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कक्षा 12 · राजनीति विज्ञान

भारतीय राजनीति : नए बदलाव

स्वतंत्र भारत में राजनीति · अध्याय 8

भरत चौधरी और वनिता कुमारी ने बनाया · marushala.com

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भारतीय राजनीति : नए बदलाव · कक्षा 12 राजनीति विज्ञान · अध्याय 8

कक्षा — 12 · विषय — राजनीति विज्ञान (स्वतंत्र भारत में राजनीति)

एक ऊँची चरखी। नौ सवार। और एक बदलता हुआ देश।

यह पुस्तक का अंतिम अध्याय है — और सबसे नया भी।

पहला पन्ना — ‘INDIAN POLITY’ की चरखी

  • एक रोलर-कोस्टर है जिस पर लिखा है ‘INDIAN POLITY’
  • उस पर सवार हैं — राजीव गाँधी, वी.पी. सिंह, आडवाणी, चंद्रशेखर, ज्योति बसु, एन.टी. रामाराव, देवीलाल, महंत, करुणानिधि
  • तख्तियाँ — MANDAL · RATH YATRA · V.P. HATAO
  • नीचे लपटें — PRICES और RESERVATION

1990 के दशक में सचमुच ऐसा ही लगा — जैसे पूरी राजनीति चरखी पर सवार हो।

इस अध्याय के चार सवाल

  • गठबंधन की राजनीति के उदय का हमारे लोकतंत्र पर क्या असर पड़ा?
  • मंडलीकरण क्या है? इसने राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कैसे बदला?
  • राम जन्मभूमि आंदोलन ने क्या विरासत छोड़ी?
  • नीतिगत मामलों की सर्व-सहमति का राजनीतिक विकल्पों पर क्या असर हुआ?

और अब एक असाधारण बात, जो पाठ्यपुस्तक खुद कहती है।

यह अध्याय इन सवालों के जवाब नहीं देता। ये सवाल राजनीतिक लिहाज़ से संवेदनशील हैं, लेकिन मात्र इसी कारण से हम इन सवालों को पूछने से बच नहीं सकते।

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 136

वर्तमान को समझना

आज़ादी के बाद की भारतीय राजनीति के इतिहास को आखिर पढ़ने का मकसद ही यही है कि हम अपने वर्तमान को समझ सकें

1 | 1990 का दशक | पाँच बड़े बदलाव

बदलाव 1 — 1989 में कांग्रेस की हार

  • 1984 में 415 सीटें → 1989 में महज 197 सीटें
  • 1991 में मध्यावधि चुनाव; कांग्रेस फिर सत्ता में
  • ★1989 में ही ‘कांग्रेस प्रणाली’ की समाप्ति हो गई
  • कांग्रेस महत्त्वपूर्ण पार्टी बनी रही — पर पहले जैसी प्रमुखता अब न रही

प्रभुत्व खत्म हुआ, पर विकल्प कोई नहीं बना।

बदलाव 2 — ‘मंडल मुद्दे’ का उदय

  • 1990 में राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार ने मंडल आयोग की सिफ़ारिशें लागू कीं
  • प्रावधान — केंद्र सरकार की नौकरियों में ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ को आरक्षण
  • देश के कई भागों में मंडल-विरोधी हिंसक प्रदर्शन
  • समर्थकों और विरोधियों के विवाद को ही ‘मंडल मुद्दा’ कहा जाता है

इसने 1989 के बाद की राजनीति में अहम भूमिका निभाई।

बदलाव 3 — नयी आर्थिक नीति

  • ढाँचागत समायोजन कार्यक्रम अथवा नए आर्थिक सुधार
  • शुरुआत राजीव गाँधी की सरकार के समय; 1991 तक बड़े पैमाने पर
  • आज़ादी के बाद की दिशा मूलगामी अर्थों में बदल गई
  • विभिन्न आंदोलनों और संगठनों की तरफ़ से भरपूर आलोचना हुई

और फिर भी एक बात नहीं बदली।

बहरहाल इस अवधि में जितनी सरकारें बनीं, सबने नयी आर्थिक नीति पर अमल जारी रखा।

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 138 — ‘बढ़ती सहमति’ की पहली जड़

