कक्षा 6 • सामाजिक विज्ञान • समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे • अध्याय 1 — पृथ्वी पर स्थानों की स्थिति
कक्षा — 6 · विषय — सामाजिक विज्ञान (समाज का अध्ययन) · पृष्ठ — 7 से 26
यह पन्ना किसलिए — स्लाइड शो कक्षा में चलाने से पहले एक बार पढ़ लेने के लिए। यहाँ सारी स्लाइड एक के नीचे एक हैं। उद्धरण-चिह्नों के भीतर सिर्फ़ किताब के शब्द हैं, और स्लाइड के ऊपर किताब का पृष्ठ लिखा है। जो बात हमारी है, उसके आगे “हमारी ओर से” लिखा है।
किताब की प्रश्नावली के उत्तर और बच्चों की आम भूलें शिक्षक संदर्शिका में हैं। बच्चे ख़ुद पढ़ें, तो उन्हें इंटरैक्टिव अध्याय दीजिए। किताब के चित्र 1.3, 1.4, 1.8 और 1.9 यहाँ बने हुए नहीं हैं; उन स्लाइडों पर बच्चे किताब खोलकर चित्र देखें।
कौन-सी स्लाइड किस कालांश में — पाठ योजना के हिसाब से:
- कालांश 1 — शुरू की तीन स्लाइड, फिर मानचित्र और उसके तीन घटक
- कालांश 2 — पृथ्वी गोल है, कागज़ चपटा
- कालांश 3 — निर्देशांक का विचार, और अक्षांश
- कालांश 4 — देशांतर, और उज्जयिनी
- कालांश 5 — समय क्षेत्र
- कालांश 6 — अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा और सारांश, फिर किताब की प्रश्नावली
अध्याय से पहले: आर्यभट्ट
पृष्ठ 7
“पृथ्वी अंतरिक्ष में स्थित है, जो जल, पृथ्वी, अग्नि और वायु से बनी है और यह गोलाकार है। यह सभी स्थलीय और जलीय प्राणियों से घिरी हुई है।”
आर्यभट्ट (लगभग 500 सा.सं.)
आर्यभट्ट ने पृथ्वी को गोलाकार कहा। आप किसी दोस्त को कैसे समझाएँगे कि पृथ्वी गोल है? दो मिनट सोचिए।
किताब के तीन महत्वपूर्ण प्रश्न
पृष्ठ 7
- “मानचित्र क्या है और हम इसका उपयोग कैसे करते हैं? इसके मुख्य घटक क्या हैं?”
- “निर्देशांक क्या हैं? पृथ्वी पर किसी स्थान को अंकित करने के लिए अक्षांश और देशांतर का उपयोग कैसे किया जा सकता है?”
- “देशांतर से स्थानीय समय और मानक समय कैसे संबंधित हैं?”
हमारी ओर से: ये तीन प्रश्न चार्ट पेपर पर लिखकर कक्षा में टाँग दीजिए। अध्याय के आख़िर में इन्हीं पर लौटेंगे।
1 | मानचित्र और उसके तीन घटक
आप पहली बार किसी नए नगर में हैं और रेलवे स्टेशन से बैंक जाना है। रास्ता कैसे ढूँढेंगे?
किताब के दो रास्ते
पृष्ठ 8
“आप सहायता के लिए किसी स्थानीय व्यक्ति से पूछ सकते हैं अथवा उस नगर के मानचित्र को देख सकते हैं।”
हमारी ओर से: पहले बच्चों के जवाब बोर्ड पर लिखिए, फिर यह स्लाइड दिखाइए।
चित्र 1.1: एक छोटा नगर
पृष्ठ 8
- रेलवे स्टेशन से बैंक तक: “आप किस मार्ग से जाएँगे?”
- “क्या कोई अन्य संभावित मार्ग भी हैं?”
हमारी ओर से: दो बच्चे परदे पर उँगली से दो अलग रास्ते दिखाएँ।
मानचित्र एक मार्गदर्शक है
पृष्ठ 8
“मानचित्र स्थानों का पता लगाने के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है जो यह दर्शाता है कि किसी स्थान की स्थिति कहाँ है और वहाँ तक कैसे पहुँचा जा सकता है।”
पाठ्यपुस्तक
चित्र 1.1 पर किताब के तीन सवाल
पृष्ठ 9
- चिकित्सालय ढूँढिए और उस पर निशान लगाइए।
- नीले रंग के क्षेत्र क्या दिखाते हैं?
- विद्यालय, नगर पंचायत और सार्वजनिक उद्यान में से रेलवे स्टेशन से सबसे दूर कौन-सा है?
