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कक्षा 11 · इतिहास

मूल निवासियों का विस्थापन · त्वरित पुनरावृत्ति

अध्याय 6

भरत चौधरी और वनिता कुमारी ने बनाया · marushala.com

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अध्याय 6 — मूल निवासियों का विस्थापन · विश्व इतिहास के कुछ विषय · कक्षा XI

कक्षा — 11 · विषय — इतिहास (विश्व इतिहास के कुछ विषय) · पृष्ठ — 124 से 152

जिन देशों को यूरोप ने ‘खोजा’ कहा — क्या वे सचमुच खोजे गए थे?

30,000 साल से वहाँ लोग रह रहे थे। तो ‘खोज’ शब्द किसकी भाषा है?

सभ्यता की दो प्रतियोगी अवधारणाएँ

अगर आप हवा की ताज़गी और पानी के बुलबुलों के मालिक नहीं हैं, तो उसे कोई कैसे ख़रीद सकता है?

मूल निवासियों का प्रश्न — खंड चार का परिचय, पृ. 125

यही प्रश्न पूरे अध्याय का बीज है — ज़मीन ‘संपत्ति’ है या ‘संबंध’?

1 | खंड चार — आधुनिकीकरण की ओर | आधुनिकता के दो स्रोत; औद्योगीकरण के कई रास्ते; उपनिवेशवाद की तीन किस्में; राष्ट्रवाद के दो रूप

आधुनिकीकरण की जड़ें — दो परिवर्तन

पृ. 124

  • औद्योगिक क्रांति — उत्पादन का ढाँचा बदला
  • राजनीतिक क्रांतियाँ — प्रजा को नागरिक में तब्दील कर दिया
  • अमरीकी क्रांति 1776–81
  • फ्रांसीसी क्रांति 1789–94
  • आधुनिक विश्व बनाने वाली घटनाएँ 15वीं शताब्दी के मध्य से शुरू हुईं

प्रजा वह है जिस पर शासन हो; नागरिक वह है जो शासन में हिस्सेदार हो

औद्योगीकरण का कोई एक ‘मॉडल’ नहीं

पृ. 124

ब्रिटेन

  • पहला चरण — कोयला और सूती कपड़ा
  • दूसरा चरण — रेलवे के आविष्कार से
  • दुनिया का पहला औद्योगिक राष्ट्र

रूस

  • औद्योगिक विकास 19वीं सदी के आख़िर में
  • रेलवे और भारी उद्योग पहले ही चरण में
  • राज्य और बैंकों की भूमिका हर देश में भिन्न

“इतिहासकारों ने औद्योगीकरण संबंधी पहले के कुछ विचारों को लेकर प्रश्न उठाए हैं”

औद्योगीकरण की चुकाई गई कीमत

ब्रिटेन का उदाहरण

  • ग़रीब मज़दूरों, ख़ासकर बच्चों की दुर्दशा
  • पर्यावरण का क्षय
  • हैज़ा और तपेदिक की महामारियाँ
  • विषय 7 में जापान — कैडमियम और पारे के ज़हर से औद्योगिक प्रदूषण
  • इसने लोगों को अंधाधुंध औद्योगीकरण के खिलाफ़ जन आंदोलन के लिए जागृत किया

हर देश ने दूसरों से सीखा, पर अंधानुकरण नहीं किया

उपनिवेशवाद की तीन किस्में

पृ. 125 — इस अध्याय की सबसे ज़रूरी तालिका

किस्मस्वरूपउदाहरण
पहलीयूरोपीय गोरे लोग जाकर बस गएअमरीका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड
दूसरीसीधा औपनिवेशिक नियंत्रणभारत
तीसरीबिना सत्ता लिए दखलअंदाज़ी → अर्ध-उपनिवेशचीन

पश्चिमी पूँजीवाद के तीन रूप — व्यापारिक, औद्योगिक, वित्तीय

राष्ट्रवाद के दो रूप

दोनों का आधार — लोक प्रभुसत्ता

नागरिक राष्ट्रवाद

  • भाषा, धर्म, जाति और लिंग से परे
  • समान नागरिकता पर आधारित
  • बराबर अधिकार वाले नागरिकों का समुदाय

जातीय/धार्मिक राष्ट्रवाद

  • भाषा, धर्म या परंपरा के इर्द-गिर्द
  • लोग जातीयता से परिभाषित
  • प्रभुसत्ता चुने हुए समूहों तक सीमित

प्रमुख अपवाद जर्मनी — यह इतिहास 1806 में फ्रांस के कब्ज़े की प्रतिक्रिया से शुरू हुआ

आधुनिकीकरण के दो मॉडल

पृ. 126–127

जापान

  • उपनिवेशी नियंत्रण से आज़ाद रहा
  • 1910 तक प्राथमिक शिक्षा लगभग निःशुल्क व अनिवार्य
  • युद्धोत्तर सफलता “केवल चमत्कार नहीं” थी
  • तनाव — लोकतंत्र/सैन्यवाद, परंपरा/पश्चिमीकरण

चीन

  • किसान विद्रोह, सुधार और क्रांति
  • 1949 में उपनिवेशवाद और राष्ट्रवादियों को उखाड़ फेंका
  • असमानताएँ घटाईं, शिक्षा फैलाई
  • एक-पार्टी ढाँचा → 1960 के दशक के मध्य के बाद असंतोष

“विभिन्न देशों ने आधुनिकता को अलग-अलग तरीके से समझा है”

आख़िर ‘मुख्यधारा’ का मतलब क्या है?

