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कक्षा 11 · इतिहास

लेखन कला और शहरी जीवन

अध्याय 1

भरत चौधरी और वनिता कुमारी ने बनाया · marushala.com

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कक्षा XI • इतिहास • विषय 1 — लेखन कला और शहरी जीवन

कक्षा — 11 · विषय — इतिहास (विश्व इतिहास के कुछ विषय)

यदि लेखन कला का विकास न हुआ होता, तो शहरों की गतिविधियाँ कैसे चलतीं?

0 | प्रारंभिक समाज | मानव-उद्भव; खेती की शुरुआत; कालक्रम एक

खेती से पहले का जीवन

खंड-प्रस्तावना

  • मानव प्राणियों का प्रादुर्भाव सर्वप्रथम अफ़्रीका में
  • अध्ययन के साक्ष्य — हड्डियाँ और पत्थर के औज़ार
  • भरण-पोषण: कंदमूल-बीज संग्रह और शिकार
  • निवास: जंगल, गुफाएँ, कामचलाऊ आसरे, शिलाश्रय
  • प्रश्न: आग और भाषा का प्रयोग कब-कैसे शुरू हुआ?

पहले नगरों से कम-से-कम 5000 वर्ष पहले तक मनुष्य गुफाओं-आसरों में ही रहता था

खेती की ओर — लगभग 10,000 वर्ष पहले

  • खानाबदोश जीवन छोड़कर एक स्थान पर बसना
  • पश्चिमी एशिया: गेहूँ, जौ, मटर, दालें
  • पूर्वी/दक्षिण-पूर्वी एशिया: ज्वार-बाजरा, धान; अफ़्रीका: ज्वार-बाजरा
  • पालतू पशु: भेड़-बकरी, ढोर, सूअर, गधा
  • रेशों से वस्त्र: रूई, पटसन, ऊन
  • लगभग 5000 वर्ष पहले: पशु हलों और गाड़ियों में जुते

कुछ विद्वानों ने इस परिवर्तन को ‘क्रांति’ कहा — पर यह कई हज़ार वर्ष लंबी धीमी प्रक्रिया थी

खेती के साथ आए परिवर्तन

  • फसल पकने तक रुकना → स्थायी घर
  • अनाज-भंडारण व भोजन हेतु मिट्टी के बर्तन
  • पॉलिशदार औज़ार — ओखली-मूसल, कुल्हाड़ी, कसिया, फावड़ा
  • ताँबा-टिन खनिजों की पहचान (नीले-हरे रंग से)
  • दूरस्थ वस्तुओं का ज्ञान — लकड़ी, पत्थर, सीपियाँ, ऑब्सीडियन
  • व्यापार बढ़ा → गाँव-कस्बे → छोटे-छोटे राज्य

1 | मेसोपोटामिया का परिचय | नाम; क्षेत्र; भाषाएँ; बाइबिल-संबंध

मेसोपोटामिया — नाम और पहचान

नाम की व्युत्पत्ति

  • यूनानी मेसोस = मध्य
  • पोटैमोस = नदी
  • अर्थ: दज़ला-फ़रात के बीच की उपजाऊ धरती
  • आज: इराक गणराज्य का हिस्सा

प्रसिद्धि के आधार

  • संपन्नता और शहरी जीवन
  • विशाल एवं समृद्ध साहित्य
  • गणित और खगोलविद्या
  • लिपि-भाषा का 2000 ई.पू. बाद दूर-दूर तक प्रसार

क्षेत्र और भाषाओं का क्रम

कौन-सा नाम कब?