उत्तर देखिए
उत्तर शिक्षक संदर्शिका में हैं। अपने विद्यालय का मानचित्र बनाने वाली समूह-गतिविधि भी किताब में यहीं है।
मानचित्र और एटलस
पृष्ठ 9
- “मानचित्र किसी भी क्षेत्र का एक प्रतीकात्मक चित्रण या रेखांकन है”
- “मानचित्र में आप सतह को ऐसे देखते हैं, जैसे आप उसे ऊपर से देखते हैं।”
- “एटलस (मानचित्रावली) मानचित्रों की एक पुस्तक या संग्रह है।”
हमारी ओर से: कक्षा का एटलस घुमाइए। हर बच्चा एक मानचित्र खोलकर बताए कि उसमें क्या दिखाया गया है।
किताब में बताए गए मानचित्र के तीन प्रकार
पृष्ठ 9
| प्रकार | क्या दिखाता है |
|---|---|
| भौतिक मानचित्र | मुख्य रूप से प्राकृतिक आकृतियाँ, जैसे पर्वत, महासागर और नदियाँ |
| राजनैतिक मानचित्र | जैसे भारत के राज्य, केंद्रशासित प्रदेश और उनकी राजधानियाँ |
| थिमैटिक मानचित्र | “विशिष्ट प्रकार की सूचना प्रदान करते हैं” |
हर मानचित्र के तीन घटक
पृष्ठ 9
“किसी भी मानचित्र के तीन मुख्य घटक होते हैं — दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न।”
हमारी ओर से: अगली स्लाइडें एक-एक घटक पर हैं।
दूरी: स्केल
पृष्ठ 9–10
- “मानचित्र का प्रत्येक सेंटीमीटर धरातल पर एक निश्चित दूरी का प्रतिनिधित्व करता है।”
- “माना कि यह 500 मीटर है, तो हम कहेंगे कि स्केल 1 सेंटीमीटर = 500 मीटर है।”
- “इसलिए मानचित्र पर चिह्नित किन्हीं दो बिंदुओं के बीच की वास्तविक दूरी उस स्केल पर निर्भर है, जिसका मानचित्र उपयोग करता है।”
हमारी ओर से: पूछिए: इसी स्केल पर मानचित्र में 3 सेंटीमीटर हों, तो ज़मीन पर कितनी दूरी? (1500 मीटर)
करके देखिए: मैदान कागज़ पर
पृष्ठ 10
- मैदान: 40 मीटर × 30 मीटर
- स्केल: 1 सेंटीमीटर = 10 मीटर
- कागज़ पर मैदान बनाइए, फिर एक कोने से सामने वाले कोने तक की दूरी नापिए
हमारी ओर से: कागज़ पर 4 सेंटीमीटर × 3 सेंटीमीटर का आयत बनेगा। कोने से कोने तक लगभग 5 सेंटीमीटर निकलेगा, यानी मैदान में लगभग 50 मीटर।
दिशा: चार प्रधान, चार मध्यवर्ती
पृष्ठ 10
दिशा के बारे में किताब
पृष्ठ 10
- “शीर्ष पर उत्तर और घड़ी के काँटे की दिशा में घूमते हुए पूर्व, दक्षिण तथा पश्चिम। इन्हें चतुर्दिश या प्रधान बिंदु भी कहा जाता है।”
- मध्यवर्ती दिशाएँ: “उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम”
- “अधिकतर मानचित्रों में ‘उ.’ अक्षर से अंकित एक तीर होता है, जो उत्तर दिशा को इंगित करता है।”
हमारी ओर से: चित्र 1.1 में ऊपर दाईं ओर दिशा का निशान ढूँढिए।
अपनी जगह पर खड़े होकर उत्तर की ओर इशारा कीजिए। क्या सब एक ही ओर इशारा कर रहे हैं?
चित्र 1.1 पर दिशाएँ: सही या ग़लत?
पृष्ठ 10
- किताब चार कथन देती है, इन जोड़ियों पर: बाजार और चिकित्सालय, संग्रहालय और बैंक, रेलवे स्टेशन और चिकित्सालय, झील और आवासीय भवन
- हर कथन चित्र 1.1 पर जाँचिए
- फिर: आपके विद्यालय से आपका घर किस दिशा में है?
