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कक्षा 12 · राजनीति विज्ञान

समकालीन दक्षिण एशिया

समकालीन विश्व राजनीति · अध्याय 3

भरत चौधरी और वनिता कुमारी ने बनाया · marushala.com

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कक्षा 12 • राजनीति विज्ञान • समकालीन विश्व राजनीति • अध्याय 3 — समकालीन दक्षिण एशिया

कक्षा — 12 · विषय — राजनीति विज्ञान (समकालीन विश्व राजनीति) · पृष्ठ — 29 से 44

चार सैनिक शासक। एक राजा का तख़्तापलट। छब्बीस साल का गृहयुद्ध। और फिर भी किताब कहती है —

★★“पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र एक स्वीकृत मूल्य बन चला है।” यह अध्याय इसी दावे का प्रमाण है • क्षेत्र क्या है • लोकतंत्र का हाल • झगड़े क्यों • रास्ता क्या

0 | पहले एक चेतावनी | यह अध्याय पहले ‘अध्याय 5’ था

पाठ्यक्रम-युक्तिकरण का पूरा नक्शा

पुराना क्रमअध्यायअबQR कोड
1शीतयुद्ध का दौर❌ हटाया गया—
2दो ध्रुवीयता का अंत✓ अध्याय 112108CH02
3समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व❌ हटाया गया—
4सत्ता के समकालीन केन्द्र✓ अध्याय 212108CH04
5समकालीन दक्षिण एशिया✓ अध्याय 312108CH05

और यहाँ हटाए गए अध्याय का सबसे स्पष्ट अवशेष है

अगर अमरीका के बारे में लिखे गए अध्याय को ‘अमरीकी वर्चस्व’ का शीर्षक दिया गया, तो इस अध्याय को भारतीय वर्चस्व क्यों नहीं कहा गया?

NCERT, अध्याय 3, पृ. 41 — पर वह अध्याय अब पाठ्यक्रम में है ही नहीं

1 | क्या है दक्षिण एशिया? | सात देश, चार सीमाएँ

अध्याय की पहली और सबसे यादगार पंक्ति

यह एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ सद्भाव और शत्रुता, आशा और निराशा तथा पारस्परिक शंका और विश्वास साथ-साथ बसते हैं।

NCERT, अध्याय 3, पृ. 30

7

सात

बांग्लादेश · भूटान · भारत · मालदीव · नेपाल · पाकिस्तान · श्रीलंका

चार प्राकृतिक सीमाएँ

एक विशिष्ट प्राकृतिक क्षेत्र

  • उत्तर — विशाल हिमालय पर्वत-शृंखला
  • दक्षिण — हिंद महासागर
  • पश्चिम — अरब सागर
  • पूरब — बंगाल की खाड़ी
  • ★“यह भौगोलिक विशिष्टता ही इस उप-महाद्वीपीय क्षेत्र के भाषाई, सामाजिक तथा सांस्कृतिक अनूठेपन के लिए जिम्मेदार है।”
  • चर्चा में जब-तब अफ़्गानिस्तान और म्यांमार भी शामिल किए जाते हैं।

! “चीन इस क्षेत्र का एक प्रमुख देश है लेकिन चीन को दक्षिण एशिया का अंग नहीं माना जाता।”

विविधता और एकता — दोनों एक साथ

इस तरह परिभाषित दक्षिण एशिया हर अर्थ में विविधताओं से भरा-पूरा इलाका है फिर भी भू-राजनीतिक धरातल पर यह एक क्षेत्र है।

NCERT, अध्याय 3, पृ. 30

2 | लोकतंत्र का हाल | “एक-सी राजनीतिक प्रणाली नहीं है”