  • आरंभ: दक्षिणी शहरीकृत भाग = सुमेर और अक्कद
  • 2000 ई.पू. बाद (बेबीलोन के उदय पर): दक्षिण = बेबीलोनिया
  • लगभग 1100 ई.पू. से: उत्तर = असीरिया
  • प्रथम ज्ञात भाषा सुमेरियन; 2400 ई.पू. बाद अक्कदी
  • 1400 ई.पू. से अरामाइक का धीरे-धीरे प्रवेश — आज भी इराक के कुछ भागों में

लिपि एक (कीलाकार), भाषाएँ कई — यह भेद विद्यार्थियों को स्पष्ट कराएँ

बाइबिल-परंपरा और पुरातत्त्व की शुरुआत

  • यूरोपवासियों के लिए मेसोपोटामिया = ‘पूर्वजों की भूमि’
  • ओल्ड टेस्टामेंट का ‘शिमार’ = सुमेर — ईंटों के शहरों की भूमि
  • 1873: ब्रिटिश समाचार-पत्र के खर्च पर जलप्लावन-पट्टिका की खोज का अभियान
  • जलप्लावन-नायक: नोआ (बाइबल) = ज़िउसूद्र/उतनापिष्टिम (मेसोपोटामिया)
  • 1960 के दशक तक बदलाव: कहानियाँ अक्षरशः सत्य नहीं; ध्यान अब आम जीवन पर

पुरातत्त्वीय खोज 1840 के दशक से; उरुक-मारी में दशकों लंबी खुदाइयाँ

2 | भूगोल | चार क्षेत्र; नदियों का वरदान

इराक की भौगोलिक विविधता

क्षेत्रविशेषताआजीविका
पूर्वोत्तरहरे-भरे मैदान, पर्याप्त वर्षा7000–6000 ई.पू. से खेती
उत्तर‘स्टेपी’ घास के मैदानपशुपालन श्रेष्ठ
पूर्वदज़ला की सहायक नदियाँईरान तक परिवहन-मार्ग
दक्षिणरेगिस्तानयहीं पहले नगर व लेखन

रेगिस्तान में उर्वरता का रहस्य

  • दज़ला-फ़रात उत्तरी पहाड़ों से उपजाऊ बारीक मिट्टी (सिल्ट) लाती हैं
  • बाढ़ / सिंचाई से सिल्ट खेतों में जमा
  • फ़रात रेगिस्तान में कई धाराओं में बँटती — यही सिंचाई-नहरें
  • फसलें: गेहूँ, जौ, मटर, मसूर
  • साथ में: भेड़-बकरी (स्टेपी), मछलियाँ, पिंड खजूर

सावधानी: शहरों का विकास केवल ग्रामीण समृद्धि के बल पर नहीं हुआ

दक्षिणी मेसोपोटामिया की खेती

सर्वाधिक उपज

रोम साम्राज्य सहित सभी पुरानी व्यवस्थाओं में दक्षिणी मेसोपोटामिया की खेती सबसे ज़्यादा उपज देने वाली थी — जबकि वहाँ वर्षा पर्याप्त नहीं थी

3 | शहरीकरण | नगर की कसौटी; श्रम-विभाजन; व्यापार; परिवहन

नगर किसे कहें?

केवल बड़ी आबादी नहीं

  • अर्थव्यवस्था में खाद्य उत्पादन से आगे की गतिविधियाँ
  • व्यापार, उत्पादन, सेवाएँ — तीनों की भूमिका
  • जनसंख्या का घनत्व बढ़ता है → कस्बे बनते हैं
  • नगरवासी आत्मनिर्भर नहीं — परस्पर निर्भर
  • शहरी अर्थव्यवस्था का लिखित हिसाब ज़रूरी

परिभाषा-प्रश्न बोर्ड में प्रिय है — ‘आर्थिक संरचना’ वाला उत्तर लिखवाएँ

श्रम-विभाजन — मुद्रा-निर्माता का उदाहरण

  • पत्थर उकेरने के लिए काँसे के औज़ार — वह स्वयं नहीं बनाता
  • रंगीन पत्थर कहाँ मिलेंगे — यह भी नहीं जानता
  • उसकी दक्षता केवल नक्काशी में
  • औज़ार-निर्माता को चाहिए ताँबा-टिन और ईंधन हेतु कोयला
  • यही श्रम-विभाजन — शहरी जीवन की विशेषता