हमारी ओर से: बाजार चिकित्सालय के उत्तर में है या नहीं, यह जाँचने के लिए चिकित्सालय पर खड़े होकर बाजार की ओर देखिए। बाकी कथन भी ऐसे ही।
प्रतीक चिह्न
पृष्ठ 11
- “प्रतीक चिह्न मानचित्रों का एक और महत्वपूर्ण घटक है।”
- “एक बड़े नगर या एक देश के मानचित्र पर इन सभी के चित्रण के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होगा।”
- “इस तरीके से मानचित्र पर उपलब्ध सीमित स्थान पर अनेक विवरण दर्शाए जा सकते हैं।”
चित्र 1.2: मानचित्र के प्रतीक चिह्न
पृष्ठ 11
हमारी ओर से: नाम ढककर दिखाइए। बच्चे चिह्न देखकर नाम बताएँ।
चिह्न कौन तय करता है
पृष्ठ 11
भारत में
- “सरकारी निकाय भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने भारत (या भारत के भागों) के मानचित्रों के लिए प्रतीक चिह्नों का एक संकलन निर्धारित किया है।”
दूसरे देशों में
- “विभिन्न देश प्रतीक चिह्नों के अलग-अलग समुच्चय का उपयोग करते हैं।”
किताब की गतिविधि: अपने स्थान या गाँव का मानचित्र
पृष्ठ 11
- अपने घर, विद्यालय और कुछ महत्वपूर्ण भू-चिह्नों के साथ अपने स्थान या गाँव का मानचित्र बनाइए
- उस पर चतुर्दिश, यानी चारों प्रधान दिशाएँ, दिखाइए
- चित्र 1.2 के प्रतीक चिह्न काम में लीजिए
हमारी ओर से: यह काम घर पर पूरा करने को दिया जा सकता है। अच्छे मानचित्र चार्ट पेपर पर कक्षा की दीवार पर लगाइए।
निकास-पर्ची: मानचित्र के तीन घटक लिखिए, और हर एक के साथ एक उदाहरण।
2 | पृथ्वी गोल है, कागज़ चपटा
संतरे का छिलका मेज़ पर बिना फाड़े चपटा बिछ जाएगा? पहले अंदाज़ा लगाइए।
पृथ्वी का मानचित्र बनाना कठिन क्यों
पृष्ठ 12
“पृथ्वी का मानचित्रण कुछ अधिक कठिन है क्योंकि हमारे ग्रह का आकार चपटा नहीं है।”
हमारी ओर से: पूछिए: नगर का मानचित्र बनाना आसान क्यों लगा था?
पृथ्वी का आकार
पृष्ठ 12
- “इसकी आकृति लगभग गोलाकार है”
- यह “ध्रुवों पर थोड़ी चपटी है।”
- फिर भी किताब कहती है: “हम इसे व्यावहारिक दृष्टि से गोलाकार मानेंगे”
- “कागज के एक समतल पृष्ठ पर एक गोलाकार वस्तु को यथावत चित्रित करना संभव नहीं है।”
करके देखिए: संतरे का छिलका
पृष्ठ 12
“एक संतरे को इस प्रकार छीलिए कि आपके पास उसके छिलकों के केवल तीन अथवा चार टुकड़े हों। इसके बाद, एक मेज पर उन्हें चपटा करने का प्रयास कीजिए। आप पाएँगे कि किनारों को तोड़े बिना आप यह नहीं कर सकते।”
पाठ्यपुस्तक
हमारी ओर से: संतरा पृथ्वी है, छिलका उसकी सतह, और मेज़ पर फैला छिलका एक समतल मानचित्र। जहाँ छिलका फटा, वहाँ मानचित्र में कुछ न कुछ बिगड़ता है।
ग्लोब
पृष्ठ 12
- ग्लोब एक गोल आकृति है, जिस पर मानचित्र बना होता है
- पृथ्वी के अलावा चंद्रमा, मंगल ग्रह, तारों और तारा-मंडल के भी ग्लोब होते हैं
- ग्लोब आम तौर पर धातु, प्लास्टिक या कार्डबोर्ड के बने होते हैं
हमारी ओर से: कक्षा में ग्लोब हो, तो अब बच्चों के हाथ में दीजिए।
ग्लोब बेहतर क्यों
पृष्ठ 12
“चूँकि ग्लोब और पृथ्वी का आकार एक समान (गोलाकार) होता है, इसलिए एक ग्लोब, किसी समतल मानचित्र की तुलना में पृथ्वी के भूगोल का बेहतर प्रतिनिधित्व करता है।”
हमारी ओर से: फिर भी हम मानचित्र क्यों बनाते हैं? बच्चों से पूछिए। एक जवाब: मानचित्र मोड़कर बस्ते में रखा जा सकता है।
ग्लोब और समतल मानचित्र
पृष्ठ 12
ग्लोब
- पृथ्वी जैसा गोल
- पृथ्वी के भूगोल का “बेहतर प्रतिनिधित्व”
समतल मानचित्र
- कागज़ पर चपटा
- गोल वस्तु को “यथावत” नहीं दिखा सकता
ग्लोब पर दिल्ली कहाँ है, यह किसी को फ़ोन पर कैसे बताएँगे? थोड़ा ऊपर, थोड़ा दाएँ कहने से काम चलेगा?
