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कक्षा 6 · सामाजिक विज्ञान

इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत

समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे · अध्याय 4

भरत चौधरी और वनिता कुमारी ने बनाया · marushala.com

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कक्षा 6 • सामाजिक विज्ञान • समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे • अध्याय 4 — इतिहास की समय-रेखा एवं उसके स्रोत

कक्षा — 6 · विषय — सामाजिक विज्ञान (समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे) · पृष्ठ — 59 से 74

अपनी सबसे पुरानी याद सोचिए। आपको कैसे पता कि वह सचमुच हुई थी?

शायद किसी ने बताया। शायद कोई पुरानी तस्वीर है। शायद बस याद है। इतिहासकार भी यही करता है — बस पूरे देश के लिए, और हज़ारों साल पीछे तक

अध्याय का आरंभ — ई.एच. कार

इतिहास “अतीत एवं वर्तमान के मध्य एक अनवरत संवाद है। यह संवाद है, आज के समाज एवं कल (बीते समय) के समाज के मध्य… हम अतीत के आलोक में ही वर्तमान समाज को पूर्णत: समझ सकते हैं।”

पृ. 59

अध्याय के तीन महत्वपूर्ण प्रश्न

पृ. 59

  • हम ऐतिहासिक काल की गणना किस प्रकार करते हैं?
  • इतिहास को समझने के लिए विभिन्न स्रोत हमारी किस प्रकार सहायता कर सकते हैं?
  • आदिमानव किस प्रकार रहते थे?

यह अध्याय अपने तीनों प्रश्नों का उत्तर ठीक इसी क्रम में देता है।

1 | अतीत का अध्ययन कौन करता है | इतिहास; चार विशेषज्ञ

इतिहास क्या है

पृ. 60

  • इतिहास = मानव के अतीत का अध्ययन।
  • पृथ्वी का इतिहास बहुत लंबा है — और उसमें मानवों का इतिहास नवीनतम और एक छोटा-सा भाग है।
  • चित्र 4.1 यही दिखाता है — मानव का पूरा इतिहास इतना छोटा है कि उसे आवर्धक काँच में दिखाना पड़ा।

चित्र 4.1 के कुछ पड़ाव

कबक्या
4.54 अरब वर्ष पूर्वपृथ्वी; प्रथम कोशिकाएँ
10,00,000 वर्ष पूर्वअग्नि
3,00,000 वर्ष पूर्वहोमो सेपियंस (मानव)
6,500 वर्ष पूर्वलेखन

अतीत का अध्ययन करने वाले चार विशेषज्ञ

विशेषज्ञक्या अध्ययन करते हैं
भू-विज्ञानीपृथ्वी के भौतिक स्वरूप — मृदा, पत्थर, पर्वत, नदियाँ
जीवाश्म विज्ञानीकरोड़ों वर्ष पूर्व के पेड़ों, पशुओं व मानवों के अवशेष
मानव विज्ञानीमानव समाज एवं संस्कृतियाँ, अतीत से वर्तमान तक
पुरातत्व विज्ञानीउत्खनन से मिले अवशेष — उपकरण, घड़े, मनके, मूर्तियाँ, हड्डियाँ

दो परिभाषाएँ जो याद रहें

पृ. 61, 68

  • जीवाश्म — जीव-जंतुओं के पदचिह्न या पौधों के अवशेष चिह्न, जो मृदा अथवा शिलाओं की परतों में संरक्षित पाए जाते हैं।
  • आनुवांशिकी — जीव विज्ञान की वह शाखा जो अध्ययन करती है कि गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक कैसे पहुँचते हैं।

पुरालेखशास्त्री प्राचीन अभिलेख पढ़ते हैं — पुरातत्व विज्ञानी खोदते हैं। दोनों अलग हैं।

2 | समय की गणना | सा.सं.पू. और सा.सं.; सूत्र

हर संस्कृति की अपनी गिनती

पृ. 61–62

  • प्रत्येक समाज एवं संस्कृति के पास समय की गणना करने की अपनी प्रणालियाँ रही हैं।
  • युग = समय का एक निश्चित कालखंड; किसी का जन्म या किसी शासक का शासन-आरंभ नया युग बनता रहा है।
  • भारत में ग्रेगोरियन कैलेंडर के साथ हिंदू, मुस्लिम, यहूदी, चीनी तिथिपत्र भी चलते हैं।

