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कक्षा 10 · भूगोल

विनिर्माण उद्योग

अध्याय 6

भरत चौधरी और वनिता कुमारी ने बनाया · marushala.com

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अध्याय 6 — विनिर्माण उद्योग · समकालीन भारत-2 (भूगोल) · कक्षा 10

कक्षा — 10 · विषय — भूगोल (समकालीन भारत–2) · पृष्ठ — 58 से 71

अपना बस्ता खोलो — और पाँच चीज़ें मेज़ पर रखो

अब बताओ — ये किससे बनी हैं?

कक्षा की पहली गतिविधि

चीज़कच्चा माल
कॉपीलकड़ी
बोतलपेट्रोलियम (प्लास्टिक)
टिफ़िनलोहा / एल्यूमिनियम
कमीज़कपास
जूताचमड़ा / रबर

जो चीज़ पेड़ थी वह कॉपी कैसे बन गई? — इसी बदलने का नाम विनिर्माण है

और किताब की शुरुआत भी ऐसे ही होती है

“दीवाली के अवसर पर हरीश अपने माता-पिता के साथ बाज़ार गया… उसके पिता ने समझाया कि जूते, कपड़े, चीनी आदि बड़े उद्योगों में मशीनों द्वारा बनाए जाते हैं; छोटे उद्योगों में बर्तन बनाए जाते हैं तथा दीप जैसी चीज़ें कारीगरों द्वारा घरेलू उद्योगों में बनाई जाती हैं।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 58

एक ही बाज़ार में तीन तरह के उद्योग दिख गए — बड़े, छोटे और घरेलू

और यह पूरे अध्याय की आत्मा है

“उद्योग देश को अमीर बनाते हैं — पर उसी हवा, पानी और मिट्टी को ग़रीब कर देते हैं जिस पर देश खड़ा है।”

इसीलिए यह अध्याय दो हिस्सों में बँटा है

पृष्ठ 58–67 तक उद्योग नायक हैं; पृष्ठ 66 से वे आरोपी बन जाते हैं — और हर बड़े उत्तर में दोनों पक्ष चाहिए

1 | विनिर्माण | परिभाषा और महत्त्व

विनिर्माण क्या है

पृष्ठ 58

  • “कच्चे पदार्थ को मूल्यवान उत्पाद में परिवर्तित कर अधिक मात्रा में वस्तुओं के उत्पादन को विनिर्माण या वस्तु निर्माण कहा जाता है”
  • उदाहरण — काग़ज़ लकड़ी से · चीनी गन्ने से · लोहा-इस्पात लौह-अयस्क से · एल्यूमिनियम बॉक्साइट से
  • “द्वितीयक कार्यों में लगे व्यक्ति कच्चे माल को परिष्कृत वस्तुओं में परिवर्तित करते हैं”
  • इसमें आते हैं — स्टील, कार, कपड़ा उद्योग, बेकरी तथा पेय पदार्थों के श्रमिक

★“किसी देश की आर्थिक उन्नति विनिर्माण उद्योगों के विकास से मापी जाती है”

विनिर्माण का महत्त्व — पाँच कारण

पृष्ठ 58

  • “न केवल कृषि के आधुनिकीकरण में सहायक हैं वरन् द्वितीयक व तृतीयक सेवाओं में रोज़गार देकर कृषि पर निर्भरता कम करते हैं”
  • “औद्योगिक विकास बेरोज़गारी तथा ग़रीबी उन्मूलन की आवश्यक शर्त है” — और जनजातीय व पिछड़े क्षेत्रों में उद्योग से क्षेत्रीय असमानताएँ घटती हैं
  • “निर्मित वस्तुओं का निर्यात वाणिज्य व्यापार को बढ़ाता है जिससे विदेशी मुद्रा मिलती है”
  • “वे देश ही विकसित हैं जो कच्चे माल को अधिक मूल्यवान तैयार माल में विनिर्मित करते हैं”
  • “कृषि तथा उद्योग एक दूसरे के पूरक हैं”

और चेतावनी — “केवल आत्मनिर्भरता ही काफ़ी नहीं है। हमारी वस्तुएँ गुणवत्ता में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की हों”