3 | निर्देशांक का विचार, और अक्षांश
बाज़ार में एक संदेश
पृष्ठ 12–13
“प्रवेश द्वार से 5वीं पंक्ति की 7वीं दुकान पर सायं 6 बजे मुझसे मिलें।”
पाठ्यपुस्तक
हमारी ओर से: दो संख्याएँ, पंक्ति 5 और दुकान 7, और जगह पक्की हो गई।
शतरंज की बिसात
पृष्ठ 12–13
- “मुख्य खानों पर अक्षर (‘क’ से ‘ज’ तक) और दोनों ओर के बीच अंक (1 से 8 तक) लगाए जाते हैं”
- “अतः प्यादा ‘घ’ 2 से ‘घ’ 4 की ओर आगे बढ़ा है।”
अब आपकी चाल
पृष्ठ 13
- “यदि आपको काले पक्ष की ओर से खेलना हो और उसी विधि से प्रत्युत्तर देना हो, तो इन्हीं नियमों का उपयोग करते हुए अपनी चाल लिखिए।”
हमारी ओर से: हर बच्चा एक अक्षर और एक अंक लिखे, जैसे ‘च’ 5। पड़ोसी बिसात पर वह खाना ढूँढे।
निर्देशांक प्रणाली
पृष्ठ 13
“इन दो उदाहरणों में प्रयुक्त प्रणाली को निर्देशांक प्रणाली कहा जा सकता है।”
किताब आगे कहती है: “मानचित्र पर किसी स्थान की स्थिति के निर्धारण के लिए निर्देशांकों की इसी प्रणाली का प्रयोग किया जाता है।”
दो उदाहरण, एक विचार
पृष्ठ 12–13
ग्लोब को देखिए। सबसे ऊपर और सबसे नीचे के बिंदु क्या कहलाते हैं? और ठीक बीच में कौन-सी रेखा है?
ध्रुव, भूमध्य रेखा और अक्षांश
पृष्ठ 13
- “ऊपरी और निचले स्तर पर स्थित बिंदु दो ध्रुव हैं। इनके मध्य में भूमध्य रेखा (विषुवत वृत्त) होती है।”
- किसी जगह की भूमध्य रेखा से दूरी: “अक्षांश, भूमध्य रेखा से इसी दूरी को मापता है।”
- “इस प्रकार की रेखा को अक्षांश (समानांतर) कहा जाता है और यह पृथ्वी के चारों ओर एक वृत्त बनाती है।”
अक्षांश के वृत्त
पृष्ठ 13–14
- “सबसे बड़ा वृत्त, विषुवत वृत्त है”
- ध्रुवों की ओर जाते हुए अक्षांश के वृत्त छोटे होते जाते हैं
- “अक्षांशों को अंशों (डिग्री) में व्यक्त किया जाता है।”
- विषुवत वृत्त 0° है; ध्रुवों को “90° उ. और 90° द.” लिखा जाता है
हमारी ओर से: ग्लोब पर दिखाइए कि ध्रुव के पास का वृत्त कितना छोटा है।
चित्र 1.3: किताब में ग्लोब देखिए
पृष्ठ 14
- दो लाल रेखाएँ: भूमध्य रेखा (विषुवत वृत्त) और प्रमुख याम्योत्तर
- अक्षांश के वृत्तों पर 30° उ., 60° उ., 30° द.; सबसे ऊपर उत्तर ध्रुव, 90° उ.
- याम्योत्तरों पर 30° प., 60° प., 30° पू., 60° पू., 90° पू.
- तीर बताते हैं: उत्तरी अक्षांश, दक्षिणी अक्षांश, पश्चिमी देशांतर, पूर्वी देशांतर
यह चित्र यहाँ बना हुआ नहीं है; बच्चे किताब खोलकर देखें। भूमध्य रेखा के समानांतर वृत्त अक्षांश हैं; ध्रुव से ध्रुव तक जाने वाली रेखाएँ देशांतर के याम्योत्तर।
अक्षांश और जलवायु
पृष्ठ 14
| कहाँ | जलवायु |
|---|---|
| भूमध्य रेखा के चारों ओर | “सामान्यतः गरम (इसे उष्ण भी कहा जाता है)” |
| भूमध्य रेखा और ध्रुवों के बीच | शीतोष्ण |
| “उत्तर या दक्षिण ध्रुव के निकट” | “शीत (ठंडी)” |
निकास-पर्ची: शतरंज की बिसात और ग्लोब में एक समानता लिखिए।
4 | देशांतर, और उज्जयिनी
ग्लोब पर उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव तक कितनी रेखाएँ खींची जा सकती हैं?
देशांतर के याम्योत्तर
पृष्ठ 14
- “इन रेखाओं को देशांतरीय याम्योत्तर (मेरिडियन ऑफ लाँगिट्यूड) (चित्र 1.3) कहा जाता है। ये अर्धवृत्त हैं, जो एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक जाते हैं।”
हमारी ओर से: अक्षांश पूरे वृत्त हैं, याम्योत्तर आधे वृत्त। ग्लोब पर उँगली से एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक चलकर दिखाइए।
0° देशांतर: ग्रिनिच
पृष्ठ 15
“वर्ष 1884 में कुछ देशों ने तय किया कि इंग्लैंड में लंदन के एक क्षेत्र ग्रिनिच से गुजरने वाली याम्योत्तर, प्रमुख याम्योत्तर के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानक मानी जाएगी। इसे 0° देशांतर के रूप में अंकित किया जाता है।”
हमारी ओर से: ध्यान दिलाइए कि 0° देशांतर कुछ देशों के मिलकर लिए गए फ़ैसले से तय हुआ।
देशांतर क्या मापता है
पृष्ठ 15
- “देशांतर प्रमुख याम्योत्तर से दूरी का एक माप है।”
- “पश्चिम हो या पूर्व, इसका मान 0° से 180° तक बढ़ता है”
- पश्चिम वाले देशांतर के साथ ‘प.’, पूर्व वाले के साथ ‘पू.’
