कक्षा XI • इतिहास • विषय 2 — तीन महाद्वीपों में फैला हुआ साम्राज्य
कक्षा — 11 · विषय — इतिहास (विश्व इतिहास के कुछ विषय)
बिना रेल, बिना टेलीफ़ोन के 6 करोड़ लोगों पर शासन कैसे चलता होगा?
0 | साम्राज्यों की दुनिया | सिकंदर से मंगोलों तक; कालक्रम दो
साम्राज्य-निर्माण की लंबी शृंखला
खंड-प्रस्तावना
- छठी शती ई.पू. — ईरानियों का असीरियाई साम्राज्य के अधिकांश भाग पर नियंत्रण
- यूनान में एथेंस और स्पार्टा के नगर-राज्य नागरिक जीवन के केंद्र
- चतुर्थ शती ई.पू. — सिकंदर: उ. अफ़्रीका, प. एशिया, ईरान और भारत में व्यास तक
- सैनिकों ने और आगे जाने से मना कर दिया — सैन्य दल लौट गया
- हेलेनाइज़ेशन — पूरे क्षेत्र का यूनानीकरण; यूनानी जानी-पहचानी भाषा बनी
NCERT की चेतावनी: ‘यूनानी काल’ नाम ईरानी संस्कृति की महत्ता अस्वीकार कर देता है
रोम, अरब और मंगोल
- दूसरी शती ई.पू. से रोम — उ. अफ़्रीका व पूर्वी भूमध्यसागर पर नियंत्रण
- जूलियस सीज़र के अधीन साम्राज्य ब्रिटेन और जर्मनी तक
- चौथी शती — कॉन्स्टैनटाइन के ईसाई बनने से ईसाईकरण; साम्राज्य पूर्व-पश्चिम में विभाजित
- नौवीं शती — पवित्र रोमन साम्राज्य: पुराने रोम से निरंतरता का दावा
- अरब साम्राज्य (दमिश्क-केंद्रित) — पैगम्बर मुहम्मद के अनुयायी/उत्तराधिकारी
- मंगोल — चंगेज़ ख़ान, तेरहवीं शताब्दी: प. एशिया, यूरोप, मध्य एशिया, चीन
मंगोल साम्राज्य प्रमाण है कि पशुचारी लोग भी लंबे समय तक साम्राज्य चला सकते हैं
साम्राज्यों का साझा गणित
वे बनते क्यों हैं, टूटते क्यों हैं
- प्रेरणा: व्यापारिक तंत्र के संसाधनों पर नियंत्रण — भारत-चीन से संबंधों का लाभ
- साधन: प्रशासनिक व्यवस्था + विभिन्न प्रकार के सैन्य संगठन
- उपलब्धियाँ प्रायः उत्तराधिकारियों द्वारा ग्रहण की जाती थीं
- चार महत्त्वपूर्ण भाषाएँ: फ़ारसी, यूनानी, लातिनी, अरबी
- अस्थिरता: संसाधनों पर आपसी लड़ाई + पशुचारी लोगों से बिगड़ते संबंध
- धर्म — बहुभाषी, बहु-नृजातीय लोगों को जोड़ने वाला सूत्र (ईसाई, इस्लाम)
1 | स्रोत और भूगोल | इतिहास कैसे जाना जाता है; दो महाशक्तियाँ
रोम के इतिहास के स्रोत
| वर्ग | उदाहरण |
|---|---|
| पाठ्य सामग्री | वर्ष-वृत्तांत (Annals), पत्र, व्याख्यान, कानून |
| प्रलेख/दस्तावेज़ | पत्थर पर उत्कीर्ण अभिलेख; पैपाइरस पांडुलिपियाँ |
| भौतिक अवशेष | इमारतें, सिक्के, पच्चीकारी, भू-दृश्य (हवाई छायांकन) |
स्रोतों का पाठ कैसे करें
- वर्ष-वृत्तांत — प्रतिवर्ष लिखे जाते थे, इसीलिए यह नाम
- अभिलेख पत्थर पर — इसलिए नष्ट नहीं हुए; यूनानी-लातिनी में बहुतायत
- पैपाइरस — नील-किनारे का सरकंडा-जैसा पौधा; रोज़मर्रा की लेखन-सामग्री
- हज़ारों संविदापत्र, संवादपत्र, सरकारी दस्तावेज़ आज भी सुरक्षित
- इनके अध्येता = पैपाइरोलॉजिस्ट
हर स्रोत एक ही तरह की जानकारी देता है — अंतर्संबंध बनाना इतिहासकार की कुशलता है
दो महाशक्तियाँ — रोम और ईरान
रोम
- भूमध्यसागर = साम्राज्य का हृदय (स्पेन से सीरिया तक)
- उत्तरी सीमा: राइन और डैन्यूब
- दक्षिणी सीमा: सहारा रेगिस्तान
- संस्कृतियों का मिलाजुला रूप
ईरान
- कैस्पियन के दक्षिण से पूर्वी अरब तक
- कभी-कभी अफ़गानिस्तान के हिस्से
- शासन: पार्थियाई, फिर ससानी
- प्रजा अधिकतर ईरानी — अपेक्षाकृत एकरूप
साम्राज्य को जोड़ता क्या था?