कृषि और उद्योग — यह चक्र समझ लीजिए

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कृषि आधारित उद्योग कच्चे माल के लिए खेत पर निर्भर हैं — और किसान सिंचाई के पंप, उर्वरक, कीटनाशक, प्लास्टिक पाइप, मशीनों व कृषि औज़ारों के लिए उद्योग पर निर्भर है

इसीलिए किताब कहती है — “न केवल कृषि उत्पादन को बढ़ावा मिला, अपितु उत्पादन प्रक्रिया भी सक्षम हुई”

2 | वर्गीकरण | पाँच आधार

आधार 1 और 2 — कच्चा माल और भूमिका

पृष्ठ 59

आधारवर्गउदाहरण
कच्चे माल का स्रोतकृषि आधारितसूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, पटसन, रेशम वस्त्र, रबर, चीनी, चाय, कॉफी, वनस्पति तेल
खनिज आधारितलोहा-इस्पात, सीमेंट, एल्यूमिनियम, मशीन, औज़ार, पेट्रोरसायन
प्रमुख भूमिकाआधारभूत — “जिनके उत्पाद या कच्चे माल पर दूसरे उद्योग निर्भर हैं”लोहा-इस्पात, ताँबा प्रगलन, एल्यूमिनियम प्रगलन
उपभोक्ता — “जो उत्पादन उपभोक्ताओं के सीधे उपयोग हेतु करते हैं”चीनी, दंतमंजन, काग़ज़, पंखे, सिलाई मशीन

याद रखिए — “आधारभूत का ग्राहक दूसरा उद्योग है; उपभोक्ता का ग्राहक तुम हो।”

आधार 3, 4 और 5 — पूँजी, स्वामित्व और भार

पृष्ठ 59

आधारवर्गउदाहरण
पूँजी निवेशलघु उद्योगअधिकतम निवेश एक करोड़ रुपये तक
स्वामित्वसार्वजनिक — सरकार द्वारा संचालितBHEL · SAIL
निजी — व्यक्ति या लोगों के स्वामित्व मेंटिस्को · बजाज ऑटो · डाबर
संयुक्त — राज्य सरकार + निजी क्षेत्रऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL)
सहकारी — उत्पादकों/श्रमिकों के हाथ में; लाभ-हानि अनुपातिकमहाराष्ट्र के चीनी उद्योग · केरल के नारियल उद्योग
माल का भारभारी / हल्केलोहा-इस्पात / विद्युतीय उद्योग

सूत्र — “सा-नि-सं-स”; और “संयुक्त = सरकार + सेठ। सहकारी = किसान + किसान।”

3 | कृषि आधारित उद्योग | वस्त्र, पटसन, चीनी

वस्त्र उद्योग — भारत का इकलौता पूर्ण उद्योग

“देश का यह अकेला उद्योग है जो कच्चे माल से उच्चतम अतिरिक्त मूल्य उत्पाद तक की श्रृंखला में परिपूर्ण तथा आत्मनिर्भर है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 59

यानी कपास से लेकर सिली हुई क़मीज़ तक — हर चरण भारत में हो सकता है

चित्र 6.1 — वस्त्र उद्योग में अतिरिक्त मूल्य

  1. रेशा उत्पादनकच्चा रेशा
  2. धुनाई कताईसूत
  3. बुनाईकपड़ा
  4. रंगाई व परिष्करण↓
  5. वस्त्र विनिर्माणवस्त्र (गारमेंट)

सूती वस्त्र उद्योग — इतिहास

पृष्ठ 59–60

  • प्राचीन भारत में — हाथ से कताई और हथकरघा बुनाई
  • “अठारहवीं शताब्दी के बाद विद्युतीय करघों का उपयोग होने लगा”
  • ! “औपनिवेशिक काल के दौरान हमारे परंपरागत उद्योगों को बहुत हानि हुई क्योंकि हमारे उद्योग इंग्लैंड के मशीन निर्मित वस्त्रों से स्पर्धा नहीं कर पाये”
  • ★“पहला सफल सूती वस्त्र उद्योग 1854 में मुंबई में लगाया गया”
  • “यूरोप दो विश्व-युद्धों से जूझ रहा था… इंग्लैंड में कपड़े की माँग आपूर्ति हेतु भारतीय सूती वस्त्र उद्योग को प्रोत्साहन मिला”