- “180° प. और 180° पू. एक ही देशांतर हैं। इसलिए इस देशांतर को प. या पू. न लिखकर 180° ही लिखा जाता है।”
तीन शहर, तीन देशांतर
पृष्ठ 15
| शहर | देशांतर |
|---|---|
| न्यूयॉर्क | 74° प. |
| दिल्ली | 77° पू. |
| टोक्यो | 140° पू. |
हमारी ओर से: पूछिए: इनमें से कौन-सा शहर प्रमुख याम्योत्तर से सबसे दूर है? और कौन-सा उसके पश्चिम में है?
दो निर्देशांक मिलकर एक पता
पृष्ठ 15
- “अक्षांश और देशांतर मिलकर एक स्थान के दो निर्देशांक होते हैं।”
- “दिल्ली 29° उ. अक्षांश और 77° पू. देशांतर पर स्थित है”
- “यह सभी रेखाएँ मिलकर ग्लोब पर एक ग्रिड बनाती है जिन्हें ग्रिड रेखाएँ भी कहा जाता है।”
दिल्ली वाली बात पर किताब यह भी कहती है: “यद्यपि यह डिग्री आनुमानिक रूप से पूर्ण है, किंतु सटीक नहीं है।”
अक्षांश और देशांतर
पृष्ठ 13–15
अक्षांश
- भूमध्य रेखा से दूरी
- पूरे वृत्त, ध्रुवों की ओर छोटे
- 0° से 90° उ. या 90° द.
देशांतर
- प्रमुख याम्योत्तर से दूरी
- अर्धवृत्त, एक ध्रुव से दूसरे ध्रुव तक
- 0° से 180°, प. या पू.
आइए, पता लगाएँ: चार शहर
पृष्ठ 16
- ग्लोब या मानचित्रावली में ये चार शहर ढूँढिए: मुंबई, कोलकाता, सिंगापुर, पेरिस
- हर शहर के अक्षांश और देशांतर के “लगभग मान” लिखिए
हमारी ओर से: किताब ये मान नहीं देती। पहले शहर के दोनों ओर की अक्षांश रेखाएँ पढ़िए, फिर देशांतर रेखाएँ, और बीच का अंदाज़ा लगाइए।
चित्र 1.4: चार गोलार्ध
पृष्ठ 16
- किताब के इस चित्र में तीन ग्लोब हैं; बच्चे किताब खोलकर देखें
- “यह चित्र दर्शाता है कि कैसे प्रमुख याम्योत्तर पृथ्वी को पश्चिमी गोलार्ध और पूर्वी गोलार्ध में, जबकि भूमध्य रेखा उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में विभाजित करती है।”
हमारी ओर से: पूछिए: भारत किन दो गोलार्धों में है? (उत्तरी और पूर्वी)
क्या ग्रिनिच ही दुनिया की पहली प्रमुख याम्योत्तर थी?
ध्यान रखें
पृष्ठ 16
“वास्तव में ग्रिनिच याम्योत्तर, पहली ज्ञात प्रमुख याम्योत्तर रेखा नहीं है।”
किताब आगे कहती है: “अतीत में अन्य प्रकार के याम्योत्तर भी थे।”
भारत की अपनी प्रमुख याम्योत्तर
पृष्ठ 16
“वास्तव में यूरोप से अनेक शताब्दियों पूर्व भारत की स्वयं की एक प्रमुख याम्योत्तर थी (चित्र 1.5), जिसे मध्य रेखा कहा जाता था और यह उज्जयिनी (वर्तमान उज्जैन) के मध्य से गुजरती थी।”
पाठ्यपुस्तक
उज्जैन: खगोल विद्या का केंद्र
पृष्ठ 16
- “उज्जैन अनेक शताब्दियों तक खगोल विद्या का एक प्रतिष्ठित केंद्र रहा है।”
- “लगभग 1500 वर्ष पूर्व प्रसिद्ध खगोलविद वराहमिहिर भी यहाँ रहे और अपना कार्य किया।”
- “भारतीय खगोलविद शून्य और प्रमुख याम्योत्तर सहित अक्षांश और देशांतर से परिचित थे।”
- “उज्जयिनी याम्योत्तर सभी भारतीय खगोलीय ग्रंथों में गणनाओं के लिए एक प्रमुख संदर्भ बन गया था।”
चित्र 1.5: उज्जयिनी की मध्य रेखा
पृष्ठ 17
हमारी ओर से: रेखा के पास के पुराने नगर उत्तर से दक्षिण की ओर पढ़िए। कौन-से नगर लगभग ठीक रेखा पर हैं? (उज्जयिनी और माहिष्मति)
चित्र 1.6: भारत का फैलाव
पृष्ठ 18
हमारी ओर से: 68° से 97° तक लगभग 29 अंश हैं। अगले कालांश में देखेंगे कि अंश समय में कैसे बदलते हैं।
निकास-पर्ची: आपके ज़िले के पास से कौन-सी अक्षांश और देशांतर रेखाएँ गुज़रती हैं? एटलस में ढूँढकर कल बताइए।
5 | समय क्षेत्र
जब आपकी कक्षा में सुबह है, तब क्या पूरी दुनिया में सुबह है?