आर्थिक और राजनीतिक शक्ति किस तरह ‘मुख्यधारा की संस्कृति’ के निर्माण को प्रभावित करती है?

2 | मूल निवासी कौन थे | कब और कहाँ से आए; जीवन-शैली; ज़मीन और समय की भिन्न समझ

उत्तरी अमरीका — मानव-निवास की कालरेखा

पृ. 137

  1. 30,000बेरिंग स्ट्रेट केभूमि-सेतु से एशिया से पहला आगमन
  2. 10,000आख़िरी हिमयुग के दौरान दक्षिण की ओर विस्तार
  3. 11,000सबसे पुरानी मानव कृति —एक तीर की नोक
  4. 5,000जलवायु में स्थिरता आई, आबादी बढ़नी शुरू
  5. 1492यूरोपीय आगमन — ‘खोज’ का आख्यान शुरू

ये सब वर्ष आज से पहले के हैं

मूल निवासियों की जीवन-शैली

पृ. 137–138

  • नदी घाटियों के गाँव; मछली और मांस; मकई व सब्ज़ियाँ
  • बाइसन (जंगली भैंसों) की तलाश में लंबी यात्राएँ
  • 17वीं सदी से घुड़सवारी — घोड़े स्पेनी आबादकारों से ख़रीदे
  • “वे उतने ही जानवर मारते, जितने की उन्हें भोजन के लिए ज़रूरत होती थी”
  • बड़े पैमाने की खेती नहीं → राजशाही और साम्राज्य नहीं बना
  • ज़मीन पर ‘मिल्कियत’ की ज़रूरत महसूस नहीं की

ज़मीन पर नियंत्रण कोई मुद्दा नहीं था

संस्कृति — जो लिखी नहीं गई

पृ. 138

  • परंपरा की विशेषता — औपचारिक संबंध और उपहारों का आदान-प्रदान
  • वेमपुम बेल्ट — रंगीन सीपियों की पट्टी; समझौते के बाद आदान-प्रदान
  • अनेक भाषाएँ बोली जाती थीं, लिखी नहीं जाती थीं
  • विश्वास — समय की गति चक्रीय है
  • हर कबीले के पास उत्पत्ति और इतिहास के पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते ब्यौरे
  • कुशल कारीगर; ख़ूबसूरत कपड़े बुनते थे

“वे धरती को पढ़ सकते थे” — जैसे पढ़े-लिखे लोग लिखी चीज़ें पढ़ते हैं

अधिशेष हर जगह एक ही समाज नहीं बनाता

मछली, अनाज, बाग़ के पेड़-पौधे, मांस — इनके अधिशेष हमारे यहाँ ताकतवर, श्रेणीबद्ध समाजों की रचना में मददगार बने, लेकिन वहाँ नहीं।

विलियम मैकलिश, अमरीका से पहले का दिन

यही वाक्य अध्याय 1 (मेसोपोटामिया) और अध्याय 6 के बीच का पुल है

‘नयी दुनिया’ के नाम — किसने रखे?

पृ. 136

नामउत्पत्ति
अमरीकाअमेरिगो वेसपुकी (1451–1512) का यात्रा-वृत्तांत
कनाडाह्यूरॉन-इरोक्वइस कनाटा = ‘गाँव’ (1535, ज़ाक कार्टियर)
ऑस्ट्रेलियालातिनी ऑस्ट्रल = ‘दक्षिण’
न्यूज़ीलैंडतासमान 1642; डच ज़ी = ‘समुद्र’

जियोग्राफ़िकल डिक्शनरी में सौ से ज़्यादा ऐसे नाम जो ‘न्यू’ से शुरू होते हैं

यूरोप ने नयी दुनिया को अपनी प्रतिलिपि के रूप में देखा

100+

अमरीका और ऑस्ट्रेलिया में ‘न्यू’ से शुरू होने वाले स्थान-नाम — और केवल ‘कनाडा’ देसी भाषा से आया, वह भी एक ग़लतफ़हमी से

नाम रखना सत्ता का पहला काम है

शब्दों की राजनीति — कौन-सा पद, किसकी भाषा?