स्थानीयकरण के कारक — कपास की उपलब्धता, बाज़ार, परिवहन, पत्तनों की समीपता, श्रम, नमीयुक्त जलवायु

और यह उद्योग कितने लोगों को पालता है

“इस उद्योग का कृषि से निकट का संबंध है और कृषकों, कपास चुनने वालों, गाँठ बनाने वालों, कताई करने वालों, रंगाई करने वालों, डिज़ाइन बनाने वालों, पैकेट बनाने वालों और सिलाई करने वालों को यह जीविका प्रदान करता है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 60

आठ तरह के लोग — तुम्हारी क़मीज़ किसी खेत में उगी थी

भारत की ताक़त और भारत की कमज़ोरीध्यान

कताई — ताक़त

  • महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु में केंद्रित
  • “भारत में कताई उत्पादन विश्व स्तर का है”
  • यहाँ हम किसी से पीछे नहीं

बुनाई — कमज़ोरी

  • अत्यधिक विकेंद्रीकृत — हथकरघों, विद्युतकरघों व मिलों में
  • “बुना वस्त्र कम गुणवत्ता वाला है”
  • क्योंकि “यह देश में उत्पादित उच्च स्तरीय धागे का अधिक प्रयोग नहीं कर पाता”

इसीलिए किताब पूछती है — “महात्मा गांधी ने सूत कातने तथा खादी बुनने पर क्यों बल दिया?”

पटसन उद्योग — 1947 का विरोधाभास

¾

“1947 में देश के विभाजन के पश्चात् पटसन मिलें तो भारत में रह गईं लेकिन तीन-चौथाई जूट उत्पादक क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान अर्थात् बांग्लादेश में चले गए।”

सोचिए — कारख़ाना यहाँ, खेत वहाँ। भारत के सामने क्या समस्या खड़ी हुई होगी?

पटसन उद्योग — आँकड़े

पृष्ठ 60

  • भारत पटसन व पटसन निर्मित सामान का सबसे बड़ा उत्पादक
  • तथा बांग्लादेश के पश्चात् दूसरा बड़ा निर्यातक
  • वर्ष 2010-11 में लगभग 80 पटसन उद्योग
  • अधिकांश पश्चिम बंगाल में हुगली नदी तट पर — 98 किमी. लंबी तथा 3 किमी. चौड़ी एक सँकरी मेखला में
  • ★पहला पटसन उद्योग 1855 में कोलकाता के निकट रिशरा में

यह मेखला इतनी पतली है कि उसे मानचित्र पर एक रेखा की तरह देखा जा सकता है

हुगली तट पर ही क्यों — छह कारण★

पृष्ठ 60 · यह प्रश्न लगभग हर साल आता है

#कारण
1पटसन उत्पादक क्षेत्रों की निकटता
2सस्ता जल परिवहन
3सड़क, रेल व जल परिवहन का जाल
4कच्चे पटसन को संसाधित करने में प्रचुर जल
5सस्ता श्रमिक — पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा, बिहार व उत्तर प्रदेश से
6कोलकाता का बैंकिंग, बीमा और निर्यात के लिए पत्तन

सूत्र — “कच्चा माल · पानी · परिवहन · पानी · मज़दूर · कोलकाता”

चीनी उद्योग

पृष्ठ 60–61

  • “भारत का चीनी उत्पादन में विश्व में दूसरा स्थान है लेकिन गुड़ व खांडसारी के उत्पादन में इसका प्रथम स्थान है”
  • ★“इस उद्योग में प्रयुक्त कच्चा माल भारी होता है तथा ढुलाई में इसके सूक्रोस की मात्रा घट जाती है”
  • “चीनी मिलों का 60 प्रतिशत उत्तर प्रदेश तथा बिहार में है”
  • “यह उद्योग मौसमी है, अत: सहकारी क्षेत्र के लिए उपयुक्त है”