एक वस्तु, अनेक हाथ — परस्पर निर्भरता ही नगर है

संसाधन-अभाव बनाम व्यापार

दक्षिण में क्या नहीं था

  • औज़ार-मुद्रा-गहनों योग्य पत्थर
  • पहिए-नाव योग्य अच्छी लकड़ी
  • कोई धातु नहीं

समाधान — विनिमय

  • तुर्की-ईरान-खाड़ी से लकड़ी, ताँबा, टिन, चाँदी, सोना, सीपी
  • बदले में कपड़ा व कृषि-उत्पाद
  • विदेशी अभियानों हेतु सामाजिक संगठन

जलमार्ग — सबसे सस्ता परिवहन

‘विश्व-मार्ग’

फ़रात नदी व्यापार का विश्व-मार्ग थी — अनाज से लदी नावें धारा और हवा से मुफ़्त चलती थीं, जबकि जानवरों को चारा खिलाना पड़ता था

काँसे का युग और वार्का शीर्ष

लगभग 3000 ई.पू.

  • काँसा = ताँबा + राँगा (टिन) — धातुएँ दूर-दूर से
  • उपयोग: बढ़ईगिरी, मनकों में छेद, मुद्रा-नक्काशी, सीपी-कटाई, हथियार
  • वार्का शीर्ष: उरुक की स्त्री-मूर्ति, सफ़ेद संगमरमर
  • आँखों-भौंहों में लाजवर्द, सीपी, डामर की जड़ाई
  • कठोर पत्थर दूर से लाया गया — मूर्तिकला का विश्व-प्रसिद्ध नमूना

क्रियाकलाप: क्या शहरी जीवन धातुओं के बिना संभव होता?

4 | लेखन कला | पहली पट्टिकाएँ; कीलाकार तकनीक; साक्षरता; एनमर्कर

पहली पट्टिकाएँ

3200 ई.पू.

उरुक के मंदिरों में आने-जाने वाली चीज़ों — बैलों, मछलियों, रोटियों — की लगभग 5000 सूचियाँ; चित्र-चिह्न और संख्याएँ

लेखन क्यों जन्मा?

  • भाषा = उच्चरित ध्वनियों से अर्थ
  • लेखन = ध्वनियों के दृश्य संकेत
  • शहर के सौदे: अलग-अलग समय, कई लोग, कई प्रकार का माल
  • समाज को चाहिए था लेन-देन का स्थायी हिसाब
  • इसलिए लेखन का जन्म हिसाब-किताब से — साहित्य से नहीं

बोर्ड-प्रिय तर्क: लेखन शहरी अर्थव्यवस्था की आवश्यकता की उपज है

पट्टिका बनाने की तकनीक

क्यूनीफ़ार्म = क्यूनियस (खूँटी) + फ़ोर्मा (आकार)

  • चिकनी मिट्टी गीली कर, गूंधकर-थापकर हाथ-भर पट्टी
  • सतह चिकनी कर सरकंडे की तीखी नोक से कीलाकार चिह्न
  • धूप में सूखकर बर्तन-जैसी पक्की
  • सूखने पर नया चिह्न असंभव → हर सौदे की नई पट्टिका
  • इसीलिए स्थलों से सैकड़ों पट्टिकाएँ मिलीं — समृद्ध स्रोत

स्रोत-निर्माण का पाठ: तकनीक ने ही इतिहास के साक्ष्य गढ़े

लिपि का विकास-क्रम

  1. 3200 ई.पू.पहली पट्टिकाएँ — चित्र-चिह्न व संख्याएँ; मंदिर-हिसाब
  2. 2600 ई.पू.वर्ण कीलाकार; भाषा सुमेरियन; शब्दकोश, भूमि-हस्तांतरण, कानून
  3. 2400 ई.पू.अक्कदी भाषा का प्रयोग बढ़ा
  4. 1400 ई.पू.अरामाइक का प्रवेश प्रारंभ
  5. पहली सदी ईसवीअक्कदी-कीलाकार का अंतिम प्रयोग — 2000+ वर्ष की परंपरा