पृ. 138

पदअर्थ / टिप्पणी
aborigineलातिन ab = ‘से’ + origine = ‘शुरुआत’
Aboriginalविशेषण — संज्ञा की तरह प्रयोग करना ग़लती
First Nationsकनाडा; 1876 एक्ट में ‘बैंड्स’, 1980 के दशक से ‘नेशन्स’
native Americanअब बहुप्रचलित पद
‘Red Indian’कोलंबस ने निवास-स्थान को ग़लती से इंडिया समझा

मूल निवासियों के नाम चीज़ों को दे दिए गए — डकोटा (हवाईजहाज़), चिरोकी (जीप), पोंटिआक (कार), मोहॉक (बाल-कटाई)

3 | मुलाक़ात और पारस्परिक धारणाएँ | पहली भेंट; ‘सभ्य’ की कसौटी; उपहार बनाम माल

होपी कथा — दो हाथ

वे स्पेनी इनसान के पास गए और हाथ मिलाने की उम्मीद में अपना हाथ बढ़ाया, लेकिन स्पेनी ने उनके हाथ में कोई सस्ती-सी चीज़ पकड़ा दी।

ली ब्राउन की एक वार्ता से, 1986

एक पक्ष संबंध चाहता था, दूसरा लेन-देन — यही पूरे अध्याय का रूपक है

पहली मुलाक़ातें — और शराब

पृ. 139

  • 17वीं सदी में उत्तरी तट पर यूरोपीय व्यापारी — व्यवहार दोस्ताना और गर्मजोशी-भरा
  • दक्षिण के स्पेनियों के विपरीत, ये मछली और रोएँदार खाल के लिए आए
  • यूरोप से आया — कंबल, लोहे के बर्तन, बंदूकें, शराब
  • “वहाँ के बाशिंदों का पहले शराब से परिचय नहीं था” — वे जल्दी आदत के शिकार हुए
  • इसने यूरोपीयों को व्यापार की अपनी शर्तें थोपने में सक्षम बनाया
  • बदले में यूरोपीय लोगों ने तंबाकू की आदत ग्रहण की

वस्तुएँ दोनों ओर से चलीं, पर लाभ एक ओर गया

उपहार बनाम माल — दो अर्थ-व्यवस्थाएँ

पृ. 140

मूल निवासियों के लिए

  • दोस्ती में दिए गए ‘उपहार’
  • ‘बाज़ार’ का ज़रा भी बोध नहीं
  • दामों का घटना-बढ़ना पहेली जैसा
  • ऊदबिलावों का हलाल देख विचलित

यूरोपीयों के लिए

  • मुनाफ़े का ‘माल’
  • दाम पूर्ति के आधार पर साल-दर-साल बदलते
  • लक्ष्य — यूरोप में बेचना
  • लालच जिसे देखकर मूल निवासी दुखी होते

“उन्हें डर था कि जानवर उनसे इस विध्वंस का बदला लेंगे”

‘सभ्य’ मनुष्य की तीन यूरोपीय कसौटियाँ

अठारहवीं सदी का पश्चिमी यूरोप, पृ. 140

  • साक्षरता
  • संगठित धर्म
  • शहरीपन
  • इन कसौटियों पर मूल निवासी स्वतः ‘असभ्य’ सिद्ध हो गए
  • पर ये तीनों यूरोप की अपनी विशेषताओं की सूची थीं

कसौटी बनाने वाला हमेशा पास हो जाता है

एक ही समय, तीन यूरोपीय — और एक जो सचमुच मिला था

पृ. 140

कौनक्या कहामिले थे?
रूसोतारीफ़ के काबिल — ‘उदात्त उत्तम जंगली’नहीं
वड्सवर्थजंगलों में कल्पनाशक्ति के अवसर बहुत कमनहीं
जैफ़र्सन“यह अभागी नस्ल … अपने उन्मूलन का औचित्य सिद्ध करती है”—
इरविंग“कविताओं में वर्णित अपने रूप से काफ़ी भिन्न”हाँ

प्रशंसा और निंदा — दोनों प्रत्यक्ष अनुभव के बिना बनीं

जो सचमुच मिला था, उसने क्या देखा

गोरे लोग ग़रीब इंडियन्स के साथ ऐसे पेश आते हैं (मैं इसका साक्षी हूँ), मानो उनमें और जानवरों में बहुत कम फ़र्क़ हो।

वाशिंगटन इरविंग

‘उदात्त जंगली’ भी उतनी ही रूढ़ि है जितनी ‘असभ्य जंगली’

मूल निवासी भी यूरोपीयों को पढ़ रहे थे

पृ. 140 का किनारा — सबसे कम ध्यान पाने वाला वाक्य

  • उनकी लोककथाओं में यूरोपीय जनों का मज़ाक उड़ाया गया था
  • उनका वर्णन लालची और धूर्त के रूप में किया गया था
  • “लेकिन चूँकि वे काल्पनिक कथाओं की शक्ल में थीं, इसलिए यूरोपीय लोग उनके सही संदर्भ को काफ़ी बाद में जाकर समझ पाए”
  • यानी विश्लेषण मौजूद था — माध्यम लोककथा था, यात्रा-वृत्तांत नहीं