बदलाव 4 — अयोध्या का विवाद

  • अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर पर शताब्दियों से चला आ रहा विधिक एवं राजनीतिक विवाद
  • इसने भारत की राजनीति को प्रभावित करना आरम्भ किया
  • राम जन्मभूमि आंदोलन के केन्द्रीय विषय बनने से धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के विमर्श की दिशा बदल गई
  • ★इन परिवर्तनों की परिणति 9 नवम्बर 2019 के निर्णय के उपरांत राम मन्दिर निर्माण के रूप में हुई

पाठ्यपुस्तक इस विवाद को उसके समाधान तक ले जाती है।

बदलाव 5 — राजीव गाँधी की हत्या

  • मई 1991 — चुनाव अभियान के सिलसिले में तमिलनाडु के दौरे पर थे
  • लिट्टे से जुड़े श्रीलंकाई तमिलों ने उनकी हत्या कर दी
  • 1991 के चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी विजयी पार्टी
  • कांग्रेस ने नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री चुना

पाँचों बदलाव मिलकर एक नया दौर बनाते हैं।

2 | गठबंधन का युग | 1989 का अंकगणित

1989 — एक विचित्र स्थिति

  • कांग्रेस हारी — पर किसी दूसरी पार्टी को बहुमत भी नहीं मिला
  • ★कांग्रेस अब भी सबसे बड़ी पार्टी थी, फिर भी उसने विपक्ष में बैठने का फ़ैसला किया
  • राष्ट्रीय मोर्चा = जनता दल + कुछ अन्य क्षेत्रीय दल
  • इसे समर्थन दिया परस्पर विरुद्ध दो समूहों ने — भाजपा और वाम मोर्चा

और दोनों में से कोई सरकार में शामिल नहीं हुआ।

‘बाहर से समर्थन’ का जन्म

  • भाजपा और वाम मोर्चा — दोनों ने कहा, “हम सरकार को बाहर से समर्थन देंगे”
  • सत्ता में हिस्सेदारी नहीं, पर सरकार टिकाने की ज़िम्मेदारी
  • यही आगे के दो दशकों की मुख्य कार्य-पद्धति बनी
  • ! और यही सरकारों की सबसे बड़ी कमज़ोरी भी

सुधीर तैलंग का कार्टून इसी को पकड़ता है।

1989 बनाम 1996 — समीकरण कितने ‘छुईमुई’

19891996
सरकारराष्ट्रीय मोर्चासंयुक्त मोर्चा
समर्थनभाजपा + वाम मोर्चाकांग्रेस + वाम मोर्चा
उद्देश्यकांग्रेस को बाहर रखनाभाजपा को बाहर रखना

इससे पता चलता है कि राजनीतिक समीकरण किस कदर छुईमुई थे।

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 141

भाजपा का उभार और राजग

  • 1991 तथा 1996 के चुनावों में स्थिति लगातार मज़बूत
  • 1996 में सबसे बड़ी पार्टी; सरकार बनाने का न्यौता मिला
  • ! पर अधिकांश दल नीतियों के खिलाफ़ थे — बहुमत हासिल नहीं हुआ
  • आखिरकार बना राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)

1998 और 1999 — दोनों बार वाजपेयी प्रधानमंत्री।

11 सरकारें

1989 के बाद केंद्र में 11 सरकारें बनीं — सभी या तो गठबंधन की थीं, या दूसरे दलों के समर्थन पर टिकी अल्पमत सरकारें

1989 के बाद से लोकसभा के चुनावों में कभी भी किसी एक पार्टी को 2014 तक पूर्ण बहुमत नहीं मिला। यद्यपि, पुनः 2014 तथा 2019 के लोकसभा चुनावों में भा.ज.पा. दल को अकेले बहुमत प्राप्त हुआ है।

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 141 — अध्याय की धुरी

केंद्रीय सरकार 1989 के बाद — भाग 1

अवधिगठबंधनप्रधानमंत्री
दिस. 1989 – नव. 1990राष्ट्रीय मोर्चा; वाम + भाजपा का समर्थनवी.पी. सिंह
नव. 1990 – जून 1991समाजवादी जनता पार्टी; कांग्रेस का समर्थनचंद्रशेखर
जून 1991 – मई 1996कांग्रेस; AIADMK आदि का समर्थननरसिम्हा राव
मई 1996 – जून 1996भाजपा — अल्पमत सरकारवाजपेयी
जून 1996 – अप्रैल 1997संयुक्त मोर्चा; कांग्रेस का समर्थनदेवगौड़ा