लेखन प्रणाली और साक्षरता

  • चिह्न = अक्षर (Syllables) — जैसे -put-, -la-, -in-
  • स्वर-व्यंजन अलग नहीं → सैकड़ों चिह्न सीखने पड़ते
  • पढ़-लिख सकने वाले बहुत कम लोग
  • पढ़ सकने वाला राजा प्रशस्ति में लिखवाता था
  • पत्र पढ़कर सुनाए जाते: “मेरे ‘अमुक’ मालिक को… सेवक निवेदन करता है…”

किसी भाषा की ध्वनियों को दृश्य रूप देना — एक महान बौद्धिक उपलब्धि

एनमर्कर का महाकाव्य — पहली पट्टिका

राजा एनमर्कर ने अपने हाथ से चिकनी मिट्टी की पट्टिका बनाई और उस पर शब्द लिख दिए — उन दिनों, मिट्टी पर शब्द लिखने का रिवाज नहीं था।

सुमेरियन महाकाव्य — उरुक के शासक एनमर्कर व अरट्टा के दूत की कथा

एनमर्कर-कथा के निष्कर्ष

शाब्दिक सत्य नहीं — विचारधारा का स्रोत

  • मंदिर सजाने हेतु लाजवर्द व रत्न — सुदूर अरट्टा से
  • थका दूत संदेश भूला → राजा ने लिखकर भेजा
  • निष्कर्ष 1: मेसोपोटामियाई सोच में राजा ने ही व्यापार-लेखन की व्यवस्था की
  • निष्कर्ष 2: लेखन = सूचना दूर भेजने का साधन
  • निष्कर्ष 3: लेखन शहरी श्रेष्ठता का प्रतीक

उरुक को केवल ‘शहर’ कहकर पुकारा जाता था

5 | मंदिर और राजा | 5000 ई.पू. से बस्तियाँ; मुख्य शहरी संस्था; अनिवार्य श्रम; उरुक

मंदिर — देवता का घर

पहला ज्ञात मंदिर: कच्ची ईंटों का देवालय

  • देवता: उर के चंद्र देवता; इन्नाना — प्रेम व युद्ध की देवी
  • खुले आँगनों के चारों ओर कमरे — घर-जैसा ही
  • पहचान: बाहरी दीवारें अंतरालों पर भीतर-बाहर मुड़ी हुई
  • भेंट: अन्न, दही, मछली (फ़र्शों पर हड्डियों की परतें)
  • देवता — खेतों, मत्स्य-क्षेत्रों, पशुधन का सैद्धांतिक स्वामी

अभ्यास-प्रश्न 4 का सीधा उत्तर इसी स्लाइड में है

मंदिर बना मुख्य शहरी संस्था

  • उपज का प्रसंस्करण मंदिर में: तेल निकालना, अनाज पीसना, कताई-बुनाई
  • मंदिर = घर-परिवार से ऊपर का व्यवस्थापक
  • व्यापारियों का नियोक्ता
  • अन्न, पशु, रोटी, जौ-बियर, मछली के वितरण-अभिलेखों का पालक
  • क्रियाकलाप बढ़ते गए → मुख्य शहरी संस्था