यूरोप ने केवल लिखित को ‘ज्ञान’ माना — इसलिए यह विश्लेषण दर्ज ही नहीं हुआ

4 | बेदख़ली | जंगल की दो नज़रें; फ्रंटियर; 1832 का फ़ैसला; आँसुओं की राह; रिज़र्वेशन्स

एक ही जंगल, दो नज़रें

पृ. 141

मूल निवासी

  • उन रास्तों की पहचान की जो यूरोपीयों के लिए अदृश्य थे
  • ज़रूरत के लिए फ़सलें उगाते, मुनाफ़े के लिए नहीं
  • ज़मीन का ‘मालिक’ बनना ग़लत मानते थे

यूरोपीय

  • कल्पना में कटे जंगल की जगह छोटे खेत उभरते
  • जैफ़र्सन का सपना — छोटे खेतों वाले यूरोपीयों से आबाद देश
  • लोहे के औज़ारों से जंगल की सफ़ाई

“यही चीज़ उन्हें जैफ़र्सन की निगाह में ‘असभ्य’ बनाती थी” — सभ्यता की कसौटी अब निजी संपत्ति है

‘फ्रंटियर’ — एक चलती हुई सीमा

पृ. 142

  • कनाडा और सं.रा.अ. 18वीं सदी के अंत में वजूद में आए
  • मौजूदा क्षेत्रफल का एक छोटा हिस्सा ही तब उनके कब्ज़े में था
  • अगले सौ सालों में — 1803 लुइज़ीआना (फ्रांस), 1819 फ्लोरिडा (स्पेन), 1848 मेक्सिको से, 1867 अलास्का (रूस)
  • “किसी के मन में यह ख़याल नहीं आया कि वहाँ रहने वाले मूल बाशिंदों की भी रज़ामंदी ली जाए”
  • जैसे-जैसे फ्रंटियर खिसकती, मूल निवासी पीछे खिसकने के लिए बाध्य किए जाते

यह देशों के बीच की सीमा नहीं थी — यह ‘सभ्यता’ और ‘जंगल’ के बीच की काल्पनिक रेखा थी

1832 — जब अदालत ने कहा और सरकार ने नहीं माना

जॉर्जिया और चिरोकी, पृ. 144

  1. 1832मुख्य न्यायाधीशजॉन मार्शल — चिरोकी “एक विशिष्ट समुदाय है”, जॉर्जिया का कानून लागू नहीं
  2. —चिरोकी वे थे जिन्होंनेअंग्रेज़ी सीखी और अमरीकी जीवन-शैली समझने की सबसे ज़्यादा कोशिश की
  3. —फिर भी उन्हेंनागरिक अधिकार नहीं दिए गए
  4. —राष्ट्रपतिएंड्रू जैक्सन ने फ़ैसला मानने से इनकार किया
  5. 1838‘आँसुओं की राह’ — फ़ौज ने खदेड़ा

कानून का शासन तब क्या मायने रखता है, जब उसे लागू करने वाला ही उसे न माने?

आँसुओं की राह — ट्रेल ऑफ़ टियर्स

15,000

लोगों को हटने पर मजबूर किया गया — उनमें से एक चौथाई सफ़र में ही मर-खप गए

राष्ट्रपति जैक्सन की छवि “आर्थिक और राजनीतिक पक्षपात के खिलाफ़ लड़ने वाली” थी — “इंडियन्स का मामला आने पर वह बिलकुल उलट गए”

बेदख़ली के चार तर्क

पृ. 144

  • वे ज़मीन का अधिकतम इस्तेमाल करना नहीं जानते
  • वे आलसी हैं — बाज़ार हेतु उत्पादन में शिल्प-कौशल नहीं लगाते
  • अंग्रेज़ी और ‘ढंग के’ कपड़ों में उनकी दिलचस्पी नहीं
  • कुल मिलाकर — “वे ‘मर-खपने’ लायक ही हैं”
  • एक फ्रांसीसी आगंतुक — “आदिम जानवरों के साथ-साथ आदिम मनुष्य लुप्त हो जाएगा”

ये तर्क नहीं, पहले से तय निर्णय का आत्म-औचित्य थे

दो अमरीका, दो नतीजे — क्रियाकलाप 2

पृ. 144

वर्गसं.रा.अ. 1820स्पेनी अमरीका 1800
मूल निवासी6 लाख75 लाख
गोरे90 लाख33 लाख
मिले-जुले यूरोपीय1 लाख53 लाख
काले19 लाख8 लाख
कुल1 करोड़ 16 लाख1 करोड़ 69 लाख