इसीलिए मिल खेत के पास जाती है — खेत मिल के पास नहीं आता

और चीनी उद्योग दक्षिण क्यों खिसक रहा है

3

“पिछले कुछ वर्षों से इन मिलों की संख्या दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों विशेषकर महाराष्ट्र में बढ़ी है” — क्योंकि (1) यहाँ के गन्ने में अधिक सूक्रोस की मात्रा है, (2) अपेक्षाकृत ठंडी जलवायु भी गुणकारी है, और (3) सहकारी समितियाँ भी सफल रही हैं

तीन कारण — मीठा गन्ना · ठंडी हवा · मिलकर काम

4 | खनिज आधारित उद्योग | लोहा से इलैक्ट्रोनिक तक

लोहा तथा इस्पात — आधारभूत उद्योग

पृष्ठ 62

  • “यह एक आधारभूत (basic) उद्योग है क्योंकि अन्य सभी भारी, हल्के और मध्यम उद्योग इनसे बनी मशीनरी पर निर्भर हैं”
  • उपयोग — इंजीनियरिंग सामान, निर्माण सामग्री, रक्षा, चिकित्सा, टेलीफ़ोन, वैज्ञानिक उपकरण
  • ★“इस्पात के उत्पादन तथा खपत को प्राय: एक देश के विकास का पैमाना माना जाता है”
  • “यह एक भारी उद्योग है क्योंकि कच्चा तथा तैयार माल दोनों ही भारी और स्थूल होते हैं”

इसलिए इसे अधिक परिवहन लागत चाहिए — दोनों तरफ़

और यह अनुपात याद रखिए★

4:2:1

“इस उद्योग के लिए लौह-अयस्क, कोकिंग कोल तथा चूना पत्थर का अनुपात लगभग 4:2:1 का है। इस्पात को कठोर बनाने के लिए इसमें मैंगनीज़ की कुछ मात्रा की भी आवश्यकता होती है।”

एक साँस में बोलिए — “चार, दो, एक”

चित्र 6.2 — इस्पात निर्माण की पाँच सीढ़ियाँ

  1. 1. परिवहनकच्चे माल का कारख़ानों तक पहुँचना
  2. 2. झोंकदार भट्ठीलौह-अयस्क गलाया जाता है; चूना पत्थर सहायक खनिज; धातु का मैल हटता है; कोक ईंधन
  3. 3. ढलवाँ लोहातरल पदार्थ साँचों में डाला जाता है
  4. 4. इस्पात बनानापुन: गलाकर ऑक्सीकरण से अशुद्धता हटाकर मैंगनीज़, निकल, क्रोमियम मिलाना
  5. 5. आकार देनारोलिंग, प्रेसिंग, ढलाई और गढ़ाई

छोटानागपुर में संकेंद्रण के चार कारण

पृष्ठ 62

#कारण
1लौह अयस्क की कम लागत
2उच्च कोटि के कच्चे माल की निकटता
3सस्ते श्रमिक
4स्थानीय बाज़ार में माँग की विशाल संभाव्यता

मानचित्र (पृ. 63) के दस संयंत्र — जमशेदपुर · बोकारो · दुर्गापुर · बर्नपुर · राउरकेला · भिलाई · विशाखापट्टनम · विजयनगर · भद्रावती · सेलम — गिनिए, दस में से सात पूर्वी-मध्य भारत में हैं

एल्यूमिनियम प्रगलन

पृष्ठ 64

  • “भारत में एल्यूमिनियम प्रगलन दूसरा सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण धातु शोधन उद्योग है”
  • गुण — हल्का, जंग अवरोधी, ऊष्मा का सुचालक, लचीला तथा अन्य धातुओं के मिश्रण से अधिक कठोर
  • उपयोग — हवाई जहाज़ बनाने में, बर्तन तथा तार बनाने में
  • “इसका महत्त्व इस्पात, ताँबा, जस्ता व सीसे के विकल्प के रूप में प्रयुक्त होने से बढ़ा है”
  • संयंत्र — ओडिशा, पश्चिम बंगाल, केरल, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र व तमिलनाडु

इसीलिए हवाई जहाज़ लोहे का नहीं बनता — ताक़त वही, वज़न बहुत कम

चित्र 6.4 — और यही तय करता है कि संयंत्र कहाँ लगेगा

6 → 1

4 से 6 टन बॉक्साइट → 2 टन एल्यूमिना → 1 टन एल्यूमिनियम। और बिजली चाहिए 18,600 कि.वाट प्रति टन अयस्क