देश-दर-देश — पाँच अलग रास्ते

देशअनुभव
भारत और श्रीलंका★ब्रिटेन से आज़ादी के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था सफलतापूर्वक कायम; “एक राष्ट्र के रूप में भारत हमेशा लोकतांत्रिक रहा है”
पाकिस्तान और बांग्लादेशलोकतांत्रिक और सैनिक — दोनों तरह के नेताओं का शासन
पाकिस्तानबेनज़ीर भुट्टो → नवाज़ शरीफ़ → 1999 का सैनिक तख़्तापलट → 2008 से लोकतंत्र
नेपाल★2006 तक संवैधानिक राजतंत्र → 2008 में लोकतांत्रिक गणराज्य
भूटान★2008 में संवैधानिक राजतंत्र; राजा के नेतृत्व में बहुदलीय लोकतंत्र
मालदीव★1968 तक सल्तनत → गणतंत्र; जून 2005 में बहुदलीय प्रणाली के पक्ष में एकमत मतदान

और फिर भी — अध्याय का केंद्रीय दावा

बांग्लादेश और नेपाल के अनुभवों के आधार पर हम कह सकते हैं कि पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र एक स्वीकृत मूल्य बन चला है।

NCERT, अध्याय 3, पृ. 30

88%

88%

दक्षिण एशियाई जो मानते हैं कि लोकतंत्र उनके देश के लिए उपयुक्त है — 19 हजार से अधिक साक्षात्कार

सर्वेक्षण — ‘लोकतंत्र बेहतर है’ (%)

कथनबांग्लादेशभारतनेपालपाकिस्तानश्रीलंका
लोकतंत्र बेहतर6970623771
कभी-कभी तानाशाही बेहतर69101411
कोई फर्क नहीं पड़ता2521284918
लोकतंत्र ‘उपयुक्त’9392798492

यह सर्वेक्षण क्यों मायने रखता है

ये निष्कर्ष बड़े महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि पहले से माना जाता रहा है कि लोकतंत्र सिर्फ विश्व के धनी देशों में फल-फूल सकता है। इस लिहाज से देखें तो दक्षिण एशिया के लोकतंत्र के अनुभवों से लोकतंत्र की वैश्विक कल्पना का दायरा बढ़ा है।

NCERT, अध्याय 3, पृ. 31

मानव विकास सूची में स्थान

देशHDI स्थानआयु प्रत्याशासाक्षरता %
★श्रीलंका7675.591.2
भारत13068.869.3
बांग्लादेश13672.872.8
नेपाल14970.659.6
पाकिस्तान15066.657.0

3 | पाकिस्तान | सेना और लोकतंत्र का झूला

शासकों का क्रम

  1. अयूब खानपहले संविधान के बाद बाग़डोर ली; “जल्दी ही अपना निर्वाचन भी करा लिया”; जनता के गुस्से से पद छोड़ना पड़ा
  2. याहिया खानउनके सैनिक-शासन मेंबांग्लादेश-संकट और 1971 का युद्ध
  3. 1971–77जुल्फ़िकार अली भुट्टो की निर्वाचित सरकार
  4. 1977जनरल जियाउल-हक ने सरकार गिरायी
  5. 1988बेनज़ीर भुट्टो के नेतृत्व में लोकतांत्रिक सरकार
  6. 1999जनरल परवेज़ मुशर्रफ ने नवाज़ शरीफ़ को हटाया
  7. 2001मुशर्रफ नेअपना निर्वाचन राष्ट्रपति के रूप में कराया
  8. 2008लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नेता शासन कर रहे हैं

लोकतंत्र स्थायी क्यों नहीं बना — पाँच कारण

प्रश्न 3

  • ★1. सामाजिक दबदबा — “यहाँ सेना, धर्मगुरु और भूस्वामी अभिजनों का सामाजिक दबदबा है।”
  • ★2. भारत से तनातनी — “इस वज़ह से सेना-समर्थक समूह ज्यादा मजबूत हैं।”
  • ★3. सेना-समर्थक तर्क — “पाकिस्तान के राजनीतिक दलों और लोकतंत्र में खोट है”; “इस तरह ये ताकतें सैनिक शासन को जायज़ ठहराती हैं।”
  • ★4. अंतर्राष्ट्रीय समर्थन का अभाव — “कोई खास अंतर्राष्ट्रीय समर्थन नहीं मिलता।”
  • ★5. पश्चिमी देशों की भूमिका — “अमरीका तथा अन्य पश्चिमी देशों ने… सैनिक शासन को बढ़ावा दिया”; डर — ‘विश्वव्यापी इस्लामी आतंकवाद’ और परमाणु हथियारों का आतंकवादियों के हाथ लगना