कुल आबादी लगभग बराबर, संरचना बिलकुल उलटी — एक ने शासन किया, दूसरे ने हटाया

रिज़र्वेशन्स — ‘स्थायी’ ज़मीन जो स्थायी नहीं थी

पृ. 144–145

  • मूल निवासी पश्चिम की ओर धकेल दिए गए
  • ‘स्थायी तौर पर अपनी’ ज़मीन — पर सीसा, सोना या तेल मिलते ही बेदख़ली
  • कई समूहों को एक ही ज़मीन साझा करने को बाध्य → आपसी झगड़े
  • रिज़र्वेशन प्रायः ऐसी ज़मीन जिससे उनका पहले कोई रिश्ता नहीं था
  • “ऐसा नहीं है कि अपनी ज़मीनें उन्होंने बिना लड़े छोड़ दी हों” — 1865–90 (सं.रा.अ.), 1869–85 मेटिस (कनाडा)
  • “लेकिन इन लड़ाइयों के बाद उन्होंने हार मान ली”

NCERT दोनों बातें एक साथ कहती है — यही संतुलित इतिहास-लेखन है

प्रधान सिएटल का उत्तर, 1854

धाराओं और नदियों में बहता हुआ चमकीला पानी सिर्फ़ पानी नहीं है, वह हमारे पुरखों का लहू है … पानी की कलकल मेरे पिता के पिता की आवाज़ है।

सिएटल के प्रधान का पत्र, राष्ट्रपति को — पृ. 145

जिस व्यक्ति की ज़मीन छीनी गई, उसी के नाम पर आज उसी ज़मीन पर सिएटल शहर खड़ा है

एक विज्ञान जो लुप्ति की भविष्यवाणी करने जन्मा

पृ. 145 का किनारा

  • 1840 के दशक से उत्तरी अमरीका में ‘मानवशास्त्र’ की शुरुआत (यह विषय फ्रांस में विकसित हुआ था)
  • उद्देश्य — स्थानीय ‘आदिम’ और यूरोप के ‘सभ्य’ समुदायों के अंतर का अध्ययन
  • कुछ मानवशास्त्रियों ने स्थापित किया कि अमरीकी मूल निवासी भी ‘समाप्त हो जाएँगे’
  • वही विचार जो फ्रांसीसी आगंतुक ने आम भाषा में कहा था — अब विज्ञान की भाषा में

बेदख़ली को वैज्ञानिक अनिवार्यता का रूप दे दिया गया

5 | गोल्ड रश से साम्राज्य तक | सोना, रेलवे, उद्योग; भैंसों का अंत; फ्रंटियर का अंत; संवैधानिक अधिकार

1840 से 1892 — पचास साल में एक महाद्वीप

पृ. 145–146

  1. 1840 का दशककैलीफ़ोर्निया में सोने के चिह्न →गोल्ड रश
  2. 1870सं.रा.अ. की पारमहाद्वीपीय रेलवे पूरी —हज़ारों चीनी श्रमिक
  3. 1885कनाडा की रेलवे से पूर्वी और पश्चिमी तटों का जुड़ाव
  4. 1890सं.रा.अ.दुनिया की अग्रणी औद्योगिक शक्ति; जंगली भैंसों का प्रायः उन्मूलन
  5. 1892महाद्वीपीय विस्तार पूरा —‘फ्रंटियर’ का अंत
  6. कुछ ही वर्ष बादहवाई और फिलिपीन्स में उपनिवेश

भीतर की सरहद खत्म हुई, तो सरहद बाहर खोजी गई

नए गणराज्य की गति

पुराने राष्ट्र घोंघे की चाल से सरकते हैं, नया गणराज्य किसी एक्सप्रेस की गति से दौड़ रहा है।

एंड्रू कार्नेगी — स्कॉटलैंड से आया ग़रीब आप्रवासी, सं.रा.अ. के पहले करोड़पति उद्योग-स्वामियों में से एक

1860 में अर्थतंत्र अविकसित था; 1890 में दुनिया में अग्रणी

और शिकार वाली जीवनचर्या समाप्त हुई

1890

तब तक जंगली भैंसों का लगभग पूरी तरह उन्मूलन हो चुका था — वह जीवनचर्या समाप्त हुई जिसे मूल बाशिंदे सदियों से जीते आ रहे थे

“उतने ही जानवर मारते जितने की ज़रूरत होती थी” — से यहाँ तक

संवैधानिक अधिकार — और उनकी सीमा

पृ. 146–147

  • 1770 के दशक की ‘लोकतांत्रिक भावना’ पुरानी दुनिया की राजशाही के खिलाफ़ पहचान बनी
  • संविधान में व्यक्ति का ‘संपत्ति का अधिकार’ — जिसे रद्द करने की छूट राज्य को नहीं
  • “लेकिन लोकतांत्रिक अधिकार और संपत्ति का अधिकार, दोनों सिर्फ़ गोरे लोगों के लिए थे”
  • डेनियल पॉल (2000) — थॉमस पाइन ने “समाज का संगठन करने के लिए इंडियन्स का इस्तेमाल एक मॉडल के तौर पर किया”
  • दलील — मूल निवासियों ने “यूरोपीय लोगों के लंबे लोकतंत्रोन्मुखी आंदोलन के बीज बोये थे”