- केवल फ़रात के किनारे की संकरी पट्टी दोनों साम्राज्यों को अलग करती थी
- चीनी लोग इस पूरे इलाके को ‘ता-चिन’ कहते थे
- रोम में अनेक भाषाएँ — पर प्रशासन केवल लातिनी और यूनानी में
- पूर्वी उच्च वर्ग यूनानी, पश्चिमी लातिनी बोलते-लिखते थे
- भाषा-सीमा भूमध्यसागर को चीरती — त्रिपोलितानिया / सायरेनाएका के बीच
सब एकमात्र सम्राट की प्रजा थे — कहीं भी रहें, कोई भी भाषा बोलें
2 | आरंभिक काल | प्रिंसिपेट; सैनेट; सेना
प्रिंसिपेट — सत्ता का विनम्र आवरण
27 ई.पू., ऑगस्टस
- गणतंत्र 509–27 ई.पू. — वास्तविक सत्ता सैनेट में, अभिजात वर्ग का बोलबाला
- ऑक्टेवियन (सीज़र का दत्तक पुत्र) ने तख्ता पलटा → ऑगस्टस बना
- वह एकछत्र शासक व सत्ता का वास्तविक स्रोत था
- फिर भी कल्पना जीवित रखी गई कि वह केवल ‘प्रमुख नागरिक’ (प्रिंसेप्स) है
- उद्देश्य: सैनेट को सम्मान देना
गणतंत्र लौटाने का दिखावा — पर सत्ता एक ही हाथ में
सैनेट — और इतिहास किसने लिखा
- कुलीन एवं अभिजात वर्गों — रोम के धनी परिवारों — का प्रतिनिधित्व
- आगे चलकर इतालवी मूल के ज़मींदार भी शामिल
- सदस्यता जीवन-भर; जन्म से अधिक धन और पद-प्रतिष्ठा का महत्त्व
- रोम के इतिहास की अधिकांश पुस्तकें इन्हीं लोगों ने लिखीं
- इसलिए सम्राट की परख = वह सैनेट के साथ कैसा व्यवहार करता है
- ‘सबसे बुरे’ सम्राट = जो सैनेटरों से शत्रुता, शक, क्रूरता रखते थे
स्रोत-पाठ: इतिहास किसने लिखा — यह जानना तथ्य जितना ही ज़रूरी है
रोम की सेना
चौथी शताब्दी तक सैनिकों की संख्या; साम्राज्य का सबसे बड़ा एकल संगठित निकाय — और सम्राटों का भाग्य निर्धारित करने की शक्ति रखने वाला
सेना — वेतनभोगी और संगठित
फ़ारस में बलात् भर्ती, रोम में व्यावसायिक सेना
- प्रत्येक सैनिक को वेतन; न्यूनतम 25 वर्ष सेवा
- वेतनभोगी सेना = रोमन साम्राज्य की ख़ास विशेषता
- बेहतर वेतन-शर्तों हेतु लगातार आंदोलन → कभी-कभी सैनिक विद्रोह
- सैनेट सेना से घृणा करती और डरती थी — अप्रत्याशित हिंसा का स्रोत
- तीसरी शताब्दी में बढ़े सैन्य-खर्च के लिए भारी कर लगाने पड़े
इसीलिए सेना की जो तस्वीर हमें मिलती है वह सैनेट-समर्थक इतिहासकारों की बनाई है
तीन ‘खिलाड़ी’ और उत्तराधिकार
- साम्राज्य के राजनीतिक इतिहास के तीन मुख्य खिलाड़ी: सम्राट, अभिजात वर्ग, सेना
- सम्राट की सफलता = सेना पर नियंत्रण
- सेनाएँ विभाजित → परिणाम प्राय: गृहयुद्ध
- 69 ईस्वी — एक ही वर्ष में चार सम्राट गद्दी पर
- उत्तराधिकार पारिवारिक वंशक्रम पर — नैसर्गिक अथवा दत्तक