दो आवश्यकताएँ — नियमित ऊर्जा की पूर्ति और कम क़ीमत पर कच्चे माल की सुनिश्चित उपलब्धता; इसीलिए संयंत्र खान और बिजली — दोनों के पास ही लग सकता है

रसायन उद्योग — दो हिस्से

अकार्बनिक रसायन

  • सलफ्यूरिक अम्ल — उर्वरक, कृत्रिम वस्त्र, प्लास्टिक, गोंद, रंग-रोगन, डाई
  • नाइट्रिक अम्ल · क्षार
  • सोडा ऐश — काँच, साबुन, शोधक, काग़ज़
  • कास्टिक सोडा

कार्बनिक रसायन

  • पेट्रोरसायन
  • कृत्रिम वस्त्र, कृत्रिम रबर, प्लास्टिक
  • रंजक पदार्थ, दवाइयाँ, औषध रसायन
  • “तेल शोधन शालाओं या पेट्रोरसायन संयंत्रों के समीप स्थापित”

GDP में लगभग 3 प्रतिशत · एशिया में तीसरा, विश्व में 12वाँ · और ★“रसायन उद्योग अपने आप में एक बड़ा उपभोक्ता भी है”

उर्वरक उद्योग

पृष्ठ 65

  • नाइट्रोजनी उर्वरक — मुख्यत: यूरिया
  • फ़ास्फ़ेटिक उर्वरक (D.A.P.) तथा अमोनियम फ़ास्फ़ेट
  • मिश्रित उर्वरक — नाइट्रोजन, फ़ास्फ़ेट व पोटाश
  • ! “तीसरा अर्थात् पोटाश पूर्णत: आयात किया जाता है क्योंकि हमारे देश में… पोटाश या पोटाशियम यौगिकों के भंडार नहीं हैं”
  • “हरित क्रांति के पश्चात् यह उद्योग देश के अन्य अनेक भागों में भी फैल गया”

गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पंजाब और केरल — कुल उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत; और अन्य में ★राजस्थान

सीमेंट उद्योग — और यहाँ रुककर सोचिए

1904

कच्चा माल — चूना पत्थर, सिलिका और जिप्सम; साथ में कोयला तथा विद्युत ऊर्जा। पहला सीमेंट उद्योग सन् 1904 में चेन्नई में लगाया गया। इकाइयाँ गुजरात में हैं क्योंकि वहाँ से खाड़ी के देशों के बाज़ार की उपलब्धता है

★किताब पूछती है — “भारत में यह उद्योग अन्य किन राज्यों में स्थित है?” — पर उत्तर नहीं देती

तीन सवाल — और उत्तर तुम ख़ुद निकालो

“सीमेंट किससे बनता है?” → चूना पत्थर से। “पिछले अध्याय में चूना पत्थर में कौन-सा राज्य पहला था?” → ★राजस्थान, 22 प्रतिशत। “तो सीमेंट के कारख़ाने कहाँ ज़्यादा होंगे?”

यही भूगोल पढ़ना है — रटना नहीं, जोड़ना

और चूँकि चूना पत्थर भारी व स्थूल है, कारख़ाना उसी के पास लगेगा

मोटरगाड़ी तथा इलैक्ट्रोनिक उद्योग

पृष्ठ 65–66

  • मोटरगाड़ी — ट्रक, बसें, कारें, मोटर साइकिल, स्कूटर, तिपहिया तथा बहुउपयोगी वाहन
  • “उदारीकरण के पश्चात् नए और आधुनिक मॉडल के वाहनों का बाज़ार तथा माँग बढ़ी”
  • केंद्र — दिल्ली, गुड़गाँव, मुंबई, पुणे, चेन्नई, कोलकाता, लखनऊ, इंदौर, हैदराबाद, जमशेदपुर, बेंगलूरु
  • ★“बेंगलुरु भारत की इलैक्ट्रॉनिक राजधानी के रूप में उभरा है”
  • सर्वाधिक संकेंद्रण — बेंगलुरु, नोएडा, मुम्बई, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे
  • “सफल होने का कारण हार्डवेयर व सॉफ़्टवेयर का निरंतर विकास है”