केंद्रीय सरकार 1989 के बाद — भाग 2

अवधिगठबंधनप्रधानमंत्री
अप्रैल 1997 – मार्च 1998संयुक्त मोर्चा; कांग्रेस का समर्थनइंद्रकुमार गुजराल
मार्च 1998 – अक्तू. 1999भाजपा-नीत राजगवाजपेयी
अक्तू. 1999 – मई 2004भाजपा-नीत राजगवाजपेयी
मई 2004 – मई 2014कांग्रेस-नीत संप्रगमनमोहन सिंह
मई 2014 के बादभाजपा-नीत राजगनरेंद्र मोदी

3 | अन्य पिछड़ा वर्ग | मंडल और उसके बाद

‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ क्या है?

  • OBC = ‘अदर बैकवर्ड क्लासेज़’ — विचार-विवेचन की एक प्रशासनिक कोटि
  • ★यह अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति से अलग एक कोटि है
  • इसमें शैक्षणिक और सामाजिक रूप से पिछड़े समुदायों की गणना होती है
  • इन्हें ‘पिछड़ा वर्ग’ भी कहा जाता है

SC/ST और OBC को कभी मत मिलाइए — यह भेद परीक्षा में पूछा जाता है।

मंडल आयोग — पृष्ठभूमि

  • दक्षिण के राज्यों में कम-से-कम 1960 के दशक से OBC आरक्षण चला आ रहा था
  • ! यह नीति उत्तर भारत के राज्यों में लागू नहीं थी
  • 1977–79 की जनता पार्टी सरकार के समय उत्तर भारत में आवाज़ उठी
  • ★बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर इस दिशा में अग्रणी थे

उनकी सरकार ने बिहार में OBC आरक्षण की नयी नीति लागू की।

आयोग का गठन

  • केंद्र सरकार ने 1978 में आयोग बैठाया
  • ज़िम्मा — पिछड़ा वर्ग की स्थिति सुधारने के उपाय बताना
  • ★आज़ादी के बाद यह दूसरा अवसर था — इसलिए नाम ‘दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग’
  • अध्यक्ष बिन्देश्वरी प्रसाद मंडल के नाम पर ‘मंडल कमीशन’

और अब आयोग की सिफ़ारिशें।

बी.पी. मंडल (1918–1982)

  • 1967–1970 तथा 1977–1979 में बिहार से सांसद
  • दूसरा पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष
  • बिहार के समाजवादी नेता
  • ★1968 में डेढ़ माह तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे; 1977 में जनता पार्टी में शामिल

उनके नाम का डाक-टिकट भी जारी हुआ।

आयोग की सिफ़ारिशें

  • आयोग ने 1980 में सिफ़ारिशें पेश कीं — तब तक जनता पार्टी की सरकार गिर चुकी थी
  • मशविरा — पिछड़ा वर्ग को ‘पिछड़ी जाति’ के अर्थ में स्वीकार किया जाए
  • सर्वेक्षण में मिला — इन जातियों की शिक्षा और नौकरियों में बड़ी कम मौजूदगी
  • ★★सिफ़ारिश: शिक्षा संस्थाओं तथा सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत सीट आरक्षित

और एक सिफ़ारिश जो अक्सर भुला दी जाती है।

भूमि-सुधार

मंडल आयोग ने अन्य पिछड़ा वर्ग की स्थिति सुधारने के लिए कई और समाधान सुझाए, जिनमें भूमि-सुधार भी एक था

लागू होना और न्यायालय

  • अगस्त 1990 — राष्ट्रीय मोर्चा की सरकार ने एक सिफ़ारिश लागू की
  • केंद्रीय सरकार और उसके उपक्रमों की नौकरियों में OBC आरक्षण
  • ! उत्तर भारत के कई शहरों में हिंसक विरोध
  • सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती — प्रकरण ‘इंदिरा साहनी केस’ के नाम से प्रसिद्ध

और नवंबर 1992 में फ़ैसला आया।

1992 के नवंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार के निर्णय को सही ठहराते हुए अपना फ़ैसला सुनाया… बहरहाल अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने के मसले पर देश के सभी बड़े राजनीतिक दलों में सहमति थी।

