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कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान

हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ

समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे · अध्याय 14

भरत चौधरी और वनिता कुमारी ने बनाया · marushala.com

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कक्षा 6 • सामाजिक विज्ञान • समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे • अध्याय 14 — हमारे आस-पास की आर्थिक गतिविधियाँ

कक्षा — 6 · विषय — सामाजिक विज्ञान (समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे) · पृष्ठ — 195 से 208

पिछले अध्याय का एक खाना

अध्याय 13 में हमने सारी गतिविधियों को दो में बाँटा था — आर्थिक और गैर-आर्थिक। आज हम उनमें से एक खाना खोलेंगे।

आज का पूरा काम एक पंक्ति में★

आर्थिक = प्राथमिक + द्वितीयक + तृतीयक

और अध्याय का उद्धरण

आर्थिक गतिविधि से ही समृद्धि आती है, इसका अभाव भौतिक तनाव देता है। सार्थक आर्थिक गतिविधि का अभाव वर्तमान समृद्धि और भावी प्रगति में बाधक होता है।

पृ. 195 — कौटिल्य (अर्थशास्त्र)

यह वही ‘अर्थशास्त्र’ है★

जिससे अध्याय 11 में संग्रहण, करवाटिका, द्रोणमुख और स्थानीय पढ़े थे।

अध्याय के तीन महत्वपूर्ण प्रश्न

पृ. 195

  • आर्थिक गतिविधियों को किस प्रकार वर्गीकृत किया जाता है?
  • विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को क्षेत्रकों (सेक्टरों) में समूहबद्ध करने का क्या आधार है?
  • यह तीन क्षेत्रक (सेक्टर) आपस में किस प्रकार संबंधित हैं?

★अध्याय ठीक इसी क्रम में चलता है।

परिचय — किताब स्वयं जोड़ बनाती है

पृ. 195

  • “अध्याय 13 में हमने दो प्रकार की गतिविधियों के बारे में सीखा — आर्थिक और गैर-आर्थिक।
  • जिन गतिविधियों में मौद्रिक मूल्य का अर्जन होता है, उन्हें आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं।
  • …इस अध्याय में हम जानेंगे कि इन आर्थिक गतिविधियों को कैसे वर्गीकृत किया जाता है।”

1 | पहले और आज | गतिविधियाँ क्यों बढ़ीं

बीते दशकों में क्या बदला

  • पहले के समय में
  • कृषि • पशुपालन
  • औजारों का निर्माण
  • मिट्टी के बर्तन • कपड़े बुनना
  • आज
  • कंप्यूटर, मोबाइल फोन और ड्रोन
  • बैंक, विद्यालय, होटल • वाहन • फर्नीचर
  • सॉफ्टवेयर • रेफ्रिजरेटर की मरम्मत

पृ. 196

और किताब बताती है कि यह क्यों हुआ

पृ. 196

  • “जैसे-जैसे समाज में प्रगति हुई, उन आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि हुई
  • जिनके माध्यम से लोग अपनी आजीविका चलाते हैं।”

और अब सबसे ज़रूरी वाक्य — हम बाँट क्यों रहे हैं★★

“इन सभी गतिविधियों के वर्गीकरण से हमें यह समझने में सहायता मिलती है कि ये कैसे कार्य करती हैं और इनके मध्य क्या संबंध है।”

पृ. 196

यानी★

हम बाँट इसलिए रहे हैं ताकि जोड़ सकें।

‘आर्थिक क्षेत्रक’ की परिभाषा

पृ. 196

  • “व्यापक समूह, जिनमें ऐसी विभिन्न गतिविधियाँ सम्मिलित होती हैं
  • जिनसे एक राष्ट्र की आर्थिक समृद्धि में सहायता मिलती है।”

★‘समृद्धि’ — यह वही शब्द है जो कौटिल्य के उद्धरण में था।

2 | तीन क्षेत्रक | और तीन क्रियाएँ

पूरा अध्याय इस एक तालिका में है★★★

क्षेत्रकक्रियाकिताब की परिभाषा
प्राथमिकनिकालनाप्रत्यक्ष रूप से प्रकृति पर निर्भर
द्वितीयकबदलनाप्राथमिक की वस्तुओं को रूपांतरित करना
तृतीयकपहुँचानादोनों को सहायता प्रदान करना

ये तीन शब्द याद रखिए★

निकालना → बदलना → पहुँचाना

और यह चित्र 197 — पाँच-पाँच उदाहरण★★

प्राथमिकद्वितीयकतृतीयक
कृषिनिर्माणस्वास्थ्य देखभाल
खननविनिर्माणव्यापार और उपयोगी सामग्री
मछली पकड़नाजल-आपूर्तिसंचार
कुक्कुट पालनसौर ऊर्जाबैंकिंग
वानिकीविद्युत उत्पादनपरिवहन

पृ. 197

और इस तालिका में एक चौंकाने वाली बात हैध्यान

‘सौर ऊर्जा’ द्वितीयक में क्यों है?