- उदाहरण: टिबेरियस (14–37) — ऑगस्टस का दत्तक पुत्र
पहली दो शताब्दियों में (69 को छोड़कर) कोई बड़ा गृहयुद्ध नहीं — अपेक्षाकृत शांति
ट्राजान का भारत-स्वप्न
फ़ारस की खाड़ी के सिरे पर पहुँचकर वह भारत की ओर जाने वाले किसी वाणिज्यिक पोत को लालायित नज़रों से देख रहा था और चाह रहा था कि काश वह सिकंदर जैसा जवान होता।
कैसियस डियो — उद्धृत: फरगस मिल्लर, ‘दि रोमन नीयर ईस्ट’
विस्तार का अंत
- प्रथम दो शताब्दियों में अन्य देशों से युद्ध बहुत कम
- ऑगस्टस-टिबेरियस को मिला साम्राज्य पहले ही लंबा-चौड़ा — और विस्तार अनावश्यक
- ऑगस्टस का शासन ‘शांति’ के लिए याद किया जाता है
- एकमात्र बड़ा अभियान — ट्राजान, 113–17: फ़रात-पार कब्ज़ा
- वह कब्ज़ा निरर्थक रहा — उत्तराधिकारियों ने वे इलाके छोड़ दिए
3 | शहरीकरण | साम्राज्य चलाने का असली रहस्य
आश्रित राज्यों का अंत
प्रत्यक्ष शासन का क्रमिक विस्तार
- आश्रित राज्य: रोम के भरोसेमंद स्थानीय शासक — बदले में अलग अस्तित्व
- दूसरी शताब्दी के प्रारंभ तक फ़रात के पश्चिम के राज्य रोम ने हड़प लिए
- ये राज्य अत्यंत समृद्ध थे
- हेरॉड के राज्य से प्रतिवर्ष 54 लाख दीनारियस की आमदनी
- = लगभग 1,25,000 कि.ग्रा. सोना
दीनारियस = रोम का चाँदी का सिक्का, लगभग 4.5 ग्राम विशुद्ध चाँदी
साम्राज्य की आबादी
दूसरी शताब्दी के मध्य में — स्कॉटलैंड से आर्मेनिया और सहारा से फ़रात तक; आज-जैसी कोई सरकार नहीं थी, फिर भी शासन चला
उत्तर: नगर
- साम्राज्य भर में दूर-दूर तक अनेक नगर स्थापित किए गए
- सबसे बड़े शहरी केंद्र: कार्थेज, सिकंदरिया, ऐंटिऑक
- ये साम्राज्यिक प्रणाली के मूल आधार थे
- इन्हीं शहरों के माध्यम से ‘सरकार’ ग्रामीण क्षेत्रों पर कर लगा पाती थी
- इटली को प्रांत नहीं माना जाता था; शेष सब प्रांतों से कर वसूला जाता
- स्थानीय उच्च वर्ग कर-वसूली व प्रशासन में सक्रिय सहायता देते थे
साम्राज्य दमन से कम, सहयोग से अधिक चलता था — यही अध्याय का केंद्रीय तर्क
सत्ता का प्रांतों की ओर खिसकना
- दूसरी-तीसरी शताब्दी: अधिकतर प्रशासक-सैनिक अफसर प्रांतीय उच्च वर्गों से
- यह नया संभ्रांत वर्ग सैनेटरों से अधिक शक्तिशाली — सम्राटों का समर्थन प्राप्त
- गैलीनस (253–68) ने सैनेटरों को सैनिक कमान से हटा दिया
- 212 ईस्वी — साम्राज्य के सभी मुक्त निवासियों को नागरिकता
- परिणाम: इटली का पतन — राजनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से
- नए संभ्रांत वर्ग उभरे — दक्षिणी स्पेन, अफ़्रीकी और पूर्वी भाग
रोमन नगर किसे कहें?