‘लिखित अभिलेख’ मंदिर की शक्ति की कुंजी — लेखन-खंड से जोड़ें

संकट, युद्ध और नेतृत्व

राजत्व का उदय

  • प्राकृतिक संकट: बाढ़ से फसल डूबना; धाराओं का रास्ता बदलना
  • मानवीय संकट: ऊपरी गाँव पानी रोकते, गाद नहीं निकालते
  • ज़मीन-पानी पर बार-बार झगड़े
  • विजयी मुखिया: लूट का वितरण, बंदी = चौकीदार-नौकर
  • पहले अस्थायी नेता — “आज हैं तो कल चले जाते थे”
  • बाद में कल्याण-उन्मुख स्थायी नेतृत्व → नयी संस्थाएँ

प्रेक्षित तथ्य (झगड़े, लूट) और अनुमान (नेतृत्व-विकास) का भेद बताएँ

राजा, नगर-सुरक्षा और श्रम

  • राजा: देवों को कीमती भेंटें → मंदिरों की शोभा
  • ग्रामीणों को पास बसाया — तुरंत सेना जुटाने हेतु; लोग भी सुरक्षित
  • युद्धबंदी + स्थानीय लोग: अनिवार्य श्रम — कर नहीं, काम अनिवार्य
  • बदले में अनाज-कपड़ा-तेल — सैकड़ों राशन-सूचियाँ प्राप्त
  • शासक के हुक्म से: पत्थर खोदना, धातु लाना, ईंटें बनाना

एक मंदिर = 1500 आदमी × 5 वर्ष × प्रतिदिन 10 घंटे

उरुक का विस्तार

250 हैक्टेयर

3000 ई.पू. के आसपास उरुक — बाद के मोहनजोदड़ो से दोगुना; विस्तार में दर्जनों गाँव उजड़े; 2800 ई.पू. तक 400 हैक्टेयर; नगर 4200 ई.पू. से 400 ईसवी तक जीवित

उरुक की तकनीकी छलाँग

लगभग 3000 ई.पू.

  • शिल्पों में काँसे के औज़ार
  • ईंटों के स्तंभ — शहतीर योग्य लकड़ी नहीं थी
  • दीवारों में रंगीन मिट्टी-शंकुओं की मोज़ेक सजावट
  • मूर्तियाँ अधिकतर आयातित पत्थर से
  • युगांतरकारी: कुम्हार का चाक — एक साथ दर्जनों एक-जैसे बर्तन

चाक = बड़े पैमाने का उत्पादन — शहरी अर्थव्यवस्था के अनुकूल

मोहर — शहरी शिल्प-कृति

भारत की ठप्पा-मोहरों से भिन्न

  • पत्थर की बेलनाकार मोहरें — बीच में आर-पार छिदी
  • तीली लगाकर गीली मिट्टी पर घुमाने से लगातार चित्र
  • लेख: मालिक का नाम, इष्टदेव, पदीय स्थिति
  • गठरी/बर्तन के मुँह पर → मोहरबंद सुरक्षा
  • पत्र-पट्टिका पर → प्रामाणिकता की प्रतीक

मुद्रा = सार्वजनिक जीवन में नगरवासी की पहचान

6 | शहरी जीवन | संभ्रांत वर्ग; परिवार; उर नगर

धन का संकेंद्रण — उर की शाही कब्रें

  • नगर-समाज में उच्च/संभ्रांत वर्ग का उदय
  • धन-दौलत का बड़ा भाग छोटे-से वर्ग के पास
  • कब्रों में दफ़न: आभूषण, सोने के पात्र, सफ़ेद सीपियाँ
  • लाजवर्द-जड़े वाद्य यंत्र, सोने के सजावटी खंजर
  • प्रश्न: “लेकिन आम आदमी की स्थिति क्या थी?”