सोचिए★

धूप तो प्रकृति से आती है।

और उत्तर यह है★★

हम सूरज नहीं बेचते — हम उसे बिजली में बदलकर बेचते हैं। और ‘बदलना’ ही द्वितीयक है।

यही जोड़ी याद रखिए★★

  • खनन
  • कोयला निकालना
  • = प्राथमिक
  • विद्युत उत्पादन
  • कोयले से बिजली बनाना
  • = द्वितीयक

एक ही कोयला, दो अलग क्षेत्रक★

क्योंकि क्रिया अलग है।

3 | प्राथमिक क्षेत्रक | निकालना

किताब की परिभाषा

पृ. 196

  • “जिन आर्थिक गतिविधियों में लोग प्रत्यक्ष रूप से वस्तुओं के उत्पादन के लिए प्रकृति पर निर्भर रहते हैं,
  • उन्हें प्राथमिक गतिविधियाँ या प्राथमिक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं।”

और पाद-टिप्पणी में एक और परिभाषा

पृ. 196

  • “प्राथमिक क्षेत्रक — उन गतिविधियों का समूह,
  • जिसमें प्रकृति से सीधे कच्चे माल का निष्कर्षण शामिल होता है,
  • जैसे — कृषि, मत्स्य पालन, वानिकी आदि।”

यहाँ मुख्य शब्द यही है★★

निष्कर्षण — यानी निकालना

किताब के पाँच उदाहरण

पृ. 196

  • कृषि क्षेत्र में अन्न और सब्जियों की खेती
  • जंगलों से लकड़ी एकत्रित करना • खदानों से कोयला निकालना
  • मत्स्य पालन से मछलियाँ • कुक्कुट पालन फार्म से अंडे प्राप्त करना

और पृष्ठ 198 पर किताब फिर गिनाती है

पृ. 198

  • “कृषि, खनन, मछली पकड़ना, पशु पालन, वानिकी इत्यादि
  • कुछ मुख्य प्राथमिक गतिविधियाँ हैं।”

★दो नए शब्द — वानिकी और मात्स्यिकी।

आइए विचार करें

पृ. 198

  • “क्या आप ऐसी प्राथमिक गतिविधियों के बारे में सोच सकते हैं, जिन्हें आपने पहले देखा है?
  • इन गतिविधियों में कौन-से प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग हुआ है?”

! ध्यान दीजिए — प्रश्न गतिविधि नहीं, प्राकृतिक संसाधन पूछता है।

4 | द्वितीयक क्षेत्रक | बदलना

किताब की परिभाषा

पृ. 199

  • “ऐसी आर्थिक गतिविधियाँ जिनमें लोग प्राथमिक क्षेत्रक पर आधारित वस्तुओं को रूपांतरित करके
  • अन्य वस्तु का उत्पादन करते हैं, उन्हें द्वितीयक गतिविधियाँ कहते हैं।”

और इसमें तीन अलग चीज़ें हैंध्यान

#किताब के शब्दों मेंउदाहरण
1निर्माणभवनों, सड़कों आदि का निर्माण
2आवश्यक वस्तुएँ प्रदान करनापानी, बिजली, गैस
3विनिर्माणउद्योगों और उत्पादन इकाइयों में

पृ. 199

सबसे आम भूलध्यान

“द्वितीयक का अर्थ केवल कारखाना है।”

पर किताब स्वयं कहती है★

“इसमें … विनिर्माण भी सम्मिलित है” — यानी कारखाना इसका एक हिस्सा है, पूरा नहीं।

रूपांतरण की जोड़ियाँ — सबसे अधिक अंक यहीं से★★

प्राथमिक से मिला→ द्वितीयक में बना
कृषि से अनाजमिलों में आटा
मूंगफलीतेल
चाय की पत्तियाँचाय
जंगल से लकड़ीफर्नीचर और कागज
कपासकपड़े
लौह अयस्कइस्पात → कार, ट्रक