सोचिए — सॉफ़्टवेयर उद्योग खान के पास क्यों नहीं लगता? क्योंकि उसे कच्चा माल नहीं, पढ़े-लिखे लोग चाहिए

5 | और अब अध्याय पलटता है | औद्योगिक प्रदूषण

वही उद्योग, अब आरोपी

“यद्यपि उद्योगों की भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि व विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका है, तथापि इनके द्वारा बढ़ते भूमि, वायु, जल तथा पर्यावरण प्रदूषण को भी नकारा नहीं जा सकता।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 66

“उद्योग चार प्रकार के प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं — (क) वायु (ख) जल (ग) भूमि (घ) ध्वनि” — और इनमें ताप विद्युतगृह भी सम्मिलित हैं

चारों प्रदूषण — एक तालिका में

पृष्ठ 66–68

प्रकारकारणअसर
वायुसल्फर डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड; कणनुमा पदार्थ — धूलि, स्प्रे, कुहासा, धुआँ; रसायन-काग़ज़ उद्योग, ईंटों के भट्टे, तेल शोधनशालाएँ, प्रगलन उद्योगमानव स्वास्थ्य, पशु, पौधे, इमारतें और पूरा पर्यावरण
जलकाग़ज़, लुगदी, रसायन, वस्त्र, रंगाई, तेल शोधन, चमड़ा व इलैक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग — रंग, अपमार्जक, अम्ल, लवण, सीसा-पारा, कीटनाशक, प्लास्टिक, रबरमुख्य अपशिष्ट — फ्लाई एश, फ़ोस्फ़ो-जिप्सम, लोहा-इस्पात की अशुद्धियाँ (slag)
भूमिकाँच, हानिकारक रसायन, औद्योगिक बहाव, पैकिंग, लवण, कूड़ा-कर्कटमृदा अनुपजाऊ; वर्षा जल के साथ रिसकर भूमिगत जल भी प्रदूषित
ध्वनिजेनरेटर, लकड़ी चीरने के कारख़ाने, गैस यांत्रिकी, विद्युत ड्रिल, निर्माण कार्यखिन्नता, उत्तेजना, श्रवण असक्षमता, हृदय गति, रक्त चाप

सूत्र — “वा-ज-भू-ध्व”

और यह प्रश्न किताब पूछकर छोड़ देती है

“ज़हरीली गैसों का रिसाव बहुत भयानक तथा दूरगामी प्रभावों वाला हो सकता है। क्या आप भोपाल गैस त्रासदी के विषय में जानते हैं?”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 66

‘दूरगामी’ का अर्थ — जो उस रात पैदा भी नहीं हुए थे, वे भी उसका असर भुगत रहे हैं। प्रदूषण एक रात में होता है, पर उसका हिसाब पीढ़ियाँ चुकाती हैं

और यह भी प्रदूषण है — गंदा नहीं, गर्म

🌡

“जब कारख़ानों तथा तापघरों से गर्म जल को बिना ठंडा किए ही नदियों तथा तालाबों में छोड़ दिया जाता है, तो जल में तापीय प्रदूषण होता है।”

जलीय जीवन पर इसका क्या प्रभाव होगा? — गर्म पानी में घुली ऑक्सीजन घट जाती है, और मछलियों का दम घुटने लगता है

6 | रोकथाम | और अध्याय का उत्तर

पहले यह आँकड़ा सुनिए★

1 = 8

“कारख़ानों द्वारा निष्कासित एक लिटर अपशिष्ट से लगभग आठ गुना स्वच्छ जल दूषित होता है।”

