा मोटर्स (मोटरगाड़ियाँ) · इंफोसिस (आई.टी.) · रैनबैक्सी (दवाइयाँ) · एशियन पेंट्स (पेंट) · सुंदरम फास्नर्स (नट और बोल्ट)
“वैश्वीकरण ने कुछ बड़ी भारतीय कंपनियों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के रूप में उभरने के योग्य बनाया है।”
सेवा क्षेत्र में नये अवसर
पृष्ठ 67
- कॉल सेंटर और लंदन की पत्रिका का प्रकाशन
- आँकड़ा प्रविष्टि (डाटा एन्ट्री) · लेखाकरण · प्रशासनिक कार्य · इंजीनियरिंग
- “ये सेवाएँ भारत जैसे देशों में अब सस्ते में उपलब्ध हैं और विकसित देशों को निर्यात की जाती हैं”
विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज़)
पृष्ठ 67
| बात | विवरण |
|---|---|
| क्या मिलेगा | बिजली, पानी, सड़क, परिवहन, भण्डारण, मनोरंजन और शैक्षिक — “विश्व स्तरीय सुविधाएँ” |
| ★कर | “आरंभिक पाँच वर्षों तक कोई कर नहीं देना पड़ता है” |
| ! श्रम-क़ानून | “श्रम-क़ानूनों में लचीलापन” — “कंपनी की श्रम लागत में कटौती करने के लिए ऐसा किया जाता है” |
| और फिर भी | “विदेशी कंपनियाँ अभी भी संतुष्ट नहीं हैं और… और अधिक लचीलेपन की माँग कर रही हैं” |
अब तक की तस्वीर सुंदर थी। पर किताब यहीं एक वाक्य में सब बदल देती है।
अध्याय का मोड़ध्यान
“उत्पादकों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का एक समान प्रभाव नहीं पड़ा है।”
अब हम दूसरा पक्ष देखेंगे — और वहाँ तस्वीर बिल्कुल अलग है
10 | छोटे उत्पादक — प्रतिस्पर्धा करो या नष्ट हो जाओ
रवि की कहानी★★
- 1992होसुर (तमिलनाडु) में बैंक-ऋण लेकर संधारित्र बनाने की कंपनी शुरू की
- तीन वर्ष मेंउत्पादन बढ़ा और 20 कर्मचारी काम करने लगे
- 2001सरकार ने WTO समझौते के अनुसार संधारित्रों के आयात पर से प्रतिबंध हटा दिए
- फिरआयातित सामान की क़ीमत रवि की क़ीमत से आधी निकली
- आजवर्ष 2000 से आधे से भी कम उत्पादन, और केवल सात श्रमिक
और यह अकेला उदाहरण नहीं है
“बैटरी, संधारित्र, प्लास्टिक, खिलौने, टायरों, डेयरी उत्पादों एवं खाद्य तेल के उद्योग कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जहाँ प्रतिस्पर्धा के कारण छोटे विनिर्माताओं पर कड़ी मार पड़ी है। कई इकाइयाँ बंद हो गईं, जिसके चलते अनेक श्रमिक बेरोज़गार हो गए।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 68
और इसीलिए यह गंभीर बात है★
“भारत में लघु और मध्यम उद्योगों में कृषि के बाद सबसे अधिक श्रमिक (11 करोड़) नियोजित हैं।”
यानी यह किसी एक रवि की कहानी नहीं — करोड़ों लोगों की रोज़ी-रोटी का सवाल है
11 | प्रतिस्पर्धा और अनिश्चित रोज़गार
श्रमिकों के लिए एक वाक्यध्यान
“बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण अधिकांश नियोक्ता इन दिनों श्रमिकों को रोज़गार देने में लचीलापन पसंद करते हैं। इसका अर्थ है कि श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है।”
वस्त्र निर्यात की श्रृंखला★
- 1अमेरिका-यूरोप की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ लाभ के लिए सबसे सस्ती वस्तुएँ खोजती हैं
- 2वे भारतीय वस्त्र निर्यातकों को ऑर्डर देती हैं
- 3निर्यातक कच्चे माल की लागत नहीं घटा सकता
- 4इसलिए वह श्रम-लागत में कटौती करता है
- 5स्थायी के बदले अस्थायी रोज़गार, लम्बे घंटे, रात की पाली, कम मज़दूरी
सुशीला — पहले और अब★★
जब स्थायी थी
- दिल्ली के वस्त्र निर्यातक उद्योग में कई वर्ष काम किया
- स्वास्थ्य बीमा की हकदार
- भविष्य निधि की हकदार
- ओवरटाइम पर दुगुनी मज़दूरी
आज
- 1990 के दशक के अंत में फैक्ट्री बंद; छह माह बाद 30 किमी दूर काम मिला
- कई वर्ष बाद भी अस्थायी श्रमिक
- आधे से भी कम कमाती है
- सातों दिन सुबह 7.30 से रात 10 बजे
और यह पंक्ति सबसे भारी है
“एक दिन काम नहीं करने का अर्थ है, उस दिन की मज़दूरी नहीं मिलना। उसे अब कोई अन्य लाभ नहीं मिलता है जो पहले मिलता था।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 69 — सुशीला
और अध्याय 2 से जोड़िए★★
“आज अधिकांश श्रमिक असंगठित क्षेत्र में नियोजित हैं। यही नहीं, संगठित क्षेत्र में क्रमश: कार्य-परिस्थितियाँ असंगठित क्षेत्र के समान होती जा रही हैं।”
★“वैश्वीकरण के कारण मिले लाभ में श्रमिकों को न्यायसंगत हिस्सा नहीं दिया गया है।”
12 | न्यायसंगत वैश्वीकरण का संघर्ष
पहले समस्या
“वैश्वीकरण सभी के लिए लाभप्रद नहीं रहा है। शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर, अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 70
तो हल क्या है?