ये देश पाकिस्तान को “‘पश्चिम’ तथा दक्षिण एशिया में पश्चिमी हितों का रखवाला” मानते हैं।

और फिर भी — दूसरा पक्ष

लोकतंत्र तो खैर पाकिस्तान में पूरी तरह सफल नहीं हो सका है लेकिन इस देश में लोकतंत्र का जज्बा बहुत मज़बूती के साथ कायम रहा है। पाकिस्तान में अपेक्षाकृत स्वतंत्र और साहसी प्रेस मौजूद है और वहाँ मानवाधिकार आंदोलन भी काफी मजबूत है।

NCERT, अध्याय 3, पृ. 33

4 | बांग्लादेश | भाषा का सवाल, धर्म का नहीं

चार शिकायतें

1947–1971

  • ★पश्चिमी पाकिस्तान का दबदबा
  • ★अपने ऊपर उर्दू भाषा को लादा जाना
  • ★बंगाली संस्कृति और भाषा के साथ किया जा रहा दुर्व्यवहार
  • ★प्रशासन में न्यायोचित प्रतिनिधित्व तथा राजनीतिक सत्ता में समुचित हिस्सेदारी की माँग

नेतृत्व — शेख मुजीबुर्रहमान; 1966 में छ: सूत्री प्रस्ताव — पूर्वी क्षेत्र के लिए स्वायत्तता।

मुक्ति की प्रक्रिया

  1. 1970अवामी लीग को पूर्वी पाकिस्तान की सारी सीटों पर विजय; संविधान सभा में बहुमत
  2. इसके बाद! सरकार ने सभा को आहूत करने से इंकार किया; शेख़ मुजीब गिरफ्तार
  3. 1971याहिया खान के शासन में सेना ने आंदोलन कुचलने की कोशिश; हजारों लोग मारे गए
  4. 1971बड़ी संख्या में लोग भारत पलायन कर गए — शरणार्थियों की समस्या
  5. 1971भारत ने आज़ादी की माँग का समर्थन किया और वित्तीय तथा सैन्य सहायता दी
  6. 1971दिसंबर — युद्ध → पाकिस्तानी सेना का आत्मसमर्पण → स्वतंत्र राष्ट्र ‘बांग्लादेश’

आज़ादी के बाद — और लोकतंत्र की वापसी

  • 1972 — संविधान: ★“धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक तथा समाजवादी देश।”
  • ! 1975 — शेख मुजीब ने अध्यक्षात्मक प्रणाली लागू की और अवामी लीग को छोड़ सभी पार्टियाँ समाप्त कीं।
  • ! अगस्त 1975 — सेना की बग़ावत; शेख मुजीब मारे गए।
  • जियाउर्रहमान — बांग्लादेश नेशनल पार्टी; 1979 के चुनाव में विजयी; बाद में हत्या।
  • लेफ्टिनेंट जेनरल एच एम इरशाद — एक और सैनिक-शासन।
  • ★“बांग्लादेश की जनता जल्दी ही लोकतंत्र के समर्थन में उठ खड़ी हुई। आंदोलन में छात्र आगे-आगे चल रहे थे।”

★1990 में इरशाद को पद छोड़ना पड़ा; 1991 के चुनाव के बाद से बहुदलीय प्रतिनिधिमूलक लोकतंत्र कायम है।