करके देखिए: लैंप और ग्लोब
पृष्ठ 15
- “एक टेबल लैंप को अपने ग्लोब से थोड़ा दूर रखिए और कल्पना कीजिए कि यह सूर्य है”
- फिर ग्लोब को पूर्व की ओर घुमाइए
किताब का निष्कर्ष: “इसी कारण एक स्थान के देशांतर के माप द्वारा हम उस स्थान के समय को भी मापेंगे।”
24 घंटे, 360°, हर घंटे 15°
पृष्ठ 19
“एक पूरा चक्कर 360° है, अतः इसका अर्थ है — प्रति घंटा 15°(15×24 = 360)।”
इससे पहले किताब कहती है कि हमारा ग्रह “प्रत्येक 24 घंटे में एक चक्कर पूरा करता है।”
पूर्व में घड़ी आगे, पश्चिम में पीछे
पृष्ठ 19
- ग्रिनिच पर दोपहर 12 बजे हों, तो पूर्व में हर 15° पर स्थानीय समय एक घंटा बढ़ता जाता है
- 15° पू. पर दोपहर 1:00 बजे, तो 30° पू. पर दोपहर 2 बजे
- 15° प. पर प्रात: 11 बजे, तो 30° प. पर प्रात: 10 बजे
हमारी ओर से: पूर्व की ओर चलिए तो घड़ी आगे, पश्चिम की ओर चलिए तो पीछे।
चित्र 1.7: हर 15° पर एक घंटा
पृष्ठ 19
किताब: “प्रत्येक रंग एक याम्योत्तर पर केंद्रित 15° का एक क्षेत्र है।” किताब के चित्र के शीर्षक में नीचे की पंक्ति को “अक्षांश” कहा गया है; पर ये संख्याएँ देशांतर हैं, क्योंकि ये प्रमुख याम्योत्तर से पूर्व या पश्चिम की दूरी बताती हैं।
चित्र 1.7 पर दो सवाल
पृष्ठ 19
- 45° पू. पर स्थानीय समय क्या है?
- 45° प. और 45° पू. के स्थानीय समय में कितने घंटे का अंतर है?
हमारी ओर से, सवाल भी और उत्तर भी: 3 अपराह्न। 6 घंटे, क्योंकि 90° ÷ 15° = 6।
हमारा हिसाब: 1° पर 4 मिनट
पृष्ठ 19
- किताब का नियम: 15° पर एक घंटा, यानी 60 मिनट
- हमारी ओर से: 60 ÷ 15 = 4, यानी 1° पर 4 मिनट
हमारी ओर से: यह 4 मिनट वाला नियम किताब के 15° वाले नियम से निकाला गया है।
फ़ोन पर दो मित्र
पृष्ठ 20
- ढलती दोपहर, एक मित्र पोरबंदर (गुजरात) में, दूसरा तिनसुकिया (असम) में
- असम में सूर्यास्त हो गया है, अँधेरा है
- पोरबंदर वाला मित्र चकित होकर कहता है: “लेकिन यहाँ तो अभी भी दिन का प्रकाश है!”
किताब का संकेत: “पोरबंदर और तिनसुकिया के बीच देशांतर में 30° के अंतर पर विचार कीजिए”
देशांतर में 30° का अंतर है, तो स्थानीय समय में कितना अंतर होगा? बोर्ड पर हिसाब लगवाइए।
हमारा हिसाब: पोरबंदर और तिनसुकिया
पृष्ठ 19–20
- 15° पर 1 घंटा, तो 30° पर 2 घंटे
- तिनसुकिया पूर्व में है, इसलिए वहाँ सूरज पहले डूबता है
हमारी ओर से: किताब यहाँ सिर्फ़ 30° का संकेत देती है। 2 घंटे का हिसाब उसी संकेत और 15° वाले नियम से निकाला गया है।
एक देश, एक घड़ी
पृष्ठ 20
“इसी कारण अधिकतर देश उनके मध्य से गुजरने वाले याम्योत्तर पर आधारित एक मानक समय को अपनाते हैं।”
इससे पहले किताब कहती है: “लेकिन यह विधि किसी देश के अंदर अनेक स्थानीय समयों के उपयोग के संदर्भ में उचित नहीं होगी।”
भारतीय मानक समय
पृष्ठ 20
“भारतीय मानक समय (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम या आई.एस.टी.) ग्रिनिच (जिसे ग्रिनिच मीन टाइम या जी.एम.टी. भी कहा जाता है) पर स्थानीय समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है।”
हमारी ओर से: पूछिए: ग्रिनिच में सुबह 6 बजे हों, तो भारत की घड़ियों में क्या बजेगा? (11:30 पूर्वाह्न)
स्थानीय समय और मानक समय
पृष्ठ 19–20
स्थानीय समय
- हर याम्योत्तर का अपना
- पोरबंदर और तिनसुकिया में अलग
मानक समय
- अधिकतर देशों में पूरे देश के लिए एक
- भारत में आई.एस.टी.