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 146

4 | दलित राजनीति | बामसेफ से बसपा तक

बामसेफ — एक असाधारण संगठन

  • 1978 में ‘बामसेफ’ का गठन — बैकवर्ड एंड माइनॉरिटीज़ कम्युनिटीज़ एम्पलाइज़ फेडरेशन
  • ! “यह सरकारी कर्मचारियों का कोई साधारण-सा ट्रेड यूनियन नहीं था”
  • इसने ‘बहुजन’ की राजनीतिक सत्ता की ज़बरदस्त तरफ़दारी की
  • ★‘बहुजन’ = अनुसूचित जाति + अनुसूचित जनजाति + अन्य पिछड़ा वर्ग + अल्पसंख्यक

इसका परवर्ती विकास था — दलित-शोषित समाज संघर्ष समिति।

बसपा का उदय

  • दलित-शोषित समाज संघर्ष समिति से बहुजन समाज पार्टी का उदय
  • अगुआई की कांशीराम ने
  • शुरुआती दौर में छोटी पार्टी — पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के दलित मतदाताओं का समर्थन
  • ★1989 और 1991 के चुनावों में उत्तर प्रदेश में सफलता

और यह भारतीय राजनीति में पहली बार था।

पहला मौका

आज़ाद भारत में यह पहला मौका था, जब कोई राजनीतिक दल मुख्यतया दलित मतदाताओं के समर्थन के बूते ऐसी राजनीतिक सफलता हासिल कर पाया था

बसपा का तर्क

  • संगठन की बुनियाद व्यवहार केंद्रित नीतियों पर रखी गई
  • तर्क — बहुजन देश की आबादी में सबसे ज्यादा हैं
  • इसलिए वे संख्या के लिहाज़ से एक मजबूत राजनीतिक ताकत बन सकते हैं
  • बसपा उत्तर प्रदेश में बड़ी ताकत बनी और एक से ज्यादा दफे सरकार बनायी

अब यह समाज के अन्य वर्गों में भी जनाधार बढ़ा रही है।

कांशीराम (1934–2006)

  • बहुजन समाज के सशक्तीकरण के प्रतिपादक; बसपा के संस्थापक
  • सामाजिक और राजनीतिक कार्य के लिए केंद्र सरकार की नौकरी से इस्तीफ़ा
  • बामसेफ → डीएस-4 → 1984 में बसपा की स्थापना
  • ★“आप राजनीतिक सत्ता को सामाजिक समानता का आधार मानते थे”

उत्तर भारत के राज्यों में दलित राजनीति के संगठनकर्ता।

पाठ्यपुस्तक का अपना सवाल

  • “क्या इससे पिछड़े और दलित समुदायों के सभी नेताओं को लाभ होगा…”
  • ”…या इन समूहों के भीतर मौजूद कुछ ताकतवर जातियाँ और परिवार ही सारे फ़ायदे अपनी मुट्ठी में कर लेंगे?”
  • और दूसरा — “असल मुद्दा नेताओं का नहीं, जनता का है!”
  • “क्या सचमुच के वंचितों के लिए बेहतर नीतियाँ बनेंगी या यह एक राजनीतिक खेल मात्र बनकर रह जाएगा?”

पाठ्यपुस्तक खुद यह सवाल खुला छोड़ती है।

5 | सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता | भाजपा, शाहबानो और अयोध्या

भाजपा का उदय

  • आपातकाल के बाद भारतीय जनसंघ का जनता पार्टी में विलय
  • जनता पार्टी के बिखराव के बाद पूर्ववर्ती जनसंघ के समर्थकों ने 1980 में भाजपा बनाई
  • विचारधारा — गांधीवादी समाजवाद के साथ-साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
  • ! 1984 के चुनावों में भाजपा को बहुत सफलता नहीं मिली

1986 के बाद उसने राष्ट्रवाद पर बल देना शुरू किया।

हिन्दुत्व को विनायक दामोदर सावरकर ने भारतीय राष्ट्रीयता के आधार के रूप में लोकप्रिय किया था। इसका मूल आशय यह था कि एक भारतीय होने के लिए आवश्यक है कि वह भारतभूमि को अपनी ‘पितृभूमि’ और साथ ही ‘पुण्यभूमि’ भी स्वीकार करे।

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 148

शाहबानो वाद, 1985

  • एक 62 वर्षीय तलाकशुदा मुस्लिम महिला ने भूतपूर्व पति से गुजारा भत्ता के लिए वाद किया
  • सर्वोच्च न्यायालय ने शाहबानो के पक्ष में निर्णय दिया
  • पुरातन पंथी मुसलमानों ने इसे ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ’ में हस्तक्षेप माना
  • सरकार ने मुस्लिम महिला (तलाक से जुड़े अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 पारित किया