तीन कसौटियाँ
- अपना दंडनायक (मजिस्ट्रेट)
- अपनी नगर परिषद (सिटी काउंसिल)
- अपना सुनिश्चित राज्य-क्षेत्र — जिसमें कई ग्राम शामिल
- किसी शहर के क्षेत्र में दूसरा शहर नहीं हो सकता था, गाँव लगभग हमेशा
- शाही अनुकम्पा से गाँव को शहर, शहर को गाँव का दर्जा मिल सकता था
शहर में रहने का लाभ: अकाल के दिनों में भी बेहतर सुविधाएँ
डॉक्टर गैलेन — शहर बनाम गाँव
शहर में रहने वालों का फ़सल कटाई के तुरंत बाद पूरे वर्ष का अनाज भंडारों में भर लेना रिवाज था… देहाती लोगों को पेड़ों की टहनियाँ, छालें, जड़ें और पत्ते खाकर अपने प्राण बचाने पड़े।
गैलेन, ‘ऑन गुड एण्ड बैड डाइट’
शहरी जीवन की सुविधाएँ
- सार्वजनिक स्नान-गृह — रोम के शहरी जीवन की ख़ास विशेषता
- ईरान में एक शासक ने ऐसा प्रयत्न किया तो पुरोहित वर्ग का क्रोध झेलना पड़ा
- कारण: जल पवित्र वस्तु; सार्वजनिक स्नान में जल का अपवित्रीकरण
- मनोरंजन: एक कैलेंडर के अनुसार वर्ष में कम से कम 176 दिन प्रदर्शन
- जलसेतु (Aqueducts) — रोम के इंजीनियरों ने तीन महाद्वीपों में पानी पहुँचाया
4 | तीसरी शताब्दी | संकट के पहले बड़े संकेत
चारों ओर से घिरा साम्राज्य
230 के दशक से
- 225 ईस्वी — ईरान में आक्रामक ससानी वंश का उदय; 15 वर्षों में फ़रात तक
- शापुर प्रथम का त्रिभाषी शिलालेख: 60,000 रोमन सेना का सफ़ाया
- और रोम की पूर्वी राजधानी ऐंटिऑक पर कब्ज़ा
- जर्मन जनजातियाँ — एलमन्नाइ, फ्रैंक, गोथ — राइन-डैन्यूब की ओर बढ़ीं
- 233 से 280 तक काला सागर से आल्पस-दक्षिणी जर्मनी तक बार-बार आक्रमण
- रोम को डैन्यूब से आगे का बहुत सारा क्षेत्र छोड़ना पड़ा
रोमवासी इन लोगों को ‘विदेशी बर्बर’ कहते थे — यह उनका पक्षपाती शब्द था
सत्ता की अस्थिरता
तीसरी शताब्दी में थोड़े-थोड़े अंतर से इतने सम्राट सत्तासीन हुए — इस अवधि के बेहद तनाव का स्पष्ट सूचक
5 | लिंग, साक्षरता, संस्कृति | रोमन समाज भीतर से
एकल परिवार और स्त्री-संपत्ति
रोमन समाज की अपेक्षाकृत आधुनिक विशेषता
- एकल परिवार का व्यापक चलन; वयस्क पुत्र पिता के साथ नहीं रहते
- पर दास परिवार में सम्मिलित माने जाते थे
- पत्नी अपनी संपत्ति पति को हस्तांतरित नहीं करती थी
- दहेज वैवाहिक अवधि में पति के पास; पर स्त्री पिता की मुख्य उत्तराधिकारी
- पिता की मृत्यु पर वह संपत्ति की स्वतंत्र मालिक
- कानून की दृष्टि से पति-पत्नी = दो अलग-अलग वित्तीय हस्तियाँ
तलाक आसान — केवल विवाह-भंग के इरादे की सूचना देना पर्याप्त था
कानून बनाम सामाजिक यथार्थ
- विवाह-आयु: पुरुष 28–32, लड़कियाँ 16–23 → बड़ा आयु-अंतराल
- विवाह आम तौर पर परिवार द्वारा नियोजित
- महिलाओं पर पति अक्सर हावी रहते थे
- बिशप ऑगस्टीन ने लिखा — उनकी माता की नियमित पिटाई होती थी
- उस छोटे नगर की अधिकतर पत्नियाँ शरीर पर खरोंचें दिखाती रहती थीं
- पिता को अवांछित शिशु को मार डालने तक का कानूनी अधिकार
सुदृढ़ कानूनी स्थिति और कठोर पितृसत्ता — दोनों साथ-साथ मौजूद थे
साक्षरता के दो चेहरे