किताब की गतिविधि: दोबारा वही दो मित्र
पृष्ठ 20
- “गुजरात और असम में बैठे दो मित्र पुन: चर्चा करते हैं। इस उदाहरण का उपयोग स्थानीय समय और मानक समय के अंतर को स्पष्ट करने के लिए कीजिए।”
हमारी ओर से: दो बच्चे मित्र बनें। एक अपनी घड़ी का समय बताए, दूसरा सूरज की स्थिति।
समय क्षेत्र
पृष्ठ 20
- “यह सभी मानक समय, समय क्षेत्र में गठित किए गए हैं, जो ग्राफ में 15° के क्षेत्र (चित्र 1.7) का व्यापक रूप से पालन करते हैं।”
- “समय क्षेत्र को विभाजित करने वाली रेखाएँ पूर्णतया सीधी नहीं होती हैं।”
- “ऐसा इसलिए है कि इन्हें अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं का पालन करते हुए प्रत्येक देश के मानक समय का ध्यान रखना पड़ता है।”
चित्र 1.8: दुनिया के समय क्षेत्र
पृष्ठ 20–21
- किताब के विश्व मानचित्र में सबसे ऊपर समय क्षेत्रों की संख्याएँ हैं, –12 से +12 तक
- भारत पर “+5½” लिखा है
- संख्या के आगे + हो तो जी.एम.टी. में जोड़िए, – हो तो घटाइए
यह चित्र यहाँ बना हुआ नहीं है; बच्चे किताब खोलकर देखें। हमारी ओर से: +5½ यानी जी.एम.टी. से 5 घंटे 30 मिनट आगे, यानी आई.एस.टी.
ध्यान रखें: बड़े देश, कई समय क्षेत्र
पृष्ठ 21
- “रूस, कनाडा या संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश एकल समय क्षेत्र की दृष्टि से अत्यधिक विशाल हैं।”
- संयुक्त राज्य अमेरिका में 6 समय क्षेत्र हैं, रूस में 11
- रूस में पूर्व से पश्चिम की यात्रा में “आपको अपनी घड़ी को 10 बार पुनर्समायोजित करना पड़ेगा।”
रूस में 11 समय क्षेत्र हैं, फिर घड़ी 10 बार ही क्यों बदलनी पड़ेगी?
चित्र 1.9: भारत पर केंद्रित ग्लोब
पृष्ठ 21–22
- “इसी प्रकार, चित्र 1.9 में भारत पर केंद्रित ग्लोब कुछ देशों के जी.एम.टी. के संबंध में मानक समय दर्शाता है।”
- इस ग्लोब पर भारत के ऊपर “+5.5” लिखा है; चित्र 1.8 में यही “+5½” है
यह चित्र यहाँ बना हुआ नहीं है; बच्चे किताब खोलकर देखें। हमारी ओर से: ग्लोब पर +3.5, +4.5 और +6.5 जैसी संख्याएँ भी ढूँढिए। कुछ समय क्षेत्र आधे घंटे के अंतर पर हैं।
निकास-पर्ची: स्थानीय समय और मानक समय में एक अंतर लिखिए।
6 | अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा और सारांश
क्या कोई ऐसी रेखा है, जिसे पार करते ही कैलेंडर की तारीख़ बदल जाए?
अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा
पृष्ठ 21
“ग्रिनिच पर स्थिर मुख्य याम्योत्तर, जिसके विपरीत की रेखा लगभग 180° देशांतर पर है, उसे अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा कहा जाता है।”
किताब: “जैसा कि आप मानचित्र में देख सकते हैं, +12 और –12 समय क्षेत्र इस रेखा पर एक-दूसरे को छूते हैं।”
रेखा पार की, तो तिथि बदली
पृष्ठ 21–22
- “यदि आप इसे समुद्री जहाज या विमान से पार करते हैं, तो आपके द्वारा अपनी घड़ी की तिथि में परिवर्तन करना आवश्यक है।”
- पूर्व की ओर यात्रा करते हुए पार कीजिए: एक दिन घटाइए, जैसे सोमवार से रविवार
- पश्चिम की ओर यात्रा करते हुए पार कीजिए: एक दिन जोड़िए, जैसे रविवार से सोमवार
तिथि रेखा एक चित्र में
पृष्ठ 21–22
रेखा टेढ़ी-मेढ़ी क्यों
पृष्ठ 22
“हमने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा लगभग 180° के देशांतर पर है, लेकिन यह कुछ देशों में एक ही दिन का विभाजन होने से बचने के लिए टेढ़ी-मेढ़ी होकर गुजरती है।”
हमारी ओर से: पूछिए: एक ही देश के दो हिस्सों में अलग-अलग तारीख़ हो, तो विद्यालय और बाज़ार का क्या होगा?