साक्ष्य से वर्ग-भेद पढ़ना सिखाएँ — कब्र भी दस्तावेज़ है

परिवार और विवाह

कानूनी दस्तावेज़ों से ज्ञात

  • आदर्श: एकल परिवार (पिता, माता, संतान); पिता मुखिया
  • विवाहित बेटा प्रायः माता-पिता के साथ रहता
  • क्रम: इच्छा-घोषणा → वधू-पक्ष की सहमति → वर-पक्ष के उपहार
  • रस्म → उपहार-विनिमय → सह-भोजन → मंदिर-भेंट
  • सास के आने पर वधू को पिता से दाय का हिस्सा
  • घर-पशुधन-खेत के वारिस — पुत्र

उर — बिना योजना का नगर

  • टेढ़ी-मेढ़ी संकरी गलियाँ — गाड़ियाँ घरों तक नहीं; माल गधों पर
  • भू-खंडों का अनियमित आकार → नगर-नियोजन का अभाव
  • गली-नालियाँ नहीं — समकालीन मोहनजोदड़ो में थीं
  • नालियाँ-नलिकाएँ भीतरी आँगनों में; वर्षा-जल हौज़ों में
  • कूड़ा गलियों में → सतह ऊँची → दहलीज़ें ऊँची
  • रोशनी आँगन-मुखी दरवाज़ों से → गोपनीयता

दफ़न: नगर-कब्रिस्तान में; कुछ घर के फ़र्श के नीचे भी

उर के शकुन-अपशकुन

पट्टिकाओं पर लिखे मिले

  • ऊँची देहली → धन-दौलत लाती है
  • सामने का दरवाज़ा दूसरे के घर की ओर न खुले → सौभाग्य
  • मुख्य दरवाज़ा बाहर की ओर खुले → पत्नी पति के लिए यंत्रणा

अंधविश्वास भी सामाजिक इतिहास का स्रोत हैं — घर, स्त्री, पड़ोस की चिंताएँ

7 | मारी | पशुचारक क्षेत्र का व्यापारिक नगर (2000 ई.पू. बाद)

मारी — स्थिति और अर्थव्यवस्था

  • 2000 ई.पू. के बाद शाही राजधानी के रूप में समृद्ध
  • स्थिति: उपजाऊ दक्षिण नहीं — फ़रात की उर्ध्वधारा पर
  • खेती और पशुपालन साथ-साथ; अधिकांश भूमि चराई हेतु
  • विनिमय: अनाज-औज़ार ↔ पनीर, चमड़ा, मांस; गोबर-खाद
  • संघर्ष: फसल-रौंदन, लूट ↔ रास्ता-पानी रोकना

सहजीवन और तनाव — दोनों एक साथ; यही अभ्यास-प्रश्न 3 की कुंजी

यायावरों से राजवंश तक

पश्चिमी मरुस्थल से आगमन

  • गर्मियों में बोए खेतों तक भेड़-बकरियाँ
  • भूमिकाएँ: फसल-मज़दूर, भाड़े के सैनिक → समृद्ध होकर बसे
  • कुछ ने पाई अपना शासन स्थापित करने की शक्ति
  • समुदाय: अक्कदी, एमोराइट, असीरियाई, आर्मीनियन
  • मारी के राजा एमोराइट — पोशाक भिन्न; डैगन का मंदिर बनवाया

मेसोपोटामिया संस्कृति विभिन्न लोगों के लिए खुली — मिश्रण से जीवन-शक्ति

ज़िमरीलिम का राजमहल (1810–1760 ई.पू.)

  • 2.4 हैक्टेयर, 260 कक्ष — निवास + प्रशासन + उत्पादन
  • कीमती धातुओं के आभूषण-निर्माण का केंद्र
  • एक ही प्रवेश द्वार — उत्तर की ओर
  • आँगन 106 (सफ़ेद पत्थर), प्राँगण 131; कमरा 132 के भित्ति-चित्र
  • प्रसिद्धि: देखने ही उत्तरी सीरिया का राजा परिचय-पत्र लेकर आया
  • राजा की मेज़: आटा, रोटी, मांस, मछली, फल, मदिरा, बीयर