5 | नेपाल | दो आंदोलन, सोलह साल का अंतर

1990 बनाम अप्रैल 2006

पहला आंदोलनदूसरा आंदोलन
कब1990★अप्रैल 2006
क्या मिलाराजा ने नए लोकतांत्रिक संविधान की माँग मान ली★राजा ज्ञानेन्द्र ने बाध्य होकर संसद बहाल की (अप्रैल 2002 में भंग)
नेतृत्वलोकतंत्र-समर्थक आंदोलन★सात दलों का गठबंधन + माओवादी + सामाजिक कार्यकर्ता
चरित्र—★“मोटे तौर पर अहिंसक”

बीच का दौर — त्रिकोणीय संघर्ष

1990 का दशक

  • ! “नेपाल में लोकतांत्रिक सरकारों का कार्यकाल बहुत छोटा और समस्याओं से भरा रहा।”
  • माओवादी अनेक हिस्सों में प्रभाव जमाने में कामयाब हुए; वे “राजा और सत्ताधारी अभिजन के खिलाफ़ सशस्त्र विद्रोह” करना चाहते थे।
  • ★★“कुछ समय तक राजा की सेना, लोकतंत्र-समर्थकों और माओवादियों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष हुआ।”
  • ! 2002 में राजा ने संसद भंग की और सरकार गिरा दी।

★2008 — राजतंत्र खत्म, लोकतांत्रिक गणराज्य। ★2015 — नया संविधान।

6 | श्रीलंका | तीसरी तरह की चुनौती

न सेना, न राजतंत्र

श्रीलंका को एक कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा। यह चुनौती न तो सेना की थी और न ही राजतंत्र की। श्रीलंका को जातीय संघर्ष का सामना करना पड़ा जिसकी माँग है कि श्रीलंका के एक क्षेत्र को अलग राष्ट्र बनाया जाय।

NCERT, अध्याय 3, पृ. 36

संघर्ष की जड़

सिंहली बनाम तमिल

  • आज़ादी 1948 के बाद से राजनीति पर बहुसंख्यक सिंहली समुदाय के हितों की नुमाइंदगी करने वालों का दबदबा।
  • ★“सिंहली राष्ट्रवादियों का मानना था कि श्रीलंका में तमिलों के साथ कोई ‘रियायत’ नहीं बरती जानी चाहिए क्योंकि श्रीलंका सिर्फ सिंहली लोगों का है।”
  • ★“तमिलों के प्रति उपेक्षा भरे बरताव से एक उग्र तमिल राष्ट्रवाद की आवाज़ बुलंद हुई।”
  • ★1983 से — ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑव तमिल ईलम’ (लिट्टे) का श्रीलंकाई सेना से सशस्त्र संघर्ष; माँग — ‘तमिल ईलम’, तमिलों के लिए अलग देश।
  • किसी समय श्रीलंका के उत्तर पूर्वी हिस्से पर लिट्टे का नियंत्रण था।

अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ — नार्वे और आइसलैंड जैसे स्केंडिनेवियाई देश। ★2009 में लिट्टे को खत्म कर दिया गया।

भारत का हस्तक्षेप — और उसका सबक

  • भारत की तमिल जनता का सरकार पर भारी दबाव था कि वह श्रीलंकाई तमिलों के हितों की रक्षा करे।
  • ★1987 — भारत ने श्रीलंका से समझौता किया और भारतीय सेना भेजी।
  • ! “आखिर में भारतीय सेना लिट्टे के साथ संघर्ष में फंस गई।”
  • !★“श्रीलंकाई जनता ने समझा कि भारत श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी कर रहा है।”
  • ★1989 — “भारत ने अपनी ‘शांति सेना’ लक्ष्य हासिल किए बिना वापस बुला ली।”

1987 के बाद से भारत श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में असलंग्नता की नीति पर अमल कर रहा है।

76 बनाम 130

76

श्रीलंका का HDI स्थान — छब्बीस साल के गृहयुद्ध के बावजूद (भारत — 130)