पोम्पेई (79 ईस्वी)
- ज्वालामुखी से दफ़न नगर
- मुख्य गलियों की दीवारों पर विज्ञापन
- समूचे शहर में अभिरेखण (Graffiti)
- व्यापक कामचलाऊ साक्षरता का ठोस प्रमाण
मिस्र (पैपाइरस)
- संविदा-पत्र व्यावसायिक लिपिकों द्वारा
- दर्ज: “अमुक व्यक्ति पढ़ या लिख नहीं सकता”
- साक्षरता कुछ वर्गों में अधिक
- सैनिक, फ़ौजी अफ़सर, सम्पदा-प्रबंधक
सांस्कृतिक विविधता
- धार्मिक सम्प्रदायों तथा स्थानीय देवी-देवताओं की भरपूर विविधता
- वेशभूषा की शैलियाँ, तरह-तरह के भोजन, बस्तियों के अनेक रूप
- अरामाइक — निकटवर्ती पूर्व; कॉप्टिक — मिस्र
- प्यूनिक व बरबर — उत्तरी अफ़्रीका; कैल्टिक — स्पेन और उत्तर-पश्चिम
- बहुत-सी भाषाई संस्कृतियाँ पूर्णतः मौखिक थीं
- अर्मिनियाई लेखन पाँचवीं शताब्दी में; कॉप्टिक बाइबिल तीसरी शताब्दी तक
लातिनी के प्रसार ने कैल्टिक का लिखित रूप विस्थापित कर दिया
6 | आर्थिक विस्तार | ठीकरों से लिखा गया इतिहास
साम्राज्य की आर्थिक रीढ़
- बंदरगाह, खानें, खदानें, ईंट-भट्टे, जैतून-तेल की फैक्टरियाँ
- मुख्य व्यापारिक मदें: गेहूँ, अंगूरी शराब, जैतून का तेल
- स्रोत: स्पेन, गैलिक प्रांत, उत्तरी अफ़्रीका, मिस्र — इटली से कम मात्रा में
- तरल पदार्थों की ढुलाई एम्फ़ोरा नामक मटकों में
- रोम के मॉंटी टेस्टैकियो स्थल पर 5 करोड़ से अधिक मटकों के अवशेष
जासूसी का पुरातत्त्व
स्पेनी जैतून-तेल का कंटेनर — नाम पुरातत्त्वविद हेनरिक ड्रेसल पर; टुकड़ों को जोड़कर और मिट्टी का मिलान करके निर्माण-स्थल तक पहुँचा जा सकता है
बाज़ार की प्रतिस्पर्धा — साक्ष्य से
- स्पेन में जैतून-तेल का उद्यम 140–160 ईस्वी में चरमोत्कर्ष पर
- ड्रेसल-20 के अवशेष भूमध्यसागर के अनेक स्थलों पर मिले
- निष्कर्ष: स्पेनी उत्पादकों ने इतालवी प्रतिद्वंद्वियों से बाज़ार छीना
- कैसे? कम कीमत पर बेहतर गुणवत्ता वाला तेल बेचकर
- फिर उत्तरी अफ़्रीका का बोलबाला — तीसरी-चौथी शताब्दियों में
- 425 के बाद: एजियन, तुर्की, सीरिया, फ़िलिस्तीन प्रमुख निर्यातक
समृद्धि वस्तुओं की गुणवत्ता और उत्पादन-परिवहन क्षमता के अनुसार घटती-बढ़ती रही
उर्वर प्रदेश और उनकी पहचान
| प्रदेश | प्रसिद्धि |
|---|---|
| कैम्पैनिया (इटली) | सबसे बढ़िया अंगूरी शराब |
| सिसिली व बाइज़ैकियम | रोम को गेहूँ का निर्यात |
| गैलिली | गहन खेती — “एक-एक इंच पर खेती” (जोसिफ़स) |
| बाएटिका (द. स्पेन) | गुआडलक्विविर किनारे की जैतून-ज़मींदारियाँ |
| फ़य्यूम (मिस्र) | असाधारण उर्वरता |
साम्राज्य की असमानताएँ
सब जगह समृद्धि नहीं थी
- नुमीडिया (आधुनिक अल्जीरिया) के देहात में ऋतु-प्रवास व्यापक
- चरवाहे अवन-आकार की झोंपड़ियाँ (मैपालिया) उठाए घूमते रहते
- रोमन जागीरों के विस्तार से चरागाह घटे, आवाजाही नियंत्रित हुई
- स्पेन का उत्तर बहुत कम विकसित — कैल्टिक-भाषी किसान
- वे पहाड़ियों की चोटियों पर बसे गाँवों — कैस्टेला — में रहते थे
रोम के बारे में सोचते समय इन असमानताओं को कभी न भूलें