लिपिक-कार्यालय की बेंचें व मिट्टीदान — प्रशासन का पुरातात्त्विक चेहरा

मारी की चुंगी

10%

फ़रात से गुज़रते जलपोत मारी में रुकते; अधिकारी माल जाँचते और मूल्य का लगभग दसवाँ भाग प्रभार लेकर आगे जाने देते — एक नाव में 300 मदिरा-पीपे तक

मारी का व्यापार-तंत्र

  • मार्ग: तुर्की-सीरिया-लेबनान के ऊँचे इलाके ↔ दक्षिणी नगर
  • माल: लकड़ी, ताँबा, टिन, तेल, मदिरा, चक्कियाँ
  • पट्टिकाओं में ‘अलाशिया’ (साइप्रस) का ताँबा; टिन का भी व्यापार
  • काँसा = औज़ार-हथियारों की मुख्य औद्योगिक सामग्री
  • चरवाहा-शिविरों पर नज़र — अग्नि-संकेतों की गुप्त सूचना

निष्कर्ष: मारी सैनिक दृष्टि से उतना सबल नहीं, पर व्यापार-समृद्धि में अद्वितीय

आधुनिक खुदाई — अबू सलाबिख

लगभग 2500 ई.पू. का कस्बा (10 हैक्टेयर, आबादी 10,000 से कम)

  • सतह को खरोंचकर दीवारों की रूपरेखा — मिलीमीटर-स्तर की सटीकता
  • टनों मिट्टी की छानबीन → पौधों-पशुओं की प्रजातियाँ
  • जली मछली-हड्डियाँ गलियों में; उपलों के अवशेष → रसोईघर की पहचान
  • गलियों में सूअर-बच्चों के दाँत → सूअर छुट्टे घूमते थे
  • फ़र्श-अध्ययन → किस कमरे पर छत थी, कौन खुला था

उर की बड़ी खुदाई बनाम आज की परिशुद्ध खुदाई — इतिहास-पद्धति का विकास

8 | नगर-गौरव और देन | गिल्गेमिश; गणित-कालगणना; पुस्तकालय; नैबोनिडस

गिल्गेमिश की सांत्वना

हारकर लौटे गिल्गेमिश ने उरुक की प्राचीर के पास चहलकदमी करते हुए नींव की पकी ईंटों को देखा — और भावविभोर हो उठा; महाकाव्य का अंत नगर की विशाल प्राचीर पर होता है।

गिल्गेमिश महाकाव्य (12 पट्टिकाएँ) — एनमर्कर के बाद उरुक का शासक

गिल्गेमिश-कथा का अर्थ

  • महान योद्धा; वीर मित्र की मृत्यु से आहत
  • अमरत्व की खोज — सागर-महासागर पार, विश्व का चक्कर — विफल
  • सांत्वना पुत्रों में नहीं — प्रजा के बनाए नगर में
  • नगर = व्यक्ति की अमरता का पात्र
  • युद्ध में नष्ट शहरों को काव्यों में याद रखा जाता था

मेसोपोटामियाई मन में नगर का स्थान — यही इस खंड का सार

गणित की विरासत

√2 ≈ 1.41421296

1800 ई.पू. की पट्टिका पर 2 का वर्गमूल: 1 + 24/60 + 51/60² + 10/60³ — सही मान 1.41421356 से बस थोड़ा-सा भिन्न

कालगणना — आज तक की देन

  • वर्ष = 12 महीने (चंद्रमा की परिक्रमा से), महीना = 4 हफ़्ते
  • दिन = 24 घंटे, घंटा = 60 मिनट
  • प्रसार: सिकंदर के उत्तराधिकारी → रोम → इस्लाम जगत → मध्ययुगीन यूरोप
  • ग्रहणों का वर्ष-मास-दिन सहित अभिलेखन; तारों-तारामंडलों की स्थिति दर्ज
  • गुणा-भाग, वर्ग-वर्गमूल, चक्रवृद्धि ब्याज की सारणियाँ

विद्यालयों की भूमिका: नकल-अभ्यास से लेखाकार भी, विद्वान भी

असुरबनिपाल का पुस्तकालय (निनवैह)

असीरिया का आखिरी राजा (668–627 ई.पू.)