इस अधिनियम ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को निरस्त कर दिया।

दोनों पक्ष — पाठ्यपुस्तक के शब्दों में

  • ★“सरकार के इस कार्य का अनेक महिला संगठनों, अनेक मुस्लिम समूहों तथा अधिकांश बुद्धिजीवियों ने विरोध किया”
  • भाजपा ने कांग्रेस सरकार के इस कार्य की आलोचना की
  • उसने इसे “अल्पसंख्यक समुदाय को दी गयी अनावश्यक छूट और उसका तुष्टिकरण” बताया
  • ! यह विवाद पर्सनल लॉ बनाम लैंगिक न्याय की बहस का केंद्र बन गया

यह प्रश्न 2 के मिलान में सीधे आता है।

अयोध्या — विवाद की जड़ें

  • यह विवाद श्री राम के जन्मस्थान के स्वामित्व से संबंधित था
  • ★1528 से प्रारम्भ होकर 500 वर्ष के इतिहास में अनेक संघर्ष दर्ज हैं
  • ये संघर्ष लखनऊ, बाराबंकी और फैजाबाद के गजेटियर में अंकित हैं
  • 1528 में जन्मस्थान पर तीन-गुम्बद ढाँचा निर्मित किया गया

ढाँचे के भीतर और बाहर हिन्दू प्रतीक और अवशेष प्रत्यक्ष दिखते थे।

  1. 1528तीन-गुम्बद ढाँचे का निर्माण; संघर्षों की शुरुआत
  2. 1858★28 नवंबर — निहंग सिखों ने स्थल पर नियंत्रण कर पूजन और हवन किया
  3. 1949! न्यायिक प्रक्रिया प्रारम्भ होने के कारण ढाँचा सील कर दिया गया
  4. 1986फैजाबाद (अब अयोध्या) जिला न्यायालय — ताला खुला, पूजा की अनुमति
  5. 1992! ढाँचे का ध्वंस
  6. 2019★★9 नवम्बर — उच्चतम न्यायालय की संवैधानिक पीठ का 5–0 निर्णय

विधिक कार्यवाही से मैत्रीपूर्ण स्वीकृति

  • “किसी भी समाज में विवाद होते ही हैं”
  • ★“एक बहु-धार्मिक और बहु-सांस्कृतिक लोकतांत्रिक समाज में इन विवादों का हल सामान्यतः विधि की उचित प्रक्रिया से होता है”
  • रास्ते थे — न्यायालय में सुनवाईयां, मध्यस्थता के प्रयास तथा जन आन्दोलन
  • 9 नवम्बर 2019 के 5–0 निर्णय से विवाद का समाधान हुआ

निर्णय ने विरोधाभासी हितों का सामंजस्यपूर्ण समाधान किया।

निर्णय के दो आदेश

  • विवादित स्थल — श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को राम मन्दिर निर्माण के लिए आवंटित
  • मस्जिद — संबंधित सरकार को आदेश कि सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड को उपयुक्त भूमि आवंटित करे
  • आधार — पुरातात्विक उत्खनन और ऐतिहासिक अभिलेख जैसे साक्ष्य
  • ★“समाज में व्यापक रूप से सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को उत्सवपूर्वक लिया गया”

पाठ्यपुस्तक इसे लोकतांत्रिक परिपक्वता का उदाहरण बताती है।

संविधान एक धर्म और दूसरे धर्म की आस्था और विश्वास के बीच अंतर नहीं करता है। सभी प्रकार के विश्वास, पूजा और प्रार्थना समान हैं…

उच्चतम न्यायालय, 9 नवंबर 2019 — निर्णय का पृष्ठ 920

6 | आँकड़े बोलते हैं | तीन आरेख

आरेख 1 — सीटें : कांग्रेस और भाजपा

वर्षभाजपाकांग्रेस
19842415
198985197
1991120232
1996160140
1998182141

आरेख 1 — सीटें(जारी)

वर्षभाजपाकांग्रेस
1999182114
2004138145
2009116206
201428244
201930352

2 से 303

1984 में भाजपा को 2 सीटें और कांग्रेस को 415 — 2019 में भाजपा को 303 और कांग्रेस को 52

आरेख 2 — वोट में हिस्सा (%)

वर्षकांग्रेसभाजपा
198448.17.4
198939.511.4
199136.420.1
199628.820.3
199928.323.8