ग्रेगोरियन कैलेंडर और अधिवर्ष

पृ. 62

  • 365 दिन मिलकर बारह माह; प्रत्येक चार वर्ष में एक अधिवर्ष।
  • शताब्दी वर्ष तभी अधिवर्ष होंगे जब वे 400 से विभाजित हो सकें।
  • इसीलिए 1800, 1900, 2000 में से केवल 2000 ही लीप वर्ष है।

नाम बदले, गिनती वही रही

पहलेअबपुस्तक में
ए.डी.सी.ई. (कॉमन एरा)सा.सं. — सामान्य संवत
बी.सी.बी.सी.ई. (बिफोर कॉमन एरा)सा.सं.पू. — सामान्य संवत पूर्व

सबसे बड़ी बात

कोई शून्य वर्ष नहीं है

1 सा.सं., 1 सा.सं.पू. के तुरंत बाद आता है — पृ. 63

इसीलिए यह सूत्र बनता है★

पृ. 63

  • 2 सा.सं.पू. से 2 सा.सं. तक केवल 3 वर्ष होते हैं — क्योंकि बीच में शून्य नहीं है।
  • सूत्र: दोनों को जोड़िए, फिर योग में से 1 घटाइए।
  • 2 + 2 − 1 = 3
  • और पुस्तक का अपना उदाहरण — 560 + 2024 − 1 = 2583

बुद्ध का जन्म (560 सा.सं.पू.) 2024 सा.सं. से 2583 वर्ष पूर्व हुआ था।

सूत्र कब लगेगा, कब नहींध्यान

−1 लगेगा

  • एक तिथि सा.सं.पू.
  • दूसरी तिथि सा.सं.
  • अर्थात शून्य के आर-पार
  • 560 + 2024 − 1 = 2583

−1 नहीं लगेगा

  • दोनों सा.सं.पू. → 560 − 320 = 240
  • दोनों सा.सं. → 1947 − 1828 = 119
  • सीधा घटा दीजिए

पृ. 63, 74

समय-रेखा

पृ. 64

  • समय-रेखा तिथियों और घटनाओं का अनुक्रम दिखाने का सुविधाजनक उपकरण है।
  • बिंदुकृत हिस्सा छोड़े गए कालखंड को दर्शाता है — अन्यथा चित्र 4.3 लगभग 3 मीटर लंबी हो जाती।
  • तिथियाँ देखे बिना भी क्रम दिख जाता है — जैसे बुद्ध का जन्म ईसा मसीह से पहले हुआ।

दशक, शताब्दी, सहस्राब्दी

इकाईवर्षवर्तमानसीमा
दशक10——
शताब्दी10021वीं2001–2100
सहस्राब्दी1000तीसरी2001–3000

सा.सं.पू. में गिनती उल्टी चलती है

पृ. 65

  • 1 सा.सं.पू. से आरंभ करके पीछे की ओर लौटते हैं।
  • तीसरी शताब्दी सा.सं.पू. = 300 से 201 सा.सं.पू.
  • प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. = 1 से 1000 सा.सं.पू.

तो आठवीं सहस्राब्दी सा.सं.पू. = 8000 से 7001 सा.सं.पू. — वही जगह जहाँ कृषि आरंभ हुई।

भारत का अपना तिथिपत्र — पंचांग

पृ. 65

  • अनेक भारतीय तिथिपत्र सूर्य एवं चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करते हैं।
  • ‘पंचांग’ तालिकाओं की एक पुस्तक है, जिसमें हर माह के दिनों के साथ खगोलीय आँकड़े होते हैं।
  • यह सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण, सूर्योदय एवं सूर्यास्त का सटीक आकलन करता है।
  • आज भी भारत में इसका बड़े स्तर पर उपयोग होता है।