श्रीलंका का विरोधाभास — पाँच उपलब्धियाँ

  • ★“संघर्षों की चपेट में होने के बाद भी श्रीलंका ने अच्छी आर्थिक वृद्धि और विकास के उच्च स्तर को हासिल किया है।”
  • ★“जनसंख्या की वृद्धि-दर पर सफलतापूर्वक नियंत्रण करने वाले विकासशील देशों में श्रीलंका प्रथम है।”
  • ★“दक्षिण एशिया के देशों में सबसे पहले श्रीलंका ने ही अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया।”
  • ★“गृहयुद्ध से गुजरने के बावजूद कई सालों से इस देश का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा है।”
  • ★“अंदरूनी संघर्ष के झंझावातों को झेलकर भी श्रीलंका ने लोकतांत्रिक राजव्यवस्था कायम रखी है।”

यही इस अध्याय का सबसे बड़ा सबक है — संघर्ष और विकास परस्पर-निषेधी नहीं हैं।

7 | भारत-पाकिस्तान | सबसे प्रमुख और सर्वग्रासी संघर्ष

भारत की स्थिति ही कारण है

दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति केंद्रीय है और इस वजह से इनमें से अधिकांश संघर्षों का रिश्ता भारत से है। इन संघर्षों में सबसे प्रमुख और सर्वग्रासी संघर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच का संघर्ष है।

NCERT, अध्याय 3, पृ. 37

कश्मीर — और उसके बाद

1947–48 · 1965 · 1971

  • विभाजन के तुरंत बाद दोनों देश कश्मीर के मसले पर लड़ पड़े।
  • ★1948 के युद्ध के फलस्वरूप कश्मीर के दो हिस्से हो गए — पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और भारत का जम्मू-कश्मीर प्रान्त; बीच में नियंत्रण-सीमा रेखा।
  • 1971 में भारत ने निर्णायक युद्ध जीता, “लेकिन कश्मीर मसला अनसुलझा ही रहा।”
  • सामरिक मसले — सियाचिन ग्लेशियर पर नियंत्रण और हथियारों की होड़।
  • ★1998 — भारत ने पोखरण में, पाकिस्तान ने चगाई पहाड़ी पर परमाणु-परीक्षण किए।

★“इसके बाद से… इनके बीच सीधे और सर्वव्यापी युद्ध छिड़ने की आशंका कम हो गई है।”

एक संधि जो सब कुछ झेल गई

1960 में विश्व बैंक की मदद से भारत और पाकिस्तान ने ‘सिंधु-जल संधि’ पर दस्तख़त किए और यह संधि भारत-पाक के बीच कई सैन्य संघर्षों के बावजूद अब भी कायम है।

NCERT, अध्याय 3, पृ. 38

आपसी आरोप

किसका आरोपक्या
भारत → पाकिस्तानकश्मीरी उग्रवादियों को हथियार, प्रशिक्षण और धन; आतंकवादी हमले के लिए सुरक्षा
भारत → पाकिस्तान1985–1995 में खालिस्तान-समर्थक उग्रवादियों को हथियार तथा गोले-बारुद
भारत → आईएसआईबांग्लादेश और नेपाल के गुप्त ठिकानों से पूर्वोत्तर भारत में भारत-विरोधी अभियान
पाकिस्तान → भारतसिंध और बलूचिस्तान में समस्या को भड़काने का आरोप