आरेख 2 — वोट में हिस्सा(जारी)

वर्षकांग्रेसभाजपा
200426.522.2
200928.618.8
201419.531.3
201919.537.4

1998 — वह वर्ष जब दोनों रेखाएँ मिलीं

  • आरेख में 1998 पर दोनों रेखाएँ लगभग मिल जाती हैं
  • वहाँ केवल एक अंक छपा है — 25.6, जो भाजपा की रेखा का शिखर है
  • यानी उस वर्ष दोनों दलों का वोट-हिस्सा लगभग बराबर था
  • ★यही वह बिंदु है जहाँ एक-दल प्रभुत्व की जगह द्वि-ध्रुवीय मुकाबला आ गया

सीटों से पहले वोट बदलते हैं — यह आरेख यही सिखाता है।

आप देखेंगे कि 1989 के चुनाव के बाद से, 1996, 2004 और 2009 को छोड़कर ज्यादातर समय दोनों पार्टियों कांग्रेस और भाजपा को मिले वोटों का योग 50 फीसदी से ज्यादा रहा है।

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 151

7 | 2004 से 2019 | संप्रग से राजग तक

संप्रग का दौर

  • 2004 — कांग्रेस भी पूरे ज़ोर के साथ गठबंधन में शामिल हुई; राजग की हार
  • संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार; वाम मोर्चा ने समर्थन दिया
  • ! 2004 में राजग और संप्रग को मिले कुल वोटों का अंतर बड़ा कम था
  • जुलाई 2008 — परमाणु समझौते पर वाम दलों ने समर्थन वापस लिया

फिर भी संप्रग सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया।

2009 और 2014

  • 2009 — 15वीं लोकसभा; कांग्रेस की सीटें 145 से बढ़कर 206
  • मनमोहन सिंह ने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली
  • सितंबर 2013 — भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया
  • 2014 — 16वीं लोकसभा; भाजपा को अपने दम पर 282 सीटें

तीस साल बाद एकल बहुमत।

30 साल बाद

भाजपा 30 साल बाद एकल पार्टी बहुमत हासिल करने वाली पहली पार्टी बन गई — और फिर भी उसने राजग सरकार बनाने का विकल्प चुना

2019 और उसका सबक

  • 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा फिर से 303 सीटों के साथ विजयी
  • 17वीं लोकसभा में भाजपा का हिस्सा 56%
  • ★“जब भाजपा को पूर्ण बहुमत मिल रहा है तब भी गठबंधन की राजनीति की मान्यता अभी भी प्रासंगिक है”
  • “इस तरह दलीय प्रणाली सत्तर के दशक की तुलना में एकदम ही बदल गई है”

बहुमत मिलने पर भी गठबंधन क्यों? यही अध्याय का सबसे गहरा सवाल है।

17वीं लोकसभा में दलों की स्थिति

दलसीटेंहिस्सा
भारतीय जनता पार्टी30356%
इंडियन नेशनल कांग्रेस5210%
द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम244%
शिवसेना183%
जनता दल यूनाईटेड163%
बीजू जनता दल122%
बहुजन समाज पार्टी102%
अन्य पार्टियाँ10820%

8 | बढ़ती सहमति | चार बातें

सहमति 1 — नयी आर्थिक नीति

  • कई समूह नयी आर्थिक नीति के खिलाफ़ हैं
  • लेकिन ज्यादातर राजनीतिक दल इन नीतियों के पक्ष में हैं
  • मान्यता — नई आर्थिक नीतियों से देश समृद्ध होगा
  • और यह भी कि भारत विश्व की एक आर्थिक शक्ति बनेगा

इसीलिए सरकारें बदलीं, पर नीति नहीं।

सहमति 2 — पिछड़ी जातियों के दावे की स्वीकृति

  • राजनीतिक दलों ने पहचान लिया कि पिछड़ी जातियों के सामाजिक और राजनीतिक दावे को स्वीकार करने की ज़रूरत है
  • ★“आज सभी राजनीतिक दल शिक्षा और रोज़गार में पिछड़ी जातियों के लिए सीटों के आरक्षण के पक्ष में हैं”
  • दल यह सुनिश्चित करने को भी तैयार हैं कि OBC को सत्ता में समुचित हिस्सेदारी मिले
  • ! यानी जो 1990 में हिंसक विवाद था, वह अब साझा नीति है