छात्र ने गुरु को असभ्य कहा

मार्क्स की नज़र में अमरीकी फ्रंटियर

सीमाहीन प्रकृति और स्थान, जिसके अनुरूप अपने को ढालती है मुनाफ़े की सीमाहीन चाहत।

कार्ल मार्क्स (1818–83), ग्रुंड्रिसे — फ्रंटियर को “आख़िरी सकारात्मक पूँजीवादी यूटोपिया” कहते हुए

पर प्रकृति सीमाहीन नहीं थी — 1890 तक भैंसे खत्म, 1892 तक फ्रंटियर खत्म

तीन असमानताएँ, एक ही संरचना

पृ. 148 — पूरे अध्याय की कुंजी

समूहदिया गया तर्क
ब्रिटिश राज के अधीन भारतीयअभी प्रतिनिधित्व की सरकार के लिए तैयार नहीं हैं
अमरीका-ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी‘पिछड़े हुए आदिम’ — स्थानबद्ध कृषि नहीं, बचत नहीं, शहर नहीं
अमरीका में अफ़्रीकी दास“दासप्रथा उनकी अपनी सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा है”

तीनों की एक ही बनावट — “तुम्हारे पास वह नहीं है जो हमारे पास है, इसलिए तुम्हें बराबरी नहीं मिलेगी”

एक क्रांति, दो विपरीत नतीजे

फैलाव सिकुड़न बन गया, लोकतंत्र तानाशाही बन गया, संपन्नता विपन्नता बन गई, और मुक्ति क़ैद बन गई।

हावर्ड स्पॉडेक, अमरीकी इतिहासकार — क्रियाकलाप 3, पृ. 148

किसी घटना का मूल्यांकन इस पर निर्भर करता है कि हम उसे किसकी दृष्टि से देख रहे हैं

6 | ऑस्ट्रेलिया | स्वप्नकाल; कुक और उलटाव; दारूक लोगों की नज़र; टेरा न्यूलिअस

ऑस्ट्रेलिया के मूल निवासी

पृ. 148

  • ‘ऐबॉरिजिनीज़’ — कई भिन्न समाजों के लिए प्रयुक्त एक सामान्य नाम
  • 40,000 साल पहले (संभवतः उससे भी पहले) न्यू गिनी से भू-सेतु द्वारा आए
  • “मूल निवासियों की अपनी परंपराओं के हिसाब से वे आए नहीं थे, बल्कि हमेशा से यहीं थे”
  • बीती सदियाँ ‘स्वप्नकाल’ कही जाती थीं — जिसमें अतीत और वर्तमान का अंतर धुँधला हो जाता है
  • 18वीं सदी के अंत में 350 से 750 समुदाय; 200 भाषाएँ आज भी बोली जाती हैं
  • टॉरस स्ट्रेट टापूवासी अलग समूह; 2005 में कुल आबादी का 2.4 फ़ीसदी

‘स्वप्नकाल’ सपना नहीं — समय की एक भिन्न अवधारणा है

यूरोपियों का ऑस्ट्रेलिया पहुँचना

पृ. 148

  1. 1606डच यात्रियों ने ऑस्ट्रेलिया को देखा
  2. 1642तास्मान — बाद में टापू का नाम तस्मानिया
  3. 1770जेम्स कुक बॉटनी खाड़ी पहुँचा; नामकरण न्यू साउथ वेल्स
  4. 1788ब्रिटेन केदंडितों की बस्ती; सिडनी की स्थापना
  5. 1850ऑस्ट्रेलियाई बस्तियों को स्वशासन का अधिकार
  6. 1901छह राज्यों को लेकरऑस्ट्रेलियाई संघ
  7. 1911कैनबरा राजधानी बनाई गई

प्रस्तावित नाम था ‘वूलव्हीटगोल्ड’; चुना गया कैमबरा = ‘सभा-स्थल’

एक घटना, दूसरी जगह, दूसरे लोग

पृ. 149

  • कुक और उसके जत्थे के आरंभिक ब्यौरे दोस्ताना व्यवहार के बारे में उत्साहपूर्ण हैं
  • “जब एक मूल निवासी ने कुक की हत्या कर दी — हवाई में, ऑस्ट्रेलिया में नहीं — तब ब्रिटिशों का रवैया पूरी तरह से उलट गया”
  • “जैसा कि प्रायः होता आया है, इस तरह की एक घटना औपनिवेशिक ताकतों द्वारा बाद में दूसरों के खिलाफ़ किए गए हिंसक व्यवहार का औचित्य साबित करने के लिए इस्तेमाल की गई”