  • साम्राज्य-शिखर 720–610 ई.पू. — मिस्र तक; लूट-बेगार आधारित अर्थव्यवस्था
  • फिर भी बेबीलोनिया = उच्च संस्कृति का केंद्र — यह मान्यता
  • संग्रह: इतिहास, महाकाव्य, शकुन साहित्य, ज्योतिष, स्तुतियाँ
  • सुमेरियन बोलचाल बंद (1800 ई.पू.) — पर द्विभाषी पट्टिकाओं से पढ़ाई जारी
  • गिल्गेमिश की प्रतियाँ; लिपिक का नाम-तिथि; टोकरी-लेबल से सूचीकरण

संग्रह: 1000 मूलपाठ, लगभग 30,000 पट्टिकाएँ — विषयानुसार वर्गीकृत

नैबोनिडस — आरंभिक ‘पुरातत्त्ववेता’

स्वतंत्र बेबीलोन का अंतिम शासक

  • पृष्ठभूमि: 625 ई.पू. नैबोपोलास्सर ने असीरियाई आधिपत्य से मुक्ति दिलाई
  • बेबीलोन: 850+ हैक्टेयर, तिहरी दीवार, ज़िगुरात, शोभायात्रा-मार्ग
  • स्वप्न में उर-देवता का आदेश → महिला पुरोहित की नियुक्ति
  • ~1150 ई.पू. के स्टेल पर पुरोहित की आकृति-वेशभूषा देखी → पुत्री को प्रतिष्ठित किया
  • सारगोन (~2370 ई.पू.) की टूटी मूर्ति — शिल्पियों से खंडित सिर बदलवाया

क्रियाकलाप 4: दोनों राजाओं ने प्राचीन परंपराओं की कद्र क्यों की?

सम्पूर्ण कालरेखा

  1. 7000–6000 ई.पू.उत्तरी मैदानों में खेती की शुरुआत
  2. 5000 ई.पू.दक्षिण में सबसे पुराने मंदिर
  3. 3200 ई.पू.लेखन-कार्य की शुरुआत
  4. 3000 ई.पू.उरुक विशाल नगर; काँसे के औज़ार
  5. 2600 ई.पू.कीलाकार लिपि; 2400: अक्कदी भाषा
  6. 2370 ई.पू.सारगोन — अक्कद सम्राट
  7. 2000 ई.पू.लिपि का प्रसार; मारी-बेबीलोन का उदय
  8. 1800 ई.पू.गणित-पाठ; सुमेरियन बोलचाल बंद
  9. 720–610 ई.पू.असीरियाई साम्राज्य; 668–627: असुरबनिपाल
  10. 331 ई.पू.सिकंदर ने बेबीलोन जीता
  11. 1850 ईसवीकीलाकार लिपि पढ़ी गई

नगर हमें क्या देता है — और हमसे क्या माँगता है?

सार-संक्षेप

  • नदी ने दिया अधिशेष; अभाव ने सिखाया व्यापार
  • व्यापार ने माँगा संगठन; संगठन ने गढ़ा राजा
  • हिसाब की ज़रूरत ने जन्मा लेखन — और लेखन ने दी गणित-कालगणना
  • मंदिर से पुस्तकालय तक — मेसोपोटामिया = संस्थाओं की सभ्यता
  • खुला समाज: यायावर भी राजा बने — मिश्रण से जीवन-शक्ति

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  • भरत चौधरीभरत चौधरीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. जेठान्तरी · ब्लॉक समदड़ी, जिला बालोतरा
  • वनिता कुमारीवनिता कुमारीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. रामसीन मूंगड़ा · ब्लॉक एवं जिला बालोतरा

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