यह अध्याय का सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव है।

सहमति 3 — प्रांतीय दलों की भूमिका

  • ★“प्रांतीय दल और राष्ट्रीय दल का भेद अब लगातार कम होता जा रहा है”
  • प्रांतीय दल केंद्रीय सरकार में साझीदार बन रहे हैं
  • इन दलों ने पिछले बीस सालों में देश की राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है
  • ! अब कोई भी गठबंधन इनके बिना नहीं बनता

अध्याय 7 का सबक यहाँ पूरा होता है।

सहमति 4 — विचारधारा की जगह कार्यसिद्धि

  • राजनीतिक दल विचारधारागत अंतर की जगह सत्ता में हिस्सेदारी पर ज़ोर दे रहे हैं
  • अधिकतर दल भाजपा की ‘हिंदुत्व’ की विचारधारा से सहमत नहीं हैं
  • फिर भी ये दल भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल हुए और सरकार बनाई
  • ★और वह सरकार पाँच साल तक चली

यही प्रश्न 4 का पूरा उत्तर है।

9 | और आगे | पुस्तक का समापन

जन आंदोलनों की नयी भूमिका

  • राजनीतिक दल सहमति के दायरे में सक्रिय हैं
  • जन आंदोलन और संगठन विकास के नए रूप, स्वप्न और तरीकों की पहचान कर रहे हैं
  • मुद्दे — गरीबी, विस्थापन, न्यूनतम मज़दूरी, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा
  • ★ये आंदोलन राज्य को उसकी ज़िम्मेदारियों के प्रति सचेत कर रहे हैं

और लोग जाति, लिंग, वर्ग और क्षेत्र के संदर्भ में न्याय के मुद्दे उठा रहे हैं।

हम विश्वासपूर्वक कह सकते हैं कि भारत में लोकतांत्रिक राजनीति जारी रहेगी और यह राजनीति इस अध्याय में वर्णित कुछ चीज़ों के मंथन के बीच आकार ग्रहण करेगी।

पाठ्यपुस्तक का अंतिम वाक्य, पृष्ठ 154

पुस्तक का अंतिम प्रश्न

  • भारत की आजादी के आसपास कई अन्य देश भी आजाद हुए और लोकतंत्र को अपनाया
  • ★भारत एक परिपक्व लोकतंत्र के रूप में उभरा — सामाजिक समानता और राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देते हुए
  • ! लेकिन उनमें से कुछ देशों में ऐसा नहीं हुआ
  • प्रश्न: उन कारकों पर चर्चा कीजिए जिन्होंने भारत में लोकतंत्र को पनपने में सक्षम बनाया है।

इसी प्रश्न पर पूरी पुस्तक बंद होती है।

जोया हसन — अंतिम चुनौती

  • “कांग्रेस-प्रणाली ने अपना खात्मा ही नहीं किया”
  • “बल्कि कांग्रेस के जमावड़े के बिखर जाने से आत्म-प्रतिनिधित्व की नयी प्रवृत्ति का भी ज़ोर बढ़ा”
  • इससे दलगत व्यवस्था की समाई करने की क्षमता पर सवाल उठे
  • ★काम है — ऐसी दलगत व्यवस्था खड़ी करना जो कारगर तरीके से विभिन्न हितों को मुखर और एकजुट करे

यही आपकी पीढ़ी का काम है।

परीक्षा के लिए छह अनिवार्य

  • ★★पाँचों बदलाव — 1989 की हार, मंडल, आर्थिक सुधार, अयोध्या, राजीव गाँधी की हत्या
  • ★★‘केंद्रीय सरकार 1989 के बाद’ की सारणी
  • ★★मंडल आयोग — 1978, 1980, 27 प्रतिशत, इंदिरा साहनी 1992
  • ★★शाहबानो और 1986 का अधिनियम
  • ★★9 नवम्बर 2019 का 5–0 निर्णय और दोनों आदेश
  • ★★बढ़ती सहमति की चारों बातें

इन छह पर पकड़ हो, तो यह अध्याय आपका है।

जो पढ़ाते हैं, वही लिखते और जाँचते हैं

इसे बनाने वाले

  • भरत चौधरीभरत चौधरीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. जेठान्तरी · ब्लॉक समदड़ी, जिला बालोतरा
  • वनिता कुमारीवनिता कुमारीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. रामसीन मूंगड़ा · ब्लॉक एवं जिला बालोतरा

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