पृ. 199

अंतिम पंक्ति पर रुकिए★

उसमें दो चरण हैं — यानी द्वितीयक के भीतर भी कई चरण होते हैं।

ध्यान रखें — भारत में 2022 के दौरान उत्पादित इकाइयाँ

मोटर वाहन के प्रकारसंख्या
यात्री वाहन जैसे — कारें45 लाख
वाणिज्यिक वाहन जैसे — ट्रक10.3 लाख
तिपहिया वाहन8.6 लाख
दोपहिया वाहन2 करोड़

पृ. 200 — स्रोत: सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स

इस तालिका से एक ही बात याद रखिए★

सबसे अधिक बनने वाला वाहन — दोपहिया, दो करोड़।

और यह जोड़ बनाइए★

कार बनाना द्वितीयक है — पर कार बेचने वाला शोरूम और ठीक करने वाला मैकेनिक तृतीयक हैं।

5 | तृतीयक क्षेत्रक | पहुँचाना

किताब की परिभाषा

पृ. 200

  • “वे सभी आर्थिक गतिविधियाँ, जो प्राथमिक और द्वितीयक गतिविधियों में सम्मिलित लोगों को सहायता प्रदान करती हैं,
  • उन्हें तृतीयक गतिविधियाँ या तृतीयक क्षेत्रक की आर्थिक गतिविधियाँ कहते हैं।”

और अब पहचानने की कुंजी★★

“इनमें ऐसी सेवाएँ सम्मिलित हैं, जिन्हें देखा नहीं जा सकता लेकिन यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।”

पृ. 200

एक वाक्य में★

प्राथमिक और द्वितीयक में सामान बनता है। तृतीयक में सेवा होती है — और सेवा दिखती नहीं।

किताब के उदाहरण — पहला समूह

पृ. 200

  • ट्रक चालक — “अनाज और सब्जियों को खेत से उद्योग या बाजार में ले जाता है”
  • फल या सब्जियों के विक्रेता — “कृषि उपज को घरेलू उपभोक्ताओं को बेचते हैं”

और दूसरा समूह

पृ. 200–201

  • चिकित्सक, नर्स, शिक्षक, अधिवक्ता और विमान चालक
  • तकनीशियन (मोबाइल फोन, टेलीविजन की मरम्मत) • मैकेनिक (कार, ट्रैक्टर) • बिजली मिस्त्री
  • संचार सेवाएँ • सॉफ्टवेयर • होटल, रेस्तरां, बैंक, विद्यालय, चिकित्सालय, हवाई अड्डे, दुकानें, गोदाम

और किताब इसे एक और नाम देती है★★

“इस क्षेत्रक को सेवा क्षेत्रक भी कहते हैं।”

पृ. 201

यहाँ बच्चे अटकते हैंध्यान

“सॉफ्टवेयर बनाना तो ‘बनाना’ है — फिर तृतीयक क्यों?”

उत्तर★

क्योंकि उसमें कोई कच्चा माल रूपांतरित नहीं होता — और उसे देखा नहीं जा सकता।

‘गोदाम’ की परिभाषा

पृ. 201

  • “विशाल इमारतें जिसमें उत्पादों को
  • बेचने, उपयोग करने या दुकानों में किराए पर देने से पहले रखा जाता है।”

6 | अमूल की कहानी | तीनों क्षेत्रक एक साथ

किताब हमें एक यात्रा पर ले जाती है

पृ. 201

  • “तीनों प्रकार की आर्थिक गतिविधियाँ या आर्थिक क्षेत्रक, प्राकृतिक कच्चे माल को अंतिम उत्पाद में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”
  • “आइए, गुजरात के आणंद जिले में एक गाँव का काल्पनिक भ्रमण करते हैं…”

आज की स्थिति

पृ. 202

  • किसान गायों का दूध दुहते हैं और आस-पास की डेयरी में बेचते हैं।
  • माह के अंत में उन्हें दूध की गुणवत्ता और तौल के आधार पर भुगतान मिलता है।

और फिर किताब एक वाक्य लिखती है★

“हालाँकि 50 साल पहले ऐसी स्थिति नहीं थी।”

पृ. 202

1940 के दशक की समस्याएँ

पृ. 202

  • किसान चिलचिलाती गरमी में साइकिल से या पैदल दूध बेचने जाते थे
  • गर्म मौसम में दूध जल्दी खराब हो जाता या फट जाता था
  • कठिन परिश्रम के बाद भी बेहद कम आमदनी होती थी