‘प्राचीन’ का अर्थ ‘पिछड़ा’ नहीं
- भूमध्यसागर के आसपास पानी की शक्ति का तरह-तरह से इस्तेमाल
- जल-शक्ति से मिलें चलाने की प्रौद्योगिकी में ख़ासी प्रगति
- स्पेन की सोने-चाँदी की खानों में जल-शक्ति से खुदाई
- पहली-दूसरी शताब्दियों में बड़े औद्योगिक पैमाने पर खनिज-निष्कर्षण
- उत्पादकता इतनी ऊँची कि उन्नीसवीं शताब्दी तक वैसे स्तर नहीं मिलते
- सुगठित वाणिज्यिक और बैंकिंग व्यवस्था; धन का व्यापक प्रयोग
लगभग 1700 वर्ष तक कोई उस उत्पादन-स्तर तक नहीं पहुँचा
7 | श्रमिकों पर नियंत्रण | दास, मज़दूर और निरीक्षण
दासता का यथार्थ
- दासता की जड़ें भूमध्यसागर और पश्चिमी एशिया में बहुत गहरी
- चौथी शताब्दी में ईसाई राज्य-धर्म बनने पर भी कोई गंभीर चुनौती नहीं
- पर इसका अर्थ यह नहीं कि अधिकांश श्रम दासों का था
- गणतंत्रीय इटली में: कुल 75 लाख की आबादी में 30 लाख दास
- समग्र साम्राज्य में ऐसी स्थिति नहीं थी
दासों को पूँजी-निवेश की दृष्टि से देखा जाता था — भावना से नहीं, हिसाब से
दास से वेतनभोगी मज़दूर तक
- पहली शताब्दी की शांति → लड़ाइयाँ कम → दासों की आपूर्ति में कमी
- विकल्प: दास प्रजनन अथवा वेतनभोगी मज़दूर
- वेतनभोगी सस्ते — आसानी से रखे और छोड़े जा सकते थे
- गुलाम को वर्ष भर खिलाना पड़ता था → लागत बढ़ती
- इसलिए रोम के सरकारी निर्माण-कार्यों में मुक्त श्रमिकों का व्यापक प्रयोग
- दास व मुक्त-दास अक्सर व्यापार-प्रबंधक बनाए जाते; पूरा कारोबार तक सौंपा जाता
निरीक्षण का शास्त्र
रोमन कृषि-लेखकों की सलाह
- कोलूमेल्ला: ज़रूरत से दुगुने औज़ारों का भंडार रखो
- क्योंकि “दास संबंधी श्रम-समय की हानि ऐसी मदों की लागत से अधिक बैठती है”
- आम धारणा: निरीक्षण के बिना कोई काम ठीक से नहीं होता
- इसलिए कामगारों के दस-दस के छोटे दल — कौन काम कर रहा, कौन कामचोरी
- प्लिनी वरिष्ठ ने जंजीर-बद्ध दास-समूहों की निंदा की — सबसे खराब तरीका
आज विश्व की अधिकांश फैक्ट्रियाँ श्रम-नियंत्रण के कुछ ऐसे ही सिद्धांत लागू करती हैं
सिकंदरिया की फ्रैंकिन्सेंस फैक्टरी
कामगारों के ऐप्रनों पर एक सील लगा दी जाती है, उन्हें अपने सिर पर एक गहरी जाली वाला मास्क पहनना पड़ता है, और उन्हें फैक्ट्री से बाहर जाने के लिए अपने सभी कपड़े उतारने पड़ते हैं।
वरिष्ठ प्लिनी — सुगंधित राल की फैक्टरियों का वर्णन
दबाव और प्रतिरोध
- तीसरी शताब्दी: मिस्र के किसान गाँव छोड़ रहे थे — खेती के काम से बचने को
- 398 का कानून: कामगारों को दागा जाता था ताकि भागने पर पहचाने जा सकें
- निजी मालिक ऋण-संविदा कर लेते — कर्मचारी ‘कर्ज़दार’ बन जाता
- एक लेखक: “हज़ारों गुलामी का काम स्वीकार करते हैं, हालाँकि वे मुक्त हैं”
- ऑगस्टीन के पत्र: माता-पिता बच्चों को 25 वर्ष के लिए बेच देते थे
- 66 ईस्वी के यहूदी विद्रोह में क्रांतिकारियों ने साहूकारों के ऋणपत्र नष्ट कर डाले
पर यह भी सच है: ऐनेस्टैसियस ने ऊँची मज़दूरी देकर दारा शहर तेज़ी से बनवा लिया
टैसिटस — 400 दासों की फाँसी
