- चाँद की कला (Phase)
- चाँद का जितना चमकता हिस्सा हमें दिखता है, उसका रूप: हँसिया, आधा, बढ़ता या पूरा। यह इस पर टिका है कि आसमान में चाँद सूरज से कितना दूर है।
- शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष (Waxing and waning)
- अमावस्या से पूर्णिमा तक के लगभग 15 दिन, जब चाँद रोज़ बढ़ता है, शुक्ल पक्ष हैं। पूर्णिमा से अमावस्या तक के, जब वह घटता है, कृष्ण पक्ष।
- सूर्य-ग्रहण (Solar eclipse)
- जब चाँद सूरज और पृथ्वी के बीच आकर सूरज को पूरा या थोड़ा ढक ले। यह हमेशा अमावस्या को होता है।
- चंद्र-ग्रहण (Lunar eclipse)
- जब पृथ्वी सूरज और चाँद के बीच आ जाए और उसकी छाया चाँद पर पड़े। यह हमेशा पूर्णिमा को होता है।
- प्रच्छाया, गहरी छाया (Umbra)
- छाया का बीच वाला गहरा हिस्सा, जहाँ से रोशनी देने वाला गोला पूरा ढका दिखता है।
- उपच्छाया, हल्की छाया (Penumbra)
- गहरी छाया के चारों ओर का हल्का हिस्सा, जहाँ से रोशनी देने वाला गोला थोड़ा ही ढका दिखता है।
- पूर्ण और आंशिक ग्रहण (Total and partial eclipse)
- पूर्ण में सूरज या चाँद पूरा ढक जाता है, आंशिक में बस एक हिस्सा।
- वलयाकार या कंगन जैसा ग्रहण (Annular eclipse)
- जब दूर होने से चाँद सूरज से छोटा दिखे और सूरज का चमकता किनारा एक कंगन की तरह बचा रहे।
- संकर ग्रहण (Hybrid eclipse)
- ऐसा सूर्य-ग्रहण जो अपनी पट्टी की कुछ जगहों से पूर्ण और कुछ से कंगन जैसा दिखे।
- हल्की छाया वाला चंद्र-ग्रहण (Penumbral lunar eclipse)
- जब चाँद सिर्फ़ पृथ्वी की हल्की छाया से गुज़रे और बस थोड़ा मटमैला हो।
- स्पर्श (Contact) और मोक्ष
- ग्रहण का शुरू होना और ख़त्म होना। विज्ञान में चार स्पर्श गिने जाते हैं: पहला, दूसरा, तीसरा और चौथा।
- आभासी आमाप (Apparent size)
- कोई चीज़ आसमान में कितनी बड़ी दिखती है। दूर की बड़ी चीज़ और पास की छोटी चीज़ बराबर दिख सकती हैं, जैसे सूरज और चाँद।
- कॉरोना (Corona)
- सूरज का बाहरी वायुमंडल, जो सिर्फ़ पूर्ण सूर्य-ग्रहण में दिखता है।
- बेली के मोती, हीरे की अँगूठी (Baily's beads, Diamond ring)
- पूर्ण अवस्था से ठीक पहले और ठीक बाद चाँद की घाटियों से छनकर चमकती सूरज की आख़िरी रोशनी।
- पात: आरोही और अवरोही (Node: ascending, descending)
- वे दो बिंदु जहाँ चाँद की झुकी कक्षा पृथ्वी की कक्षा के तल को काटती है। आरोही पात पर चाँद नीचे से ऊपर जाता है, अवरोही पात पर ऊपर से नीचे।
- ग्रहण का मौसम (Eclipse season)
- साल में दो बार आने वाला 31 से 37 दिन का समय, जब सूरज किसी पात के पास होता है और ग्रहण हो सकते हैं।
- सारोस (Saros)
- लगभग 18 साल 11 दिन 8 घंटे का चक्र, जिसके बाद लगभग वैसा ही ग्रहण लौटता है।
- पारगमन (Transit)
- जब कोई छोटा पिंड, जैसे बुध या शुक्र, सूरज के आगे से एक छोटे काले बिंदु की तरह गुज़रे।