और सबसे बड़ी समस्या

पृ. 202

  • “इसलिए उन्हें बिचौलिए पर निर्भर रहना पड़ता था,
  • जो किसानों से बहुत कम कीमत पर अधिक मात्रा में दूध खरीदते और इसे बाजार में बेच देते थे।
  • कई बार किसान बिचौलियों के कारण ठगा या उत्पीड़ित अनुभव करते थे।”

पर सावधान — किताब उन्हें ‘बुरा’ नहीं कहतीध्यान

“बिचौलिए — व्यक्ति, जो उत्पादकों से सामान खरीदते हैं और उपभोक्ताओं को बेचते हैं। बिचौलिए इस सेवा के लिए शुल्क लेते हैं।”

पृ. 202

यानी बिचौलिया भी एक तृतीयक गतिविधि है★★

समस्या उनके होने में नहीं थी — समस्या यह थी कि किसान के पास कोई विकल्प नहीं था।

सरदार पटेल का परामर्श

पृ. 203

  • “एक दिन सभी किसान मिलकर देश के एक बड़े नेता सरदार वल्लभ भाई पटेल के पास अपनी समस्याएँ लेकर मिलने गए।
  • उन्होंने स्वेच्छा से कार्य करने और बिचौलियों पर निर्भरता को रोकने के लिए एक सहकारी संगठन बनाने का परामर्श दिया।”
  • “किसानों ने सरदार पटेल का परामर्श माना।”

‘सहकारी संगठन’ की परिभाषा — चार भागों में★★

किताब के शब्दों में
कैसे बनता हैव्यक्ति स्वेच्छा से एक साथ आकर
किस रूप मेंऔपचारिक तरीके से
किसलिएअपनी आर्थिक तथा सामाजिक आवश्यकताओं को पूरा करने
★स्वामी कौनसभी सदस्य — और निर्णय सामूहिक रूप से

पृ. 203

अमूल की स्थापना

पृ. 203

  • “अमूल की स्थापना 1946 में श्री त्रिभुवन दास पटेल (अधिवक्ता और स्वतंत्रता सेनानी)
  • तथा डॉ. वर्गीज कुरियन (एक इंजीनियर) के नेतृत्व में की गई।”

और उसका परिणाम

पृ. 203

  • ★“इस प्रयास ने किसानों, विशेषकर महिलाओं को एकजुट किया तथा दूध के उत्पादन और बिक्री पर उनका नियंत्रण बढ़ा।”
  • “इन कार्यों को सभी ने आपस में साझा किया जिसके कारण इन सभी की आमदनी बढ़ी।”
  • ★“उन्हें अब बिचौलियों की जरूरत नहीं थी और वे एक बड़ा परिवार बन गए।”

7 | एक ही दूध | तीन क्षेत्रक

और अब किताब स्वयं तीनों अलग कर देती है★★★

चरणक्षेत्रक
गाय का दूध दुहना (प्राकृतिक स्रोत से प्रत्यक्ष)प्राथमिक
कारखाने में पाउडर, घी, पनीर, मक्खन बनानाद्वितीयक
ट्रक, लॉरी, रेल, वायुयान • खुदरा भंडार • विपणनतृतीयक

पृ. 204

इसे याद रखिए★★★

एक ही दूध — तीन क्षेत्रक। यही ‘परस्पर निर्भरता’ है।

दो और परिभाषाएँ

पृ. 204

  • खुदरा — “माल की बिक्री को थोड़ी मात्रा में अंतिम उपभोगकर्ताओं तक पहुँचाना और जिसका उद्देश्य माल का पुनर्विक्रय नहीं है।”
  • निर्यात — “वस्तुएँ और सेवाएँ, जो किसी एक देश में उत्पादित होती हैं और इन्हें किसी अन्य देश के क्रेताओं या उपभोक्ताओं को बेचा जाता है।”

ध्यान रखें — अन्य सहकारी दुग्ध संगठन

संगठनराज्य
नंदिनीकर्नाटक
मदर डेयरीदिल्ली — राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र
आविनतमिलनाडु
विजयाआंध्र प्रदेश
केवीनागालैंड
सुधाबिहार
वरकापंजाब

पृ. 204

ध्यान दीजिए★

एक ही विचार — पूरे देश में, चारों दिशाओं में।

8 | आपकी अपनी किताब | चित्र 14.1

अब सबसे अच्छा उदाहरण★★

जो किताब आपके हाथ में है — वह कैसे बनी?