पुराने रिवाज के अनुसार आवश्यक था कि एक ही छत के नीचे रहने वाले प्रत्येक दास को फाँसी दे दी जाए। परन्तु बहुत से निर्दोष लोगों को बचाने के लिए भीड़ एकत्र हो गई और दंगे शुरू हो गए।
टैसिटस (55–117) — प्रीफ़ेक्ट पेडेनियस सेकंडस की हत्या के बाद
8 | सामाजिक श्रेणियाँ | सैनेटर से ह्यूमिलिओरिस तक
टैसिटस के सामाजिक समूह
| समूह | पहचान |
|---|---|
| सैनेटर (पैट्रेस) | ‘पिता’; लगभग 1,000 सदस्य, आधे इतालवी |
| अश्वारोही (इक्वाइट्स) | ज़मींदार + जहाज़-मालिक, व्यापारी, बैंकर |
| सम्माननीय वर्ग | महान घरानों के आश्रित (clients) |
| प्लेब्स सोर्डिडा | सर्कस-थिएटर तमाशों के आदी निम्नतर वर्ग |
| दास | सबसे नीचे |
परवर्ती साम्राज्य में समाज
कॉन्स्टैनटाइन के शासन से
- सैनेटर और अश्वारोही एकीकृत होकर एक विस्तृत अभिजात वर्ग बने
- इनके आधे परिवार अफ़्रीकी अथवा पूर्वी मूल के थे
- अत्यधिक धनवान — पर सैनिक संभ्रांत वर्ग से कम शक्तिशाली
- ‘मध्यम’ वर्ग: नौकरशाही और सेना से जुड़े लोग, समृद्ध सौदागर-किसान
- सबसे नीचे ह्यूमिलिओरिस — ‘निम्नतर वर्ग’ का विशाल समूह
- इसमें: जागीर-श्रमिक, खनन-कामगार, प्रवासी कामगार, शिल्पकार, हज़ारों गुलाम
असमानता का पैमाना
रोम के कुलीन परिवारों की वार्षिक आय — इसमें वह उपज शामिल नहीं जो वे सीधे उपभोग कर लेते थे (ओलिंपियोडोरस)
मुद्रा, नौकरशाही और कानून
- चाँदी-आधारित प्रणाली समाप्त — स्पेन की खानों से चाँदी मिलनी बंद
- कॉन्स्टैनटाइन ने सोने पर आधारित नयी प्रणाली स्थापित की
- उच्च-मध्य नौकरशाही को वेतन सोने में → आय ज़मीन में निवेश
- भ्रष्टाचार व्यापक — विशेषकर न्याय-प्रणाली और सैन्य आपूर्तियों में
- सरकार ने रोकने के लिए अनेक कानून बनाए; बुद्धिजीवियों ने खुलकर निंदा की
- चौथी शताब्दी तक रोमन कानून की प्रबल परंपरा — भयंकर सम्राटों पर भी अंकुश
इसी बल पर एम्ब्रोस जैसे बिशप दमनकारी सम्राटों का मुकाबला कर सके
9 | परवर्ती पुराकाल | पुनर्गठन, ईसाईकरण और अंत
डायोक्लीशियन और कॉन्स्टैनटाइन
चौथी से सातवीं शताब्दी
- डायोक्लीशियन (284–305): महत्त्वहीन प्रदेश छोड़कर साम्राज्य छोटा किया
- सीमाओं पर किले; 100 प्रांतों में पुनर्गठन (297)
- असैनिक कार्यों को सैनिक कार्यों से अलग; सेनापतियों को अधिक स्वायत्तता
- कॉन्स्टैनटाइन: 312 में ईसाई धर्म स्वीकार; सॉलिडस — 4.5 ग्राम शुद्ध सोना
- 324 — एकमात्र शासक; नयी राजधानी कुंस्तुनतुनिया (आज इस्तांबुल)
- नयी राजधानी के लिए नयी सैनेट → शासक वर्गों का तेज़ विस्तार
मिस्र का कर
जस्टीनियन के शासनकाल में अकेला मिस्र प्रतिवर्ष इतना (लगभग 35,000 पाउंड सोना) कर देता था — पूर्वी साम्राज्य की समृद्धि का पैमाना
परवर्ती काल की आर्थिक तेज़ी
- मौद्रिक स्थायित्व और बढ़ती जनसंख्या → आर्थिक विकास में तेज़ी
- ग्रामीण उद्योग-धंधों में पर्याप्त पूँजी-निवेश
- नयी प्रौद्योगिकियाँ: तेल की मिलें, शीशे के कारखाने, पेंच की प्रेसें, पानी की मिलें