एक बोतल गंदा पानी — आठ बोतल साफ़ पानी ख़त्म। अब पूरे शहर का हिसाब सोचिए

जल के लिए तीन सुझाव और शोधन के तीन चरण

पृष्ठ 68

क्या
(क)जल का न्यूनतम उपयोग तथा दो या अधिक उत्तरोत्तर अवस्थाओं में पुनर्चक्रण द्वारा पुन: उपयोग
(ख)वर्षा जल संग्रहण
(ग)नदियों-तालाबों में छोड़ने से पहले गर्म जल तथा अपशिष्ट पदार्थों का शोधन
(अ) प्राथमिकयांत्रिक साधनों द्वारा — छँटाई, छोटे-छोटे टुकड़े करना, ढकना, तलछट जमाव
(ब) द्वितीयकजैविक प्रक्रियाओं द्वारा
(स) तृतीयकजैविक, रासायनिक तथा भौतिक प्रक्रियाओं द्वारा — जल पुन: प्रयोग योग्य बनता है

और जहाँ भूमिगत जल का स्तर कम है, वहाँ अधिक निष्कासन पर क़ानूनी प्रतिबंध होना चाहिए

वायु और ध्वनि के लिए उपाय

पृष्ठ 68

  • ऊँची चिमनियाँ
  • चिमनियों में एलेक्ट्रोस्टैटिक अवक्षेपण (electrostatic precipitators)
  • स्क्रबर उपकरण तथा गैसीय प्रदूषकों को जड़त्वीय रूप से पृथक करने के उपकरण
  • “कोयले की अपेक्षा तेल व गैस के प्रयोग से धुएँ के निष्कासन में कमी”
  • ध्वनि — जेनरेटरों में साइलेंसर, ऊर्जा सक्षम व कम शोर वाली मशीनरी, ध्वनि अवशोषित उपकरण, और कारीगरों के लिए कानों पर शोर नियंत्रण उपकरण

NTPC ने रास्ता दिखाया — उसके पास पर्यावरण प्रबंधतंत्र (EMS) 14001 के लिए ISO प्रमाण पत्र है

और यही अध्याय का उत्तर है

✦

“सतत् पोषणीय विकास की चुनौतियों के लिए पर्यावरणीय संचेतना से युक्त आर्थिक विकास की ज़रूरत है।”

यानी किताब यह नहीं कह रही कि उद्योग बंद कर दो। वह कह रही है — चलाओ, पर समझदारी से

7 | और अब अपने राज्य की बात

राजस्थान — जो किताब में है★

तीन जगह

#कहाँक्या
1मानचित्र पृ. 61बीकानेर और जयपुर — ऊनी वस्त्र
2उर्वरक (पृ. 65)राजस्थान महत्त्वपूर्ण उत्पादक राज्यों की सूची में
3मानचित्र पृ. 67जयपुर — सॉफ़्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क

और वह जो किताब में है ही नहीं★

½

भीलवाड़ा को भारत की ‘वस्त्र नगरी’ कहा जाता है — 400 से अधिक इकाइयाँ, और भारत में बनने वाले पॉलिएस्टर कपड़े व सूटिंग का लगभग आधा भाग वहीं बनता है। साथ ही सीमेंट उत्पादन में राजस्थान का हिस्सा लगभग 20 प्रतिशत है

किताब में न होना और सच न होना — दो अलग बातें हैं

जाते-जाते — पाँच सूत्र जो सब कुछ बाँध देते हैं

  1. सा-नि-सं-सस्वामित्व के चार वर्ग — सार्वजनिक, निजी, संयुक्त, सहकारी
  2. 4-2-1लौह-अयस्क : कोकिंग कोल : चूना पत्थर
  3. 54-55-041854 सूती (मुंबई) · 1855 पटसन (रिशरा) · 1904 सीमेंट (चेन्नई)
  4. वा-ज-भू-ध्वप्रदूषण के चार प्रकार
  5. एक = आठएक लिटर अपशिष्ट = आठ गुना स्वच्छ जल दूषित

और आख़िरी सवाल — जब कल तुम कोई कारख़ाना देखो, तो दो बातें एक साथ सोचना: “यह यहीं क्यों लगा?” और “इसकी क़ीमत कौन चुका रहा है?”

जो पढ़ाते हैं, वही लिखते और जाँचते हैं

इसे बनाने वाले

  • भरत चौधरीभरत चौधरीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. जेठान्तरी · ब्लॉक समदड़ी, जिला बालोतरा
  • वनिता कुमारीवनिता कुमारीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. रामसीन मूंगड़ा · ब्लॉक एवं जिला बालोतरा

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