3 | इतिहास के स्रोत | चार श्रेणियाँ; इतिहासकार का काम

स्रोत क्या है

पृ. 65

  • इतिहास का स्रोत = कोई स्थान, व्यक्ति, लेख अथवा वस्तु, जिससे हम अतीत की जानकारी एकत्र करते हैं।
  • अपने घर से शुरू कीजिए — पुराने सिक्के, पुस्तकें, वस्त्र, आभूषण, बर्तन, पुराने घर और भवन।
  • तीन पीढ़ियों की वंशावली बनाइए — नाम, व्यवसाय, जन्म-स्थान, और सूचना का स्रोत।

अध्याय का केंद्रीय विचार

इतिहास एक जिग्सॉ पहेली है

और उसके कुछ हिस्से हमेशा गायब रहेंगे — पृ. 67

इतिहास के स्रोत — चार श्रेणियाँ★

श्रेणीउसमें क्या आता है
पुरातात्विकशिलालेख (पांडुलिपि, ताम्रपत्र, सिक्के) · संरचना (स्मारक, टीला) · उत्खनन
मौखिकवंशावली · लोक साहित्य
साहित्यिकभारतीय साहित्य · विदेशी विवरण (यात्रा वृत्तांत, ऐतिहासिक वृत्तांत)
कलात्मकचित्रकला · मूर्तिकला · पट्टिका (पैनल)

उत्खनन से क्या-क्या मिलता है

पृ. 67

  • मानव, पशु तथा पौधों के अवशेष
  • उपकरण एवं हथियार
  • मूर्तियाँ एवं आभूषण
  • मृदभांड एवं खिलौने
  • निवास स्थान एवं शवाधान

पुस्तक स्वयं कहती है — “आपको अभी इन सभी को याद रखने की आवश्यकता नहीं है।”

इतिहासकार कैसे काम करता है★

पृ. 68

  • वे अधिक से अधिक स्रोतों से जानकारी संकलित करते हैं।
  • कभी स्रोत एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं — पहेली के टुकड़े मेल खाते हैं।
  • कभी वे एक-दूसरे के विपरीत सूचनाएँ देते हैं — टुकड़े मेल नहीं खाते।
  • तब निर्णय लेना पड़ता है कि किस स्रोत पर अधिक विश्वास किया जाए।

इस प्रकार वे उस कालखंड के इतिहास का पुनर्निर्माण करते हैं।

इतिहास अकेले इतिहासकार का काम नहीं

पृ. 68

  • पुरातत्व विज्ञानी · पुरालेखशास्त्री · मानव विज्ञानी · साहित्य व भाषा के विशेषज्ञ
  • पिछले 50 वर्षों में वैज्ञानिक अध्ययनों का योगदान बहुत बढ़ा है —
  • प्राचीन जलवायु · उत्खनित सामग्री का रासायनिक अध्ययन · प्राचीन मानव की आनुवांशिकी
  • आधुनिक इतिहास (पिछली दो-तीन शताब्दियाँ) के लिए — समाचार-पत्र और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया।

4 | मानव इतिहास का प्रारंभ | आदिमानव; पहली उपज

आदिमानव कब से

पृ. 70

  • मानव (होमो सेपियंस) लगभग 3,00,000 वर्ष पूर्व से पृथ्वी पर रह रहे हैं।
  • यह लंबा समय प्रतीत होता है, पर यह पृथ्वी के इतिहास का एक छोटा-सा अंश मात्र है।
  • आदिमानव को प्रकृति से अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

आदिमानव का जीवन

पृ. 70–71

  • वे टोलियों अथवा समूहों में रहते थे — एक-दूसरे की सहायता करने के लिए।
  • वे मुख्यत: आखेटक एवं खाद्य संग्राहक थे; भोजन एवं आश्रय की निरंतर खोज करते रहते थे।
  • वे अस्थायी शिविरों, शैलाश्रयों अथवा गुफाओं में रहते थे।
  • वे जिन भाषाओं में संवाद करते थे, वे अब लुप्त हो चुकी हैं।