- पूर्व के देशों से लम्बी दूरी के व्यापार का पुनरुत्थान
- मिस्र के पैपाइरस: समाज अपेक्षाकृत खुशहाल, मुद्रा का व्यापक प्रयोग
पश्चिम एशिया के देहात पाँचवीं-छठी शताब्दियों में आज (बीसवीं) से भी अधिक घने बसे थे
धर्म — एक क्रमिक परिवर्तन
- यूनान-रोम की परंपरागत संस्कृति बहुदेववादी
- जूपिटर, जूनो, मिनर्वा और मार्स तथा यूनानी-पूर्वी देवी-देवता
- साम्राज्य भर में हज़ारों मंदिर, मठ और देवालय
- दूसरा बड़ा धर्म यहूदी — पर वह भी ‘एकाश्म’ यानी विविधता-रहित नहीं था
- ईसाईकरण एक क्रमिक एवं जटिल प्रक्रिया के रूप में हुआ
- बहुदेववाद, विशेषकर पश्चिमी प्रांतों में, तुरंत गायब नहीं हुआ
धार्मिक समुदायों के बीच कठोर सीमाएँ बाद में — शक्तिशाली बिशपों की कोशिशों से बनीं
दो दिशाओं में जाता साम्राज्य
पश्चिम — विखंडन
- गोथ, वैंडल, लोंबार्ड ने बड़े प्रांत लिए
- ‘रोमोत्तर’ राज्य स्थापित
- स्पेन में विसिगोथ (711–20 तक)
- गॉल में फ्रैंक (511–687)
- इटली में लोंबार्ड (568–774)
पूर्व — समृद्धि
- साम्राज्य संयुक्त बना रहा
- जस्टीनियन का वैभव और महत्त्वाकांक्षा
- 533 में अफ़्रीका वैंडलों से मुक्त
- इटली ऑस्ट्रोगोथों से वापस — पर देश तहस-नहस
- 540 के दशक में प्लेग का प्रकोप
अंतिम धक्का
- सातवीं शताब्दी के प्रारंभ में रोम और ईरान की लड़ाई फिर छिड़ गई
- ससानी शासकों ने 614–19 में मिस्र सहित पूर्वी प्रांतों पर कब्ज़ा किया
- बाइज़ेंटियम ने 620 के दशक में उन्हें फिर से जीत लिया
- पर कुछ ही वर्ष बाद दक्षिण-पूर्व से ज़ोरदार अंतिम धक्का लगा
- 642 तक — मुहम्मद की मृत्यु के मुश्किल से 10 वर्ष बाद —
- पूर्वी रोमन और ससानी दोनों राज्यों के बड़े-बड़े भाग अरबों के कब्ज़े में
एक शताब्दी बाद ये जीतें स्पेन, सिंध और मध्य एशिया तक फैल गईं
सम्पूर्ण कालरेखा
- 27 ई.पू.ऑगस्टस — प्रिंसिपेट की स्थापना
- 69 ईस्वीएक ही वर्ष में चार सम्राट
- 79विसूवियस का विस्फोट — पोम्पेई दफ़न
- ~115ट्राजान की विजयें — साम्राज्य का अधिकतम विस्तार
- 212सभी मुक्त निवासियों को रोमन नागरिकता
- 224/225ईरान में ससानी वंश की स्थापना
- 284–305डायोक्लीशियन — 100 प्रांतों में पुनर्गठन
- 312 / 324कॉन्स्टैनटाइन — ईसाई धर्म; कुंस्तुनतुनिया की स्थापना
- 410विसिगोथों ने रोम का विध्वंस किया
- 541–70ब्यूबोनिक प्लेग का प्रकोप
- 622 / 633–42हिजरत; अरब विजयों का पहला चरण
- 711स्पेन पर अरबों का आक्रमण
जब आधा साम्राज्य गिर रहा था, दूसरा आधा और अमीर क्यों हो रहा था?
सार-संक्षेप
- रोम ने दुनिया सेना से जीती, पर उसे नगरों और सहयोगियों से चलाया
- 212 की नागरिकता ने साम्राज्य को प्रांतों का साझा उद्यम बना दिया
- अर्थव्यवस्था समुन्नत थी — पर उसकी नींव में दासता और ऋणबद्धता भी थी
- कानून की परंपरा ने सम्राटों पर भी अंकुश लगाया
- पश्चिम बिखरा, पूर्व चमकता रहा — ‘पतन’ की कहानी इतनी सरल नहीं
अंत रोम का नहीं, प्राचीन विश्व-व्यवस्था का हुआ — अगला अध्याय: इस्लाम और खिलाफ़त