यह अपवाद नहीं — उपनिवेशवाद की सामान्य विधि है

दारूक लोगों की नज़र से — सिडनी, 1790

ये नवागंतुक बिना वजह पेड़ों को काटते जाते। यह बिना वजह इसलिए जान पड़ता था कि उन्हें न डोंगी बनानी थीं, न जंगली शहद इकट्ठा करना था और न ही जानवर पकड़ने थे।

पी. ग्रिमशॉ, एम. लेक, ए. मैक्ग्राथ, एम. क्वार्टली — क्रिएटिंग ए नेशन

उन्होंने सोचा होगा कि कोई “विशाल कर्मकांडी जलसा” होने जा रहा है — किसकी ‘वजह’ सही थी?

लगभग नब्बे फ़ीसदी

90%

मूल बाशिंदों को कीटाणुओं के असर से, अपनी ज़मीनें खोने के चलते और आबादकारों के साथ हुई लड़ाइयों में अपनी जान गँवानी पड़ी

NCERT तीनों कारण एक साथ गिनाती है — ‘बीमारी ने मारा’ कहकर रुक जाना ही औपनिवेशिक व्याख्या है

आबादकार कौन थे — एक विडंबना

पृ. 150

  • ऑस्ट्रेलिया के ज़्यादातर शुरुआती आबादकार इंग्लैंड से निर्वासित होकर आए थे
  • कारावास पूरा होने पर वापस न लौटने की शर्त पर स्वतंत्र जीवन की इजाज़त
  • किसी सहारे के बग़ैर जीवनयापन के लिए उन्होंने मूल निवासियों को निकालने में कोई झिझक नहीं दिखलाई
  • कुछ मूल निवासी खेतों में इतने सख़्त हालात में काम करते कि दासप्रथा से अंतर बहुत कम था
  • फिर चीनी आप्रवासियों ने सस्ता श्रम दिया — और फिर उन्हें भी प्रतिबंधित कर दिया गया
  • 1974 तक ‘गैर-गोरों’ को बाहर रखने की नीति

ब्रिटिश समाज के सबसे शक्तिहीन लोग पहुँचते ही और शक्तिहीनों के लिए ताकतवर बन गए

7 | बदलाव की लहर | चुप्पी टूटती है; अदालतें; क्षमायाचना

अमरीका और कनाडा — धीमी वापसी

पृ. 147

  1. 1928लेवाइस मेरिअम का सर्वेक्षण — दि प्रॉब्लम ऑफ़ इंडियन एडमिनिस्ट्रेशन
  2. 1934इंडियन रीऑर्गनाईज़ेशन एक्ट — ज़मीन ख़रीदने और ऋण लेने का अधिकार
  3. 1950–60विशेष प्रावधान हटाकर ‘मुख्यधारा में शामिल’ करने की कोशिश
  4. 1954‘डिक्लेरेशन ऑफ़ इंडियन राइट्स’ — नागरिकता, पर शर्तों के साथ
  5. 1969कनाडा — “आदिवासी अधिकारों को मान्यता नहीं” → धरना-प्रदर्शन
  6. 1982कनाडा —संवैधानिक धारा द्वारा आदिवासी अधिकारों को स्वीकृति

समानता चाहना और समरूपता से इनकार करना — दोनों एक साथ संभव हैं

जब चुप्पी टूटी

ऑस्ट्रेलिया, पृ. 150–151

  • 1968 — मानवशास्त्री डब्ल्यू.ई.एच. स्टैनर का व्याख्यान ‘दि ग्रेट ऑस्ट्रेलियन साइलेंस’
  • “इतिहासकारों की मूल निवासियों के बारे में चुप्पी” — इस व्याख्यान से “लोगों में बिजली की तरंग-सी दौड़ गई”
  • हेनरी रेनॉल्ड्स — व्हाइ वरंट वी टोल्ड? (हमें बताया क्यों नहीं गया?)
  • उस ढर्रे की भर्त्सना जिसमें कैप्टन कुक की ‘खोज’ से ही इतिहास की शुरुआत मानी जाती थी
  • विश्वविद्यालयी विभाग, कलादीर्घाओं में देसी कला, मूल निवासियों द्वारा अपने जीवन-इतिहास लिखना
  • 1974 से ‘बहुसंस्कृतिवाद’ ऑस्ट्रेलिया की राजकीय नीति

“यह प्रयास समय रहते शुरू हो गया” — वरना बहुत कुछ विस्मृति की गर्त में जा चुका होता

उन्होंने मुझे नहीं बताया था

उन्होंने मुझे नहीं बताया था कि जिस ज़मीन को मैं इतना प्यार करती हूँ, वह तुम्हारे ही हाथों से छीनी गई थी।