8 | भारत और उसके पड़ोसी | ‘बड़े होने’ की समस्या

पाँच पड़ोसी — एक सहयोग, एक मतभेद

देश! मतभेद★सहयोग
बांग्लादेशगंगा-ब्रह्मपुत्र का जल; अवैध आप्रवास; कट्टरपंथी जमातों को समर्थन; गैस निर्यात से इंकार‘एक्ट ईस्ट’ का हिस्सा; आपदा-प्रबंधन; 2015 में परिक्षेत्रों का आदान-प्रदान
नेपालचीन से दोस्ती; माओवादी आंदोलन; “समुद्र तक पहुँचने से रोकता है”★बिना पासपोर्ट-वीज़ा आवाजाही; व्यापार, बिजली, जल-प्रबंधन ग्रिड
श्रीलंकाजातीय संघर्ष पर तनावमुक्त व्यापार समझौता; ‘सुनामी’ के बाद पुनर्निर्माण में मदद
भूटानकोई बड़ा झगड़ा नहीं★उग्रवादियों को खदेड़ा; पनबिजली परियोजनाएँ; सबसे ज्यादा अनुदान भारत से
मालदीव—★1988 में भारतीय वायुसेना और नौसेना की तुरंत कार्रवाई; पर्यटन और मत्स्य उद्योग में मदद

‘बड़े होने’ की समस्या — दो दृष्टियाँ

छोटे देशों की दृष्टिभारत की दृष्टि
“भारत का आकार बड़ा है और वह शक्तिशाली है। इसकी वजह से… छोटे देशों का भारत के इरादों को लेकर शक करना लाजिमी है।”“भारत सरकार को अक्सर महसूस होता है कि उसके पड़ोसी देश उसका बेज़ा फायदा उठा रहे हैं।”
“छोटे देशों को लगता है कि भारत दक्षिण एशिया में अपना दबदबा कायम करना चाहता है।”“भारत नहीं चाहता कि इन देशों में राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो” — डर कि “बाहरी ताकतों को इस क्षेत्र में प्रभाव जमाने में मदद मिलेगी।”

पर सारे झगड़े भारत-केंद्रित नहीं

  • नेपाल-भूटान — जातीय मूल के नेपालियों के भूटान आप्रवास पर मतभेद।
  • बांग्लादेश-म्यांमार — रोहिंग्या लोगों के आप्रवास पर मतभेद।
  • बांग्लादेश-नेपाल — हिमालयी नदियों के जल की हिस्सेदारी को लेकर खटपट।

★“इसका एक कारण दक्षिण एशिया का भूगोल भी है जहाँ भारत बीच में स्थित है और बाकी देश भारत की सीमा के इर्द-गिर्द पड़ते हैं।”

9 | शांति और सहयोग | दक्षेस, साफ्टा, और अंतिम सवाल

दक्षेस — और उसकी सीमा

SAARC · 1985

  • ★“दक्षेस… दक्षिण एशियाई देशों द्वारा बहुस्तरीय साधनों से आपस में सहयोग करने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। इसकी शुरुआत 1985 में हुई।”
  • पहला सम्मेलन — ढाका; सातवाँ (1993, ढाका) — SAPTA; 12वाँ (फरवरी 2004) — SAFTA; 18वाँ (नवंबर 2014) — काठमांडू।
  • 2007 में अफ़गानिस्तान दक्षेस का सदस्य बना।
  • ! “दुर्भाग्य से विभेदों की मौजूदगी के कारण दक्षेस को ज्यादा सफलता नहीं मिली है।”

साफ्टा की तीन तिथियाँ — 2002 दस्तख़त · फरवरी 2004 हस्ताक्षर · 1 जनवरी 2006 प्रभावी।

साफ्टा — तीन दृष्टिकोण

कौनक्या मानता है
कुछ छोटे देश“‘साफ्टा’ की ओट लेकर भारत उनके बाज़ार में सेंध मारना चाहता है” और उनके समाज तथा राजनीति पर असर डालना चाहता है
भारत“‘साफ्टा’ से इस क्षेत्र के हर देश को फायदा होगा” और मुक्त व्यापार से राजनीतिक सहयोग बेहतर होगा
भारत में कुछ लोगपरेशान होने की ज़रूरत नहीं — भारत भूटान, नेपाल और श्रीलंका से पहले ही द्विपक्षीय समझौता कर चुका है

बाहरी शक्तियाँ

“कोई भी क्षेत्र हवा में नहीं होता”