किताब स्वयं दिखाती है

पृ. 205

  • “नीचे दिए गए चित्रों के माध्यम से, आइए जानें कि आपकी पाठ्यपुस्तकें कैसे बनती हैं।
  • यह चित्र दर्शाते हैं कि कैसे लुगदी (पेड़ के काष्ठीय रेशे) को कागज और उसके बाद इस कागज पर मुद्रण कर इसे पाठ्यपुस्तकों में परिवर्तित करते हैं।”

आठ चरण, और उनका वर्गीकरण★★

#चित्र मेंक्षेत्रक
1पेड़ काटनाप्राथमिक
2लट्ठे उठाना और ढेर लगानाप्राथमिक / तृतीयक
3–4ट्रक में लादना और ले जानातृतीयक
5कागज मिल में कागज बननाद्वितीयक
6गोदाम में रखनातृतीयक
7कागज पर मुद्रणद्वितीयक
8दुकान में बिकनातृतीयक

और एक बात ध्यान दीजिए★

तृतीयक बीच में भी आया, अंत में भी — यानी क्रम हमेशा 1-2-3 नहीं होता।

और किताब का निष्कर्ष★★★

”…कोई भी गतिविधि संभव नहीं होती, अगर यह तीनों क्षेत्रक एक साथ कार्य नहीं करते।”

पृ. 206

ध्यान रखें — कागज का पुनर्चक्रण

पृ. 206

  • “केवल एक टन कागज का पुनर्चक्रण करने से 17 पेड़ों एवं 2.5 घन मीटर लैंडफिल स्थान की बचत की जा सकती है।”
  • “पुनर्चक्रित किए गए कागज का उपयोग करने से 70 प्रतिशत ऊर्जा और पानी की बचत होती है।”

★पूछिए — हम कक्षा में कागज का विवेकपूर्ण उपयोग कैसे कर सकते हैं?

9 | समापन | और पुस्तक का अंत

अंतिम क्रियाकलाप

पृ. 207

  • “अपने आस-पास की आर्थिक गतिविधियों की एक सूची बनाइए और प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक गतिविधियों के रूप में उन्हें वर्गीकृत कीजिए।”
  • “तीर लगाकर दर्शाइए कि वे एक-दूसरे से किस प्रकार संबंधित और परस्पर आश्रित हैं;
  • ★यदि इनमें से किसी एक गतिविधि का अंत हो जाता है, तो क्या होगा?”

यह अंतिम प्रश्न सबसे अच्छा है★★

शृंखला बनाइए, फिर बीच से एक कड़ी मिटा दीजिए — और देखिए क्या होता है।

आगे बढ़ने से पहले… — दोनों बिंदु

पृ. 207

  • “इस अध्याय में हमने आर्थिक गतिविधियों के तीन क्षेत्रकों के बारे में सीखा है।”
  • “विभिन्न उदाहरणों और चित्रों से तीनों प्रकार की आर्थिक गतिविधियों या क्षेत्रकों — प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक की भिन्नता और उनकी परस्पर निर्भरता को समझने में सहायता मिली है।”

दो शब्द, और पूरा अध्याय★

भिन्नता · परस्पर निर्भरता

पूरे अध्याय के जाल — एक बार देख लीजिएध्यान

जालसही बात
“द्वितीयक = केवल कारखाना”निर्माण और पानी/बिजली/गैस भी
“सौर ऊर्जा प्राथमिक है”हम धूप नहीं, बिजली बेचते हैं
“सॉफ्टवेयर द्वितीयक है”तृतीयक — कोई कच्चा माल नहीं बदलता
“एक चीज़ एक ही क्षेत्रक में”एक ही दूध तीनों से गुज़रता है
“बिचौलिए बुरे लोग हैं”किताब उन्हें सेवा देने वाला बताती है
“तृतीयक कम ज़रूरी है”उसके बिना बाकी दोनों चल ही नहीं सकते

और अब पहले पृष्ठ पर लौटिए

आर्थिक गतिविधि से ही समृद्धि आती है।

पृ. 195 — कौटिल्य (अर्थशास्त्र)

और यह पुस्तक का अंतिम अध्याय है★★

जो चीज़ आपके हाथ में है, वह किसी एक व्यक्ति ने नहीं बनाई — उसे प्रकृति से आप तक पहुँचाने में तीनों क्षेत्रकों ने काम किया है।

जो पढ़ाते हैं, वही लिखते और जाँचते हैं

इसे बनाने वाले

  • भरत चौधरीभरत चौधरीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. जेठान्तरी · ब्लॉक समदड़ी, जिला बालोतरा
  • वनिता कुमारीवनिता कुमारीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. रामसीन मूंगड़ा · ब्लॉक एवं जिला बालोतरा

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