“चूँकि वैश्वीकरण अब एक सच्चाई है… न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।”
यानी सवाल इसे रोकने का नहीं — न्यायसंगत बनाने का है
सरकार के पाँच काम★
पृष्ठ 70
| # | काम |
|---|---|
| 1 | नीतियाँ “देश के सभी लोगों के हितों का संरक्षण” करें, केवल धनी-प्रभावशाली का नहीं |
| 2 | “श्रमिक क़ानूनों का उचित कार्यान्वयन हो और श्रमिकों को अपने अधिकार मिलें” |
| 3 | “छोटे उत्पादकों को… मदद, जब तक वे प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम न हो जायें” |
| 4 | ज़रूरत हो तो “व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग” |
| 5 | “‘न्यायसंगत नियमों’ के लिए विश्व व्यापार संगठन से समझौते” |
और दो और ताक़तें
विकासशील देश
- “विश्व व्यापार संगठन में विकसित देशों के वर्चस्व के विरुद्ध…”
- ”…समान हितों वाले विकासशील देशों को मिलकर लड़ना होगा”
जनता
- “बड़े अभियानों और जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने… महत्त्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित किया है”
- ★“जनता भी न्यायसंगत वैश्वीकरण के संघर्ष में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है”
- हांगकांग में डब्ल्यू.टी.ओ. के ख़िलाफ़ प्रदर्शन, 2005
13 | दोहराइए
पूरा अध्याय दो कॉलम में★★
यही उत्तर-पुस्तिका में बनाइए
| ✓ किसे मिला | ❌ किससे छिना |
|---|---|
| शहरी धनी उपभोक्ता — विकल्प, गुणवत्ता, कम क़ीमत | छोटे उत्पादक — इकाइयाँ बंद (रवि) |
| शीर्ष भारतीय कंपनियाँ — प्रौद्योगिकी, ऊँचे मानक | श्रमिक — अस्थायी रोज़गार, कम मज़दूरी (सुशीला) |
| आई.टी. कर्मचारी — कॉल सेंटर, डाटा एन्ट्री | संगठित क्षेत्र के लाभ — बीमा, भविष्य निधि |
| भारतीय MNC — टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी | खिलौने, बैटरी, टायर, खाद्य तेल के विनिर्माता |
चार परिभाषाएँ — इनसे बचा नहीं जा सकता
शब्दश: याद कीजिए
| शब्द | परिभाषा |
|---|---|
| बहुराष्ट्रीय कंपनी | “एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है” |
| वैश्वीकरण | “विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया” |
| व्यापार अवरोधक | वह प्रतिबंध जो सरकार व्यापार पर लगाए — जैसे आयात पर कर |
| उदारीकरण | “सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया” |
रटने के लिए केवल यह
परीक्षा से पहले
| क्या | कितना |
|---|---|
| फोर्ड | 26 देश · 1995 · 1,700 करोड़ · 88,000 / 1,81,000 |
| कारगिल | परख फ़ूड्स · 50 लाख पैकेट प्रतिदिन |
| चीनी खिलौने | 70-80 प्रतिशत दुकानें |
| उदारीकरण | 1991 |
| WTO | लगभग 160 देश · अमेरिका में कृषि 1% और 0.5% |
| सेज़ | पाँच वर्ष कर से छूट |
| रवि | 1992 · 20 कर्मचारी · 2001 · सात श्रमिक |
| सुशीला | 35 वर्ष · 30 किमी · 7.30 से 10 बजे |
| लघु-मध्यम उद्योग | 11 करोड़ श्रमिक |
और अंत में यही एक वाक्य★★
“वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है।”
हर पाँच अंक के उत्तर में दोनों पक्ष लिखिए — किसे लाभ, किसे हानि। एक-तरफ़ा उत्तर आधा उत्तर है।
अध्याय की आख़िरी सीख
जब भी कोई बड़ा बदलाव हो, यह पूछना मत भूलना — “इससे फ़ायदा किसे हुआ, और किससे छिना?”
यही इस अध्याय की असली पढ़ाई है