  • ★“चाहे कोई क्षेत्र अपने को गैर इलाकाई ताकतों से अलग रखने की जितनी भी कोशिश करे उस पर बाहरी ताकतों और घटनाओं का असर पड़ता ही है।”
  • चीन — “पिछले दस वर्षों में भारत और चीन के संबंध बेहतर हुए हैं”; ! “चीन की रणनीतिक साझेदारी पाकिस्तान के साथ है और यह भारत-चीन संबंधों में एक बड़ी कठिनाई है।”
  • अमरीका — ★“शीतयुद्ध के बाद दक्षिण एशिया में अमरीकी प्रभाव तेजी से बढ़ा है”; “वह भारत-पाक के बीच लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।”
  • अमरीकी रुचि के तीन कारण — दक्षिण एशियाई मूल के लोगों की अच्छी-खासी संख्या, क्षेत्र की जनसंख्या और बाजार का भारी-भरकम आकार, और सुरक्षा-शांति से बँधे अपने हित।

पृ. 42 के दोनों कार्टून — चीन (“बुनियादी मुद्दों की बातें क्यों नहीं करते?”) और अमरीका (टेनिस-अंपायर)।

अध्याय का अंतिम वाक्य

दक्षिण एशिया को संघर्षों की आशंका वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता रहेगा अथवा यह एक ऐसे क्षेत्रीय गुट के रूप में उभरेगा जिसके सांस्कृतिक गुण-धर्म तथा व्यापारिक हित एक हैं — यह बात किसी बाहरी शक्ति से ज्यादा यहाँ के लोगों और सरकारों पर निर्भर है।

NCERT, अध्याय 3, पृ. 43

10 | निचोड़ | एक दावा, छह प्रमाण

पूरा अध्याय एक स्लाइड में

  • क्षेत्र — सात देश, चार प्राकृतिक सीमाएँ; चीन इसमें नहीं; “सद्भाव और शत्रुता साथ-साथ बसते हैं।”
  • पाकिस्तान — अयूब → याहिया → भुट्टो → जियाउल-हक → बेनज़ीर → मुशर्रफ → 2008; पाँच कारण; पर “लोकतंत्र का जज्बा कायम रहा।”
  • बांग्लादेश — भाषा और हिस्सेदारी का सवाल → 1970 का चुनाव → दमन → दिसंबर 1971; फिर 1990 का जन-आंदोलन और 1991 से लोकतंत्र।
  • नेपाल — दो आंदोलन (1990, अप्रैल 2006); त्रिकोणीय संघर्ष; 2008 गणराज्य, 2015 संविधान।
  • श्रीलंका — जातीय संघर्ष (1983–2009); भारत की 1987–89 की भूल; और फिर भी ★HDI में 76वाँ स्थान।
  • भारत-पाक — 1948 से कश्मीर के दो हिस्से; 1998 के परीक्षण; पर 1960 की सिंधु-जल संधि आज भी कायम।
  • पड़ोसी — आकार और भूगोल ही समस्या की जड़; दोनों दृष्टियाँ सच हैं।
  • रास्ता — दक्षेस (1985), साफ्टा (1 जनवरी 2006), विश्वास बहाली के उपाय।

★★और सबसे बड़ा निष्कर्ष: “पूरे दक्षिण एशिया में लोकतंत्र एक स्वीकृत मूल्य बन चला है।”

और एक सवाल, जो अध्याय के बाद भी बचा रहता है

अगर ये सातों देश एक-दूसरे पर भरोसा कर लें, तो यह क्षेत्र कैसा होता?

प्रश्नावली के प्रश्न 9, 10 और 11 इसी सवाल के बच्चे हैं

जो पढ़ाते हैं, वही लिखते और जाँचते हैं

इसे बनाने वाले

  • भरत चौधरीभरत चौधरीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. जेठान्तरी · ब्लॉक समदड़ी, जिला बालोतरा
  • वनिता कुमारीवनिता कुमारीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. रामसीन मूंगड़ा · ब्लॉक एवं जिला बालोतरा

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