ज्यूडिथ राइट (1915–2000) — ‘दो स्वप्नसमय’, ऊडगेरू नूनुक्कल के लिए

एक गोरी लेखिका की एक आदिवासी कवयित्री के लिए लिखी कविता — यह दया नहीं, अपराध-स्वीकृति है

टेरा न्यूलिअस का अंत

पृ. 151–152

  1. —सरकार हमेशा से ज़मीन कोटेरा न्यूलिअस कहती आई थी — ‘जो किसी की नहीं है’
  2. —सं.रा.अ., कनाडा और न्यूज़ीलैंड केविपरीत ऑस्ट्रेलिया में कोई समझौता-पत्र नहीं था
  3. 1974‘गोरे ऑस्ट्रेलिया’ नीति का ख़ात्मा
  4. 1992माबो केस — हाई कोर्ट ने टेरा न्यूलिअस को कानूनी रूप से अवैध घोषित किया
  5. 1995बच्चों को परिवारों से अलग किए जाने परराष्ट्रीय जाँच
  6. 1999‘राष्ट्रीय क्षमायाचना दिवस’ (26 मई)

1832 में अदालत ने कहा और सरकार ने नहीं माना; 1992 में कहा और माना गया — 160 साल का अंतर

दो अदालती फ़ैसले, एक ही प्रश्न

तुलना ज़रूर करवाएँ

1832 — मार्शल का फ़ैसला

  • चिरोकी “एक विशिष्ट समुदाय है”
  • कुछ मामलों में सम्प्रभुतासंपन्न
  • राष्ट्रपति जैक्सन ने मानने से इनकार किया
  • परिणाम — आँसुओं की राह

1992 — माबो का फ़ैसला

  • टेरा न्यूलिअस कानूनी रूप से अवैध
  • 1770 से पहले के दावों को मान्यता
  • फ़ैसला लागू हुआ
  • परिणाम — नीति-परिवर्तन

अदालत का फ़ैसला तभी अर्थ रखता है जब कार्यपालिका और समाज उसे स्वीकार करें

संख्या घटी, पर आवाज़ बढ़ी

अध्याय का समापन-वाक्य, पृ. 147

  • “इन अधिकारों की बारीकियों के बारे में बहुत से फ़ैसले बाकी हैं”
  • पर अब यह बहुत साफ़ है कि दोनों मुल्कों के मूल निवासियों ने —
  • 18वीं सदी के मुकाबले अपनी संख्या बहुत कम हो जाने के बावजूद
  • अपनी संस्कृति निभाने के अधिकारों की पुरज़ोर दावेदारी की है
  • और ख़ास तौर से कनाडा में, अपनी पवित्र भूमि पर अधिकार की भी
  • “ऐसी दावेदारी 1880 के दशक में उनके पुरखे नहीं कर सकते थे”

इतिहास में हार का मतलब हमेशा चुप्पी नहीं होता

1911 — नयी दिल्ली और कैनबरा

उसी वर्ष दोनों राजधानियाँ घोषित हुईं। उस समय दोनों देशों के मूल निवासियों की राजनीतिक स्थिति की तुलना कीजिए — और विषमता को रेखांकित कीजिए।

अध्याय क्या सिखाता है

तीन कौशल — तीन तिथियाँ याद रखने से ज़्यादा ज़रूरी

  • किसी दावे के पीछे की कसौटी पहचानना — जब कोई कहे ‘असभ्य’, पूछिए किस कसौटी पर? और वह कसौटी किसने बनाई?
  • स्रोत को परतों में खोलना — सिएटल का पत्र, होपी कथा, दारूक लोगों का वर्णन — हर स्रोत की अपनी जीवनी है
  • इतिहास-लेखन को स्वयं एक ऐतिहासिक घटना मानना — 1968 में एक व्याख्यान से “बिजली की तरंग-सी दौड़ गई”
  • यानी किताबें बदलना भी इतिहास बनाना है

यदि आप पूछने लगें — “जो कहानी हमें बताई गई, वह किसने चुनी?” — तो अध्याय सफल रहा

और अंत में

जिन देशों को यूरोप ने ‘खोजा’ कहा, वे खोजे नहीं गए थे — वे छीने गए थे; और यह बात स्वीकारने में दुनिया को दो सौ साल लगे।

अध्याय 6 का सार

इतिहास बदला नहीं जा सकता — पर इतिहास-लेखन बदला जा सकता है

जो पढ़ाते हैं, वही लिखते और जाँचते हैं

इसे बनाने वाले

  • भरत चौधरीभरत चौधरीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. जेठान्तरी · ब्लॉक समदड़ी, जिला बालोतरा
  • वनिता कुमारीवनिता कुमारीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. रामसीन मूंगड़ा · ब्लॉक एवं जिला बालोतरा

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