पहेली का यह टुकड़ा हमेशा के लिए गायब है।

उन्होंने क्या-क्या किया

पृ. 71

  • अग्नि का उपयोग किया।
  • पत्थर की उन्नत कुल्हाड़ियाँ, ब्लेड्स, नुकीले तीर और अन्य उपकरण बनाए।
  • शैल-चित्र बनाए — कुछ साधारण आकृतियाँ और प्रतीक, कुछ पशुओं एवं मानवों के विस्तृत दृश्य।
  • पत्थर व मनकों की माला, पशुओं के दाँतों के पेंडेंट जैसे आभूषण बनाए और दूसरे समूहों से आदान-प्रदान करने लगे।
  • उनके प्राकृतिक तत्वों को लेकर विश्वास थे, और संभवत: मरणोपरांत जीवन को लेकर भी।

हिम युग

पृ. 71

  • एक समय पृथ्वी पर बहुत ठंड थी और उसका बड़ा भाग हिमाच्छादित था — इसे ‘हिम युग’ कहा गया।
  • हिम युग लगभग 1,00,000 वर्ष पूर्व से 12,000 वर्ष पूर्व तक रहा।
  • जब जलवायु गरम हुई तो हिम पिघली → नदियों में जलभराव → वे समुद्रों में समाहित हो गईं।

पहली उपज — और एक ‘लेकिन’★

पृ. 71

  • हिम युग के बाद जीने योग्य परिस्थितियों में सुधार आया।
  • लोगों ने एक स्थान पर बसना तथा अनाज उगाना आरंभ किया; गाय, बकरी का घरेलूकरण किया।
  • भोजन की अधिक उपलब्धता से समूह आकार व संख्या में बढ़ गए।
  • वे नदियों के किनारे बसने लगे — लेकिन इसका एकमात्र कारण जल नहीं था, मृदा का उपजाऊ होना भी था।

यह ‘लेकिन’ परीक्षा में आता है। दो कारण हैं, एक नहीं।

समाज जटिल होता गया

पृ. 73

  • सरदार अथवा मुखिया लोगों के कल्याण के लिए उत्तरदायी थे।
  • निजी स्वामित्व का भाव नहीं था; भूमि पर सामुदायिक रूप से कृषि की जाती थी।
  • पल्ली (उप-ग्राम) → बड़े गाँव → कुछ छोटे कस्बे।
  • गाँवों में संप्रेषण एवं आवागमन का तंत्र विकसित हुआ; भोजन, वस्त्र एवं उपकरण का आदान-प्रदान होने लगा।
  • मृदभांड और धातु — पहले तांबा, फिर लोहा — से टिकाऊ उपकरण और आभूषण बनना सरल हो गया।

अध्याय का समापन — पृ. 73

मानव सभ्यता को विकास के इन प्रारंभिक चरणों में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। इस दौरान कुछ कठिन क्षण भी आए, जब कुछ पूर्ववर्ती प्रजातियों की भाँति मानव सभ्यता भी लुप्त हो सकती थी। हम उन आदिमानवों के बारे में कभी नहीं जान पाएँगे जिनके साहस और दृढ़ता के कारण आज हमारा अस्तित्व संभव हो पाया है।

5 | सारांश | चार बातें जो याद रहें

अध्याय एक स्लाइड में

पृ. 73

  • समय-रेखा की अवधारणा हमें ऐतिहासिक घटनाओं का अनुक्रम समझने में सहायता करती है।
  • समय की गणना की विभिन्न विधियाँ हैं — वर्ष, दशक, शताब्दी, सहस्राब्दी।
  • इतिहास के विभिन्न स्रोत घटनाओं को समझने व उनका पुनर्निर्माण करने में सहायक होते हैं।
  • मानव-समाज समय के साथ जटिल होता गया।

और अध्याय की सबसे बड़ी बात — पहेली के कुछ हिस्से हमेशा गायब रहेंगे, और यह ठीक है।

जो पढ़ाते हैं, वही लिखते और जाँचते हैं

इसे बनाने वाले

  • भरत चौधरीभरत चौधरीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. जेठान्तरी · ब्लॉक समदड़ी, जिला बालोतरा
  • वनिता कुमारीवनिता कुमारीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. रामसीन मूंगड़ा · ब्लॉक एवं जिला बालोतरा

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