आगे बढ़ने से पहले: किताब का सार
पृष्ठ 22–23
- “मानचित्र पृथ्वी के क्षेत्र, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, को दर्शाने के लिए एक अत्यधिक उपयोगी साधन है।”
- “मानचित्रों के मुख्य घटक दूरी, दिशा और प्रतीक चिह्न हैं।”
- “देशांतर से समय निर्धारित किया जाता है और समय क्षेत्र को भी परिभाषित किया जाता है।”
- “अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा को पार करने पर तिथि में एक दिन का परिवर्तन होता है।”
किताब के सार में अक्षांश और देशांतर के ग्रिड वाली बात भी है। बच्चे पूरा सार अपने शब्दों में बोलें।
पूरा अध्याय एक चित्र में
पृष्ठ 8–23
पहले दिन के तीन प्रश्न, अब
पृष्ठ 7
“देशांतर से स्थानीय समय और मानक समय कैसे संबंधित हैं?”
हमारी ओर से: चार्ट पेपर वाले तीनों प्रश्न फिर पढ़िए। हर प्रश्न का जवाब एक-एक बच्चा दो वाक्यों में दे।
किताब की प्रश्नावली: कौन-सा प्रश्न किस कालांश से
पृष्ठ 23–25
| प्रश्न | किस बारे में | कालांश |
|---|---|---|
| 1 | स्केल से दूरी निकालना | 1 |
| 2 | लंदन में दोपहर 12 बजे, भारत में सायं 5:30 क्यों | 5 |
| 3 | प्रतीक चिह्न और रंग | 1 |
| 4 | घर या विद्यालय की आठ दिशाएँ | 1 |
| 5 | स्थानीय समय और मानक समय, समूह में | 5 |
| 6 | दिल्ली और बेंगलुरु का स्थानीय समय | 4 और 5 |
| 7 | छह कथन: सही या ग़लत | 3, 4 और 5 |
| 8 | वर्ग पहेली | 6 |
कालांश वाला मिलान हमारी ओर से है। उत्तर शिक्षक संदर्शिका में हैं।
प्रश्न 6 से शुरू कीजिए
पृष्ठ 23
“दिल्ली और बेंगलुरु के अक्षांश क्रमशः 29° उ. और 13° उ. हैं और उनका देशांतर लगभग 77° पू. एक ही है। दोनों नगरों के बीच स्थानीय समय में कितना अंतर होगा?”
हमारी ओर से: पहले बच्चों का अंदाज़ा सुनिए। सुराग: स्थानीय समय देशांतर से तय होता है, अक्षांश से नहीं।
सही या ग़लत: किताब के छह कथन
पृष्ठ 23–24
- “अक्षांशों के सभी समानांतरों की लंबाई समान होती है।”
- “देशांतर के एक याम्योत्तर की लंबाई भूमध्य रेखा की आधी होती है।”
- “दक्षिण ध्रुव का अक्षांश 90° द. है।”
- “असम में स्थानीय समय और आई.एस.टी. (भारतीय मानक समय) एक ही है।”
- “समय क्षेत्र को पृथक करने वाली रेखाएँ देशांतर के याम्योत्तर के समान होती हैं।”
- “भूमध्य रेखा एक अक्षांश वृत्त भी है।”
हमारी ओर से: ज़्यादातर कथनों के लिए किताब में सीधी पंक्ति मिलती है; बच्चे उसे ढूँढें। जहाँ सीधी पंक्ति न मिले (जैसे याम्योत्तर की लंबाई, या असम का समय), वहाँ किताब की दो बातें जोड़कर सोचना होगा।
वर्ग पहेली
पृष्ठ 24–25
संकेत किताब में हैं। हर सही शब्द के बाद पूछिए: यह शब्द किस कालांश में आया था?
अध्याय की पहली पंक्ति, फिर से
पृष्ठ 7
“पृथ्वी अंतरिक्ष में स्थित है, जो जल, पृथ्वी, अग्नि और वायु से बनी है और यह गोलाकार है।”
आर्यभट्ट (लगभग 500 सा.सं.)
हमारी ओर से: अब बच्चे बताएँ: पृथ्वी गोल है, तो उस पर किसी जगह का पता कैसे लिखते हैं?

